राजनीति
पायलट ने कहीं भी कोई बयान नहीं दिया : सुरजेवाला
राष्ट्रीय समाचार
शेयर बाजार लगातार गिरावट के बाद हरे निशान में खुला; सेंसेक्स 517 अंक उछला, आईटी शेयरों में खरीदारी

लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 500 से ज्यादा अंकों तक की बढ़त दर्ज की गई।
सेंसेक्स 416.25 अंक यानी 0.57 प्रतिशत चढ़कर 73,665.64 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 54.55 अंक यानी 0.24 प्रतिशत बढ़कर 22,742.20 पर खुला।
सेंसेक्स पिछले दिन 73,249.39 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी का पिछला बंद 22,687.65 था।
वहीं दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 517.12 अंकों यानी 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,766.51 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं निफ्टी 50 करीब 100 अंक यानी 0.43 प्रतिशत उछलकर 22,787.25 का हाई टच किया।
इस दौरान, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, क्योंकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी आईटी इंडेक्स एकमात्र ऐसा इंडेक्स था जिसमें तेजी (1.8 प्रतिशत) देखी गई। निफ्टी मेटल, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी मीडिया में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
इस बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे बढ़कर 94.79 पर खुला, जबकि गुरुवार को यह 94.82 के स्तर पर बंद हुआ था।
वैश्विक स्तर पर, एशियाई बाजारों में गिरावट आई, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार एआई पर होने वाले खर्च और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंताओं के चलते ज्यादातर निचले स्तर पर बंद हुआ।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड का उछलकर 114 डॉलर तक पहुंच जाना अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए एक बड़ी नकारात्मक बात है। हालांकि, अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड में 4.96 प्रतिशत तक की भारी गिरावट और डॉलर के मुकाबले रुपए का मजबूत होकर 94.70 पर आना सकारात्मक संकेत हैं, जो एफआईआई की बिकवाली को काफी हद तक रोक सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो दिनों में जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में गए 3.73 लाख करोड़ रुपए में से 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि, शेयरों के अलॉटमेंट के बाद अगले सोमवार तक वापस सिस्टम में आ जाएगी। “लिक्विडिटी में आने वाला यह संभावित उछाल अगले हफ्ते बाजार को ऊपर ले जा सकता है।”
विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए आरएसआई 43.98 पर है, जो इसके 38.86 के औसत से ऊपर है, जबकि पीसीआर घटकर 0.82 पर आ गया है। निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 22,600-22,650 के स्तर पर है, और रेजिस्टेंस 22,900-23,000 के स्तर पर देखा जा रहा है।
गुरुवार को एफआईआई नेट सेलर रहे और उन्होंने 3,459 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 2,891 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी करके बाजार को सपोर्ट दिया।
गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में, एआई-आधारित टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के चलते नैस्डैक 2.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
इसी तरह, एशियाई बाजारों की शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई, जिसमें जापान का निक्केई लगभग 1.7 प्रतिशत नीचे आ गया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
जर्मन कंपनियों के लिए भारत में निवेश, विनिर्माण और नवाचार के बड़े अवसर: पीयूष गोयल

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को जर्मनी की राजधानी बर्लिन में कई प्रमुख उद्योगपतियों और कारोबारी नेताओं के साथ बैठकों के दौरान कहा कि भारत जर्मन कंपनियों के लिए निवेश, विनिर्माण और नवाचार के क्षेत्र में अपार अवसर प्रदान करता है। उन्होंने जोर दिया कि भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के पास विश्वास, प्रतिस्पर्धात्मकता और एक-दूसरे की पूरक क्षमताओं पर आधारित एक मजबूत आर्थिक साझेदारी बनाने का सुनहरा अवसर है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने फ्रेसेनियस ग्रुप के सीईओ माइकल सेन के साथ भी बैठक की। दोनों पक्षों ने भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा सेवाओं की मांग तथा मजबूत विनिर्माण क्षमता का लाभ उठाकर सहयोग बढ़ाने के अवसरों पर चर्चा की।
गोयल ने कहा कि भारत की कुशल प्रतिभा और विश्वस्तरीय उत्पादन क्षमता का उपयोग कर जर्मन कंपनियां न केवल भारतीय बल्कि वैश्विक बाजारों की जरूरतों को भी पूरा कर सकती हैं।
उन्होंने एक्स पर लिखा, “फ्रेसेनियस ग्रुप के सीईओ श्री माइकल सेन के साथ एक सार्थक बैठक हुई। भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, गुणवत्तापूर्ण और किफायती चिकित्सा समाधानों की बढ़ती मांग और मजबूत विनिर्माण क्षमताओं का लाभ उठाते हुए, स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सहयोग को और गहरा करने के अवसरों पर चर्चा की गई। यह भी पता लगाया गया कि कंपनी अपने कुशल कर्मचारियों और विश्व स्तरीय उत्पादन क्षमताओं का उपयोग करके घरेलू और वैश्विक बाजारों को कैसे सेवाएं प्रदान कर सकती है।”
इसके अलावा, उनकी स्टीफन ओएलरिख, जो बेयर के फार्मास्यूटिकल्स डिवीजन के अध्यक्ष हैं, के साथ सार्थक चर्चा हुई। इस दौरान भारत में बेयर की विस्तार योजनाओं और देश के तेजी से विकसित हो रहे स्वास्थ्य क्षेत्र में अधिक निवेश, नवाचार और सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया।
इसके साथ ही, केंद्रीय मंत्री ने बर्लिन में नॉफ ग्रुप के ग्लोबल जनरल पार्टनर मुरात अकयिलदिज के साथ भी बैठक की, जिसमें भारत में कंपनी के बढ़ते विनिर्माण विस्तार, टिकाऊ निर्माण सामग्री और बुनियादी ढांचा विकास के क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा हुई। यह सहयोग भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण और आर्थिक परिवर्तन के अनुरूप माना जा रहा है।
इससे पहले गोयल ने जर्मन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (डीजीएपी) के इंडिया सेंटर के उद्घाटन समारोह में भाग लिया। इस कार्यक्रम में जर्मनी की संघीय आर्थिक मामलों और ऊर्जा मंत्री कैथरीना रीचे भी मौजूद थीं।
अपने संबोधन में गोयल ने कहा कि यह केंद्र भारत-जर्मनी संबंधों की बढ़ती मजबूती और दोनों देशों की सहयोग को और गहरा करने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “हमारी पूरक ताकतें महत्वाकांक्षी आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं। भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता इस साझेदारी को और अधिक गति देने का काम करेगा।”
मंत्री ने यह भी कहा कि भारत और जर्मनी मिलकर वैश्विक स्तर पर मजबूत और लचीली वैल्यू चेन विकसित कर सकते हैं। उन्होंने दोनों देशों के उद्योगों और निवेशकों से परस्पर विकास और समृद्धि के लिए नए सहयोगी अवसर तलाशने का आह्वान किया।
बर्लिन स्थित ईएसएमटी बर्लिन द्वारा आयोजित बिजनेस लीडर्स राउंडटेबल में भी गोयल ने कई प्रमुख कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से बातचीत की। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और जर्मनी के बीच व्यापारिक और आर्थिक साझेदारी आने वाले वर्षों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है, लेकिन ईरान को रोकना भी जरूरी: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ आगे भी सैन्य कार्रवाई संभव है, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि इस युद्ध का असर आगामी कांग्रेस चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक नुकसान के रूप में झेलना पड़ सकता है।
जब उनसे पूछा गया कि इस संघर्ष का चुनावी अभियान पर क्या असर पड़ा है, तो ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिकी जनता की राय बंटी हुई है। युद्ध का असर आने वाले कांग्रेस चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी को राजनीतिक रूप से झेलना पड़ सकता है, लेकिन उन्हें परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना जरूरी था।
ट्रंप ने वाशिंगटन से रवाना होने से पहले पत्रकारों से कहा, “एक तरह से लोग इसे पसंद करते हैं क्योंकि मैं वही कर रहा हूं जो पहले के राष्ट्रपतियों को बहुत पहले कर देना चाहिए था। दूसरी तरफ, कुछ लोग शायद इसे पसंद न करें।”
उन्होंने कहा, “इसके लिए एक राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ सकती है और मुझे यह बात तभी समझ आ गई थी जब मैंने यह फैसला लिया। लेकिन हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते।”
हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या वह किसी नए सैन्य अभियान पर विचार कर रहे हैं, संभावित टारगेट कौन हो सकते हैं या ऐसा कदम कब उठाया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “ईरान युद्ध में हमने उन्हें काफी बड़ा नुकसान पहुंचाया है और हो सकता है कि हम आगे भी कुछ और करें।”
उनका यह बयान आगे किसी कार्रवाई की संभावना का संकेत था, लेकिन इसे किसी नए अभियान की आधिकारिक घोषणा नहीं माना जा सकता। ट्रंप ने ईरान को हुए नुकसान का जिक्र तो किया, लेकिन इसके साथ कोई सैन्य ब्रीफिंग या आधिकारिक आंकड़े पेश नहीं किए।
ट्रंप का कहना था कि भले ही कुछ लोग इस अभियान का विरोध करते हों, लेकिन बड़ी संख्या में लोग इसका समर्थन भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “एक तरह से लोग शायद इसे पसंद नहीं करते, लेकिन बहुत से लोग, बहुत से देशभक्त इसे सही मानते हैं। यह काम पहले के राष्ट्रपतियों को काफी पहले कर देना चाहिए था।”
इसी बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि आगामी चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी का प्रदर्शन काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके समर्थक मतदान के लिए कितनी संख्या में बाहर निकलते हैं।
इस बीच, न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी कि बढ़ते संघर्षों का असर अब उन देशों से कहीं आगे तक पहुंच रहा है जहां लड़ाई चल रही है।
गुटेरेस ने कहा कि ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्ग, आपूर्ति श्रृंखलाएं और वित्तीय व्यवस्थाएं ऐसे माध्यम बन गए हैं जिनके जरिए युद्ध का असर दुनिया भर के आम लोगों तक पहुंच रहा है।
गुटेरेस ने संघर्ष रोकने, आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और कूटनीतिक प्रयासों को मौका देने की अपील की। उन्होंने यह भी बताया कि वह शुक्रवार को मिस्र की यात्रा पर जाएंगे। जब उनसे इस यात्रा के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मिस्र, अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव में मध्यस्थ की भूमिका निभाने वाले देशों में से एक है। हालांकि उन्होंने किसी संभावित समझौते, सफलता या अमेरिकी और ईरानी प्रतिनिधियों की बैठक की घोषणा नहीं की।
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