राजनीति
भारतीय इतिहास से नेहरू को हटाना फुटबॉल रिकॉर्ड से रोनाल्डो को छोड़ने जैसा : चिदंबरम

पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि भारत के इतिहास से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का नाम मिटा देना फुटबॉल के इतिहास से क्रिस्टियानो रोनाल्डो या विमानन के इतिहास से राइट भाइयों को हटाने जैसा है। दक्षिण गोवा के मडगांव शहर में हुई कांग्रेस की एक बैठक में चिदंबरम ने यह भी कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार द्वारा एकरूपता का प्रयास ‘भारत का सबसे बड़ा दुश्मन’ है।
उन्होंने कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर फुटबॉल का इतिहास लिखा जाए और उसमें क्रिस्टियानो रोनाल्डो को छोड़ दिया जाए तो कैसा लगेगा? मोटर कार का इतिहास लिखा जाए, तो हेनरी फोर्ड नहीं होंगे? अगर विमान का इतिहास लिखा जाता है, तो राइट ब्रदर्स नहीं होंगे? भाजपा इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास कर रही है। हमें इसके खिलाफ खड़ा होना चाहिए और जो पार्टी इसके खिलाफ खड़ी हो सकती है, वह केवल कांग्रेस हो सकती है।”
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद द्वारा जारी एक पोस्टर का जिक्र करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि पोस्टर से नेहरू गायब थे।
चिदंबरम ने कहा, “और मैं आपको चेतावनी देता हूं। यदि आप इस प्रवृत्ति को जारी रखने की अनुमति देते हैं, तो वे इतिहास की किताबों से जवाहरलाल नेहरू अध्याय हटा देंगे। हां, सरदार पटेल हैं, और हम इससे खुश हैं। मौलाना अबुल कलाम आजाद हैं, हम खुश हैं। लेकिन जवाहरलाल नेहरू वहां क्यों नहीं हैं।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता वर्तमान में 2022 के गोवा विधानसभा चुनावों के अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ पर्यवेक्षक प्रभारी के रूप में गोवा के तीन दिवसीय दौरे पर हैं।
चिदंबरम ने ‘देश में एक समरूप संस्कृति बनाने के प्रयास’ को भारत के सामने सबसे बड़े खतरों में से एक बताया।
चिदंबरम ने कहा, “इस देश में ऐसी ताकतें हैं जो भारत को एकरूप बनाना चाहती हैं। एक भाषा, एक धर्म, एक संस्कृति, एक भोजन की आदत। हम इसे कैसे स्वीकार कर सकते हैं? न केवल मुझे इसे कैसे स्वीकार करना चाहिए, बल्कि मुझे इसे क्यों स्वीकार करना चाहिए? आपको क्यों चाहिए इसे स्वीकार करें? प्रत्येक राज्य की अपनी भाषा, संस्कृति, जीवनशैली, आदत, पहनावे का तरीका, पारिवारिक जीवन का तरीका है, अन्य लोगों के साथ रहने का तरीका आदि है। हमें इस समरूपता को क्यों स्वीकार करना चाहिए।”
राजनीति
दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने वक्फ संशोधन विधेयक पास होने पर कहा – ‘न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत तय’

नई दिल्ली, 4 अप्रैल। लोकसभा के बाद राज्यसभा से भी वक्फ संशोधन विधेयक के पास होने पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने खुशी जताई। उन्होंने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि इस विधेयक को मंजूरी मिलने से अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत होगी।
उन्होंने कहा कि 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा।
उन्होंने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए।
सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “आज का दिन ऐतिहासिक है। संसद ने ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक – 2025’ को मंजूरी दे दी है, जो दशकों से चले आ रहे अन्याय और भ्रष्टाचार को खत्म कर न्याय और पारदर्शिता की नई शुरुआत करेगा। 2013 में तुष्टिकरण के लिए रातों-रात वक्फ कानून को अतिवादी बना दिया गया, जिसके कारण दिल्ली के लुटियंस जोन की 123 वीवीआईपी संपत्तियां वक्फ को दे दी गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक कदम से अब इसकी पारदर्शिता से निगरानी की जा सकेगी।”
उन्होंने लिखा, “2013 में लाए गए संशोधन विधेयक पर दोनों सदनों में कुल साढ़े 5 घंटे चर्चा हुई थी, जबकि इस विधेयक पर दोनों सदनों में 16 घंटे से ज्यादा की चर्चा हुई। मोदी सरकार ने संयुक्त समिति बनाई, जिसमें 38 बैठकें हुईं, 113 घंटे चर्चा हुई और 284 हितधारकों को शामिल किया गया। ‘वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025’ को संसद के पटल पर लाने से पहले मोदी सरकार को देशभर से करीब एक करोड़ ऑनलाइन सुझाव मिले, जिनका विश्लेषण करने के बाद यह कानून बनाया गया, जो दर्शाता है कि जहां मोदी सरकार मुस्लिमों के साथ खड़ी है, वहीं विपक्ष केवल वोट बैंक की आड़ में गुमराह कर रहा है।”
सीएम रेखा गुप्ता ने लिखा, “इस विधेयक के पारित होने से देश के विकास में एक नया अध्याय जुड़ रहा है, जो न्याय और समानता को सुनिश्चित करेगा। इसे समर्थन देने वाले सभी दलों और सांसदों का भी धन्यवाद। वक्फ बोर्ड को अधिक उत्तरदायी बनाना अनिवार्य था। यह विधेयक सुनिश्चित करेगा कि वक्फ संपत्तियों का दुरुपयोग न हो और इसका लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचे। यह पारदर्शिता और सुशासन की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा, जिससे करोड़ों लोगों को न्याय मिलेगा।”
अंतरराष्ट्रीय समाचार
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को बढ़ाने के लिए यूपीआई लिंक का दिया प्रस्ताव

बैंकॉक, 4 अप्रैल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को भारत के यूपीआई को बिम्सटेक देशों के पेमेंट सिस्टम से जोड़ने का प्रस्ताव दिया। इससे ग्रुप के सदस्य देशों के बीच व्यापार और पर्यटन बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, सात देशों (बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार और थाईलैंड) के समूह की छठी समिट में प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय करेंसी में रीजन में व्यापार बढ़ाने के लिए बिम्सटेक चेम्बर ऑफ कॉमर्स स्थापित करने का प्रस्ताव दिया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 28 मार्च को म्यांमार और थाईलैंड में आए
बिम्सटेक समिट में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समृद्धि, सुरक्षा और समावेशिता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को साकार करने के लिए बैंकॉक विजन 2030 को अपनाया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने बिम्सटेक समूह के दायरे और क्षमताओं को लगातार बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया, गृह मंत्रियों के तंत्र को संस्थागत बनाने का स्वागत किया और भारत में पहली बैठक आयोजित करने की पेशकश की।
उन्होंने आगे कहा कि यह मंच साइबर अपराध, साइबर सुरक्षा खतरों, आतंकवाद, साथ ही नशीली दवाओं और मानव तस्करी के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस संबंध में, मैं 2025 में इसकी पहली बैठक भारत में आयोजित करने का प्रस्ताव करता हूं।
थाईलैंड द्वारा आयोजित बिम्सटेक समिट में भारत, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और भूटान के शीर्ष नेता भाग ले रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि एक स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और संरक्षित हिंद महासागर हमारी साझा प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा, “आज साइन हुए समुद्री परिवहन समझौते से व्यापारिक नौवहन और माल परिवहन में सहयोग मजबूत होगा और व्यापार में तेजी आएगी।”
विनाशकारी भूकंप में हुई जानमाल की हानि पर अपनी संवेदना व्यक्त की और आपदा की तैयारी, राहत और पुनर्वास पर सहयोग के लिए भारत में बिम्सटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर डिजास्टर मैनेजमेंट की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में एक सस्टेनेबल मैरीटाइम ट्रांसपोर्ट सेंटर की स्थापना की भी बात की। उन्होंने कहा, “यह केंद्र समुद्री नीतियों में क्षमता निर्माण, अनुसंधान, नवाचार और समन्वय पर ध्यान केंद्रित करेगा और समुद्री सुरक्षा में सहयोग को भी बढ़ावा देगा।”
राष्ट्रीय समाचार
झारखंड हाईकोर्ट के त्योहारों के दौरान बिजली नहीं काटने के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रोका

नई दिल्ली/रांची, 4 अप्रैल। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में रामनवमी सहित अन्य त्योहारों के दौरान बिजली काटने पर रोक लगाने के झारखंड हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी है। झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट की ओर से 3 अप्रैल को जारी आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
झारखंड सरकार के निर्देश पर राज्य बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) त्योहारों पर निकलने वाली शोभायात्रा या जुलूस में शामिल लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर एहतियात के तौर पर कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बंद कर देता है। 1 अप्रैल, 2025 को सरहुल त्योहार की शोभायात्रा के दौरान भी रांची में पांच से दस घंटे तक बिजली काटी गई थी।
इस पर झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रौशन ने 3 अप्रैल को स्वतः संज्ञान लेते हुए त्योहारों के दौरान बिजली आपूर्ति बंद करने के झारखंड सरकार के निर्देश पर रोक लगा दी थी।
हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार और जेबीवीएनएल से पूछा था कि सरहुल के दिन घंटों बिजली आपूर्ति बाधित क्यों रही? इससे होने वाली परेशानी को ध्यान में क्यों नहीं रखा गया? बिजली काटे जाने से लोगों को होने वाली परेशानी से निजात दिलाने के लिए क्या वैकल्पिक उपाय किए जाते हैं?
हाईकोर्ट के इस आदेश को चुनौती देने वाली राज्य सरकार की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई की।
झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि रामनवमी के जुलूस में लोग लंबे झंडे लेकर चलते हैं, जिससे करंट लगने की आशंका बनी रहती है। पूर्व में झारखंड में ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बिजली कटौती केवल शोभायात्रा मार्गों तक सीमित रहे और उसे न्यूनतम स्तर पर रखा जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं की बिजली आपूर्ति पर कोई असर न पड़े।
शीर्ष अदालत ने जेबीवीएनएल के प्रबंध निदेशक को यह अंडरटेकिंग देने का निर्देश दिया है कि कम समय के लिए बिजली काटी जाएगी और अस्पताल एवं अन्य जरूरी सेवा वाली संस्थाओं को बिजली आपूर्ति की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई आठ अप्रैल को मुकर्रर की है।
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