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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी को दी बधाई
नई दिल्ली में आयोजित ऐतिहासिक ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के सफल समापन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी है। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान नवाचार, सहयोग और स्थिरता को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में सामने रखा। राजनाथ सिंह ने इस संबंध में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इन प्राथमिकताओं के तहत भारत ने ब्रिक्स सहयोग को सीधे आम लोगों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने कहा कि समावेशी और जन-केंद्रित दृष्टिकोण नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की प्रमुख पहचान बना। भारत ने यह संदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग का लाभ केवल सरकारों तक सीमित न रहकर आम लोगों तक भी पहुंचना चाहिए। रक्षा मंत्री ने ब्रिक्स 2026 नई दिल्ली घोषणा पर हस्ताक्षर को भी बड़ी उपलब्धि बताया है। सोमवार को इस विषय पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संदेश है।
उनके अनुसार, इस घोषणा ने साझा सहमति और सहयोग के लिए भारत की भूमिका को और मजबूत किया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत ने ग्लोबल साउथ को हाशिये पर रखने के बजाय उसे केंद्र में रखा है। भारत एक अधिक समावेशी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की वकालत कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ की आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उचित महत्व देना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है।
उन्होंने भारत की सभ्यतागत सोच ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ का भी उल्लेख किया। इस का उल्लेख करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने एक बार फिर दिखाया है कि नेतृत्व का मतलब सबसे ऊंची आवाज में बोलना नहीं, बल्कि सबसे मजबूत सहमति तैयार करना है। उन्होंने कहा कि जब भारत नेतृत्व करता है, तो दुनिया उसकी बात सुनती है।
राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई देते हुए कहा कि इस सम्मेलन ने वैश्विक मंच पर एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और प्रभाव का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
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गणेश चतुर्थी पर 14 सितंबर को बंद रहेंगे शेयर बाजार, मंगलवार को फिर शुरू होगा कारोबार

गणेश चतुर्थी के अवसर पर आज सोमवार, 14 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्क बीएसई और एनएसई, दोनों पर इक्विटी, इक्विटी डेरिवेटिव्स और करेंसी डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग बंद रहेगी। इसके बाद बाजार मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को फिर से खुलेगा।
शेयर बाजार अवकाश सूची के अनुसार, 14 सितंबर 2026 को गणेश चतुर्थी पर्व के चलते बाजार में ट्रेडिंग नहीं होगी। इस दौरान इक्विटी सेगमेंट, इक्विटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, एनडीएस-आरएसटी और ट्राई-पार्टी रेपो से जुड़े लेनदेन भी स्थगित रहेंगे।
हालांकि, कमोडिटी डेरिवेटिव्स और इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट (ईजीआर) सेगमेंट में आंशिक कारोबार होगा। इन बाजारों में सुबह का सत्र बंद रहेगा और शाम 5:00 बजे के बाद ट्रेडिंग फिर शुरू होगी। यानी कमोडिटी बाजार सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक बंद रहेगा।
सितंबर 2026 में शेयर बाजार के लिए केवल एक ही अवकाश निर्धारित है और वह 14 सितंबर (सोमवार) को गणेश चतुर्थी का अवकाश है।
गणेश चतुर्थी के बाद वर्ष 2026 में शेयर बाजार निम्नलिखित अवसरों पर बंद रहेंगे। इनमें 2 अक्टूबर (शुक्रवार) – महात्मा गांधी जयंती, 20 अक्टूबर (मंगलवार) – दशहरा, 10 नवंबर (मंगलवार) – दिवाली बलिप्रतिपदा, 24 नवंबर (मंगलवार) – प्रकाश गुरुपर्व श्री गुरु नानक देव और 25 दिसंबर (शुक्रवार) – क्रिसमस शामिल है।
अवकाश से पहले समाप्त हुए सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुआ। निफ्टी 50 में 2 प्रतिशत से अधिक की कमजोरी दर्ज हुई और यह 23,398 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स करीब 2.27 प्रतिशत फिसलकर 74,781 पर बंद हुआ। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड बाजार पर दबाव के प्रमुख कारण रहे।
इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म मध्याह्न काल में हुआ था, इसलिए इसी समय गणेश स्थापना और पूजा को सबसे शुभ माना जाता है।
इस प्रकार निवेशकों को अब अगले कारोबारी सत्र के लिए 15 सितंबर (मंगलवार) तक इंतजार करना होगा, जबकि कमोडिटी बाजार में शाम के सत्र में सीमित कारोबार जारी रहेगा।
व्यापार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ईरानी समकक्ष से की मुलाकात, भारत-ईरान आर्थिक सहयोग को नई गति देने पर हुई चर्चा

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को ईरान के वित्त मंत्री डॉ. सैयद अली मदनिजादेह के साथ बैठक कर दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत बनाने के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। यह मुलाकात राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान हुई, जहां दोनों पक्षों ने साझा हितों वाले क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ईरान की सक्रिय भागीदारी और वित्तीय ट्रैक के तहत हुई चर्चाओं में उसके रचनात्मक योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स जैसे मंच विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
बैठक में भारत और ईरान के बीच व्यापार, निवेश, वित्तीय सहयोग और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में साझेदारी को और गहरा करने के उपायों पर विचार हुआ। दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने और सहयोग के अवसरों की पहचान करने पर जोर दिया।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब भारत विभिन्न ब्रिक्स और साझेदार देशों के साथ आर्थिक एवं निवेश संबंधों को मजबूत करने के लिए सक्रिय पहल कर रहा है। बीते शनिवार को वित्त मंत्री सीतारमण ने एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (एआईआईबी) की अध्यक्ष जू जियायी से भी मुलाकात की थी। उस बैठक में भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन संपर्क परियोजनाओं को समर्थन देने, स्थानीय मुद्रा में वित्तपोषण बढ़ाने, निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहित करने और एआईआईबी की वैश्विक भूमिका को मजबूत बनाने पर चर्चा हुई थी।
इसके अलावा, वित्त मंत्री ने हाल ही में रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव के साथ भी बैठक की थी। दोनों पक्षों ने भारत-रूस आर्थिक सहयोग को और सशक्त बनाने, वित्तीय सेवाओं में साझेदारी बढ़ाने तथा द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर वार्ता को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी। प्रस्तावित बीआईटी का उद्देश्य दोनों देशों के बीच निवेश प्रवाह को बढ़ाना और आर्थिक जुड़ाव के लिए एक स्थिर एवं पारस्परिक रूप से लाभकारी ढांचा तैयार करना है।
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026 को सर्वसम्मति से अपनाए जाने की घोषणा की। समापन संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि यह घोषणा पत्र ब्रिक्स देशों के साझा संकल्पों को स्पष्ट दिशा देता है और अब सदस्य देशों की जिम्मेदारी है कि वे इन संकल्पों को ठोस परिणामों में बदलें।
प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स नेताओं के बीच हुई चर्चाओं को सार्थक और रचनात्मक बताते हुए कहा कि बदलती वैश्विक व्यवस्था को पुरानी संस्थागत संरचनाओं के माध्यम से प्रभावी ढंग से नहीं संभाला जा सकता। उन्होंने अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक वैश्विक शासन व्यवस्था की आवश्यकता पर भी बल दिया।
राष्ट्रीय समाचार
टेस्ला लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को अगली पीढ़ी की रोडस्टर को करेगी लॉन्च

इलेक्ट्रिक वाहन बनाने वाली कंपनी टेस्ला के सीईओ एलन मस्क ने घोषणा की कि कंपनी लंबी देरी के बाद एक अक्टूबर को रोडस्टर लॉन्च करेगी। टेस्ला रोडस्टर की पहली जनरेशन को करीब एक दशक पहले बाजार में उतारा गया था।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर टेस्ला ने एक पोस्ट में कहा, “गो फॉर लॉन्च”, साथ ही इसमें एक पोस्टर भी था, जिसमें इसकी तारीख एक अक्टूबर दी गई थी।
इस पोस्ट के रिप्लाई में मस्क ने कहा, “नई टेस्ला रोडस्टर 10.01 को लॉन्च की जाएगी।”
इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में अगस्त में दावा किया गया था कि टेस्ला नए डिजाइन वाली रोडस्टर को जल्द ही लॉन्च करने की योजना बना रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस इवेंट में स्पेसएक्स के साथ मिलकर बनाए गए कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स वाले लिमिटेड-एडिशन वर्जन का डेमो दिखाया जा सकता है।
टेस्ला ने सबसे पहले 2017 में अगली पीढ़ी की रोडस्टर लाने का ऐलान किया था और कहा था कि इसकी डिलीवरी 2020 में शुरू हो जाएगी, लेकिन इस प्रोग्राम में बार-बार देरी हुई है।
यह कदम टेस्ला द्वारा पिछले हफ्ते ऑस्टिन, टेक्सास के कुछ इलाकों में अपनी दो-सीटर साइबरकैब में राइड्स की सुविधा शुरू करने के बाद उठाया गया है। इस साइबरकैब में न तो स्टीयरिंग व्हील है और न ही पैडल। मस्क ने इस गाड़ी को टेस्ला को ड्राइवरलेस गाड़ियों के क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बनाने के लिए अहम बताया है।
खबरों के मुताबिक, नई रोडस्टर अब एक आम हाई-परफॉर्मेंस ईवी से बदलकर पूरी तरह से नई कार्बन-फाइबर हाइपरकार बन गई है।
नई रोडस्टर के लॉन्च से पहले टेस्ला के शेयर में तेजी देखी गई। बीते एक महीने में टेस्ला ने 7 प्रतिशत से ज्यादा का रिटर्न दिया है। हालांकि, सालाना आधार पर इसमें करीब 10 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है।
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