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Sunday,18-October-2026
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44 शिक्षक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित, दंड के मुकाबले प्रेम पर आधारित शिक्षा अधिक कारगर: राष्ट्रपति

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एक अच्छा शिक्षक व्यक्तित्व निर्माता है, समाज निर्माता है और राष्ट्र निर्माता भी है। दंड पर आधारित शिक्षा के मुकाबले प्रेम पर आधारित शिक्षा अधिक कारगर सिद्ध होती है। यह बात शुक्रवार को शिक्षा दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने कही। इस दौरान उन्होंने देशभर के 44 शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार से भी सम्मानित किया। राष्ट्रपति ने कहा, “अपने विशिष्ट योगदान के लिए सम्मान पाने वाले सभी 44 शिक्षकों को मैं बधाई देता हूं। भावी पीढ़ियों का निर्माण हमारे योग्य शिक्षकों के हाथों में सुरक्षित है। शिक्षक दिवस का आयोजन पूर्व उपराष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस के उपलक्ष में 5 सितंबर को किया जाता है।”

राष्ट्रपति ने कहा, “राधाकृष्णन एक दार्शनिक और विद्वान के रूप में विश्व विख्यात थे। यद्यपि उन्होंने अनेक उच्च पदों को सुशोभित किया लेकिन वे चाहते थे कि उन्हें एक शिक्षक के रूप में ही याद किया जाए। डॉक्टर राधाकृष्णन ने एक शिक्षक के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी है।”

राष्ट्रपति ने अपने शिक्षकों को याद करते हुए कहा, “मुझे आज तक मुझे अपने आदरणीय शिक्षकों की याद आती रहती है। मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूं कि मुझे राष्ट्रपति बनने के उपरांत मुझे अपने स्कूल में जाने एवं अपने वयोवृद्ध शिक्षकों का आशीर्वाद लेने का अवसर प्राप्त हुआ।”

उन्होने कहा कि पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम एक वैज्ञानिक के रूप में अपनी सफलता का श्रेय अपने शिक्षकों को दिया करते थे। वे बताते थे कि शिक्षकों के पढ़ाने के रोचक तरीके के कारण ही बचपन से उनके मन में एयरोनॉटिकल विज्ञान की रुचि जागी।

राष्ट्रपति ने शिक्षकों से कहा, “आप सभी विद्यार्थियों में प्रेरणा भर सकते हैं, उन्हें सक्षम बना सकते हैं ताकि वह अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा कर सकें। शिक्षकों का कर्तव्य है कि वह अपने छात्रों में अध्ययन के प्रति रुचि पैदा करें। संवेदनशील शिक्षक अपने आचरण से शिक्षकों का भविष्य संवार सकते हैं।”

राष्ट्रपति ने शिक्षकों से कहा कि पिछले वर्ष लागू की गई हमारी शिक्षा नीति में भारत को ग्लोबल नालेज सुपर पावर के रूप में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। विद्यार्थियों को ऐसी शिक्षा प्रदान करनी है जो ज्ञान पर आधारित है, न्याय पूर्ण समाज के निर्माण में सहायक हो। हमारी शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों और देश के प्रति प्रेम की भावना मजबूत बने तथा बदलते वैश्विक परि²श्य में अपनी भूमिका को लेकर वह सचेत रहें।

राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षकों को इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि प्रत्येक विद्यार्थी की क्षमता अलग होती है। उनकी प्रतिभा अलग होती है। मनोविज्ञान अलग होता है। सामाजिक पृष्ठभूमि व परिवेश भी अलग होता है, इसलिए हर एक बच्चे की विशेष जरूरतों और क्षमताओं के अनुसार उसके सर्वांगीण विकास पर बल देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि “मेरा मानना है कि हर व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण आरंभ में उसके माता पिता और शिक्षकों के द्वारा शुरू किया जाता है। हमारी परंपरा में किसी को भी अयोग्य या अनुपयोगी नहीं माना गया है। हमारे यहां सभी को योग्य व उपयोगी माना गया है “

राष्ट्रपति ने कहा कि “लगभग 125 वर्ष पहले पश्चिमी देशों में शिक्षाविद विद्यार्थियों को शारीरिक दंड देने के विषय में वाद विवाद कर रहे थे, उस समय गुरु रविंद्र नाथ टैगोर द्वारा स्थापित विद्यालय शांतिनिकेतन में शारीरिक दंड सर्वथा वर्जित था। गुरुदेव मानते थे कि ऐसे दंड का छात्रों के मध्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। आज पूरा जगत इस वैज्ञानिक तथ्य को स्वीकार करता है। उनकी शिक्षा संबंधित सोच अत्याधुनिक थी।”

राष्ट्रपति ने कहा कि “हम पिछले करीब डेढ़ वर्ष से कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न हुए संकट से गुजर रहे हैं। ऐसी स्थिति में भी शिक्षकों ने विषम परिस्थितियों में बच्चों की शिक्षा का कर्म रुकने नहीं दिया। इसके लिए शिक्षकों ने बहुत कम समय में ही डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए शिक्षा प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया। कुछ शिक्षकों ने अपनी मेहनत और लगन से बुनियादी सुविधाएं विकसित की है मैं ऐसे शिक्षकों को साधुवाद देता हूं।”

अंतरराष्ट्रीय समाचार

दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री ने प्योंगयांग के साथ बातचीत फिर से शुरू करने पर दिया जोर

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दक्षिण कोरिया की प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने रविवार को कहा कि सरकार सोल और प्योंगयांग के बीच बातचीत फिर से शुरू करने का प्रयास करेगी और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करेगी।

सोल में विस्थापित उत्तर कोरियाई नागरिकों के लिए आयोजित एक प्रतियोगिता में शामिल होते हुए, हान ने कहा, “दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच बातचीत के रास्ते खोलने और शांति तथा साझा समृद्धि पर चर्चा करने के प्रयास किए जाएंगे।”

योनहाप समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने दोनों देशों के विभाजन को एक “हकीकत” बताया और इस बात पर जोर दिया कि विस्थापित नागरिकों और अलग हुए परिवारों का दर्द आज भी “जारी” है।

प्रधानमंत्री ने कहा, “दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का रास्ता खोलने के हमारे प्रयास रुक नहीं सकते।” उन्होंने प्रतिभागियों से शांति स्थापित करने में सहयोग मांगा और दक्षिण कोरिया के आर्थिक विकास तथा लोकतंत्रीकरण में उनके योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया।

8 अक्टूबर को, दक्षिण कोरिया ने संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया से “जिम्मेदार कदम” उठाने का आग्रह किया। दक्षिण कोरिया ने प्योंगयांग पर ‘युद्धविराम समझौते’ के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने जानबूझकर एक बारूदी सुरंग बिछाई थी, जिसकी चपेट में आने से पिछले महीने दोनों कोरियाई देशों की सीमा के पास तीन दक्षिण कोरियाई सैनिक घायल हो गए थे।

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की एक समिति बैठक के दौरान, संयुक्त राष्ट्र में दक्षिण कोरिया के राजदूत चा जी-हून ने बताया कि दक्षिण कोरियाई सेना और संयुक्त राष्ट्र कमान (यूएनसी) की संयुक्त जांच से पुष्टि हुई है कि 21 सितंबर को हुआ विस्फोट एक बारूदी सुरंग के कारण हुआ था। इस सुरंग को उत्तर कोरियाई सैन्य बलों ने जानबूझकर ‘सैन्य सीमा रेखा’ (एमडीएल) के दक्षिण में बिछाया था, जो दोनों कोरियाई देशों को अलग करती है।

चा ने कहा, “दक्षिण कोरियाई सेना और यूएनसी की संयुक्त जांच, जिसे फोरेंसिक विश्लेषण का भी समर्थन प्राप्त है, से पुष्टि हुई है कि यह विस्फोट उत्तर कोरियाई बलों द्वारा सैन्य सीमा रेखा के दक्षिण में जानबूझकर बिछाई गई बारूदी सुरंग के कारण हुआ था।” उन्होंने दोनों कोरियाई देशों को उनके आधिकारिक नामों – ‘रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (दक्षिण कोरिया) और ‘डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ कोरिया’ (उत्तर कोरिया) – से संबोधित किया।

चा ने कहा कि यह घटना ‘युद्धविराम समझौते’ का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा, “हम उत्तर कोरिया (डीपीआरके) से आग्रह करते हैं कि वह माफी मांगे, तनाव बढ़ाने वाली ऐसी गतिविधियों को रोके और जिम्मेदार कदम उठाए।”

हालांकि, उत्तर कोरिया के प्रतिनिधि ने सोल के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि यह प्योंगयांग द्वारा अपनी दक्षिणी सीमा को मजबूत करने के प्रयासों को ‘सैन्य घुसपैठ’ के रूप में पेश करने की एक कोशिश है। प्रतिनिधि ने कहा, “यह आरओके (दक्षिण कोरिया) सेना की एक घटिया चाल के अलावा और कुछ नहीं है, जिसका मकसद अपनी गलतियों का दोष डीपीआरके (उत्तर कोरिया) पर मढ़ना है।”

दोनों कोरियाई देशों ने प्योंगयांग के परमाणु हथियार कार्यक्रम को लेकर अपने-अपने विपरीत रुख को फिर से दोहराया।

चा ने परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकने के प्रति सोल की प्रतिबद्धता को दोहराया और उत्तर कोरिया से आग्रह किया कि वह ‘परमाणु अप्रसार संधि’ और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संबंधित प्रस्तावों का पूरी तरह से पालन करे।

उत्तर कोरियाई प्रतिनिधि ने प्योंगयांग के परमाणु हथियारों का बचाव करते हुए कहा कि अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए यह एक अनिवार्य विकल्प था, क्योंकि उन्हें “दशकों से अमेरिकी परमाणु खतरे” का सामना करना पड़ रहा है।

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राष्ट्रीय समाचार

शीर्ष 10 कंपनियों की मार्केट वैल्यू में 3.65 लाख करोड़ रुपए का उछाल; टीसीएस, भारती एयरटेल और इंफोसिस रहीं टॉप गेनर्स

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भारतीय शेयर बाजार में बीते सप्ताह आई तेज उछाल के बीच देश की 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से 9 के संयुक्त बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैपिटलाइजेशन) में 3.65 लाख करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस दौरान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस), भारती एयरटेल और इंफोसिस सबसे अधिक लाभ पाने वाली कंपनियों के रूप में उभरीं।

दलाल स्ट्रीट पर सकारात्मक माहौल के बीच सप्ताह के दौरान सेंसेक्स 2,256.94 अंक यानी 3.11 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी में 625.7 अंकों यानी 2.77 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

शीर्ष 10 कंपनियों में टीसीएस सबसे बड़ी वेल्थ क्रिएटर रही। कंपनी का बाजार पूंजीकरण 1,08,542.63 करोड़ रुपए बढ़कर 8,91,134.96 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

इसके बाद भारती एयरटेल का स्थान रहा, जिसकी मार्केट वैल्यू 61,406.53 करोड़ रुपए बढ़कर 11,88,815.45 करोड़ रुपए हो गई। वहीं इंफोसिस ने 55,893.05 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी दर्ज की और उसका बाजार पूंजीकरण 4,71,409.41 करोड़ रुपए पर पहुंच गया।

देश की सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण भी 53,047.56 करोड़ रुपए बढ़कर 16,37,437.19 करोड़ रुपए हो गया और उसने अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा।

निजी क्षेत्र के बैंकों में भी अच्छी तेजी देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक की मार्केट वैल्यू 32,379.05 करोड़ रुपए बढ़कर 11,22,628.07 करोड़ रुपए हो गई, जबकि आईसीआईसीआई बैंक का मार्केट कैप 30,769.95 करोड़ रुपए बढ़कर 10,02,871.44 करोड़ रुपए हो गया।

अन्य बढ़त दर्ज करने वाली कंपनियों में बजाज फाइनेंस शामिल रही, जिसकी वैल्यू 14,786.65 करोड़ रुपए बढ़कर 6,11,326.72 करोड़ रुपए हो गई। भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के बाजार पूंजीकरण में 4,933.5 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई और यह 5,02,204.82 करोड़ रुपए पर पहुंच गया। वहीं भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की मार्केट वैल्यू 3,323.07 करोड़ रुपए बढ़कर 8,87,722.84 करोड़ रुपए हो गई।

शीर्ष 10 कंपनियों में केवल लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) ऐसी कंपनी रही, जिसके बाजार पूंजीकरण में गिरावट दर्ज की गई, और कंपनी की मार्केट वैल्यू 9,232.26 करोड़ रुपए घटकर 4,99,725.06 करोड़ रुपए रह गई।

देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों की रैंकिंग में रिलायंस इंडस्ट्रीज पहले स्थान पर रही। इसके बाद क्रमशः भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टीसीएस, एसबीआई, बजाज फाइनेंस, एलआईसी, लार्सन एंड टुब्रो और इंफोसिस का स्थान रहा।

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राष्ट्रीय समाचार

भारत की आर्थिक प्रगति जश्न मनाने लायक, अगले वर्षों में भी मजबूत विकास की संभावनाएं : शीर्ष अर्थशास्त्री

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शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने रविवार को कहा कि पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक प्रगति सराहना की हकदार है। उन्होंने कहा कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद के पर्याप्त कारण प्रदान करती है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में किम ने कहा कि भारत के सामने अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद आर्थिक रूप से तेजी से आगे बढ़ने की देश की क्षमता और मध्यम अवधि की विकास संभावनाएं बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं।

उन्होंने कहा, “मेरा निष्कर्ष वही है। भारत के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन विशेष रूप से पिछले दशक में उसकी आर्थिक प्रगति और मध्यम अवधि में सकारात्मक विकास संभावनाएं जश्न मनाने योग्य हैं। 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए यह प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है।”

किम की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उन्होंने एक दिन पहले ही भारत की मजबूत विकास यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), एशियाई विकास बैंक (एडीबी) और विश्व बैंक जैसे लगभग सभी प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाकर 7 प्रतिशत से अधिक कर दिया है।

अर्थशास्त्री के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था ने असाधारण मजबूती का प्रदर्शन किया है। महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई थी, लेकिन इसके बाद 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और अगले चार वर्षों तक विकास दर 7 प्रतिशत से ऊपर बनी रही।

किम ने कहा कि उनके सहित कई अर्थशास्त्रियों को लगातार अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में ऊपर की ओर संशोधन करना पड़ा, क्योंकि प्रत्येक तिमाही के जीडीपी आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे।

उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर दर्ज की है। यह प्रदर्शन 2003 से 2007 के उस दौर के बराबर है, जब भारत पहली बार दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।

किम ने यह भी कहा कि वर्ष 2021 से 2025 के दौरान 7.83 प्रतिशत की औसत वार्षिक विकास दर 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि की दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक केवल 2003 से 2007 के दौरान 7.89 प्रतिशत की औसत वृद्धि दर रही थी।

भारत की अर्थव्यवस्था के बढ़ते आकार का उल्लेख करते हुए किम ने कहा कि आज का भारत दो दशक पहले की तुलना में बिल्कुल अलग आर्थिक स्तर पर खड़ा है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार 1 ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह 4 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। ऐसे में समान विकास दर का अर्थ अब कहीं अधिक बड़े पैमाने पर आर्थिक विस्तार और मूल्य सृजन से है।

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