महाराष्ट्र
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बढ़ा कोरोना के नये वैरियंट का खतरा, मंगलवार को 8 नये मामलों की पुष्टि
देश की आर्थिक राजधनी मुंबई में कोरोना का नया वैरियंट ओमिक्रॉन धीरे धीरे पांव पसार रहा है..ताजा जानकारी के मुताबिक मंगलवार को राज्य में 8 नए ओमिक्रॉन संक्रमित मिलने से तीसरी लहर की आशंका अब बढ़ती जा रही है..मंगलवार को आए मामले में अकेले मुंबई में ही 7 मामले सामने आए हैं…. इन 8 मरीजों में 3 महिलाएं और 5 पुरुष शामिल हैं जिनकी उम्र 24 से लेकर 41 वर्ष के बीच है. इनमें से 3 मरीजों में कोई लक्षण नहीं हैं जबकि अन्य 5 में भी मामूली लक्षण हैं.
सबसे गौर करने वाली बात ये है कि इनमें किसी के भी विदेश यात्रा की की हिस्ट्री नहीं है…एक शख्स बेंगलुरू गया था जबकि दूसरा दिल्ली से लौटा है. मुंबई में मिला एक मरीज राजस्थान का रहने वाला है. इन 8 मरीजों में से दो को अस्पताल में भर्ती कराया गया है जबकि बाकी के 6 होम आइसोलेशन में हैं. इनके संपर्क में आने वालों को भी ट्रैक कर लिया गया है. इसके साथ ही राज्य में ओमिक्रॉन संक्रमितों का आंकड़ा बढ़कर 28 हो गया है..जबकि देश में अब तक कुल 61 मामले सामने आ चुके हैं..
मुंबई में अबतक 12, पिंपरी चिंचवाड़ में 10, पुणे में 2, कल्याण डोम्बिवली में 1, नागपुर में 1, लातूर में 1 और वसई विरार में 1 मामला सामने आया है…जानकारी के मुताबिक राज्य में अब तक 9 ओमिक्रॉन संक्रमितों को ठीक होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है जबकि 19 का इलाज चल रहा है…ओमिक्रॉन के बढ़ते खतरे के मद्देनजर राज्य सरकार ने सख्ती और बढ़ा दी है…ऐसे में लोगों को भी अब ऐहतियात बरतना जरूरी है और कोरोना के गाइडलाइन्स का पालन किया जाना अति आवश्यक भी हो गया है…
महाराष्ट्र
विधायक अबू आसिम आज़मी ने मानखुर्द शिवाजी नगर विकास कार्यों को लेकर सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के साथ अहम मीटिंग की

मुंबई: लोकल विधायक अबू आसिम आज़मी ने मुंबई सबअर्बन डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (आईएएस) सौरभ कटियार से मिलकर मानखुर्द शिवाजी नगर (गोविंद) असेंबली इलाके में कई पेंडिंग और ज़रूरी डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर डिटेल में बात की। मीटिंग में इलाके में एजुकेशन, सोशल वेलफेयर और रिहैबिलिटेशन से जुड़े ज़रूरी मुद्दों पर अच्छी बातचीत हुई। मीटिंग के दौरान, विधायक आज़मी ने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के सामने कुछ ज़रूरी मांगें रखीं, जिनमें मानखुर्द गोविंद इलाके में एक डिग्री कॉलेज के लिए सरकारी ज़मीन देना, शिया मुस्लिम कम्युनिटी के लिए अंतिम संस्कार के लिए सही जगह देना, और ट्रांजिट कैंप में रहने वाले लोगों के रिहैबिलिटेशन के मुद्दों का तुरंत हल निकालना शामिल है। मीटिंग के बाद विधायक अबू आसिम आज़मी ने कहा, “पब्लिक इंटरेस्ट और इलाके का हर तरह का डेवलपमेंट मेरा पहला मकसद है। डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के साथ मीटिंग बहुत पॉजिटिव रही, और मुझे यकीन है कि एडमिनिस्ट्रेशन जल्द ही उठाए गए मुद्दों पर अच्छे फैसले लेगा।”
महाराष्ट्र
मानखुर्द: शिवाजी नगर में इस्तेमाल न होने वाले टॉयलेट और वहां एक फ्री दवा की दुकान, महिलाओं के लिए जिम और किंडरगार्टन बनाया जाएगा: अबू आज़मी

मुंबई: मानखुर्द शिवाजी नगर विधानसभा क्षेत्र में कई पब्लिक टॉयलेट बहुत खराब हालत में हैं (मरम्मत के लायक नहीं)। कई जगहों पर, इन टॉयलेट की स्थानीय नागरिकों को ज़रूरत नहीं है और वे इस्तेमाल नहीं होते। स्थानीय विधायक अबू आसिम आज़मी ने मांग की है कि ऐसे सभी बेकार और खराब टॉयलेट पर जल्द से जल्द बुलडोज़र चलाया जाए और इस ज़मीन का इस्तेमाल जनकल्याण के कामों के लिए किया जाए। विधायकआज़मी ने नागरिकों की सुविधा के लिए इन ज़मीनों पर एक ‘जेनेरिक मेडिकल शॉप’, सिर्फ़ महिलाओं के लिए एक मॉडर्न ‘जिम’ और बच्चों के लिए एक ‘किंडरगार्टन’ बनाने का अपना इरादा ज़ाहिर किया है। इस बारे में म्युनिसिपल कमिश्नर और ‘ ईस्ट’ वार्ड के एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारियों को लिखा गया है और यह ज़ोरदार मांग की गई है कि इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द मंज़ूरी दी जाए। पब्लिक जगहों का इस्तेमाल लोगों के सीधे फ़ायदे के लिए किया जाना चाहिए। बेकार टॉयलेट हटाने और वहाँ मेडिकल और सोशल सुविधाएँ देने से इलाके की महिलाओं और बच्चों को बहुत फ़ायदा होगा। अगर प्रशासन तुरंत इजाज़त दे, तो हम असली काम शुरू कर देंगे।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र में नकली पनीर पर एक साल का प्रतिबंध, एफडीए ने शुरू की सख्त कार्रवाई

खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने एनालॉग या नकली (नॉन-डेयरी) पनीर के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है।
मंगलवार को जारी नोटिफिकेशन में यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (एफएसएस एक्ट), 2006 की धारा 30(2)(ए) के साथ धारा 18 और 29 के तहत जारी किया गया है।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में जारी आदेश का असर होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सर्विस और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। यह कदम महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा विधायक विक्रम पचपुते द्वारा राज्य में बढ़ते सिंथेटिक पनीर के कारोबार का मुद्दा बार-बार उठाने के बाद उठाया गया है।
विधायक विक्रम पचपुते ने इस फैसले का स्वागत करते हुए एफडीए आयुक्त की सराहना की और कहा, ”यह कदम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य धोखाधड़ी पर रोक लगाने के लिए महत्वपूर्ण है। महाराष्ट्र भर में एफडीए की निरीक्षण टीमें खाद्य कारोबारियों, आपूर्तिकर्ताओं और कैटरिंग कंपनियों पर अचानक छापेमारी करेंगी। नकली या एनालॉग पनीर रखने या परोसने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना, सामान जब्ती और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।”
आदेश के अनुसार, राज्य के सभी जिलों में किसी भी प्रकार के नॉन-डेयरी पनीर के निर्माण, पैकिंग, थोक बिक्री, खुदरा बिक्री और बिक्री के लिए प्रदर्शित करने पर रोक लगा दी गई है। होटल, रेस्टोरेंट, कैटरर, क्लाउड किचन और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान अब एनालॉग पनीर का उपयोग, तैयारी, भंडारण या किसी भी व्यंजन में परोस नहीं सकेंगे।
दूध से बने असली पनीर/छेना के निर्माताओं को खाद्य सुरक्षा एवं मानक (लेबलिंग और डिस्प्ले) विनियम, 2020 का सख्ती से पालन करना होगा। बिना बैच नंबर, बिल या उचित पैकेजिंग के खुले पनीर की बिक्री पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि इससे उत्पाद के स्रोत की पहचान करना मुश्किल होता है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ एफएसएस एक्ट की धाराओं 50, 51, 52, 55 और 59 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें भारी जुर्माना, उत्पाद जब्ती और गैर-अनुपालन वाले स्टॉक को नष्ट करने की कार्रवाई शामिल है।
एफडीए की रिपोर्ट के अनुसार, 1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच पनीर और डेयरी एनालॉग के 308 नमूनों की जांच की गई। इनमें से 109 नमूने (35.4 प्रतिशत) राज्य के मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 79 नमूने घटिया गुणवत्ता वाले पाए गए, जबकि 30 नमूने असुरक्षित घोषित किए गए।
जांच में पाया गया कि कई मामलों में प्राकृतिक दूध वसा की जगह सस्ते वनस्पति तेल और गैर-दुग्ध वसा का इस्तेमाल किया जा रहा था। प्रयोगशाला जांच में ब्यूटायरो-रिफ्रैक्टोमीटर रीडिंग और आयोडीन वैल्यू जैसे मानकों में गड़बड़ी सामने आई।
एफडीए के अनुसार, एनालॉग पनीर में वह पोषण मूल्य नहीं होता जो असली दूध से बने पनीर में पाया जाता है, खासकर प्रोटीन की मात्रा कम होती है। इससे उन उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है जो शाकाहारी आहार में पनीर को प्रोटीन के प्रमुख स्रोत के रूप में इस्तेमाल करते हैं।
राज्य में एक साल तक निगरानी और जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद मिलावट और भ्रामक बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी। इसी कारण उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है।
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