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सुप्रीम कोर्ट बेनामी कानून पर फैसले की समीक्षा के लिए केंद्र की याचिका पर विचार करने को तैयार

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नई दिल्ली, 31 जनवरी : सुप्रीम कोर्ट बेनामी कानून पर फैसले की समीक्षा के लिए केंद्र की याचिका पर विचार करने के लिए सहमत है। केंद्र ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में उस फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई की मांग की, जिसमें बेनामी लेनदेन (निषेध) संशोधन अधिनियम, 2016 के कई प्रावधानों को रद्द कर दिया गया था। केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भारत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया: यह एक असामान्य अनुरोध है। हम समीक्षा की खुली अदालत में सुनवाई चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि इस फैसले के कारण बहुत सारे आदेश पारित किए जा रहे हैं जबकि बेनामी अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती भी नहीं दी गई थी। जैसे पूर्वव्यापी प्रभाव पर गौर नहीं किया जा सकता था (पीठ द्वारा जिसने निर्णय पारित किया था)। पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा भी शामिल हैं, ने कहा, हम इस पर विचार करेंगे।

पिछले साल अगस्त में भारत के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम, 1988 की धारा 3(2) और धारा 5 को रद्द कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम 1988 की धारा 3(2) स्पष्ट रूप से मनमाना होने के आधार पर असंवैधानिक थी, और कानून में 2016 के कड़े संशोधन को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता है।

इसने कहा: 1988 के असंशोधित अधिनियम की धारा 3 (2) को स्पष्ट रूप से मनमाना होने के कारण असंवैधानिक घोषित किया गया है। तदनुसार, 2016 अधिनियम की धारा 3 (2) भी असंवैधानिक है क्योंकि यह संविधान के अनुच्छेद 20 (1) का उल्लंघन है। 2016 के संशोधन अधिनियम से पहले, 1988 के असंशोधित अधिनियम की धारा 5 के तहत जब्ती प्रावधान स्पष्ट रूप से मनमाना होने के लिए असंवैधानिक था।

शीर्ष अदालत ने 1988 के बेनामी लेन-देन (निषेध) अधिनियम के प्रावधानों को रद्द कर दिया, जिसमें ‘बेनामी’ लेनदेन में शामिल लोगों के लिए तीन साल तक कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान था। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि संशोधन अधिनियम परिवर्तनों के बाद होने वाले लेन-देन पर लागू होगा।

इस तथ्य के मद्देनजर कि यह अदालत पहले ही मान चुकी है कि 1988 के अधिनियम के तहत आपराधिक प्रावधान मनमाना और लागू करने में अक्षम थे, 2016 के संशोधन के माध्यम से कानून 5 सितंबर, 1988 से 25 अक्टूबर, 2016 के बीच किए गए लेन-देन की जब्ती के लिए पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं हो सकता है, क्योंकि यह किसी अन्य प्रकार की सजा के अभाव में दंडात्मक सजा के समान होगा।

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नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

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नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।

आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।

शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।

बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।

सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।

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कथित बांग्लादेशियों के जाली और फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शुरू; किरीट सोमैया के आरोपों के बाद मुंबई पुलिस हरकत में।

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मुंबई: भाजपा नेता किरीट सौम्या ने मुंबई में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच भी एक्शन में आ गई है। मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक एसआईटी टीम बनाने को मंजूरी दे दी है और एक आदेश भी जारी किया है। किरीट सौम्या ने पहले इस मामले की जांच की मांग की थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने अब एक आदेश जारी कर यह जिम्मेदारी मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी है, जो इन मामलों की जांच करेगी। मुंबई शहर से अब तक एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी अप्रवासियों को निकाला जा चुका है, इसके बावजूद किरीट सौम्या ने आरोप लगाया है कि शहर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं और यह देश की अखंडता के लिए खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में धार्मिक नफरत फैलाना भी शुरू कर दिया है। मुंबई मुंबई पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट और शिकायत की जांच के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी बनाई है। इस एसआईटी के बारे में डिपार्टमेंटल ऑर्डर जारी करते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि इस टीम को जॉइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम लक्ष्मी गौतम हेड करेंगी, जबकि एडिशनल कमिश्नर क्राइम मुंबई, एडिशनल कमिश्नर स्पेशल ब्रांच, डीसीपी डिटेक्शन क्राइम और असिस्टेंट कमिश्नर क्राइम इस टीम का हिस्सा हैं। ऑर्डर में कहा गया है कि यह एसआईटी टीम बड़े पैमाने पर फर्जी डॉक्यूमेंट्स और बर्थ सर्टिफिकेट में फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायतें सामने आने के बाद बनाई गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का मकसद डॉक्यूमेंट्स की जांच करके जरूरी एक्शन लेना है। यह ऑर्डर मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने जारी किया है।

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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

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मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।

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