राजनीति
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को राहुल गांधी ने बताया ‘चुनावी बिल’
महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार का घेराव किया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार को निशाने पर लिया, जबकि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने रोजगार और मजदूरों की स्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा, “कह दिया था कि चुनाव के बाद महंगाई की गर्मी आएगी। आज कमर्शियल गैस सिलेंडर 993 रुपए महंगा हुआ। यह एक ही दिन में सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। यह चुनावी बिल है। फरवरी से अब तक 1,380 रुपए की बढ़ोतरी हुई है। यह सिर्फ 3 महीनों में 81 प्रतिशत का इजाफा है।”
उन्होंने आगे लिखा, “चायवाला, ढाबा, होटल, बेकरी, हलवाई हर किसी की रसोई पर बोझ बढ़ा और इसका असर आपकी थाली पर भी पड़ेगा। पहला वार गैस पर, अगला वार पेट्रोल-डीजल पर।”
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में बढ़ती बेरोजगारी के लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ‘हम दो-हमारे दो’ नीति का नतीजा हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने मजदूर विरोधी लेबर कोड लागू किया, जिससे नोएडा, पानीपत के आईओसीएल, एनटीपीसी पतरातू और श्रीपेरंबदूर में सैमसंग फैक्ट्री समेत कई जगहों पर असंतोष देखने को मिला।
उन्होंने कहा कि नया लेबर कोड नौकरी की सुरक्षा के बजाय कॉन्ट्रैक्ट लेबर और ‘हायर एंड फायर’ जैसी नीतियों को बढ़ावा देता है, इसलिए इसकी समीक्षा की जानी चाहिए। खड़गे ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने मनरेगा को खत्म कर दिया है और मजदूरी का 40 प्रतिशत बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया है, जिससे राज्यों के लिए रोजगार देना मुश्किल हो गया है।
खड़गे ने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण लोगों को मजबूरन गिग वर्क की ओर जाना पड़ रहा है, और करीब 69 प्रतिशत लोग न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले एक दशक (2014-15 से 2022-23) में मजदूरों की आय में सालाना 1 प्रतिशत से भी कम वृद्धि हुई है।
इसके अलावा, उन्होंने पढ़े-लिखे युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकारी नौकरियों में करीब 30 लाख पद खाली हैं, लेकिन उन्हें भरा नहीं जा रहा। साथ ही, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण से भी नौकरियां कम हुई हैं और एमएसएमई सेक्टर को नुकसान पहुंचा है।
कांग्रेस ने इस दौरान मजदूरों के लिए पांच प्रमुख मांगें भी रखीं, जिनमें मनरेगा को दोबारा शुरू करना और शहरों तक विस्तार, न्यूनतम मजदूरी 400 रुपए प्रतिदिन तय करना, ‘राइट टू हेल्थ’ कानून लागू करना, असंगठित श्रमिकों के लिए बीमा और ठेकेदारी प्रथा पर रोक लगाने के साथ नए लेबर कोड की समीक्षा शामिल है।
राष्ट्रीय समाचार
पहली तिमाही के नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव और घरेलू आर्थिक आंकड़ों से तय होगा शेयर बाजार का रुझान

भारतीय शेयर बाजार के लिए अगला कारोबारी हफ्ता काफी अहम होने वाला है। घरेलू आर्थिक आंकड़े जैसे पीएमआई, अमेरिका-ईरान तनाव और वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के नतीजे बाजार की चाल निर्धारित करेंगे।
सरकार की ओर से पीएमआई के आंकड़े 24 जुलाई को जारी किए जाएंगे। पीएमआई औद्योगिक क्षेत्र में गतिविधियों को दर्शाता है और इससे देश में आर्थिक गतिविधियों के बारे में सटीक जानकारी मिलती है।
वहीं, अमेरिका-ईरान तनाव बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा। ईरानी हमलों में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद दोनों देश के बीच तनाव और बढ़ गया है। अमेरिका ने भी ईरान पर नई एयर स्ट्राइक की हैं।
मध्य पूर्व संघर्ष के कारण कच्चा तेल भी बाजार में अहम भूमिका निभाएगा। अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से इसमें दोबारा उछाल आने लगा है। शुक्रवार के सत्र में बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 4.59 प्रतिशत की तेजी के साथ 88.10 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 4.48 प्रतिशत की मजबूती के साथ 8.49 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ।
20-24 जुलाई के बीच बजाज हेल्थकेयर, इंडियन ओवरसीज बैंक,अल्ट्राटेक सीमेंट, अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, बजाज ऑटो, जेएसडब्ल्यू इन्फ्रा, एमएंडएम फाइनेंस, अदाणी ग्रीन, अदाणी पावर, बीपीसीएल, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, इन्फोसिस और इंडिगो जैसी कंपनियों की ओर से वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के नतीजे जारी किए जाएंगे।
भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता एक हफ्ता मुनाफे वाला रहा है। इस दौरान सेंसेक्स 582.06 अंक या 0.75 प्रतिशत की मजबूती के साथ 78,151.45 और निफ्टी 127.40 अंक या 0.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,334.30 पर था।
13-17 जुलाई के सत्र में निफ्टी आईटी 4.34 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.11 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 2.50 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.51 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 1.08 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.89 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.87 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.28 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
निफ्टी रियल्टी 2.12 प्रतिशत, निफ्टी मेटल 1.99 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस 1.48 प्रतिशत, निफ्टी एफएमसीजी 1.14 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 0.83 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज 0.60 प्रतिशत और निफ्टी हेल्थकेयर 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार की शीर्ष 10 में से पांच कंपनियों का मार्केटकैप 1.54 लाख करोड़ रुपए बढ़ा

भारतीय शेयर बाजार की शीर्ष 10 में से पांच कंपनियों का मार्केटकैप बीते एक हफ्ते में 1.54 लाख करोड़ रुपए बढ़ा है। इसमें सबसे अधिक फायदा टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और आईसीआईसीआई बैंक को हुआ है।
टीसीएस के वैल्यूएशन में सबसे अधिक बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान कंपनी का मार्केटकैप 72,072.3 करोड़ रुपए बढ़कर 8,20,672.70 करोड़ रुपए हो गया।
यह उछाल तब आया जब देश की सबसे बड़ी आईटी सर्विस कंपनी ने जून तिमाही में अपने कंसोलिडेटेड मुनाफे में सालाना आधार पर 4.61 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की है और निवेशकों को भरोसा जताया कि पश्चिम एशिया संकट से प्रभावित मांग मौजूदा तिमाही में बेहतर होगी।
आईसीआईसीआई बैंक का मार्केटकैप 29,062.06 करोड़ रुपए बढ़कर 10,34,441.77 करोड़ रुपए हो गया है, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केटकैप इस दौरान 23,884.93 करोड़ रुपए बढ़ा है, जिससे कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन 17,95,091.26 करोड़ रुपए हो गया है।
बजाज फाइनेंस का मार्केटकैप 21,946.2 करोड़ रुपए बढ़कर 6,57,274.28 करोड़ रुपए हो गया है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) का मार्केटकैप 7,338.34 करोड़ रुपए बढ़कर 9,63,768.78 करोड़ रुपए हो गया है।
दूसरी तरफ, एलएंडटी का मार्केटकैप 18,097.72 करोड़ रुपए कम होकर 5,24,840.68 करोड़ रुपए हो गया है। एलआईसी का बाजार पूंजीकरण 12,080.75 करोड़ रुपए कम होकर 5,48,124.30 करोड़ रुपए हो गया है।
भारती एयरटेल का मार्केटकैप 7,706.45 करोड़ रुपए घटकर 11,91,067.77 करोड़ रुपए हो गया, जबकि एचडीएफसी बैंक की वैल्यूएशन में 7,084.61 करोड़ रुपए की कमी आई, जिससे उसका मार्केट कैपिटलाइजेशन 12,62,369.81 करोड़ रुपए हो गया। हिंदुस्तान यूनिलीवर की वैल्यूएशन में भी 1,221.79 करोड़ रुपए की मामूली गिरावट आई और यह 5,03,775.86 करोड़ रुपए पर आ गया है।
हफ्ते के आखिर में, रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे अधिक वैल्यूएशन वाली लिस्टेड कंपनी बनी रही। इसके बाद एचडीएफसी बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, टीसीएस, बजाज फाइनेंस, एलआईसी, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और हिंदुस्तान यूनिलीवर का नंबर रहा।
भारतीय शेयर बाजार के लिए बीता एक हफ्ता मुनाफे वाला रहा है। इस दौरान सेंसेक्स 582.06 अंक या 0.75 प्रतिशत की मजबूती के साथ 78,151.45 और निफ्टी 127.40 अंक या 0.53 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,334.30 पर था।
13-17 जुलाई के सत्र में निफ्टी आईटी 4.34 प्रतिशत की तेजी के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स 3.11 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 2.50 प्रतिशत, निफ्टी प्राइवेट बैंक 1.51 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 1.08 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 0.89 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.87 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.28 प्रतिशत और निफ्टी एनर्जी 0.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
राजनीति
टीएमसी के बागी सांसदों को बुलाने पर भड़का विपक्ष, सर्वदलीय बैठक से कांग्रेस, सपा और ‘आप’ का वॉकआउट

संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने आरोप लगाया कि बैठक में पार्टी के कथित बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने के विरोध में विपक्षी दलों ने वॉकआउट किया।
महुआ मोइत्रा ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वामपंथी दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया। उनका आरोप था कि एक गैर-मान्यता प्राप्त गुट को बैठक में स्थान दिया गया, जबकि लोकसभा टेबल ऑफिस की सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के 28 सांसद दर्ज हैं।
मोइत्रा ने सवाल उठाया कि पार्टी के 20 कथित बागी सांसदों को संसदीय कार्य मंत्री ने किस आधार पर बैठक में आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि इन सांसदों के विलय को लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनके खिलाफ दायर 20 अयोग्यता याचिकाएं अभी भी लंबित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संविधान के 91वें संशोधन के बाद अलग गुट के आधार पर मान्यता देने का कोई प्रावधान नहीं है।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी विपक्ष के वॉकआउट को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा तथा आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना के समर्थन में यह कदम उठाया है। उनका कहना था कि किसी मामले में अंतिम फैसला आने से पहले कोई निष्कर्ष निकालना पूरी तरह असंवैधानिक है।
बैठक के बाद समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने भी सरकार पर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि टीएमसी नेताओं ने बैठक में यह मुद्दा उठाया कि आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस सांसदों के बजाय पहले कथित बागी सांसदों की सूची क्यों दिखाई गई। उन्होंने इसे सरकार का अलोकतांत्रिक कदम बताया।
सर्वदलीय बैठक से विपक्ष के वॉकआउट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) की सांसद महुआ माजी ने कहा कि आज देश में विभिन्न तरीकों से सांसदों को लालच देकर राजनीतिक दलों को सुनियोजित ढंग से तोड़ा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में बगावत करने वाले सांसदों को सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया, जबकि स्पीकर ने अभी तक उन्हें मान्यता नहीं दी है।
महुआ माजी ने परिसीमन के मुद्दे का भी जिक्र करते हुए कहा कि यदि 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जाता है तो झारखंड जैसे राज्यों में अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों का काफी नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यह भरोसा दिलाए कि किसी भी राज्य की सीटें कम नहीं होंगी और सभी विपक्षी दल इस पर सहमत हों, तो उनकी पार्टी अपने रुख पर पुनर्विचार कर सकती है। हालांकि, उन्होंने कहा कि अब तक इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई है।
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