महाराष्ट्र
पालघर लिंचिंग : सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र पुलिस के आरोप-पत्र का परीक्षण करेगा
महाराष्ट्र के पालघर जिले में भीड़ द्वारा दो साधुओं की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र पुलिस के आरोप पत्र का परीक्षण करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से कथित पालघर लिंचिंग मामले में दाखिल आरोप-पत्र अदालत के सामने रखने को कहा है। न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी की खंडपीठ ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा कि इस मामले में पुलिस अफसरों की भूमिका पर क्या जांच हुई है और उन पर क्या कार्रवाई हुई है, क्योंकि लिंचिंग (हिंसक भीड़ द्वारा पिटाई) की घटना को महीनों बीत चुके हैं।
इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने महाराष्ट्र सरकार से जांच के विवरण मांगने के साथ ही जांच रिपोर्ट और आरोप पत्र भी मांगा।
जूना अखाड़ा के साधुओं और पालघर लिंचिंग में कथित तौर पर पीट-पीटकर मार दिए गए साधुओं के रिश्तेदारों द्वारा याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि उन्हें महाराष्ट्र सरकार या पुलिस पर कोई विश्वास नहीं है और उन्हें नहीं लगता कि पुलिस इस मामले की सही प्रकार से जांच कर रही है, क्योंकि उन्हें इसमें अपनी भागीदारी पर संदेह है।
मामले में मुख्य याचिकाकर्ता होने का दावा करने वाले अधिवक्ता शशांक शेखर झा ने पीठ के समक्ष दलील दी कि महाराष्ट्र साधुओं की भूमि है, लेकिन उन्हें पुलिस ने खुद ही भीड़ के हवाले कर दिया।
न्यायमूर्ति भूषण ने महाराष्ट्र सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता राहुल चिटनिस से पालघर में दो साधुओं और उनके ड्राइवर की लिंचिंग मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ की गई जांच में हुई प्रगति के बारे में पूछा। वहीं झा ने कहा कि राज्य सरकार को आरोप पत्र के प्रासंगिक अंश दाखिल करने होंगे और अब तक की जांच की प्रगति पर एक हलफनामा भी दाखिल करना होगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, सभी आरोप पत्रों को रिकॉर्ड पर आने दें और अदालत को तय करने दें कि क्या प्रासंगिक है और क्या नहीं।
शीर्ष अदालत ने मामले को तीन सप्ताह के बाद आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने 11 जून को पालघर में साधुओं की लिंचिंग की सीबीआई जांच की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताते हुए महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।
इसके साथ ही न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति एम. आर. शाह और न्यायमूर्ति छवी. रामसुब्रह्मण्यम की एक पीठ ने इस मामले में दायर की गई एक अलग याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से इस मामले की जांच कराने की मांग की गई है, ताकि सबूत नष्ट न हो सके।
उल्लेखनीय है कि इस घटना में मारे गए तीनों व्यक्ति कोविड-19 महामारी के दौरान लागू राष्ट्रव्यापी बंद के बीच मुंबई में कांदिवली से कार से गुजरात के सूरत जा रहे थे, जहां उन्हें एक अंतिम संस्कार में शामिल होना था। इनकी गाड़ी गढ़चिंचली गांव में 16 अप्रैल की रात में पुलिस की मौजूदगी में भीड़ ने रोक ली और उन पर हमला कर दिया। इस हमले में दोनों साधुओं सहित तीनों व्यक्ति मारे गए। मारे गए व्यक्तियों में 70 वर्षीय महाराज कल्पवृक्षगिरि, 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज और 30 वर्षीय ड्राइवर नीलेश तेलगड़े शामिल थे।
महाराष्ट्र
मुंबई: पुलिस ने करोड़ों रुपये की एपीके फाइल बनाने वाले जालसाज को किया गिरफ्तार, आरोपी के पास से पर्सनल बैंक डिटेल्स और डेटा भी बरामद हुआ

मुंबई: मुंबई महानगर गैस के नाम पर शिकायतकर्ता से धोखाधड़ी करने और एपीके फाइल तैयार करके जनता से ठगी करने वाले आरोपी को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार कर लिया गया है। मुंबई में महानगर गैस लिमिटेड के नाम से डीबी मार्ग पुलिस स्टेशन में शिकायतकर्ता को एक नकली एपीके फाइल भेजी गई थी और उसका मोबाइल हैक करके बैंक खाते से 70,500 रुपये उड़ा लिए गए थे। इस संबंध में मामला दर्ज किया गया और उसकी तलाश शुरू की गई। जब पुलिस ने मामले की जांच शुरू की तो उसका पता पश्चिम बंगाल में चला और उसे यहां से गिरफ्तार कर लिया गया। 26 साल का आरोपी झारखंड का रहने वाला है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसके कब्जे से 10 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 7 सिम कार्ड, 4 डेबिट क्रेडिट कार्ड, 963 एपीके फाइलें और 37,200 बैंक खातों का डेटा भी बरामद किया है। आरोपी ने तैयार की गई 91 एपीके फाइलें दूसरे आरोपियों को भी दी हैं। इस 91 एपीके फाइल के ज़रिए देश में 2993 और मुंबई और महाराष्ट्र में 512 पोर्टल पर शिकायतें दर्ज की गई हैं, जिसमें करीब 63 करोड़ 71 लाख 82 हज़ार रुपये की ठगी की गई है। आरोपी बहुत चालाक है, इसलिए वह एपीके फाइलें तैयार करने में एक्सपर्ट था। यहां एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, डीसीपी रग्सुधा ने कहा कि पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया आरोपी बैंक एपीके फाइलों के ज़रिए बैंक अकाउंट भी हैक करता था। इसके साथ ही, वह टेक्निकली भी अच्छा था। डीसीपी ने नागरिकों से अपील की है कि वे कोई भी अनजान फाइल न खोलें क्योंकि ऐसे ग्रुप इसी तरह से लोगों को ठगते हैं।
महाराष्ट्र
नेट पेपर लीक: गुजरात कनेक्शन रोहित पवार का नया दावा, एक्स पर ट्वीट के बाद सियासत तेज, एग्जाम पेपर से तीन दिन पहले पेपर लीक का खुलासा

मुंबई: दिल्ली जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी, नेट पेपर लीक मामले में नए खुलासे होने लगे हैं। पेपर लीक को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा और धमाका एनसीपी शरद पवार ग्रुप के नेता और विधायक रोहित पवार ने किया है। रोहित पवार ने एक्स पर एक ट्वीट में आरोप लगाया है कि पेपर लीक के तार गुजरात से जुड़े हैं क्योंकि नेट री-एग्जाम का पेपर तीन दिन पहले गुजरात पहुंचा था और पेपर गुजरात से लीक हुआ था। एक्स पर रोहित पवार के ट्वीट ने एक बार फिर बवाल मचा दिया है। रोहित पवार ने एक्स पर लिखा है कि नेट का पेपर तीन दिन पहले लीक हो गया था। यह खबर है। इसे साफ किया जाना चाहिए। मेरे पास इससे जुड़े सभी डॉक्यूमेंट्स, लिंक्स और व्हाट्सएप चैट्स हैं। इसे लेकर रोहित पवार ने ट्विटर एक्स पर एक ईमेल की कॉपी भी शेयर की है, जिसमें उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग की है, जिसमें सभी डॉक्यूमेंट्स का भी जिक्र है। एक तरफ संसद में पेपर लीक सुधार बिल पर चर्चा के दौरान हंगामा हो रहा है, तो दूसरी तरफ रोहित पवार ने दोबारा हो रहे नेट पेपर के लीक होने को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है, जिसके बाद इस मामले में राजनीति भी तेज हो गई है।
महाराष्ट्र
‘तीन साल में 1.21 लाख से ज्यादा एमएसएमई बंद’, सामना में शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र पर साधा निशाना

शिवसेना (यूबीटी) ने केंद्र पर देश के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने बुधवार को अपने मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में लोकसभा में पेश केंद्र सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले तीन वर्षों में देशभर में 1,21,805 एमएसएमई इकाइयां बंद हो गईं। इसके कारण लाखों युवाओं की नौकरियां चली गईं।
शिवसेना (यूबीटी) ने संपादकीय लिखा, “पिछले 12 वर्षों से देश में पुराने उद्योग बंद हो रहे हैं और नए उद्योग शुरू करने की बातें हो रही हैं। जिस शासन में युवाओं के हाथों में रोजगार देने के बजाय उनके मन में धार्मिक उन्माद भरा जाए, वहां इससे अलग परिणाम की उम्मीद कैसे की जा सकती है?”
संपादकीय के अनुसार, 2024 से 2026 के बीच 1,21,805 एमएसएमई इकाइयों ने अपना संचालन बंद कर दिया। पार्टी ने कहा कि एमएसएमई क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह कृषि के बाद देश में सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है और निर्यात में भी इसकी बड़ी भूमिका है। इसके बावजूद पिछले एक दशक में एमएसएमई इकाइयों के बंद होने की रफ्तार लगातार बढ़ती गई है।
राज्यों की बात करें तो महाराष्ट्र सबसे अधिक प्रभावित रहा, जहां 28,764 एमएसएमई इकाइयां बंद हुईं। इसके बाद तमिलनाडु में 14,176, गुजरात में 11,150 और राजस्थान में 9,881 इकाइयों ने हमेशा के लिए कामकाज बंद कर दिया। संपादकीय में कहा गया कि ये आंकड़े बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश और रोजगार सृजन के सरकारी दावों से मेल नहीं खाते।
संपादकीय में शिवसेना (यूबीटी) ने यह भी दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने स्टार्टअप और एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 35 लाख करोड़ रुपए से अधिक के ऋण उपलब्ध कराए। लेकिन इसके बावजूद उद्यमियों को बढ़ती परिचालन लागत, बाजार की चुनौतियों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।
संपादकीय में कहा गया कि राज्य सरकारों के नेता और केंद्रीय मंत्री दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नए निवेश और उद्योग लाने की कोशिश करते हैं, लेकिन पहले से संकट झेल रहे उद्योगों को दोबारा खड़ा करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जाते।
महाराष्ट्र का उदाहरण देते हुए पार्टी ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में राज्य में 75 लाख से अधिक नए उद्यम पंजीकृत हुए, लेकिन इसी दौरान 28 हजार से ज्यादा एमएसएमई इकाइयां बंद भी हो गईं। शिवसेना (यूबीटी) का कहना है कि बीमार उद्योगों के पुनर्वास के लिए कोई लक्षित योजना न होने से बैंकों के नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स बढ़ रहे हैं और हजारों युवाओं की नौकरियां अचानक खत्म हो रही हैं।
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि सरकार की ओर से इन उद्योगों को सहारा देने, दोबारा खड़ा करने या पुनर्जीवित करने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
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