राजनीति
राज्यसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक, गुरुवार तक मिले संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत
राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को गुरुवार को पेश किया जाएगा। सदन की कार्यवाही के दौरान सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को बताया कि लोकसभा से पारित इस विधेयक पर राज्यसभा में विचार और पारित कराने के लिए कार्य संचालन नियमों के नियम 123 के तहत छूट प्रदान की गई है। इसके अनुरूप अनुपूरक कार्यसूची भी जारी की गई है। ऐसे में गुरुवार दोपहर तक मिले संशोधन प्रस्ताव स्वीकृत किए गए हैं।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 प्रस्तुत करेंगे। संशोधन विधेयक के तहत त्वरित जांच, विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों के जरिए से त्वरित सुनवाई, अपीलों का समयबद्ध निपटारा व कठोर दंड प्रावधानों की व्यवस्था की गई है।
गौरतलब है कि हाल के वर्षों में प्रश्न-पत्र लीक होने व परीक्षा से जुड़ी संगठित गड़बड़ियों के मद्देनजर, ये प्रस्तावित संशोधन लाए गए हैं। ये संशोधन अधिक जवाबदेही तय करते हैं व ऐसे अपराधों के खिलाफ सख्ती से रोक लगाने व लोक परीक्षाओं की शुचिता सुनिश्चित करेंगे। इस विधेयक में अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वालों के लिए पहले से अधिक सजा का प्रस्ताव है। इसके तहत कम 5 वर्ष की जेल, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, करने का प्रस्ताव है।
इसके साथ ही, अधिकतम जुर्माना भी 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है। राज्यसभा के सभापति ने कहा कि लोकसभा से पारित विधेयक की प्रति मंगलवार अपराह्न लगभग 3 बजकर 30 मिनट पर राज्यसभा सदस्यों के पोर्टल पर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध करा दी गई थी। चूंकि सदस्यों के पास विधेयक का अध्ययन करने और संशोधन प्रस्ताव तैयार करने के लिए अपेक्षाकृत कम समय उपलब्ध था, इसलिए इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गई है।
उन्होंने बताया कि जो सदस्य इस विधेयक में संशोधन प्रस्ताव देना चाहते हैं, उन्हें गुरुवार दोपहर तक अपने संशोधन सचिवालय को सौंपने का अवसर दिया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समय इसलिए निर्धारित किया गया, ताकि सचिवालय सभी संशोधन प्रस्तावों की जांच कर उनकी सूची तैयार कर सके और उसे समय रहते सदस्यों के बीच प्रसारित किया जा सके।
इस घोषणा के साथ, राज्यसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा और उसे पारित कराने की संसदीय प्रक्रिया आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त हो गया।
महाराष्ट्र
महाराष्ट्र: कोयना बांध से शाम 5 बजे पानी छोड़ा जाएगा, जलगांव के गिरना डैम का भी जलस्तर बढ़ा

महाराष्ट्र के कोयना बांध के जलग्रहण क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए गुरुवार को शाम 5 बजे कोयना बांध के 6 रेडियल गेट 1 फुट तक खोले जाएंगे, जिससे 5,079 क्यूसेक पानी कोयना नदी में छोड़ा जाएगा।
वर्तमान में कोयना बांध के पाद (केडीपीएच) विद्युत गृह का एक यूनिट चालू है, जिसके माध्यम से 1,050 क्यूसेक पानी पहले से छोड़ा जा रहा है। इसके बाद कोयना नदी में कुल 6,129 क्यूसेक पानी का प्रवाह शुरू हो जाएगा। प्रशासन ने बताया है कि क्षेत्र में वर्षा की तीव्रता और बांध में आने वाले पानी की मात्रा के अनुसार पानी का विसर्ग आगे और बढ़ाया जा सकता है।
बांध से छोड़े जाने वाले पानी के कारण कोयना नदी का जलस्तर बढ़ने की संभावना है। इसके मद्देनजर प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले नागरिकों से सतर्क रहने और नदी में प्रवेश न करने की अपील की है। साथ ही, नदी तट के गांवों के ग्राम प्रशासन व संबंधित विभागों को भी जरूरी सावधानी बरतने और स्थिति पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
उधर, जलगांव जिले के आधे हिस्से की लाइफलाइन माने जाने वाले गिरना डैम का भी जलस्तर बढ़ा है। डैम में गुरुवार सुबह तक 94 प्रतिशत पानी जमा हो चुका है। अभी करीब 3 हजार क्यूसेक पानी आ रहा है। इससे डैम के जल्द ही अपनी पूरी क्षमता तक भरकर ओवरफ्लो होने की संभावना है।
22 जुलाई को गिरना डैम में पानी का स्टोरेज सिर्फ 40.38 प्रतिशत था, लेकिन ऊपरी हिस्सों में भारी बारिश की वजह से सिर्फ आठ दिनों में पानी का स्तर 54 प्रतिशत बढ़ा है। इससे भड़गांव, पचोरा, चालीसगांव और जलगांव तालुका के किसानों व लोगों को राहत मिली है, जो गिरना प्रोजेक्ट पर निर्भर हैं। डैम ओवरफ्लो होने की स्थिति में यहां से पानी छोड़ने का फैसला लिया जा सकता है।
महाराष्ट्र
पेपर लीक और घोटालों की वजह से शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है : शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया है कि भारत की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और महाराष्ट्र इस व्यवस्थागत भ्रष्टाचार का सबसे ज्यादा शिकार हुआ है।
गुरुवार को पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में राज्य और केंद्र के शैक्षिक ढांचे की कड़ी आलोचना की गई। दावा किया कि परीक्षा पेपर लीक होना,पैमाने पर खरे नहीं उतरने वाले वाइस-चांसलर की गैर-कानूनी नियुक्तियों और बड़े पैमाने पर वित्तीय घोटालों ने शैक्षणिक ढांचे में गहरी गिरावट के तौर पर काम किया है।
संपादकीय में प्रतियोगी और बोर्ड परीक्षाओं में पेपर लीक की कड़ी आलोचना की गई। हाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया गया कि महाराष्ट्र में एक महीने के भीतर दस से ज्यादा परीक्षा के पेपर लीक हुए, और इसके बाद महाराष्ट्र कॉमन एंट्रेंस टेस्ट के पेपर भी लीक हुए। संपादकीय में चेतावनी दी गई, “दिन-दहाड़े खुलेआम पेपर लीक और ग्रेड की चोरी हो रही है। शिक्षा समाज की नींव है, और अगर यह व्यवस्था चरमरा गई, तो समाज भी इसके साथ ही ढह जाएगा।”
संपादकीय में कहा गया कि महाराष्ट्र की परीक्षा और शिक्षा व्यवस्था से जनता का भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। राज्य के शैक्षणिक संस्थानों और विश्वविद्यालयों को योग्यता के बजाय पक्षपाती एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए चलाया जा रहा है।
संपादकीय में भ्रष्टाचार के कुछ खास मामलों का भी जिक्र किया गया, जिसमें परभणी एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से जुड़ा करोड़ों रुपए का वित्तीय घोटाला भी शामिल है। इसके अलावा, इसमें जलगांव से भाजपा नेता संजय गरुड़ की गिरफ्तारी का भी जिक्र किया गया, जो 160 करोड़ रुपए के ‘शलार्थ आईडी’ घोटाले से जुड़े थे।
सामना संपादकीय में केंद्र सरकार की आलोचना की गई कि उसने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा के हिसाब से इतिहास की पाठ्य पुस्तकों में बदलाव किए और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में कांग्रेस, वामपंथियों और समाजवादियों के योगदान को मिटा दिया। इसमें यह भी कहा गया कि अवैज्ञानिक विचारधाराओं को मानने का दबाव शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जैसे प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों को छोड़ने के लिए मजबूर कर रहा है।
संपादकीय में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने वंचित छात्रों और अमीर उम्मीदवारों के बीच भारी अंतर की ओर इशारा किया। जहां मध्यम वर्गीय माता-पिता महंगी कोचिंग क्लास के लिए कर्ज लेते हैं, वहीं अमीर लोग परीक्षा पास करने के लिए लीक हुए पेपर खरीदते हैं और खास परीक्षा केंद्रों में हेरफेर करते हैं। इसमें कहा गया, “पुणे, जिसे कभी शिक्षा और ज्ञान के केंद्र के रूप में जाना जाता था, अब पेपर लीक के गढ़ के रूप में बदनाम हो गया है।” साथ ही, राज्य सरकार की आलोचना करते हुए कहा गया कि वह ढांचागत सुधार करने के बजाय बार-बार विशेष जांच टीमें बनाती रहती है।
राष्ट्रीय समाचार
तमिलनाडु में अस्पतालों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम शुरू करने की तैयारी

हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने के मकसद से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के तहत एक बड़े सुधार के तौर पर, तमिलनाडु सरकार अस्पतालों के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम शुरू करने जा रही है। इससे मंजूरी की उस बिखरी हुई प्रक्रिया का अंत होगा, जिसकी देरी और कागजी अड़चनों के लिए लंबे समय से आलोचना होती रही है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पिछले एक हफ्ते से तैयार किए जा रहे सरकारी आदेश को शुक्रवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के साथ समीक्षा बैठक के तुरंत बाद जारी किए जाने की उम्मीद है।
इस प्रस्तावित सिस्टम से नए अस्पतालों के लिए मंजूरी लेने में लगने वाले समय में काफी कमी आने की उम्मीद है। यह प्रक्रिया कई साल से घटकर कुछ महीने की रह जाएगी। इसके लागू होने के बाद, तमिलनाडु महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा, जहां हेल्थकेयर प्रोजेक्ट्स के लिए रेगुलेटरी मंजूरी को आसान बनाने के लिए पहले से ही सिंगल-विंडो सिस्टम मौजूद हैं।
इस घटनाक्रम से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यह सुधार सरकार की उन व्यापक कोशिशों का हिस्सा है, जिनका मकसद हेल्थकेयर सेक्टर में निवेश को तेजी देना और साथ ही रेगुलेटरी प्रक्रियाओं को ज्यादा पारदर्शी और कुशल बनाना है।
इस पहल से मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और हेल्थकेयर सेवाओं के लिए भारत के प्रमुख डेस्टिनेशन के तौर पर तमिलनाडु की स्थिति और मजबूत होने की भी उम्मीद है।
इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि मंजूरी की मौजूदा प्रक्रिया में (खासकर बिल्डिंग और प्रोजेक्ट डिजाइन जमा करने के बाद) अक्सर कई विभाग शामिल होते थे और बहुत ज्यादा देरी होती थी, जिससे निवेशकों में अनिश्चितता बनी रहती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मंजूरी लेना मुश्किल हो गया था और कुछ मामलों में 40 लाख से 50 लाख रुपए तक की मांग की जाती थी।
नए फ्रेमवर्क से, जिसमें पारदर्शी और स्टैंडर्ड फीस स्ट्रक्चर लाने की उम्मीद है, ऐसी अनियमितताओं को खत्म करने और जवाबदेही बेहतर बनाने का इरादा है।
हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़े लोगों के अनुसार, तमिलनाडु में अभी कम से कम सात-आठ ऐसे अस्पतालों की मंजूरी लंबित है जिन्हें डॉक्टर प्रमोट कर रहे हैं, जबकि दूसरे राज्यों में इसी तरह के प्रोजेक्ट्स में तेजी से काम हुआ है।
उन्होंने बताया कि हेल्थकेयर इंडस्ट्री की बार-बार की अपीलों के बावजूद सिंगल-विंडो सिस्टम का प्रस्ताव एक दशक से ज्यादा समय से विचाराधीन था।
लंबे समय से प्रतीक्षित इस सुधार से अस्पतालों में प्राइवेट निवेश को बड़ा बढ़ावा मिलने, हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को प्रोत्साहन मिलने और राज्य में मेडिकल संस्थान स्थापित करने की समग्र प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने पुष्टि की कि मुख्यमंत्री की समीक्षा के बाद सरकारी आदेश जारी होने की संभावना है, जिससे पूरे तमिलनाडु में अस्पताल परियोजनाओं के लिए मंजूरी की प्रक्रिया तेज और ज्यादा पारदर्शी हो सकेगी।
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