खेल
2034 तक चेल्सी में बने रहेंगे जोआओ पेड्रो, क्लब ने की कॉन्ट्रैक्ट बढ़ाने की पुष्टि
चेल्सी के फॉरवर्ड जोआओ पेड्रो ने प्रीमियर लीग क्लब के साथ एक नए कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किया है। यह कॉन्ट्रैक्ट साल 2034 तक के लिए किया गया है। शनिवार को क्लब ने इसकी घोषणा की है।
ब्राजील के इस खिलाड़ी ने जुलाई 2025 में ब्राइटन एंड होव एल्बियन से चेल्सी का रुख किया था और आते ही अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने क्लब को फीफा क्लब वर्ल्ड कप जिताने में अहम भूमिका निभाई।
पेड्रो ने सेमीफाइनल में अपने पूर्व क्लब फ्लुमिनेंस के खिलाफ दो गोल किए और फिर पेरिस सेंट-जर्मेन के खिलाफ चेल्सी की फाइनल जीत में भी गोल करके लंदन की टीम को ट्रॉफी जिताने में अहम भूमिका निभाई।
23 वर्षीय खिलाड़ी ने चेल्सी में अपने पहले पूरे सीजन में शानदार फॉर्म जारी रखी। उन्होंने सभी प्रतियोगिताओं में 20 गोल किए और उन्हें समर्थकों द्वारा क्लब का ‘प्लेयर ऑफ द सीजन’ चुना गया। पेड्रो ने वेस्ट हैम यूनाइटेड के खिलाफ घर से बाहर खेले गए गेम में 2025/26 सीजन का चेल्सी का पहला गोल भी किया और बाद में टोटेनहम हॉटस्पर के खिलाफ जीत में एकमात्र गोल भी दागा।
उन्होंने यूईएफए चैंपियंस लीग में भी अपनी छाप छोड़ी और नेपोली के खिलाफ चेल्सी की जीत में दो गोल किए।
अपना कार्यकाल बढ़ाने के बाद पेड्रो ने कहा, “मैं चेल्सी के साथ नया कॉन्ट्रैक्ट साइन करके बहुत खुश हूं। मैंने हमेशा एक बड़े क्लब के लिए खेलने का सपना देखा था, और इस क्लब के प्रति अपनी लंबी अवधि की प्रतिबद्धता जताना मेरे लिए बहुत मायने रखता है। चेल्सी की जीत की एक लंबी परंपरा रही है और भविष्य के लिए इसके बड़े लक्ष्य हैं।”
पेड्रो ने नए मैनेजर जाबी अलोंसो के नेतृत्व में आगामी सीजन को लेकर भी अपना उत्साह जाहिर किया। उन्होंने कहा, “हर कोई इस सीजन के लिए बहुत उत्साहित है। हम जानते हैं कि हम बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। हमारे पास एक बेहतरीन टीम है, हमारे पास एक ऐसे कोच हैं जो जीतना चाहते हैं और पहले भी जीत चुके हैं। मैं पूरी तरह से प्रतिबद्ध हूं, हर कोई तैयार है, और उम्मीद है कि हम अपने लक्ष्य हासिल कर सकेंगे।”
पिछले सीजन 10वें स्थान पर रही चेल्सी की टीम 2026-27 प्रीमियर लीग में अपने सीजन का आगाज 24 अगस्त को फुलहम के खिलाफ करेगी।
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अर्शदीप सिंह ने रचा इतिहास, एक कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक विकेट लेने वाले भारतीय गेंदबाज बने

भारत और न्यूजीलैंड के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला हेगले ओवल के मैदान पर खेला जा रहा है। पहले बल्लेबाजी करते हुए न्यूजीलैंड ने 5 विकेट खोकर 180 रन बनाए। अर्शदीप सिंह ने इस मुकाबले में दो विकेट लेने के साथ ही इतिहास रच दिया है।
अर्शदीप भारत की ओर से टी20 इंटरनेशनल में एक कैलेंडर ईयर में सर्वाधिक विकेट लेने वाले गेंदबाज बन गए हैं। अर्शदीप साल 2026 में अब तक कुल 38 विकेट अपने नाम कर चुके हैं। 4 ओवर के स्पेल में भारतीय तेज गेंदबाज ने 33 रन देकर दो विकेट अपने नाम किए। अर्शदीप ने भुवनेश्वर कुमार का रिकॉर्ड तोड़ा। भुवनेश्वर ने साल 2022 में क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में भारत की ओर से 37 विकेट निकाले थे। वहीं, 2024 में अर्शदीप ने 36 विकेट चटकाए थे।
अर्शदीप ओवरऑल एक कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले दुनिया के संयुक्त रूप से दूसरे गेंदबाज बने हैं। उन्होंने श्रीलंका के गेंदबाज वानिंदु हसरंगा के रिकॉर्ड की बराबरी की है। इस लिस्ट में अर्शदीप से आगे सिर्फ आयरलैंड के तेज गेंदबाज जोश लिटिल हैं, जिन्होंने 2022 में 39 विकेट निकाले थे। अर्शदीप ने टिम सीफर्ट और ग्लेन फिलिप्स का बड़ा विकेट अपने नाम किया।
न्यूजीलैंड की तरफ से फिलिप्स ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 43 गेंदों में 70 रनों की दमदार पारी खेली। अपनी इस पारी में फिलिप्स ने 4 चौके और चार छक्के लगाए। बेवन जैकब्स भी बेहतरीन लय में दिखाई दिए और उन्होंने 46 गेंदों का सामना करते हुए 58 रन बनाए। अपनी इस पारी में जैकब्स ने 5 चौके और एक छक्का लगाया। दोनों ने मिलकर चौथे विकेट के लिए 76 गेंदों में 116 रनों की साझेदारी निभाई, जिसके बूते टीम सम्मानजनक स्कोर तक पहुंचने में सफल रही। फिन एलन ने 16 और माइकल ब्रेसवेल ने 10 रनों का योगदान दिया। पांच मैचों की टी20 सीरीज में भारतीय टीम 1-0 से आगे है।
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भारत बनाम न्यूजीलैंड: तिलक-नितीश की जोड़ी के बीच 69 रन की अटूट साझेदारी ,रिकॉर्ड बुक में नाम दर्ज

भारत ने तिलक वर्मा और नितीश रेड्डी की 69 रनों की अटूट साझेदारी के दम पर न्यूजीलैंड के खिलाफ शनिवार को टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में 4 विकेट से रोमांचक जीत दर्ज की। यह फुल मेंबर देश की तरफ से टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफल रन-चेज के दौरान 7वें विकेट के लिए संयुक्त रूप से दूसरे सबसे बड़ी साझेदारी का रिकॉर्ड है।
तिलक-नितीश के अलावा, चमिका करुणारत्ने और दासुन शनाका की श्रीलंकाई जोड़ी भी 69 रन की अटूट साझेदारी कर चुकी है, जिसने साल 2022 में ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध नाबाद 69 रन जुटाए थे। इस लिस्ट में वेन पार्नेल और रस्टी थेरोन (साउथ अफ्रीका) की जोड़ी शीर्ष पर है, जिसने साल 2011 में 64 रन की अटूट साझेदारी की थी। इस लिस्ट में अफीफ हुसैन और मोसादेक हुसैन की बांग्लादेशी जोड़ी शीर्ष पर है, जिसने साल 2019 में जिम्बाब्वे के विरुद्ध मीरपुर में 82 रन जुटाए थे।
हैगली ओवल में टॉस गंवाकर बल्लेबाजी के लिए उतरी न्यूजीलैंड की टीम ने निर्धारित ओवरों में 5 विकेट खोकर 180 रन बनाए। इस पारी में ग्लेन फिलिप्स ने सर्वाधिक 70 रन बनाए, जबकि बेवॉन जैकब्स ने 58 रन की पारी खेली। भारतीय खेमे से अर्शदीप सिंह ने 33 रन देकर सर्वाधिक 2 विकेट हासिल किए, जबकि भुवनेश्वर कुमार, प्रिंस यादव और नितीश रेड्डी को 1-1 विकेट हाथ लगा।
इसके जवाब में भारत ने 19.5 ओवरों में मुकाबला अपने नाम कर लिया। टीम इंडिया ने 70 के स्कोर तक 5 विकेट खो दिए थे। इसके बाद तिलक वर्मा (नाबाद 51) ने नमन धीर (31) के साथ छठे विकेट के लिए 24 गेंदों में 42 रन जोड़े, जबकि नितीश रेड्डी (नाबाद 26) के साथ सातवें विकेट के लिए 30 गेंदों में 69 रन की अटूट साझेदारी करते हुए टीम को रोमांचक जीत दिलाई। विपक्षी खेमे से मिचेल सेंटनर ने 21 रन देकर 4 विकेट निकाले।
भारत ने पांच मुकाबलों की टी20 सीरीज में 2-0 से बढ़त हासिल कर ली है। अब सीरीज के शेष मुकाबले 27 अक्टूबर, 30 अक्टूबर और 1 नवंबर को खेले जाएंगे, जिसके बाद दोनों टीमें 5 वनडे और 2 टेस्ट मुकाबलों की सीरीज खेलेंगी।
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‘भारतीय टीम में वापसी की उम्मीद के बिना लगातार मेहनत किया’: भुवनेश्वर कुमार

दाएं हाथ के तेज गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने 4 साल बाद भारतीय टीम में वापसी की है। भुवनेश्वर ने कहा है कि खुद से कोई उम्मीद न रखने और अपने काम पर फोकस करने की वजह से नेशनल टीम से दूर रहने के बावजूद उनकी तैयारियों पर कभी कोई असर नहीं पड़ा।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में भुवनेश्वर कुमार ने कहा, “पिछले तीन-चाल वर्षों में उन्होंने भविष्य की चिंता करने की जगह वर्तमान पर फोकस किया है।”
उन्होंने कहा, “मैं जिस सोच में हूं, वह बहुत सिंपल है। मुझे खुद से कोई उम्मीद नहीं है। मुझे लगता है कि पिछले 3-4 वर्षों में मेरे लिए चीजें ऐसे ही हुईं। कोई उम्मीद नहीं, बस अपना काम करते रहो। आम तौर पर, हम वर्तमान में रहने की बात करते हैं। हम भविष्य के बारे में नहीं सोचते। मुझे लगता है कि मैं अभी इसी सोच में हूं।”
भुवनेश्वर ने कहा, “मुझे पता है कि मैं देश के लिए नहीं खेला। लेकिन मैंने जो चीजें कीं और एक इंसान के तौर पर मुझमें जो परिपक्वता आई। मुझे लगता है कि उन्होंने मुझे यही सिखाया कि वर्तमान में रहो। पिछले चार साल में, मैं कभी इंडियन जर्सी के पीछे नहीं भागा। मुझे यह भी नहीं पता था कि वे चार साल कब आएंगे।”
भारतीय टीम में वापसी का श्रेय भुवनेश्वर ने घरेलू क्रिकेट और आईपीएल को दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम में उनकी वापसी होगी या नहीं, इसका उन्हें पता नहीं था, लेकिन घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के लिए तैयारी जारी रही।
उन्होंने कहा, “पिछले दो आईपीएल में, मैं बिना किसी उम्मीद के गया था। लेकिन ऐसा नहीं था कि मैंने तैयारी नहीं की थी। मैंने फिटनेस से लेकर स्किल्स और मानसिक पक्ष, सब पर काम किया। हां, इस बात की उम्मीद शून्य थी कि मैं क्या करूंगा। मुझे टीम के लिए योगदान करना था, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे दो साल में दो आईपीएल खिताब मिलेंगे।”
भुवनेश्वर का मानना है कि आईपीएल ने उन्हें टी20 क्रिकेट की बदलती जरूरतों को समझने में भी मदद की है, जिसमें बल्लेबाज ज्यादा आक्रामक हो गए हैं और हाई स्कोर आम बात हो गई है।
उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि एक इम्पैक्ट प्लेयर होता है। लेकिन उस इम्पैक्ट प्लेयर ने बैट्समैन का माइंडसेट बहुत बदल दिया है। वे पहली बॉल से ही पीछे पड़ जाते हैं। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि हम गेंदबाजों को पीड़ित मानते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है, एक गेंदबाज के तौर पर आप गेम को नियंत्रित कर सकते हैं। आप चाह सकते हैं कि वे वहीं हिट करें जहां हम चाहते हैं। इसलिए मुझे लगता है कि यह सिर्फ एक नजरिया है।”
भुवनेश्वर ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में गेम में काफी बदलाव आया है, सिर्फ फ्रेंचाइजी क्रिकेट में ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी। 200 एक छोटा स्कोर हो गया है।”
इस अनुभवी पेसर ने विदेशों में खेलने की चुनौतियों के बारे में भी बताया, खासकर सेना देशों में, जहां बैट्समैन और बॉलर दोनों के लिए हालात मुश्किल हो सकते हैं।
उन्होंने कहा, “यह कोई बड़ी बात नहीं है। हम एक युवा टीम हैं। हम कई सालों से खेल रहे हैं। जब आप किसी विदेशी दौरे पर आते हैं, तो यह मुश्किल होता है। हालात अलग होते हैं। आम तौर पर, हम उम्मीदों के साथ आते हैं कि शायद हमें किसी फास्ट बॉलर से कुछ मिलेगा, लेकिन पिछले चार-पांच वर्षों से, जिस तरह से हम व्हाइट बॉल फॉर्मेट देख रहे हैं, गेंदबाजों को ज्यादा सपोर्ट नहीं मिलता। मैंने महसूस किया है कि टी20 एक ऐसा फॉर्मेट बन गया है जहां आपको एक गेंदबाज के तौर पर बहुत परिपक्वता की जरूरत होती है।”
भुवनेश्वर ने कहा, “जब भी हम किसी विदेशी दौरे पर आते हैं, तो सबसे बड़ा माइंडसेट वहां जीतने का होता है, खासकर जब हम सेना (साउथ अफ्रीका, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया) देशों में आते हैं। यह आसान नहीं है, लेकिन ऐसे देशों में जीतने से आपको बहुत संतुष्टि मिलती है।”
भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी20 में जीत मिली थी। उस पर भुवनेश्वर ने कहा, “जिस तरह से हमने पहला गेम जीता, मुझे पता है कि यह बॉलर्स के लिए मुश्किल था। बल्लेबाजों ने जिस तरह चेज किया, उससे टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है। पहले मैच में जीत आगे के मैचों और सीरीज के लिए आत्मविश्वास लेकर आती है।”
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