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Thursday,29-October-2026
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पीलीभीत रैली के दौरान ‘राम मंदिर’ वाले बयान पर चुनाव आयोग द्वारा पीएम मोदी को क्लीन चिट दिए जाने की संभावना।

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उम्मीद है कि चुनाव आयोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में एक चुनाव अभियान के दौरान ‘राम मंदिर’ पर उनकी टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ एक शिकायत के संबंध में क्लीन चिट दे सकता है।

चुनाव आयोग ने तय किया है कि चुनावी रैली के दौरान पीएम मोदी द्वारा राम मंदिर निर्माण का जिक्र करना धर्म के नाम पर वोट मांगना नहीं है। इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएम मोदी का करतारपुर साहिब के विकास का संदर्भ आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन नहीं करता है।

सूत्रों के हवाले से दी गई रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट के वकील आनंद एस जोंडेले द्वारा एमसीसी उल्लंघन का आरोप लगाते हुए पीएम मोदी के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज करते हुए इस फैसले को सूचित करने के लिए तैयार है।

आनंद जोंडेले ने चुनाव आयोग में अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि पीएम मोदी ने 9 अप्रैल को यूपी के पीलीभीत में चुनावी रैली के दौरान हिंदू देवी-देवताओं और हिंदू पूजा स्थलों के साथ-साथ सिख देवताओं और सिख पूजा स्थलों के नाम पर वोट मांगकर आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है।चुनाव आयोग का फैसला अपेक्षित है, क्योंकि उसे 21 अप्रैल को राजस्थान के बांसवाड़ा में एक रैली में अपनी टिप्पणी के लिए प्रधान मंत्री मोदी के खिलाफ शिकायत मिली है, जहां उन्होंने कथित तौर पर मुसलमानों को ‘घुसपैठिए’ कहा था और सुझाव दिया था कि अगर कांग्रेस निर्वाचित होती है, तो ऐसा हो सकता है। देश की संपत्ति को “घुसपैठियों” और “जिनके अधिक बच्चे हैं” के बीच वितरित करें।सीपीआई (एम) के महासचिव सीताराम येचुरी ने 16 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार को एक पत्र लिखा, जिसमें अपने चुनाव अभियानों के दौरान विपक्षी दलों को “राम मंदिर के विरोधियों” के रूप में ब्रांड करने के लिए पीएम मोदी के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया गया।

येचुरी ने सीईसी को लिखे अपने पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किया और चुनाव आयोग पर तत्काल हस्तक्षेप के लिए दबाव डाला। उन्होंने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन को रोकने के उपायों का आह्वान किया और व्यक्ति के कद की परवाह किए बिना कानून के निष्पक्ष कार्यान्वयन की वकालत की। उन्होंने जोर देकर कहा, “चुनावी माहौल को और खराब होने से रोकने के लिए भारत के चुनाव आयोग द्वारा कड़ी और त्वरित कार्रवाई आवश्यक है।”

चुनाव आयोग ने अभी तक इन शिकायतों पर अपना निर्णय नहीं सुनाया है।

जोंडेले ने पहली बार 10 अप्रैल को चुनाव आयोग को पत्र लिखकर पीएम मोदी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, जो कि पीलीभीत में रैली के एक दिन बाद हुई थी।

जोंडेले ने एचसी से संपर्क किया

अपनी शिकायत के संबंध में चुनाव आयोग से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलने के बाद, उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और अदालत से चुनाव आयोग को उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की।

पीएम का भाषण चुनाव आयोग के लिए कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है

द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, चुनाव आयोग ने अपने विचार-विमर्श में एमसीसी का कोई उल्लंघन नहीं पाया, जिससे यह निष्कर्ष निकला कि पीएम केवल पीलीभीत रैली में अपनी सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे।

इसके अलावा, यह भी समझा जाता है कि चुनाव आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि प्रधान मंत्री के भाषण ने समुदायों के बीच शत्रुता को बढ़ावा नहीं दिया और एक अभियान भाषण में धर्म का उल्लेख मात्र चुनाव आयोग के लिए कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं है, क्योंकि यह एक उम्मीदवार की स्वतंत्रता को अनुचित रूप से प्रतिबंधित करेगा। अभियान के लिए।

9 अप्रैल को पीलीभीत रैली में, मोदी ने इस साल की शुरुआत में अयोध्या मंदिर के अभिषेक समारोह में भाग नहीं लेने के लिए इंडिया ब्लॉक गठबंधन के साझेदारों, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला किया था और इसे “राम का अपमान” बताया था। ”, भगवान राम का अपमान।

अपराध

झारखंड पुलिस में सब-इस्पेक्टर बताकर युवती से दुष्कर्म का आरोपी गयाजी से गिरफ्तार

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झारखंड पुलिस में दरोगा होने का झूठा रौब दिखाकर एक युवती को अपने जाल में फंसाने और उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी को बिहार के गया जिले से गिरफ्तार किया गया है। रांची पुलिस और गया के मुफस्सिल थाना की संयुक्त टीम ने मानपुर इलाके में एक गुप्त ठिकाने पर छापेमारी कर आरोपी को गिरफ्तार किया।

आरोपी की पहचान अविनाश कुमार उर्फ राज शर्मा के रूप में हुई है, जो गया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र स्थित विष्णु विहार कॉलोनी निवासी बताया गया है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस उसे ट्रांजिट रिमांड पर रांची ले आई है।

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस मामले में पीड़िता की लिखित शिकायत के आधार पर इसी वर्ष 15 मई को रांची महिला थाने में भारतीय न्याय संहिता और संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की कांड संख्या 15/26 के तहत दर्ज इस मुकदमे में गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

शिकायतकर्ता युवती के अनुसार, आरोपी ने खुद को झारखंड पुलिस में सब-इस्पेक्टर (दारोगा) बताकर सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के जरिए उससे संपर्क साधा था। आरोप है कि वर्दी और पद का खौफ तथा झूठा प्रभाव दिखाकर उसने युवती को विश्वास में लिया और उसका यौन शोषण किया।

आरंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि जब पीड़िता को आरोपी के दावों की पोल खुलने और उसकी असली पहचान का पता चला, तो उसने हिम्मत जुटाकर रांची महिला थाने का दरवाजा खटखटाया और लिखित शिकायत दर्ज कराई।

प्राथमिकी दर्ज होने के बाद से ही रांची पुलिस और महिला थाना की विशेष टीम आरोपी की सुरागकशी में जुटी हुई थी। तकनीकी अनुसंधान और सर्विलांस के जरिए रांची पुलिस को यह पुख्ता सुराग मिला कि नाम बदलकर छिप रहा आरोपी वर्तमान में बिहार के गया जिले में शरण लिए हुए है।

इसके बाद रांची पुलिस की एक विशेष टीम गया पहुंची और स्थानीय मुफस्सिल थाना पुलिस के सहयोग से मानपुर क्षेत्र में घेराबंदी कर उसे दबोच लिया।

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राजनीति

सूखा राहत पर शिवसेना उद्धव गुट का हमला, किसानों को 5,000 रुपए की मदद को बताया छलावा

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शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने गुरुवार को राज्य सरकार द्वारा सूखा प्रभावित किसानों को अग्रिम राहत के तौर पर 5,000 रुपए देने की घोषणा की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने इस फैसले को धोखाधड़ीपूर्ण और खोखला दिखावा करार दिया। पार्टी का कहना है कि सूखे से जूझ रहे किसानों को वास्तविक और पर्याप्त सहायता की आवश्यकता है और 5,000 रुपए की यह राहत केवल एक दिखावटी कदम है, जिससे किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होने वाला।

ठाकरे गुट ने पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में छपे एक तीखे संपादकीय में तर्क दिया है कि महाराष्ट्र में सूखे की मार झेल रहे लगभग 1.50 करोड़ किसानों के साथ मजबूती से खड़े होने के बजाय सत्ताधारी सरकार ने “33 प्रतिशत की शर्त” लगाकर असल में उनकी पीठ में छूरा घोंपा है।

संपादकीय में कहा गया है कि सरकार ने 5,000 रुपए की अग्रिम सहायता तुरंत बांटने के बड़े-बड़े दावे किए थे, लेकिन अब इस राहत को केवल उन्हीं इलाकों तक सीमित कर दिया गया है, जहां फसल के नुकसान का आकलन (पंचनामा) पूरा हो चुका है और फसल का नुकसान 33 प्रतिशत से अधिक है। इसमें बताया गया है कि इस तरह के सख्त नियम लागू करने से भीषण सूखे के इस दौर में संकट से जूझ रहे 1.50 करोड़ किसानों में से लगभग आधे किसान पूरी तरह खाली हाथ रह जाएंगे।

खरीफ की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है और बारिश न होने के कारण रबी की बुआई भी लगभग नामुमकिन लग रही है। ऐसे में ग्रामीण इलाकों में पीने के पानी और चारे का भारी संकट पैदा हो गया है। सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जो निजी फाइनेंस कंपनियां और साहूकार कर्ज वसूली के लिए किसानों को परेशान कर रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद किसानों को डराने-धमकाने का सिलसिला बदस्तूर जारी है।

संपादकीय में नांदेड़ और लातूर के उन मामलों का जिक्र किया गया है, जहां कर्ज के दबाव में आकर किसानों ने अपनी जान दे दी। कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकार के आदेश वास्तव में जमीनी स्तर तक पहुंच भी रहे हैं या नहीं।

संपादकीय में कहा गया है कि मानसून खत्म होने के कई हफ्तों बाद ‘मृदा एवं जल संरक्षण विभाग ने अचानक पानी सोखने वाले गड्ढे खोदने का काम शुरू कर दिया है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने इन देर से उठाए गए कदमों को बहुत देर हो जाने के बाद की गई कार्रवाई की संज्ञा दी है। पार्टी ने कहा कि चूंकि अब बारिश की कोई उम्मीद नहीं है, इसलिए सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इन हजारों नए खोदे गए गड्ढों को पानी के टैंकरों से भरने की योजना बना रही है?

संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि ऐसी परियोजनाएं ग्रामीण इलाकों की प्यास बुझाने के बजाय, ठेकेदारों और बिचौलियों की जेबें भरने के लिए बनाई गई हैं।

इस गंभीर वास्तविकता को सामने रखते हुए संपादकीय में कहा गया है कि सत्ता में बैठे लोग भले ही बड़े-बड़े दावे करते हों, लेकिन प्रशासन की नौकरशाही की अड़चनें और पात्रता संबंधी शर्तें एक ऐसे “अल नीनो” की तरह काम करती हैं, जो प्राकृतिक सूखे से भी कहीं अधिक खतरनाक साबित होती हैं।

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राजनीति

वाराणसी स्नातक सीट पर सपा की जीत तय, भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने मानी हार

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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी ताकत का सेमीफाइनल माने जा रहे विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वाराणसी स्नातक सीट पर बड़ा झटका लगता दिख रहा है।

मतगणना के तीसरे दिन गुरुवार को भी इस सीट पर नतीजा घोषित नहीं हो सका लेकिन समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा की लगातार मजबूत होती बढ़त के बीच भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जनादेश स्वीकार करते हुए अपनी हार मान ली है। नौवें चक्र की मतगणना तक आशुतोष सिन्हा काफी आगे चल रहे थे। ऐसे में उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है। केदारनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी संदेश में वाराणसी खंड के स्नातक मतदाताओं के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उन्हें चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी है।

उन्होंने लिखा कि वह जनादेश को पूर्ण विनम्रता और लोकतांत्रिक मर्यादा के साथ स्वीकार करते हैं। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं, समर्थकों और शुभचिंतकों का भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चुनाव में सफलता और असफलता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं लेकिन जनसेवा का संकल्प किसी परिणाम का मोहताज नहीं होता। उनके इस संदेश के बाद वाराणसी स्नातक सीट पर भाजपा की हार और सपा की संभावित जीत को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम और जीत का आधिकारिक प्रमाणपत्र जारी होने तक चुनावी प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाएगी। मतगणना मंगलवार सुबह आठ बजे शुरू हुई थी। बुधवार शाम तक 11 में से 10 सीटों के नतीजे घोषित हो चुके थे लेकिन वाराणसी स्नातक सीट पर गिनती पूरी नहीं हो सकी।

वाराणसी में मतगणना के दौरान बुधवार शाम से शुरू हुआ विवाद देर रात तक जारी रहा। भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह धरने पर बैठ गए और उन्होंने मतगणना पर्यवेक्षक प्रांजल यादव पर धांधली कराने के आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की। हालांकि, ये आरोप भाजपा प्रत्याशी की ओर से लगाए गए थे। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने कार्यकर्ताओं से मतगणना केंद्र पर डटे रहने की अपील की। इसके बाद सपा के 500 से अधिक कार्यकर्ता रातभर मतगणना स्थल पर मौजूद रहे।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कार्यकर्ताओं से भोजन, पानी, छतरी और तौलिये की व्यवस्था करने तथा मतगणना केंद्र से नहीं हटने की अपील की। उन्होंने लिखा, ”सब डटे रहें और जीत का प्रमाणपत्र लेकर ही उठें।” उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने साथियों की मदद करने और हौसला बनाए रखने का भी आह्वान किया।

अखिलेश ने मतगणना की निगरानी को लेकर कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने का संदेश देते हुए लिखा, ”नजर हटी, दुर्घटना घटी!” समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ने कहा कि पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मेहनत करके मतदाताओं का समर्थन हासिल किया है। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए दावा किया कि यदि यही रुझान आगे भी बना रहा तो 2027 में प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी। सुजीत यादव ने भाजपा प्रत्याशी पर निशाना साधते हुए कहा कि चुनाव में हार के बाद बहाने तलाशे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा किसी के स्तर पर उतरकर जवाब नहीं देना चाहती क्योंकि पार्टी का लक्ष्य प्रदेश में सरकार बनाना है।

गौरतलब है कि वाराणसी खंड की दोनों विधान परिषद सीटों पर पहले भी समाजवादी पार्टी का कब्जा रहा है। स्नातक सीट पर आशुतोष सिन्हा की बढ़त ने भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ा दी है। विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बीच उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि भाजपा और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के छह उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है जबकि घोषित परिणामों में समाजवादी पार्टी को चार सीटें मिली हैं। उन्होंने कहा कि सपा को इन नतीजों से बहुत उत्साहित नहीं होना चाहिए क्योंकि कई सीटों पर उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव और मेहनत की अहम भूमिका रही है।

वहीं, कांग्रेस नेता अजय राय ने चुनाव परिणामों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में यह चुनाव लड़ा ही नहीं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक प्रभाव में गिरावट आने वाली है। उधर, कौशांबी से समाजवादी पार्टी के नवनिर्वाचित एमएलसी मान सिंह यादव ने अपनी जीत का श्रेय मतदाताओं और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की नीतियों को दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान कई स्तरों पर मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिशें हुईं और कुछ स्थानों पर सपा समर्थकों को परेशान किया गया।

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी आरोप लगाया कि बैलेट पेपर से हुए चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा और कुछ स्थानों पर प्रशासन का दुरुपयोग कर परिणाम प्रभावित करने की कोशिश की गई। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। वाराणसी स्नातक सीट पर मतगणना पूरी होने और आधिकारिक परिणाम घोषित होने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी। फिलहाल, भाजपा प्रत्याशी के सोशल मीडिया संदेश और सपा उम्मीदवार की बड़ी बढ़त ने इस चुनाव को प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय बना दिया है।

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