राष्ट्रीय समाचार
चार राज्यों में विधान परिषद चुनाव का ऐलान; 23 अक्टूबर को मतदान, 27 को होगी मतगणना
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों पर द्विवार्षिक चुनाव का ऐलान कर दिया है। इन चार राज्यों की कुल 28 सीटों पर चुनाव होगा, जहां मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल नवंबर-दिसंबर 2026 में खत्म हो रहा है।
चुनाव आयोग ने बताया कि संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में आचार संहिता तुरंत प्रभाव से लागू हो गई है। कुल 28 सीटों में से बिहार की 8 सीटें, कर्नाटक की 4 सीटें, महाराष्ट्र की 5 सीटें और उत्तर प्रदेश की 11 सीटें शामिल हैं।
बिहार में 4 स्नातक और 4 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होगा। इनमें पटना स्नातक से नीरज कुमार, दरभंगा स्नातक से सर्वेश कुमार, तिरहुत स्नातक से बंसीधर ब्रजवासी और कोसी स्नातक से डॉ. एनके यादव का कार्यकाल 16 नवंबर को खत्म हो रहा है। वहीं पटना शिक्षक से नवल किशोर यादव, दरभंगा शिक्षक से डॉ. मदन मोहन झा, तिरहुत शिक्षक से संजय कुमार सिंह और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सदस्य का कार्यकाल भी इसी दिन समाप्त होगा।
बता दें कि स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र भारतीय राज्यों की विधान परिषद (उच्च सदन) के सदस्य (एमएलसी) चुनने के लिए बने विशेष क्षेत्र होते हैं, जहां आम जनता नहीं बल्कि केवल योग्य स्नातक और शिक्षक वोट डालते हैं।
कर्नाटक में 2 स्नातक और 2 शिक्षक सीटों पर चुनाव होगा। कर्नाटक दक्षिण-पूर्व स्नातक से चिदानंद एम गौड़ा, कर्नाटक पश्चिम स्नातक से एस.वी. संकानुर, कर्नाटक उत्तर-पूर्व शिक्षक से शशिल जी. नमोशी और बैंगलोर शिक्षक से श्री पुट्टन्ना का कार्यकाल 11 नवंबर को खत्म हो रहा है।
महाराष्ट्र में 3 स्नातक और 2 शिक्षक सीटों पर चुनाव होगा। औरंगाबाद डिवीजन स्नातक से चव्हाण सतीश भानुदासराव, पुणे डिवीजन स्नातक से अरुण गणपति लाड, नागपुर डिवीजन स्नातक से अभिजीत गोविंदराव वंजारी, अमरावती डिवीजन शिक्षक से सरनाईक किरण रामराव और पुणे डिवीजन शिक्षक से जयंत दिनकर आसगावकर का कार्यकाल 6 दिसंबर को समाप्त होगा।
उत्तर प्रदेश में 5 स्नातक और 6 शिक्षक सीटों पर चुनाव होगा। लखनऊ डिवीजन स्नातक से इंजीनियर अवनीश कुमार सिंह, वाराणसी डिवीजन स्नातक से आशुतोष सिन्हा, आगरा डिवीजन स्नातक से डॉ. मानवेन्द्र प्रताप सिंह ‘गुरु जी’, मेरठ डिवीजन स्नातक से दिनेश कुमार गोयल और इलाहाबाद-झांसी डिवीजन स्नातक से डॉ. मान सिंह यादव का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को खत्म हो रहा है। इसी तरह लखनऊ शिक्षक से उमेश द्विवेदी, वाराणसी शिक्षक से लाल बिहारी यादव, आगरा शिक्षक से डॉ. आकाश अग्रवाल, मेरठ शिक्षक से श्रीचंद शर्मा, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक से हरि सिंह ढिल्लो और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक से ध्रुव कुमार त्रिपाठी का कार्यकाल भी 6 दिसंबर को समाप्त होगा।
चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, 29 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। नामांकन की आखिरी तारीख 6 अक्तूबर तक है। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी जबकि 9 अक्तूबर तक नाम वापस लिए जा सकेंगे।
मतदान 23 अक्तूबर को सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा। वोटों की गिनती 27 अक्टूबर को होगी और 31 अक्टूबर तक पूरी चुनाव प्रक्रिया खत्म कर ली जाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
बॉम्बे हाई कोर्ट ने विजय माल्या को सोशल मीडिया पर अदालती दस्तावेज पोस्ट करने के खिलाफ चेतावनी दी

एक वकील ने मंगलवार को बताया कि बॉम्बे हाई कोर्ट ने ब्रिटेन में रहने वाले ‘भगोड़े आर्थिक अपराधी’ विजय माल्या को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा जांच किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग मामले की सुनवाई जारी रहने के दौरान अदालती दस्तावेज सोशल मीडिया पर पोस्ट न करने की चेतावनी दी है।
वकील आशीष मेहता ने बताया कि कथित तौर पर ब्रिटेन में मौजूद भगोड़े व्यवसायी को हाई कोर्ट का यह निर्देश ईडी द्वारा माल्या को जांच एजेंसी के हलफनामे को अदालत द्वारा उस पर विचार किए बिना ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपलोड करने पर आपत्ति जताने के बाद आया है।
मामले की सुनवाई 13 अक्टूबर को तय करते हुए हाई कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) को ईडी द्वारा किए गए खुलासों को ध्यान में रखते हुए एक नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
इससे पहले, माल्या ने फरवरी में हाई कोर्ट को बताया था कि वह यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि वह भारत कब लौटेंगे।
उन्होंने इंग्लैंड की अदालतों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों का हवाला दिया, जिनके कारण वह देश छोड़ने में असमर्थ हैं।
उच्च न्यायालय माल्या द्वारा दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था।
एक याचिका में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (एफईओए) के तहत ‘भगोड़ा आर्थिक अपराधी’ घोषित किए जाने को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी याचिका में उन्हें औपचारिक रूप से भगोड़ा घोषित करने वाले अदालत के आदेश को चुनौती दी गई है।
माल्या की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अमित देसाई ने सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्णयों का हवाला दिया, जिनमें याचिकाकर्ताओं की अनुपस्थिति में भी रिट याचिकाओं की सुनवाई हुई थी।
उन्होंने कहा कि माल्या के खिलाफ ब्रिटेन में प्रत्यर्पण की कार्यवाही चल रही है और उनके मुवक्किल को इसकी जानकारी है, लेकिन बाध्यकारी अदालती आदेशों के कारण वे ब्रिटेन नहीं छोड़ सकते।
हालांकि, उच्च न्यायालय ने माल्या के अदालत में पेश होने के इरादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे ब्रिटेन के अदालती आदेशों पर भरोसा कर रहे हैं, जबकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन आदेशों को चुनौती दी गई है या नहीं।
अदालत ने संकेत दिया कि इस तरह के भरोसे को सर्वमान्य औचित्य नहीं माना जा सकता।
अदालत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को माल्या के हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने देसाई को सुनवाई के दौरान दिए गए सभी बयानों को रिकॉर्ड पर रखते हुए एक विस्तृत हलफनामा प्रस्तुत करने को भी कहा, ताकि भारत सरकार तदनुसार जवाब दे सके।
राष्ट्रीय समाचार
वित्त वर्ष 26 में सैमसंग इंडिया का मुनाफा 36 प्रतिशत घटकर 7,228 करोड़ रुपए रहा

सैमसंग इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स ने 31 मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में अपने कंसोलिडेटेड मुनाफे में 36 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है।
बिजनेस इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म टॉफ्लर के जरिए हासिल नियामकीय फाइलिंग के अनुसार, कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 में 7,228.10 करोड़ रुपए का मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वित्त वर्ष में दर्ज 11,287.50 करोड़ रुपए से कम है।
कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन निर्माता कंपनी का ऑपरेशंस से राजस्व वित्त वर्ष 2026 में सालाना आधार पर 1.2 प्रतिशत बढ़कर 1.12 लाख करोड़ रुपए हो गया। वित्त वर्ष 2025 में यह 1,11,183.40 करोड़ रुपए था।
अन्य आय समेत कंपनी की कुल कंसोलिडेटेड आय वित्त वर्ष के दौरान 1,14,738.60 करोड़ रुपए रही।
सैमसंग इंडिया के राजस्व में मोबाइल फोन कारोबार की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है, जो देश में कंपनी के कारोबार के प्रमुख आधारों में से एक बना हुआ है।
कंपनी की टेलीविजन, टैबलेट, घरेलू उपकरणों और कंप्यूटर समेत कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स के कई क्षेत्रों में भी मजबूत मौजूदगी है।
दक्षिण कोरियाई टेक्नोलॉजी दिग्गज सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स का हिस्सा यह कंपनी भारत के कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में प्रमुख कंपनियों में बनी हुई है।
यह देश के अप्लायंस और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की एकमात्र कंपनी है, जिसका कारोबार 1 लाख करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुका है।
सैमसंग का वित्तीय प्रदर्शन ऐसे समय में आया है जब भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन बाजार में प्रतिस्पर्धा काफी तेज है। वैश्विक और घरेलू कंपनियां विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में आक्रामक तरीके से प्रतिस्पर्धा कर रही हैं।
इस बीच, दक्षिण कोरिया की एक अन्य प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स ने भी वित्त वर्ष 2026 में अपेक्षाकृत स्थिर वृद्धि दर्ज की। वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की कुल आय सालाना आधार पर करीब 1 प्रतिशत बढ़कर 2,46,049.12 करोड़ रुपए हो गई।
इसके अतिरिक्त, इस महीने की शुरुआत में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, बढ़ती परिचालन लागत, कमजोर उपभोक्ता मांग और संगठनात्मक पुनर्गठन के बीच लागत को तर्कसंगत बनाने की कवायद के तहत सैमसंग इंडिया ने अपने टेलीविजन और होम अप्लायंस कारोबार से जुड़े कर्मचारियों की छंटनी की है।
कई रिपोर्टों में कहा गया कि इस कार्यबल में कमी का असर विभिन्न स्तरों के कर्मचारियों पर पड़ा है, जिनमें निदेशक, टीम लीडर, ब्रांच मैनेजर और एरिया मैनेजर शामिल हैं।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली एसआईआर में 47 लाख नाम हटाने के दावे पर सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से मांगा जवाब

दिल्ली में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट में दलील दी कि दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 47 लाख से ज्यादा नाम हटा दिए गए हैं। इसके अलावा 33 लाख लोगों को नोटिस भेजे गए हैं और इन नोटिसों के पीछे कारण रिकॉर्ड में कमी बताया गया है। प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम काटे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, “दिल्ली में पहले 47 लाख नाम डिलीट किए। बंगाल में आपने देखा अपील को निपटाने में 12 साल लगेंगे। 47 लाख उन्होंने ड्राफ्ट रोल में डिलीट कर दिए। ज्यादातर को आयोग कहता है कि शिफ्ट कर दिए गए हैं।”
इस पर चुनाव आयोग की ओर से वकील डी. एस. नायडू ने कहा कि उन्हें याचिका की कॉपी नहीं मिली है। एक सप्ताह पहले याचिकाकर्ता ने एक रिप्रजेंटेशन दिया था और आयोग जवाब दे पाता, उससे पहले ही वे कोर्ट आ गए।
सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव आयोग को इन शिकायतों की जांच करनी चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि नोटिस ऐसे लग रहे हैं जैसे कंप्यूटर से बने हों। जस्टिस बागची ने कहा, “प्लीज इसकी जांच करें। वे कह रहे हैं कि जब नोटिस जा रहा है तो वह कुछ खास कैटेगरी में जा रहा है। संबंधित व्यक्ति को पता होता है कि एलडी की कैटेगरी क्या है।”
सीजेआई ने भी कहा कि आयोग को लॉजिकल अंतर को थोड़ा क्लियर करने की जरूरत है। चुनाव आयोग ने जवाब में कहा कि उसने प्रेस नोट जारी किया है और हर नोटिस में कारण लिखा होता है। यह कोई मुद्दा नहीं है। आयोग ने कहा कि पेंडेंसी मैनेज करने के लिए मैनपावर बढ़ाई गई है और नोटिस में कारण भी बताए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से पूछा कि आपने लगभग 30 लाख नोटिस भेजे हैं और कितने बीएलओ तैनात हैं? इस पर आयोग ने बताया कि 14,000 बीएलओ और 1,200 ईआरओ तैनात किए गए हैं।
चुनाव आयोग ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि 29 अक्टूबर डेडलाइन है और अगर काम पूरा नहीं हुआ तो वह एक्सटेंशन के लिए तैयार है। यह चुनाव वाला राज्य नहीं है और एक भी वोटर का नाम गलत तरीके से नहीं हटाया जाएगा।
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