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Sunday,23-August-2026
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राजनीति

तमिलनाडु: टीवीके की सात उपचुनावों की तैयारी तेज, सीएम विजय ने पिछली सरकार के भ्रष्टाचार के खुलासे का दिया संकेत

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तमिलनाडु की सात विधानसभा सीटों पर होने वाले संभावित उपचुनावों के लिए टीवीके की ओर से बड़ी रणनीति तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने संकेत दिया है कि चुनाव प्रचार के दौरान पिछली सरकार से जुड़े कथित भ्रष्टाचार की फाइलें सार्वजनिक की जा सकती हैं।

तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों में से सात सीटें (तिरुचि ईस्ट, पेरुंदुरई, मदुरंतकम, धारापुरम, अंबासमुद्रम, करूर और विरलिमलाई) अभी खाली हैं। तिरुचि ईस्ट, करूर, विरलिमलाई, पेरुंदुरई और अंबासमुद्रम में उपचुनाव नहीं हो पाए क्योंकि इन सीटों के नतीजों को चुनौती देने वाली चुनाव याचिकाएं अभी भी लंबित हैं।

मद्रास हाईकोर्ट का इन पांच सीटों पर उपचुनाव रोकने वाला स्टे (रोक) 24 अगस्त को खत्म होने की उम्मीद है। इसलिए, उम्मीद है कि चुनाव आयोग जल्द ही सभी सात खाली सीटों पर उपचुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।

हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में अपने दम पर पूर्ण बहुमत न मिलने के बावजूद टीवीके ने सरकार बनाई थी। ऐसे में अब टीवीके के लिए उपचुनाव में जीत बहुत जरूरी है। पार्टी ने 107 सीटें जीती थीं, 234 सदस्यों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों से 11 कम थीं। उसने कांग्रेस (जिसके पांच विधायक हैं) और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिलनाडु पार्टी, सीपीआई, सीपीआई(एम), और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (हर एक के दो-दो विधायक) के समर्थन से सरकार बनाई थी।

हालांकि कांग्रेस पार्टी और दो अन्य सहयोगी दल कैबिनेट में शामिल हैं और उनके समर्थन वापस लेने की संभावना कम है, लेकिन अगर जनता से जुड़े मुद्दों पर मतभेद पैदा होते हैं तो दो कम्युनिस्ट पार्टियां अपनी स्थिति पर फिर से विचार कर सकती हैं। ऐसी स्थिति सरकार पर दबाव डाल सकती है। अगर टीवीके सभी सात खाली सीटें जीत जाती है, तो उसकी ताकत बढ़कर 114 हो जाएगी, जिससे वह बहुमत से सिर्फ चार सीटें दूर रह जाएगी।

मुख्यमंत्री विजय ने 19 अगस्त को विधानसभा सत्र के दौरान सरकार की चुनावी रणनीति का संकेत दिया, जब विपक्ष ने मंत्रियों की ओर से लगाए गए आरोपों के लिए दस्तावेजी सबूत मांगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के पास कई क्षेत्रों से जुड़े सबूत हैं और संबंधित फाइलें उनकी मेज़ पर हैं। मुख्यमंत्री विजय ने कहा, “मैं यह कहना नहीं चाहता था, लेकिन वे सबूत मांग रहे हैं। सब कुछ सबूत के साथ मेरी मेज पर है।” उन्होंने कहा था कि फाइलें “सही समय पर” खोली जाएंगी और साथ ही यह भी संकेत दिया था कि इन खुलासों का असर आने वाले उपचुनावों पर पड़ सकता है।

राष्ट्रीय समाचार

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का आकार अगले एक दशक में 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान

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भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 9 अरब डॉलर तक पहुंच गई है और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम एवं नीतिगत सुधारों के चलते अगले दशक में इसके 40-45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह जानकारी सरकार की ओर से जारी ताजा डेटा में सामने आई।

भारत रविवार को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस ऐसे अवसर पर मनाया जा रहा है, जब देश का अंतरिक्ष इकोसिस्टम तेजी से विस्तार कर रहा है। पंजीकृत अंतरिक्ष स्टार्टअप की संख्या इस साल अगस्त तक बढ़कर करीब 440 हो गई है, जो 2014 में सिर्फ 1 थी।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी निवेश लगभग छह गुना बढ़ा है। यह वित्त वर्ष 2021-22 में 100.5 मिलियन डॉलर से बढ़कर 31 मार्च 2026 तक 618.5 मिलियन डॉलर हो गया। अकेले 2026 में अब तक 187 मिलियन डॉलर का निवेश दर्ज किया गया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2026 के मध्य तक 52 गैर-सरकारी संस्थाओं (एनजीई) को 113 ऑथराइजेशन दिए जा चुके हैं। इनमें 18 स्टार्टअप हैं, जिन्हें उपग्रह संचालन, पेलोड स्थापित करने और लॉन्च सेवाओं के लिए अनुमति मिली है।

भारत ने 2020 में अपने अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया था। इससे उपग्रहों, लॉन्च सिस्टम और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के क्षेत्र में उद्योगों और स्टार्टअप्स की भागीदारी संभव हुई।

इसे भारत के व्यापक राष्ट्रीय अंतरिक्ष इकोसिस्टम की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया है।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 ने अंतरिक्ष क्षेत्र की पूरी वैल्यू चेन में निजी भागीदारी को और बढ़ाया। इस नीति में न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) और भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया।

इसरो की वाणिज्यिक शाखा एनएसआईएल लॉन्च, उपग्रह और अंतरिक्ष आधारित सेवाएं उपलब्ध कराती है और इसरो की तकनीकों को भारतीय उद्योगों तक पहुंचाती है।

एनएसआईएल का राजस्व वित्त वर्ष 2021-22 में 321.77 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में 3,000 करोड़ रुपए से अधिक हो गया। यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के बढ़ते व्यावसायीकरण को दर्शाता है।

इन-स्पेस सिंगल-विंडो व्यवस्था के जरिए निजी अंतरिक्ष गतिविधियों को सक्षम बनाता है। 31 जनवरी 2026 तक इसने उद्योगों और स्टार्टअप्स को इसरो की 71 तकनीकों के हस्तांतरण में मदद की।

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राष्ट्रीय समाचार

मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम से बढ़ेगा स्थानीय उत्पादन और पुर्जों का घरेलू निर्माण: उद्योग जगत

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हाल ही में मंजूर की गई मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (एमपीएमएस) भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को नई गति दे सकती है। उद्योग जगत का मानना है कि यह योजना स्थानीय मूल्य संवर्धन बढ़ाने, आयातित पुर्जों पर निर्भरता कम करने और इलेक्ट्रॉनिक्स आपूर्ति शृंखला में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ईसीएमएस) के तहत अब योजनाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उत्पादन स्तर तक पहुंच चुकी हैं। अब तक 106 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 38 विनिर्माण संयंत्र उत्पादन शुरू कर चुके हैं, जबकि 16 अन्य परियोजनाएं निर्माण के उन्नत चरण में हैं।

सेमी इंडिया और इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) के अध्यक्ष अशोक चंदक ने कहा कि उद्योग लंबे समय से उत्पादन क्षमता बढ़ाने, मजबूत डिजाइन टीम विकसित करने, स्थानीय स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दे रहा था। उन्होंने कहा कि मौजूदा आंकड़े दर्शाते हैं कि यह बदलाव अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है।

चंदक ने कहा कि भारत लंबे समय तक मल्टीलेयर पीसीबी, डिस्प्ले मॉड्यूल, सेंसर और रिले जैसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक पुर्जों के लिए आयात पर निर्भर रहा है। लेकिन अब स्थिति बदल रही है और भारत केवल वैश्विक कंपनियों के लिए एक बड़ा बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि इस बदलाव का प्रमाण इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम के तहत हाल ही में 31 नई परियोजनाओं की मंजूरी है, जिनमें लगभग 6,844 करोड़ रुपए का निवेश प्रस्तावित है। इससे पहले पांच महीने के भीतर ही 75 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी, जिनमें 61,671 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव था।

नई परियोजनियों के तहत देश में पहली बार कई महत्वपूर्ण घटकों का घरेलू उत्पादन शुरू होगा, जिनमें फिल्टर, कॉइल, स्पीकर जैसे प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक हिस्सों के साथ-साथ एसीटिलीन ब्लैक और इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स जैसे आवश्यक कच्चे माल का निर्माण भी शामिल है।

उन्होंने आगे कहा कि यह बदलाव भारत को केवल मोबाइल फोन असेंबली केंद्र से आगे ले जाकर घटक और सामग्री-आधारित विनिर्माण मॉडल की ओर आगे बढ़ा रहा है, जिससे भारतीय बौद्धिक संपदा, भारतीय डिजाइन और भारतीय विनिर्माण क्षमताओं को हर स्तर पर बढ़ावा मिलेगा।

ईवाई इंडिया में दूरसंचार और ग्राहक एवं उद्योग क्षेत्र के प्रमुख प्रशांत सिंघल ने कहा कि नई मोबाइल फोन विनिर्माण योजना पहले की योजनाओं की सफलता को आगे बढ़ाएगी। उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2014-15 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का मोबाइल फोन उत्पादन 33 गुना और मोबाइल निर्यात 165 गुना बढ़ चुका है।

सिंघल ने आगे कहा कि नई योजना भारतीय मोबाइल ब्रांडों को विशेष प्रोत्साहन देगी, जिसमें घरेलू स्तर पर पुर्जों की खरीद और अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन शामिल हैं। इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और देश में एक मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होगा।

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अंतरराष्ट्रीय समाचार

पुतिन का दावा: दुश्मन की किसी कार्रवाई का असर नहीं, हर दिशा में आगे बढ़ रही है रूसी सेना

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने एक इंटरव्‍यू में बताया क‍ि दुश्‍मन की क‍िसी भी कार्रवाई का हमारे युद्धक्षेत्र की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्‍होंने कहा क‍ि रूस ने अपकी आक्रामक कार्रवाई को और तेज कर द‍िया है।

रूसी समाचार एजेंसी ‘टास’ की जानकारी के अनुसार, रूसी राष्‍ट्रपत‍ि व्लादिमीर पुतिन ने वेस्टी के पत्रकार पावेल जारुबिन को दिए एक इंटरव्यू में दावा क‍िया कि रूसी सेना ने अपने आक्रामक अभियानों की गति को तेज कर द‍िया है। उन्‍होंने क‍हा क‍ि रूसी सेना विशेष सैन्य अभियान के लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल करती जा रही है।

टास की र‍िपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने दावा क‍िया क‍ि विपक्षी पक्ष की कार्रवाइयों का युद्धक्षेत्र की स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ा है। उन्‍होंने कहा क‍ि हमारी सेना न केवल सभी दिशाओं में आगे बढ़ रही है, बल्कि उसने अपने हमलों और सैन्य अभियानों की रफ्तार भी बढ़ा दी है।

उन्होंने कहा कि रूसी सशस्त्र बल अपने निर्धारित कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा कर रहे हैं और विशेष सैन्य अभियान के लक्ष्य हासिल होने तक ऐसा करते रहेंगे।

टास की जानकारी के अनुसार, रूसी राष्ट्रपति ने कहा क‍ि हमारा लक्ष्य अपनी हवाई सुरक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाना तथा उसकी क्षमताओं को बढ़ाना भी है।

टास के अनुसार, रूस में नागरिक ठिकानों पर यूक्रेन की ओर से किए गए हमलों पर टिप्पणी करते हुए पुतिन ने कहा कि हवाई सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ रूस को अपनी सुरक्षा एजेंसियों और नागरिक प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल भी विकसित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस प्रयास में सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी कंपनियों को भी शामिल किया जाना चाहिए।

गुरुवार रात ही यूक्रेनी हमलों में रूस की पर्म तेल रिफाइनरी, मैरिनोवका सैन्य हवाई अड्डे और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ”हम युद्ध के परिणामों को वहीं वापस पहुंचाने के लिए अपनी लंबी दूरी वाली प्रतिबंध और जवाबी कार्रवाई की रणनीति जारी रखे हुए हैं, जहां से यह युद्ध शुरू हुआ था। बीती रात हमारे लंबी दूरी के हमलों ने सीमा से 1,600 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित ‘पर्म’ की तेल रिफाइनरी और रूस के वोल्गोग्राद क्षेत्र में मौजूद ‘मैरिनोवका’ सैन्य हवाई अड्डे को निशाना बनाया। काला सागर के क्षेत्र में भी हमें कुछ परिणाम मिले हैं।”

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