राष्ट्रीय समाचार
स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले असम में बढ़ाई गई सुरक्षा
प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम-इंडिपेंडेंट (उल्फा-आई) और एनएससीएन/जीपीआरएन द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह के बहिष्कार का आह्वान किए जाने के बाद असम में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि राज्यभर में शांतिपूर्ण तरीके से स्वतंत्रता दिवस समारोह संपन्न कराने के लिए निगरानी बढ़ा दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं।
इन संगठनों ने असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और नागालैंड के लोगों से आजादी दिवस के कार्यक्रमों से दूर रहने की अपील की है। हालांकि पिछले कुछ सालों के उलट उन्होंने असम में बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए आम हड़ताल का आह्वान नहीं किया है।
पुलिस ने समारोह के लिए तय सभी जगहों के अलावा महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक स्थानों और अन्य संवेदनशील जगहों पर सुरक्षा मजबूत कर दी है। अतिरिक्त गश्त और निगरानी की व्यवस्था की गई है, जबकि सुरक्षा बल समारोह में बाधा डालने की किसी भी कोशिश पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
उग्रवादियों की आवाजाही या किसी भी विध्वंसक गतिविधि को रोकने के उपायों के तहत अंतरराज्यीय सीमाओं पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “हमें भरोसा है कि आजादी दिवस बिना किसी घटना के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा।”
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा गुवाहाटी के खानापारा मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे, जबकि मंत्री और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी राज्य भर में विभिन्न स्थानों पर समारोहों की देखरेख करेंगे।
इस सप्ताह की शुरुआत में मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की संयुक्त अध्यक्षता में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई थी। वरिष्ठ जिला अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इसमें भाग लिया। समीक्षा में तोड़फोड़-रोधी उपाय, संवेदनशील प्रतिष्ठानों की निगरानी, सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया जानकारी साझा करना, रूट सैनिटाइजेशन (रास्ते की सुरक्षा जांच), जांच तंत्र और समारोह स्थलों की चौबीसों घंटे निगरानी जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।
असम और पूर्वोत्तर में, खासकर आजादी दिवस और गणतंत्र दिवस के आसपास, इस तरह के बहिष्कार का आह्वान आम बात रही है। उल्फा-आई ऐतिहासिक रूप से एक संप्रभु असम की अपनी मांग के तहत इन समारोहों का विरोध करता रहा है।
मुख्यमंत्री सरमा ने 2022 में इसी तरह के बहिष्कार और शटडाउन के आह्वान के बाद कहा था कि आजादी दिवस समारोह में लोगों की भारी भागीदारी ने एक स्वतंत्र असम की मांग करने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया है। 2021 में, उल्फा-आई ने दशकों में पहली बार आजादी दिवस पर बंद का आह्वान नहीं किया था। मुख्यमंत्री सरमा ने इस कदम का स्वागत किया था और संगठन के प्रमुख परेश बरुआ से केंद्र के साथ सार्थक बातचीत के लिए आगे आने का आग्रह किया था।
अधिकारी इस साल सिर्फ बहिष्कार की अपील को देखते हुए असम में स्वतंत्रता दिवस के समारोह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए आपसी तालमेल वाले सुरक्षा उपायों और कड़ी निगरानी पर भरोसा कर रहे हैं।
राजनीति
राहुल गांधी के ‘जोकर’ वाले बयान का संजय राउत ने किया समर्थन, आरएसएस पर साधा निशाना

शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘जोकर’ वाले बयान का समर्थन किया है। आरएसएस पर भी निशाना साधा है।
संजय राउत ने भाजपा के दो सबसे वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के अहंकार को जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चकनाचूर कर दिया।”
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश को कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। संजय राउत ने आरएसएस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अगर आरएस अपने आप को राष्ट्रभक्त संगठन मानती है, तो सबसे पहले मोहन भागवत को दिल्ली में आकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी चाहिए और पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की पोल खोलनी चाहिए।” उन्होंने कहा कि यह संघ प्रमुख मोहन भागवत की भी जिम्मेदारी है कि देश में जो चल रहा है उसके खिलाफ आवाज उठाएं।
बता दें कि इससे पहले राहुल गांधी ने भाजपा और आरएसएस को ‘जोकर’ कहा था। इसे लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने यह बात कही।
राहुल गांधी ने तंज कसते हुए कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी का गले मिलना ही विदेश नीति जैसा है। इस पर संजय राउत ने कहा, “यह विदेश नीति पीएम मोदी की है, देश की नहीं है। देश की विदेश नीति बीते दस साल में खत्म हो गई है।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जहां भी जाते हैं, वहां जोर से गले मिलते हैं। संजय राउत ने मजाकिया अंदाज में कहा, “एक-दो विदेशी राष्ट्रों के राष्ट्रपति का तो सांस तक थम गई थी।”
वहीं, उत्तर प्रदेश में महिलाओं को 50 लाख रुपए की सौगात देने पर संजय राउत ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सब आगामी विधानसभा चुनाव की वजह से हो रहा है। इससे पहले हमने बिहार में भी देखा था कि विधानसभा चुनाव से पहले महिलाओं को 10-10 हजार रुपए दिए गए थे जबकि महाराष्ट्र में चुनाव से पहले 1,500-1,500 रुपए दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सब चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।
संजय राउत के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। भाजपा की ओर से अब तक संजय राउत के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्रीय समाचार
दिल्ली के इस अस्पताल में 37 सीनियर रेजिडेंट पदों पर भर्ती का अवसर, 18 अगस्त को वॉक-इन इंटरव्यू

सरकारी अस्पताल में नौकरी करने के इच्छुक लोगों के लिए एक खास मौका सामने आया है। जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सोसायटी (जेएसएसएचएस) ने एड-हॉक आधार पर विभिन्न विभागों में सीनियर रेजिडेंट के कुल 37 खाली पदों पर योग्य उम्मीदवारों की नियुक्ति के लिए एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।
जेएसएसएचएस ने जिन विभागों में 37 सीनियर रेजिडेंट पदों पर भर्ती निकाली है, उनमें एनेस्थीसिया में 5, बायोकेमिस्ट्री में 2, कार्डियोलॉजी में 1, सीटीवीएस में 4, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी में 3, जीआई सर्जरी में 2, माइक्रोबायोलॉजी में 2, नेफ्रोलॉजी में 3, न्यूरो-सर्जरी में 1, न्यूरोलॉजी में 4, न्यूक्लियर मेडिसिन में 1, ऑन्कोलॉजी में 2, पैथोलॉजी में 2, रेडियोलॉजी में 3 और यूरोलॉजी में 2 पद शामिल हैं।
इन सभी रिक्तियों के लिए ऑफलाइन माध्यम से आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 17 अगस्त तय की गई है। ऐसे में एप्लीकेशन फॉर्म भरने के इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे तय अंतिम तिथि के दोपहर 2 बजे तक या उससे पहले अपनी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर लें।
उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से संबंधित स्पेशलिटी में डीएम/एमसीएच/डॉएनबी/एमडी/एमएस; बेसिक स्पेशलिटी में एमडी/एमएस, जिसमें 3 वर्ष का अनुभव हो (इनमें से 1 वर्ष का अनुभव संबंधित सुपर स्पेशलिटी में हो तो बेहतर है); एमबीबीएस के साथ 3 वर्ष का अनुभव, जिसमें से 2 वर्ष का अनुभव संबंधित स्पेशलिटी में होना चाहिए।
आवेदकों की अधिकतम आयु बायो-केमिस्ट्री, पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी डिपार्टमेंट के लिए 50 वर्ष और दूसरे डिपार्टमेंट के लिए जनरल/ईडब्ल्यूएस कैटेगरी के लिए 45 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना 30 जून 2025 के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
योग्य अभ्यर्थियों का चयन आवेदनों की जांच, वॉक-इन इंटरव्यू, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और शारीरिक फिटनेस के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 67,700 रुपए प्रति माह होगी। इसके अलावा, कैंडिडेट्स को अन्य लाभ और भत्ते भी दिए जाएंगे।
वॉक इन इंटरव्यू 18 अगस्त को सुबह 10.30 बजे से आयोजित किए जाएंगे। ऐसे में जो उम्मीदवार साक्षात्कार में शामिल होने वाले हैं, उन्हें समय से जेएसएसएचएस पहुंचने के अलावा आपने साथ भरे हुए आवेदन पत्र की हार्ड कॉपी के साथ सभी संबंधित डॉक्यूमेंट्स की मूल और फोटोकॉपी को साथ ले जाने की सलाह दी जाती है।
अप्लाई करने वाले अभ्यर्थियों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा, जो जनरल के लिए 1,000 रुपए और ओबीसी/एससी/एसटी/ईडब्ल्यूएस के लिए 500 रुपए तय किया गया है। वहीं, विकलांग व्यक्ति (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।
आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले जेएसएसएचएस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद संबंधित पोस्ट के लिए जारी अधिसूचना लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद नोटिफिकेशन में दिए गए एप्लीकेशन फॉर्म को डाउनलोड कर उसका प्रिंट आउट निकाल लें। फिर फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को दर्ज करें। संबंधित सभी डॉक्यूमेंट्स को आवेदन के साथ अटैच करें। इसके बाद सभी को एक लिफाफे में डालकर उसे ‘निदेशक, प्रशासनिक ब्लॉक, पहली मंजिल, जनकपुरी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (जेएसएसएचए), सी-2बी, जनकपुरी, नई दिल्ली – 110058’ पते पर डाक के माध्यम से तय समय सीमा के अंदर पहुंचा दें।
कैंडिडेट्स ध्यान दें कि जेएसएसएचएस की ओर से यह नियुक्ति 89 दिनों की अवधि के लिए होगी, जिसे 89 दिनों के कार्यकाल के लिए आगे बढ़ाया जा सकता है या फिर तब तक जब तक कि यह पद किसी रेगुलर सीनियर रेजिडेंट से भर नहीं लिया जाता। वहीं, सीनियर रेजिडेंसी स्कीम के अनुसार किसी भी स्थिति में कार्यकाल को सीनियर रेजिडेंसी के 3+1 वर्ष पूरे होने से ज्यादा नहीं बढ़ाया जाएगा।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य पूर्व तनाव ने भारत के आईएमईसी की जरूरत को किया साबित, लॉजिस्टिक्स लागत में आएगी कमी : रिपोर्ट

देश में आयोजित हुई जी20 समिट के दौरान भारत की ओर से प्रस्तावित किए गए इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (आईएमईसी) मौजूदा समय की जरूरत है और यह मध्य पूर्व तनाव में बाधित हुए हॉर्मुज स्ट्रेट ने साबित कर दिया है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
आईएमईसी को चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का भारतीय जवाब माना जा रहा है।
ज्यूइश टेलीग्राफिक एजेंसी द्वारा प्रकाशित एक आर्टिकल के अनुसार, इसकी परिकल्पना बंदरगाहों, रेलवे, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर, फाइबर-ऑप्टिक केबल और लॉजिस्टिक्स लिंक के एक ऐसे नेटवर्क के तौर पर की गई है जो खाड़ी और इजरायल के जरिए भारत को यूरोप से जोड़ेगा। इसके तहत सामान भारत से अरब प्रायद्वीप होते हुए, सऊदी अरब और जॉर्डन से गुजरकर इजरायल और फिर हाइफा के रास्ते यूरोप तक पहुंचता है। इस रास्ते से समुद्री जहाजों के लिए खतरनाक संकरे रास्तों और इराक, सीरिया व लेबनान जैसे अस्थिर देशों से होकर नहीं गुजरना पड़ता।
आर्टिकल में आगे कहा गया है कि भले ही मध्य पूर्व के तनाव की वजह से आईएमईसी प्रोजेक्ट फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है, लेकिन पर्शियन गल्फ और रेड सी में समुद्री व्यापार में आई रुकावटों ने सभी पक्षों के लिए इसकी जरूरत को और बढ़ा दिया है।
अगर इजरायल को केंद्र में रखकर आईएमईसी सफल होता है, तो देश का हाइफा पोर्ट पूर्वी मेडिटेरेनियन का मुख्य लॉजिस्टिक्स हब बन सकता है। साथ ही, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, डिसेलिनेशन और एनर्जी टेक्नोलॉजी में इजरायल की खूबियां बेंगलुरु से बर्लिन तक फैली सप्लाई चेन का हिस्सा बन जाएंगी।
आर्टिकिल में हाल की उन स्टडीज का भी जिक्र है जिनसे पता चलता है कि अगर यह कॉरिडोर पूरा हो जाता है, तो भारत और यूरोप के बीच ट्रांसपोर्ट का समय 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है और लॉजिस्टिक्स की लागत में लगभग 30 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इससे एक स्टैंडर्ड कंटेनर की शिपिंग लागत लगभग 6,000 डॉलर से घटकर 4,200 डॉलर के आसपास रह जाएगी।
आर्टिकिल में यह भी कहा गया है कि इससे न सिर्फ नए बिजनेस के फलने-फूलने के लिए एक इकोसिस्टम बनेगा, बल्कि हर साल 1.5 मिलियन कंटेनर के मामूली वॉल्यूम पर भी सिर्फ ढुलाई लागत में लगभग 2.7 अरब डॉलर की बचत होगी।
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