राजनीति
किसानों के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस ने भाजपा को घेरा
नए कृषि कानून के खिलाफ चल रहे किसानों के आन्दोलन पर विपक्षी दलों ने सियासत शुरू कर दी है। इस मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा पर निशाना साधा है। अखिलेश यादव ने ट्वीट के माध्यम से लिखा कि, जब बेबस किसान की न सुनी जाती फरियाद, हुकूमत के गरूर की वो हिला देते हैं बुनियाद!
इससे पहले अखिलेश यादव ने लिखा, हम कृषि कानूनों के इस संघर्ष में अपने अन्नदाता भाइयों के लिए आटा, दाल, चावल की कमी नहीं होने देंगे। हम सपा के कार्यकतार्ओं व आम जनता से अपील करते हैं कि वो अन्नदाता की हर संभव मदद करें। डॉक्टरों से विशेष आग्रह है कि वो बुजुर्ग किसानों का ख्याल रखें।
उधर, कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर लिखा कि भाजपा सरकार के मंत्री व नेता किसानों को देशद्रोही बोल चुके हैं। आन्दोलन के पीछे इंटरनेशनल साजिश बता चुके हैं। आन्दोलन करने वाले किसान नहीं लगते, बोल चुके हैं। लेकिन आज बातचीत में सरकार को किसानों को सुनना होगा। किसान कानून के केंद्र में किसान होगा न कि भाजपा के अरबपति मित्र।
केंद्र सरकार लगातार कोशिश कर रही है कि किसानों की समस्या जल्द से जल्द सुलझा ली जाए। इसको लेकर गुरुवार को बैठक चल रही है जिसमें शांतिपूर्ण तरीके से समाधान निकालने पर चर्चा होगी। वहीं किसानों ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर तीनों कानून रद्द करने की मांग की है।
राष्ट्रीय समाचार
डेयरी संस्था आविन ने दूध की किल्लत वाली खबर का किया खंडन, कहा- ऐसी खबरें पूरी तरह भ्रामक

तमिलनाडु की राज्य संचालित डेयरी सहकारी संस्था आविन ने दूध की आपूर्ति में गिरावट संबंधी खबरों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि चेन्नई में दूध की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में दूध की बिक्री में वृद्धि दर्ज की गई है।
यह स्पष्टीकरण तमिलनाडु मिल्क एजेंट्स एंड वर्कर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा लगाए गए उन आरोपों के बाद आया है, जिनमें कहा गया था कि निजी डेयरी कंपनियां आविन की तुलना में अधिक खरीद मूल्य देकर दूध उत्पादकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं।
एसोसिएशन के अनुसार, इसके कारण आविन के दूध खरीद में गिरावट आई है, जिससे कई इलाकों में दूध की आपूर्ति पर 30 प्रतिशत तक असर पड़ा है।
इन आरोपों को खारिज करते हुए आविन ने कहा कि दूध की खरीद या वितरण में किसी भी तरह की कोई बाधा नहीं आई है और चेन्नई के उपभोक्ताओं को प्रतिदिन आविन के सभी प्रकार के दूध के पैकेट बिना किसी कमी के उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
आधिकारिक बयान में आविन ने कहा कि वह वर्तमान में चेन्नई में प्रतिदिन औसतन 14.50 लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रहा है और अपने व्यापक वितरण नेटवर्क के माध्यम से निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित कर रहा है।
सहकारी संस्था ने कहा कि वह उपभोक्ताओं की मांग पूरी करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और दूध की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
बिक्री में गिरावट के दावों का जवाब देते हुए आविन ने जून महीने के दौरान दूध वितरण के तुलनात्मक आंकड़े भी जारी किए।
जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2025 में सहकारी संस्था ने प्रतिदिन औसतन 14.46 लाख लीटर दूध की बिक्री की थी। वहीं जून 2026 में औसत दैनिक बिक्री बढ़कर 14.82 लाख लीटर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में प्रतिदिन लगभग 36,000 लीटर अधिक है।
आविन ने कहा कि ये आंकड़े स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि उपभोक्ता मांग या दूध वितरण में किसी प्रकार की कोई गिरावट नहीं आई है। इसके विपरीत, मिल्क एजेंट्स एसोसिएशन द्वारा जताई गई चिंताओं के बावजूद बिक्री में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है।
डेयरी सहकारी संस्था ने आगे कहा कि आविन दूध की कमी या आपूर्ति में व्यवधान संबंधी खबरें “निराधार और भ्रामक” हैं।
संस्था ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे ऐसी खबरों से गुमराह न हों। उसने दोहराया कि पर्याप्त मात्रा में दूध उपलब्ध है और दूध वितरण का कार्य पूरी तरह सामान्य रूप से चल रहा है।
उपभोक्ताओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए आविन ने कहा कि निर्बाध दूध आपूर्ति उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और उसने जनता को आश्वस्त किया कि चेन्नई में सभी श्रेणियों के दूध के पैकेट बिना किसी कठिनाई के लगातार उपलब्ध रहेंगे।
सहकारी संस्था ने यह भी दोहराया कि वह दूध खरीद और वितरण की लगातार निगरानी करती रहेगी, ताकि शहर के उपभोक्ताओं को भरोसेमंद और निर्बाध दूध आपूर्ति मिलती रहे।
राष्ट्रीय समाचार
भारत में अमेरिकी मिशन ने बनाया रिकॉर्ड, अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर का निवेश जुटाया

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बताया कि नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने इस साल अमेरिका में 20.5 अरब डॉलर (20.5 बिलियन डॉलर) के नए निवेश आकर्षित किए हैं। इस उपलब्धि के साथ भारत में अमेरिकी मिशन निवेश बढ़ाने के मामले में दुनियाभर के सभी अमेरिकी दूतावासों में पहले स्थान पर पहुंच गया है।
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी मंच (यूएसआईएसपीएफ) के लीडरशिप समिट में बोलते हुए सर्जियो गोर ने कहा कि यह उपलब्धि भारत में बढ़ते भरोसे और दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों का बड़ा संकेत है।
उन्होंने कहा, “हमारी सभी अमेरिकी दूतावासों के बीच एक तरह की प्रतिस्पर्धा रहती है। इस साल नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने 20.5 अरब डॉलर का नया निवेश अमेरिका तक पहुंचाया और हम बाकी सभी मिशनों से काफी आगे रहे। यह हमारे लिए बेहद गर्व और संतोष की बात है।”
सर्जियो गोर ने कहा कि आज भारत एक भरोसेमंद निवेश गंतव्य बनकर उभरा है। यही वजह है कि अमेरिकी कंपनियां भारत के साथ काम करने में पहले से ज्यादा विश्वास दिखा रही हैं।
उन्होंने बताया कि जब कोई अमेरिकी कंपनी उनसे पूछती है कि क्या भारत में निवेश करना सुरक्षित है? क्या यहां उनकी बौद्धिक संपदा (आईपी) सुरक्षित रहेगी? क्या कानून अचानक नहीं बदलेंगे? क्या टैक्स व्यवस्था स्थिर और भरोसेमंद है? तब उन्हें गर्व के साथ जवाब देने का मौका मिलता है कि अमेरिका भारत पर भरोसा करता है और भारत के साथ मिलकर काम करता है।
राजदूत ने कहा कि उन्होंने भारत में अपने छह महीने के कार्यकाल के दौरान कई सकारात्मक बदलाव देखे हैं। अमेरिकी दूतावास अब केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका पूरा ध्यान ठोस आर्थिक परिणाम हासिल करने पर है।
उन्होंने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कहते हैं, हम परिणामों पर काम करते हैं। मैं भारत सिर्फ स्वागत समारोहों में शामिल होने नहीं आया हूं। मेरा उद्देश्य इस महत्वपूर्ण साझेदारी को और मजबूत करना है, जो दोनों देशों के लिए बेहद जरूरी है।”
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिकी दूतावास हमेशा निवेशकों और कारोबारियों के लिए खुला है। उन्होंने कंपनियों से अपील की कि अगर किसी निवेश या कारोबारी परियोजना में नियमों या सरकारी प्रक्रियाओं की वजह से कोई अड़चन आती है, तो वे सीधे दूतावास से संपर्क करें।
उन्होंने कहा, “हमारा दूतावास आपके लिए हमेशा खुला है। आइए, हमसे मिलिए और बताइए कि हम आपकी किस तरह मदद कर सकते हैं। कई बार दोनों देशों में फाइलें सरकारी प्रक्रियाओं में अटक जाती हैं। अगर हम सही व्यक्ति तक मामला पहुंचाकर उसे आगे बढ़ाने में मदद कर सकते हैं, तो जरूर करेंगे। आपको हमारा दूतावास हमेशा सहयोगी और सकारात्मक मिलेगा।”
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार आर्थिक कूटनीति को विदेश नीति का अहम हिस्सा मानती है। उनका कहना था कि ट्रंप खुद भी अमेरिकी कंपनियों को विदेशों में कारोबार बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा, “कोई भी सौदा छोटा नहीं होता। अगर किसी निवेश से अमेरिका में रोजगार पैदा होता है, तो राष्ट्रपति खुद उस कंपनी के समर्थन में फोन करने के लिए भी तैयार रहते हैं। यह बेहद सक्रिय तरीका है, जैसा हमने पहले किसी भी राजनीतिक दल की सरकार में नहीं देखा।”
सर्जियो गोर ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ तकनीक, रक्षा, विमानन (एविएशन) और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कारोबारी और निवेश संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका का रिश्ता भरोसे, साझा अवसरों और दीर्घकालिक साझेदारी पर आधारित है।
उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा, तकनीक और ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ अब कॉमर्शियल डिप्लोमेसी भी भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का एक मजबूत और महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुकी है।
राष्ट्रीय समाचार
भारत-अमेरिका संबंधों को व्यापार समझौते से मिली नई रफ्तार, एआई और रक्षा सहयोग पर बढ़ा जोर

अमेरिका और भारत के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी में बढ़ते भरोसे का अनुमान लगाते हुए कहा कि लंबे समय से इंतजार किया जा रहा द्विपक्षीय व्यापार समझौता पूरा होने वाला है। दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग और मजबूत सप्लाई चेन में सहयोग बढ़ा रहे हैं।
अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी फोरम (यूएसआईएसपीएफ) लीडरशिप समिट में इस पर आम सहमति बनी, जहां दोनों सरकारों के अधिकारियों, कानून बनाने वालों और बिजनेस लीडर्स ने बताया कि यह संबंध तकनीक, निवेश और साझा रणनीतिक हितों से प्रेरित होकर एक नए दौर में पहुंच रहा है।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत अपने आखिरी चरण में पहुंच गई है।
अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि भारत के आर्थिक बदलाव ने इसे वैश्विक विकास, स्थिरता और भरोसेमंद साझेदारी का एक जरूरी सहारा बना दिया है। उन्होंने कहा कि लगातार सुधार, मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी और उच्च तकनीक में निवेश ने भारत को इस दशक के आखिर तक 7 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर ला खड़ा किया है।
क्वात्रा ने बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और क्वांटम टेक्नोलॉजी को भारत-अमेरिका सहयोग के अगले मोर्चों के तौर पर पहचाना और कहा कि 2030 तक दोनों देशों का आपसी व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य सप्लाई चेन, इन्वेस्टमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और स्किल्ड टैलेंट के करीबी इंटीग्रेशन पर निर्भर करेगा।
पूरे समिट में चीन के साथ तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर खास तौर पर बात हुई। अमेरिका के आर्थिक विकास, ऊर्जा और पर्यावरण के अवर सचिव जैकब हेलबर्ग ने इंजीनियरिंग टैलेंट में भारत को दुनिया का एकमात्र ऐसा देश बताया जो असल में चीन को टक्कर देता है और इसे भरोसेमंद तकनीकी इकोसिस्टम बनाने में अमेरिका का सबसे जरूरी लॉन्ग-टर्म साझेदार बताया।
हेलबर्ग ने कहा कि वाशिंगटन चीन से आगे जरूरी तकनीकी सप्लाई चेन में विवधिकरण लाना चाहता है। इसके साथ ही भारत के साथ मिलकर एक साझा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेवलपर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है।
अपनी शुरुआती बातों में, यूएसआईएसपीएफ के अध्यक्ष मुकेश अघी ने कहा कि अमेरिकी कंपनियां चुपचाप चीन पर निर्भरता कम कर रही हैं और भारत में मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च ऑपरेशन बढ़ा रही हैं।
समिट में नई दिल्ली के साथ करीबी संबंधों के लिए वाशिंगटन में दोनों पार्टियों के समर्थन पर भी जोर दिया गया। रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेन्स ने कहा कि भारत और अमेरिका मिलकर ही एकमात्र ऐसा कॉम्बिनेशन हैं जो इनोवेशन में चीन के लेवल की बराबरी कर सकते हैं।
डेमोक्रेटिक सेनेटर मार्क वार्नर ने भारत को लंबे समय में अमेरिका के शीर्ष दो या तीन रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया। डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि रो खन्ना ने कहा कि यह संबंध आखिर में साझा डेमोक्रेटिक मूल्यों के साथ-साथ बढ़ते रक्षा और आर्थिक सहयोग पर आधारित होना चाहिए।
पूर्व अमेरिकी राजदूत केनेथ जस्टर ने मौजूदा संबंधों को ऐतिहासिक संदर्भ में रखते हुए लोगों के बीच के जुड़ाव को ‘सीक्रेट सॉस’ बताया, जिसने दशकों तक दोनों देशों के संबंधों को बनाए रखा। उन्होंने यूएसआईएसपीएफ की यादगार कॉफी टेबल बुक, ‘वी द पीपल: 250 वॉयसेज दैट हैव शेप्ड द यूएस-इंडिया रिलेशनशिप’ भी लॉन्च की।
बातचीत में यह बात सामने आई कि भारत-अमेरिका के संबंध डिप्लोमेसी और डिफेंस पर अपने पारंपरिक फोकस से कहीं आगे बढ़ गए हैं। अधिकारियों और बिजनेस लीडर्स ने बार-बार तकनीक, सप्लाई चेन की मजबूती, मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश को संबंध के अगले चरण की तय प्राथमिकता बताया।
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