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Monday,21-September-2026
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पेटीएम तीसरी तिमाही परिणाम: राजस्व 89 प्रतिशत बढ़कर 1456 करोड़ रुपये हुआ, घाटा कम होने के साथ वित्तीय सेवाओं में तेजी

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वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड के स्वामित्व वाली पेटीएम, जो भारत की अग्रणी डिजिटल भुगतान और वित्तीय सेवा कंपनी है, ने वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही के परिणाम साझा किए हैं।

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के दौरान, कंपनी ने अपना राजस्व 89 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1,456 करोड़ रुपये दर्ज किया है। वहीं कंपनी का ईबीआईटीडीए घाटा (ईएसओपी खर्च से पहले) पिछले वर्ष की इसी तिमाही के 488 करोड़ रुपये से घटकर 393 करोड़ रुपये हो गया है। यह राजस्व वृद्धि उच्च मुद्रीकरण और एमडीआर असर वाले उपकरणों, नए उपकरण सदस्यता (डिवाइस सब्सक्रिप्शन) और ऋण संवितरण के माध्यम से व्यापारी भुगतान (मर्चेंट पेमेंट्स) में वृद्धि के कारण हुई है।

कंपनी ने अपने औसत मासिक लेन-देन करने वाले यूजर्स को 6.44 करोड़ और 2.5 लाख करोड़ रुपये का जीएमवी भी दर्ज किया है।

पेटीएम के एक प्रवक्ता ने कहा, “हमारा व्यवसाय उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए भुगतान की पेशकश करना है और उन्हें उच्च-मार्जिन वाली वित्तीय सेवाओं और वाणिज्य को क्रॉस-सेल करना है। हम बिल भुगतान, मनी ट्रांसफर और ऑफलाइन मर्चेंट भुगतान के लिए अपने उपभोक्ता ऐप पर ग्राहकों को प्राप्त करते हैं और उन्हें पेटीएम पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (पेटीएम वॉलेट, पेटीएम पेमेंट्स बैंक अकाउंट और पेटीएम पोस्टपेड) और पेटीएम यूपीआई की पेशकश करते हैं। हम क्यूआर भुगतान, ईडीसी और साउंडबॉक्स उपकरणों और पेमेंट गेटवे (ऑनलाइन व्यापारियों के लिए) के लिए व्यापारियों का अधिग्रहण करते हैं। हम अपने ग्राहकों और व्यापारियों को विभिन्न वित्तीय उत्पादों की पेशकश करने के लिए अपने मंच से अंतर्²ष्टि (इनसाइट्स) का उपयोग करते हैं। हम अपने व्यापारियों को पेटीएम ऐप का उपयोग करके वाणिज्य को सक्षम करने में मदद करने के लिए उच्च-मार्जिन वाली वाणिज्य और क्लाउड सेवाएं भी प्रदान करते हैं।”

उपभोक्ताओं को भुगतान सेवाओं से कंपनी का राजस्व 60 प्रतिशत बढ़कर 406 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि व्यापारियों को भुगतान सेवाओं से राजस्व 117 प्रतिशत बढ़कर 586 करोड़ रुपये हो गया है। क्लाउड और वाणिज्य सेवाओं का राजस्व भी 64 प्रतिशत बढ़कर 339 करोड़ रुपये हो गया है।

प्लेटफॉर्म लीवरेज पर चल रही वित्तीय सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है।

कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजों का एक बड़ा हिस्सा उसकी वित्तीय सेवाओं में तेजी के रूप में देखा गया। कंपनी ने कुल 2,181 करोड़ रुपये (366 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि) के कुल मूल्य के 44 लाख ऋण (401 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि) का वितरण किया।

कंपनी का क्रेडिट व्यवसाय तीन मुख्य कार्यक्षेत्रों में फैला है – पेटीएम पोस्टपेड (अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें), व्यापारी ऋण और व्यक्तिगत ऋण है, जो कि तेजी से बढ़ा है। वितरित किए गए पोस्टपेड ऋणों की संख्या वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में वर्ष-दर-वर्ष 407 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पोस्टपेड ऋणों का मूल्य वर्ष-दर-वर्ष 408 प्रतिशत बढ़ा।

कंपनी के प्रवक्ता के अनुसार, वितरित किए गए व्यक्तिगत ऋणों की संख्या वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में वर्ष-दर-वर्ष 1,187 प्रतिशत बढ़ी, जबकि व्यक्तिगत ऋणों का मूल्य वर्ष-दर-वर्ष 1,925 प्रतिशत बढ़ा। हम क्रॉस-सेल की एक महत्वपूर्ण संभावना देखते हैं, क्योंकि 50 प्रतिशत से अधिक व्यक्तिगत ऋण हमारे मौजूदा पेटीएम पोस्टपेड यूजर्स को वितरित किए गए थे। 12-14 महीनों के औसत कार्यकाल के साथ औसत टिकट का आकार 80,000-90,000 के बीच रहा।

इसके अतिरिक्त, वितरित किए गए मर्चेंट ऋणों की संख्या वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही में वर्ष-दर-वर्ष 38 प्रतिशत बढ़ी, जबकि मर्चेंट ऋणों का मूल्य वर्ष-दर-वर्ष 128 प्रतिशत बढ़ा। नए ऋण लेने वालों को 25 प्रतिशत से अधिक ऋण वितरित किए गए। औसत टिकट का आकार लगातार बढ़ रहा है, जो अब 12-14 महीनों के औसत कार्यकाल के साथ 120,000-140,000 रुपये है। 25 प्रतिशत व्यापारियों ने एक से अधिक बार ऋण लिया है, जिसमें दोहराए गए ऋणों में बेहतर वृद्धि देखी गई है।

अंशदान लाभ में भी छह गुणा वृद्धि दर्ज की गई है।

कंपनी ने वित्त वर्ष 2021 और वित्त वर्ष 2022 के बीच अपने अंशदान या योगदान लाभ में एक सकारात्मक परिवर्तन देखा है। तीसरी तिमाही वित्त वर्ष 2022 के लिए 454 करोड़ रुपये का योगदान लाभ 560 प्रतिशत वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि का प्रतिनिधित्व करता है। राजस्व के प्रतिशत के रूप में कंपनी के खर्च में भी तेजी से कमी आ रही है।

राजनीति

असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

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असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”

मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।

उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”

उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।

आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।

इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।

सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।

यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।

मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।

मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।

सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।

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राष्ट्रीय

सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

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सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।

सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।

सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।

सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।

सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।

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राजनीति

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।

उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।

बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

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