महाराष्ट्र
एजेंटिक एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी के जरिए फाइनेंशियल सेक्टर में बदलाव लाने का मौका: सीएम फडणवीस
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र आम नागरिकों, किसानों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तक उभरती डिजिटल वित्तीय तकनीकों का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सीएम देवेंद्र फणडवीस ने कहा कि एजेंटिक एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी फाइनेंशियल इन्क्लूजन (वित्तीय समावेशन) को एक नई दिशा देंगे।
यहां ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने फाइनेंशियल सेक्टर में क्रांति लाने के लिए एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी की अपार संभावनाओं पर जोर दिया।
सीएम फडणवीस ने याद दिलाया कि पिछले साल के ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान, राज्य ने महाराष्ट्र को देश का पहला ‘टोकनाइज्ड स्टेट’ बनाने का संकल्प लिया था। उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए राज्य सरकार ने ‘महाराष्ट्र डिजिटाइजेशन एंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन एसेट एक्ट (डेल्टा एक्ट)’ का ड्राफ्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। यह कानून जमीन और रियल एस्टेट एसेट्स के ब्लॉकचेन-आधारित टोकनाइजेशन के लिए जरूरी कानूनी ढांचा तैयार करेगा। सेबी, बीएसई, एनएसई, इंडस्ट्री, टेक्नोलॉजी, कानून और एकेडेमिया के एक्सपर्ट इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
उन्होंने बताया कि टोकनाइजेशन रियल एस्टेट में फंसी पूंजी को प्रोडक्टिव आर्थिक अवसरों में बदलता है, जिससे पारदर्शिता, लिक्विडिटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है और इलिक्विड एसेट्स (आसानी से नकद में न बदले जा सकने वाले एसेट्स) का लाभ उठाया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल फाइनेंस का भविष्य भारत में, खासकर मुंबई में, आकार ले रहा है। देश की फाइनेंशियल राजधानी के तौर पर, मुंबई तेजी से एक उभरती हुई ग्लोबल फिनटेक राजधानी बनने की ओर बढ़ रही है।
इस साल की थीम ‘पोटेंशियल ऑफ इम्पैक्ट’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी की क्षमताओं को असल दुनिया में असरदार बदलाव में बदलना आज की जरूरत है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए एक ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करने के बाद, भारत को अब क्रेडिट, निवेश, मालिकाना हक और वित्तीय जानकारी तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने पर ध्यान देना चाहिए।
सीएम फडणवीस ने कहा कि आधुनिक टेक्नोलॉजी में कोल्हापुर की किसी इंडस्ट्री, विदर्भ के किसी किसान या पुणे की किसी महिला उद्यमी को बड़े फाइनेंशियल संस्थानों के बराबर ही हाई-क्वालिटी वित्तीय जानकारी देने की क्षमता है।
एजेंटिक एआई के बारे में विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की जहां किसी उद्यमी का एआई असिस्टेंट वित्तीय जरूरतों का आकलन कर सके और सबसे अच्छे समाधान सुझा सके, जबकि किसानों को उनकी मातृभाषा में वित्तीय सलाह मिल सके।
हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भले ही एआई नागरिकों के लिए काम करे, लेकिन अंतिम नियंत्रण इंसानों के हाथों में ही रहना चाहिए।
महाराष्ट्र की वित्तीय, तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी ताकतों पर प्रकाश डालते हुए सीएम फडणवीस ने बताया कि मुंबई में देश का सबसे बड़ा फाइनेंशियल इकोसिस्टम है, पुणे तकनीकी टैलेंट का हब है, और नवी मुंबई डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल कनेक्टिविटी के केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), स्टार्टअप और यूनिवर्सिटीज के आस-पास एक मजबूत इकोसिस्टम बना रही है।
उन्होंने इंडस्ट्री लीडर्स से कहा कि वे महाराष्ट्र को सिर्फ एक बाजार के तौर पर न देखें, बल्कि इनोवेशन की एक प्रयोगशाला के तौर पर देखें। मुख्यमंत्री ने खेती, एमएसएमई, शहरी विकास, हेल्थकेयर, मोबिलिटी, फाइनेंशियल इन्क्लूजन, धोखाधड़ी रोकने और पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में समाधान मांगे और बड़े पैमाने पर टेस्टिंग के लिए राज्य की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक ग्लोबल स्टैंडर्ड सेट किया है और दुनिया भारत की अगली फाइनेंशियल क्रांति को उत्सुकता से देख रही है।
राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि महाराष्ट्र एक पायनियर के तौर पर काम करेगा, जो अगली पीढ़ी के फिनटेक समाधानों के लिए सबसे बड़े ‘रियल-वर्ल्ड टेस्टबेड’ के रूप में काम करेगा और मुंबई को दुनिया की फिनटेक राजधानी बनाने के पीएम मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में प्रयास करेगा।
इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में, बीकेसी में अपने विस्तार को लेकर मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए), सेबी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), और एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) के बीच समझौते के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया।
महाराष्ट्र
बैंक ऑफ महाराष्ट्र फ्रॉड केस : पूर्व मैनेजर राम भरोस मीणा को 7 साल की कठोर कैद

जयपुर की सीबीआई अदालत ने बैंक ऑफ महाराष्ट्र में 3.61 करोड़ रुपए की बैंक धोखाधड़ी के मामले में तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राम भरोस मीणा को दोषी ठहराते हुए सात साल की कठोर कैद (आरआई) की सजा सुनाई है।
अदालत ने उन पर 2,85,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
इसी मामले में एक निजी व्यक्ति माखन लाल मीणा को भी दोषी ठहराया गया है और उसे तीन साल की कठोर कैद तथा 25,000 रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने यह मामला बैंक ऑफ महाराष्ट्र के जोनल ऑफिस, जयपुर की ओर से 3 जून 2016 को दी गई लिखित शिकायत के आधार पर 9 नवंबर 2016 को दर्ज किया था।
शिकायत में बैंक ऑफ महाराष्ट्र के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर राम भरोस मीणा पर अपने पद का दुरुपयोग करने और धोखाधड़ी एवं जालसाजी के जरिए बैंक को वित्तीय नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए थे।
आरोप के मुताबिक, 15 जनवरी 2015 से 6 मई 2015 के बीच उन्होंने बिना वैध लोन आवेदन, जरूरी दस्तावेज और पर्याप्त सिक्योरिटी के 17 अकाउंट्स में अवैध तरीके से ऋण मंजूर किए।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के मुताबिक, इन अनियमितताओं के चलते बैंक को करीब 3.61 करोड़ रुपए का गलत नुकसान हुआ। जांच एजेंसी ने मामले की जांच पूरी करने के बाद राम भरोस मीणा और माखन लाल मीणा के खिलाफ 9 जुलाई 2020 को चार्जशीट दाखिल की।
चार्जशीट दाखिल करने के बाद अदालत ने 1 दिसंबर 2021 को दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए और मामले की सुनवाई आगे बढ़ी।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष जांच एजेंसी की ओर से आरोपों से संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज पेश किए गए। सुनवाई पूरी होने के बाद सीबीआई अदालत, जयपुर ने दोनों आरोपियों को मामले में दोषी ठहराया।
अदालत ने राम भरोस मीणा को सात साल की कठोर कैद के साथ 2.85 लाख रुपए का जुर्माना और माखन लाल मीणा को तीन साल की कठोर कैद के साथ 25 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई।
महाराष्ट्र
किसानों की बढ़ती मुश्किलों को लेकर शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र सरकार पर साधा निशाना

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की ओर से महाराष्ट्र के ज्यादातर हिस्सों से मानसून की वापसी की आधिकारिक घोषणा के बाद सोमवार को शिवसेना (यूबीटी) ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा है। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से चेतावनी दी गई कि महाराष्ट्र को गंभीर सूखे का सामना करना पड़ सकता है।
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में ठाकरे गुट की ओर से इस बात पर जोर दिया गया कि बिना बारिश के मॉनसून के चले जाने से राज्यभर के किसानों की आखिरी उम्मीदें भी टूट गई हैं और महाराष्ट्र का आधे से ज्यादा हिस्सा बुरी तरह सूख गया है।
संपादकीय के अनुसार, इस सीजन में महाराष्ट्र के 36 में से 20 से ज्यादा जिलों में बारिश की कमी दर्ज की गई। मानसून के देर से आने के कारण शुरुआती बुआई में रुकावट आई। लगभग दो महीने तक लगातार बारिश नहीं होने से बुआई की कोशिशें भी बेकार गईं जिससे मराठवाड़ा, विदर्भ और मध्य महाराष्ट्र में फसलें बर्बाद हो गईं।
‘सामना’ के संपादकीय में कहा गया, “राज्य में सबसे ज्यादा कमी सोलापुर में 58 प्रतिशत दर्ज की गई। बीड में बारिश की कमी 51 प्रतिशत रही। हिंगोली में 49 प्रतिशत, जालना में 48 प्रतिशत और अहिल्यानगर व धाराशिव दोनों में 46 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यहां तक कि तटीय सिंधुदुर्ग, जो आमतौर पर ज्यादा बारिश के लिए जाना जाता है, वहां भी 36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।”
राज्य प्रशासन पर निशाना साधते हुए ठाकरे गुट की ओर से आरोप लगाया गया कि सूखे से प्रभावित सोलापुर में स्थानीय अधिकारियों ने गार्डियन मिनिस्टर को सिंचाई वाले हरे-भरे खेत का मुआयना कराया जबकि दूसरी जगहों पर फसलें सूख चुकी थीं। इसे उन्होंने पीड़ित किसानों का क्रूर मजाक बताया।
असामान्य मौसम के कारण यह संकट और भी गंभीर गया है। आम तौर पर अक्टूबर में होने वाली गर्मी अगस्त के मध्य में ही शुरू हो गई और राज्य भर में तापमान 36 डिग्री तक पहुंच गया। संपादकीय में कहा गया है कि इस लगातार गर्मी ने हरे-भरे चरागाहों, कुओं और स्थानीय जल स्रोतों को सुखा दिया है, जिससे पीने के पानी और मवेशियों के चारे की भारी कमी हो गई है।
संपादकीय में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारी आर्थिक तंगी के कारण विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में किसानों की आत्महत्या का नया दौर शुरू हो चुका है। राजनीतिक नेताओं पर सीधा निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने कहा कि सिर्फ सूखा घोषित कर देने से सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो जाती।
संपादकीय में कहा गया है कि मॉनसून के लौटने के साथ ही, वे मंत्री और नेता भी सचिवालय लौट गए हैं जो पहले फोटो खिंचवाने के लिए खेतों की मेड़ों का दौरा करते थे और किसान अब भी तुरंत राहत का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
महाराष्ट्र
मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत जमा होने पर सीजेपी समर्थकों के खिलाफ केस दर्ज

मुंबई के शिवाजी पार्क में बिना इजाजत के इकट्ठा होने, नारे लगाने और घोषणाएं करने के आरोप में शनिवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के समर्थकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
मुंबई पुलिस के अनुसार, लगभग 400 से 500 अज्ञात समर्थक और प्रदर्शनकारी, जिनमें सीजेपी सदस्य अजिंक्य शिंदे, प्रणय अहीरे, आशुतोष रंका, अभिजीत दिपके, सौरव दास, आफरीन नवाज, सौम्या कोर्डे, अंकित भारद्वाज, विजय मलंगी और योगेश इंगले शामिल थे, ने दादर वेस्ट में मीनाताई ठाकरे मेमोरियल के सामने शिवाजी पार्क ग्राउंड के गेट नंबर 6 पर बिना अनुमति के जमा हुए।
बताया जा रहा है कि यह जमावड़ा 2 अक्टूबर की शाम 4 बजे से 7 बजे के बीच शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में हुआ।
पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारी एक सार्वजनिक सड़क पर जमा हुए और नारे लगाए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई। बिना जरूरी अनुमति के लाउडस्पीकर भी लगाए गए थे।
शुक्रवार को सीजेपी ने चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग करते हुए अपना ‘जेल भरो’ विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
भारी पुलिस तैनाती और शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन करने की औपचारिक अनुमति न मिलने के बावजूद हजारों नागरिक और समर्थक कार्यक्रम स्थल पर जमा हुए। प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को निशाना बनाते हुए नारे लगाए गए।
आयोजकों द्वारा अपने आंदोलन का ‘सीजन 2’ बताए गए इस विरोध प्रदर्शन को मुंबई पुलिस द्वारा अनुमति न दिए जाने के बावजूद आयोजित किया गया। बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए थे, जबकि दादर इलाके के कई हिस्सों में बैरिकेड्स लगाए गए थे।
इस प्रदर्शन को सार्वजनिक हस्तियों, बुद्धिजीवियों और बॉलीवुड हस्तियों का भी समर्थन मिला, जिन्होंने कार्यक्रम में भाग लिया और मतदान के अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थानों के महत्व के बारे में बात की।
मौजूद लोगों में अभिनेता शबाना आजमी और नसीरुद्दीन शाह के साथ-साथ संगीतकार विशाल ददलानी भी शामिल थे। इस सभा में शामिल लोगों ने वोटिंग के अधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की सुरक्षा के महत्व पर जोर दिया।
अभिनेता प्रकाश राज ने भी एक रिकॉर्डेड वीडियो मैसेज के जरिए अपना समर्थन दिया और नागरिकों से लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने की अपील की।
सभा को संबोधित करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की आलोचना की।
दिपके ने औपचारिक रूप से ‘जेल भरो’ आंदोलन का आह्वान किया और कहा कि वोटिंग के अधिकार की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण ढंग से इकट्ठा होना एक मौलिक संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने गैरकानूनी रूप से इकट्ठा होने के खिलाफ पुलिस की चेतावनियों को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को चुनौती भी दी।
दिपके ने कहा, “मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, आपने हमें सिर्फ तीन दिन के लिए जेल में डालने की बात कही थी। अगर आपने तीन महीने कहा होता तो पूरा मुंबई शहर पूरी तरह ठप हो जाता।”
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र2 years agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
महाराष्ट्र2 years agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
राजनीति2 years agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल2 years agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
