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2022 में उत्तर प्रदेश के भाजपा विधायकों के टिकट के लिए पंचायत नतीजे अहम
उत्तर प्रदेश में हाल ही में हुए पंचायत चुनावों में जिन भाजपा विधायकों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में खराब प्रदर्शन किया है, वे साल 2022 के विधानसभा चुनावों में अपना टिकट खो सकते हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भाजपा नेतृत्व पंचायत चुनाव में पार्टी की हार को विधायकों के खराब प्रदर्शन का नतीजा मान रहा है।
मतलब यह कि 50 प्रतिशत से अधिक मौजूदा विधायकों को टिकट से वंचित रहना पड़ सकता है।
पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “पार्टी अयोध्या, मथुरा और काशी जैसी जगहों पर हार गई, जो हमारे गढ़ के रूप में जानी जाती हैं और हमारे विधायकों की अक्षमता के अलावा इसके लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं हो सकता।”
भाजपा ने पहली बार 3,050 जिला पंचायत वार्ड सदस्य सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची घोषित की थी। इसका दावा है कि उसने 900 से अधिक सीटें जीती हैं, जिसका अर्थ है कि भाजपा को 2,000 से अधिक सीटों का नुकसान हुआ है।
दूसरी ओर, भाजपा विधायक पंचायत की हार के लिए कोविड से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम न हो पाने के कारण योगी आदित्यनाथ सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ विधायक ने कहा, “जमीनी स्तर पर कोविड कुप्रबंधन निंदनीय रहा है और नौकरशाहों ने यह सुनिश्चित किया है कि चिकित्सा देखभाल आम आदमी तक नहीं पहुंचे। मुख्यमंत्री के सर्वोत्तम प्रयासों को लापरवाह अधिकारियों ने कमजोर कर दिया। जब निचले दर्जे के अधिकारी भी निर्वाचित प्रतिनिधियों की नहीं सुनते, तब दोष हम पर क्यों?”
पार्टी नेतृत्व को इस बात से भी नाराज बताया जाता है कि विधायकों और सांसदों ने कृषि कानूनों को लेकर किसानों के गुस्से को कम करने के लिए कुछ खास नहीं किया है।
एक भाजपा कार्यकर्ता ने कहा, “हम बार-बार सांसदों और विधायकों से किसानों तक पहुंचने और उन्हें कृषि कानून के फायदे समझाने के लिए कह रहे हैं, ताकि वे विपक्षी प्रचार के बहकावे में न आएं। लेकिन, ऐसा प्रतीत होता है कि उनमें से अधिकांश महामारी का हवाला देते हुए अपने घर से नहीं निकले।”
इस बीच, मुख्यमंत्री और नौकरशाह से एमएलसी बने अरविंद कुमार शर्मा के बीच हालिया बैठक के बाद राज्य कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें शुरू हो गई हैं। शर्मा को प्रधानमंत्री का करीबी और विश्वासपात्र माना जाता है।
शर्मा के जनवरी में भाजपा में शामिल होने और यूपी विधान परिषद के सदस्य बनाए जाने के बाद से मंत्रिपरिषद में शामिल होने की खबरें आ रही हैं।
हालांकि, पार्टी सूत्रों ने कहा कि फिलहाल कैबिनेट में बड़े फेरबदल की कोई संभावना नहीं है क्योंकि पार्टी और सरकार की पहली प्राथमिकता कोविड और ब्लैक फंगस संक्रमण से निपटना है।
इसके अलावा, जिन लोगों को मंत्रिमंडल से हटाया जाना है और जिन्हें शामिल किया जाना है, उनके नामों पर मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेताओं के बीच गहरा मतभेद प्रतीत होता है।
पार्टी पदाधिकारी ने कहा, “हालांकि, एक या दो मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है।”
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नीट पेपर लीक मामला : दिल्ली की अदालत ने आरोपी शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई

नई दिल्ली, 6 जून। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने शनिवार को नीट-यूजी 2026 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार आरोपी शुभम खैरनार को 15 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया। 13 मई को सीबीआई ने शुभम खैरनार को नासिक से गिरफ्तार किया था।
आरोपी शुभम खैरनार की शनिवार को न्यायिक हिरासत खत्म होने के बाद उसे राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया। मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने शुभम खैरनार की न्यायिक हिरासत 15 जून तक बढ़ाई।
शुभम खैरनार, महाराष्ट्र के नासिक जिले के नंदगांव का रहने वाला है। उसने मध्य प्रदेश की श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी से बीएएमएस (आयुर्वेद) की पढ़ाई की है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) का आरोप है कि उसने पुणे के एक संदिग्ध से यह पेपर 10 लाख में खरीदा और इसे हरियाणा के एक खरीदार को 15 लाख में बेच दिया।
बता दें कि नीट पेपर लीक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इस मामले में अब तक 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जानकारी सामने आई कि सीबीआई अधिकारियों ने शुक्रवार को कल्याण के म्हारल क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा से भी पूछताछ की।
सूत्रों ने बताया कि जांच टीम ने म्हारल इलाके में छात्रा के घर पहुंचकर उसका बयान दर्ज किया। सूत्रों का दावा है कि संबंधित छात्रा नाशिक की एक अन्य छात्रा के संपर्क में थी, जिसकी जांच के दौरान उसका मोबाइल नंबर जांच एजेंसियों के रिकॉर्ड में आया। इसी आधार पर सीबीआई ने उससे पूछताछ की है। हालांकि, सीबीआई की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
3 मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा में पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे। एजेंसियों की शुरुआती जांच में परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठे। इसी आधार पर परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया और अब इसे नए सिरे से आयोजित किया जाएगा। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।
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कथित बांग्लादेशियों के जाली और फर्जी जन्म प्रमाण पत्रों की जांच शुरू; किरीट सोमैया के आरोपों के बाद मुंबई पुलिस हरकत में।

मुंबई: भाजपा नेता किरीट सौम्या ने मुंबई में अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था, जिसके बाद मुंबई पुलिस और क्राइम ब्रांच भी एक्शन में आ गई है। मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक एसआईटी टीम बनाने को मंजूरी दे दी है और एक आदेश भी जारी किया है। किरीट सौम्या ने पहले इस मामले की जांच की मांग की थी। मुंबई पुलिस कमिश्नर ने अब एक आदेश जारी कर यह जिम्मेदारी मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी को दी है, जो इन मामलों की जांच करेगी। मुंबई शहर से अब तक एक हजार से ज्यादा बांग्लादेशी अप्रवासियों को निकाला जा चुका है, इसके बावजूद किरीट सौम्या ने आरोप लगाया है कि शहर में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं और यह देश की अखंडता के लिए खतरा है। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में धार्मिक नफरत फैलाना भी शुरू कर दिया है। मुंबई मुंबई पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बर्थ सर्टिफिकेट और शिकायत की जांच के लिए मुंबई क्राइम ब्रांच की एसआईटी बनाई है। इस एसआईटी के बारे में डिपार्टमेंटल ऑर्डर जारी करते हुए मुंबई पुलिस कमिश्नर ने साफ किया है कि इस टीम को जॉइंट पुलिस कमिश्नर क्राइम लक्ष्मी गौतम हेड करेंगी, जबकि एडिशनल कमिश्नर क्राइम मुंबई, एडिशनल कमिश्नर स्पेशल ब्रांच, डीसीपी डिटेक्शन क्राइम और असिस्टेंट कमिश्नर क्राइम इस टीम का हिस्सा हैं। ऑर्डर में कहा गया है कि यह एसआईटी टीम बड़े पैमाने पर फर्जी डॉक्यूमेंट्स और बर्थ सर्टिफिकेट में फर्जी सर्टिफिकेट की शिकायतें सामने आने के बाद बनाई गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का मकसद डॉक्यूमेंट्स की जांच करके जरूरी एक्शन लेना है। यह ऑर्डर मुंबई पुलिस कमिश्नर देविन भारती ने जारी किया है।
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नासिक: जालसाज अशोक खराट की जांच में अहम नतीजा, कई जगहों पर छापेमारी के दौरान जानवरों के अवशेष और महिलाओं के बाल बरामद, बली देने का संदेह

मुंबई: नासिक के धोखेबाज अशोक खरात की जांच में कई अहम खुलासे हुए हैं और SIT ने कई जगहों पर छापेमारी की है। SIT को यहां से जानवरों के अवशेष भी मिले हैं, लेकिन SIT ने यह जांच शुरू कर दी है कि क्या ये सच में जानवरों के अवशेष हैं या फिर मानव बलि का मामला है। इस मामले में SIT ने अवशेषों को अपने कब्जे में भी ले लिया है, वहीं शक है कि अशोक खरात अघोरी करता था और इसी प्रथा के चलते उसने मानव बलि भी दी होगी। इस बारे में SIT की जांच सही दिशा में जा रही है। नासिक के धोखेबाज अशोक खरात मामले में SIT की जांच में कई अहम नतीजे भी निकले हैं। SIT टीम की हेड तेजस्वी सतपोवे पहले भी कई हाई-प्रोफाइल मामलों पर काम कर चुकी हैं और उनकी जांच कर चुकी हैं। इसी तरह अब नासिक मामले में भी जांच चल रही है। तेजस्वी सतपोवे की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता किसान हैं। वह अहमदनगर के शेगांव की रहने वाली हैं। तेजस्वी सतपोवे ने अब खरात के पॉलिटिकल कनेक्शन की जांच शुरू कर दी है। अशोक खरात के कई बड़े नेताओं और अफसरों से भी कनेक्शन थे। महिला आयोग की हेड रूपाली चाकणकर से भी उनके कनेक्शन थे, इसी आधार पर रूपाली को इस्तीफा देना पड़ा था। SIT जांच में जानवरों के अवशेषों के साथ महिलाओं के बाल भी मिले थे। अब SIT टीमें पता लगा रही हैं कि ये बाल किसके हैं, क्या ये एक महिला के बाल हैं या कई महिलाओं के बाल हैं।
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