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Sunday,20-September-2026
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पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में चीन को दिया सोना, यूरेनियम खनन का अवैध ठेका

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Gilgit

पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए और अपने स्वयं के संविधान की अवहेलना करते हुए, कब्जे वाले गिलगित बाल्टिस्तान (जीबी) क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों को लूटने के लिए चीनी खनन कंपनियों को खुली छूट दे दी है। यही नहीं, इस्लामाबाद ने डियामर डिवीजन में एक बड़ा बांध बनाने के लिए बीजिंग के साथ अरबों डॉलर के एक अनुबंध पर भी हस्ताक्षर किया है, जबकि यह इलाका कानूनी रूप से भारत का है।

पाकिस्तान सरकार ने गिलगित और बाल्टिस्तान में चीनी फर्मों को अवैध रूप से सोना, यूरेनियम और मोलिब्डेनम का खनन करने के लिए 2,000 से अधिक लीज दे दी है। ऐसा करते हुए इमरान खान सरकार ने पर्यावरण के मानदंडों को भी हवा में उड़ा दिया है।

अवैध खननों के इस मामले का खुलासा निर्वासित नेता और गिलगित बाल्टिस्तान क्षेत्र के एक प्रमुख राजनीतिक संगठन यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (यूकेपीएनपी) के मुख्य प्रवक्ता ने किया है।

अजीज ने फोन पर आईएएनएस को बताया, ‘हम अगले महीने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के सम्मेलन में प्राकृतिक संसाधनों को लूटने की पाकिस्तान की इस साजिश का पदार्फाश करेंगे।”

पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 257 का हवाला देते हुए अजीज ने कहा कि इस्लामाबाद में सरकार को जीबी क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों को लूटने का कोई अधिकार नहीं है।

अजीज ने आगे कहा, “यहां नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मीडिया रिपोर्ट नहीं कर सकता है। जीबी क्षेत्र में आवाज उठाने वाले लोगों को दंडित किया जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में जब कोई भी किसी निर्णय का विरोध नहीं कर सकता है तो प्राकृतिक संसाधनों को लूटा जा रहा है। पाकिस्तान चीन के हाथों का खिलौना बन गया है।”

स्विट्जरलैंड के जिनेवा में रहने वाले यूकेपीएमपी नेता ने आगे कहा, “स्थानीय लोगों से सलाह नहीं ली जाती है। उनके हितों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है। जीबी क्षेत्र में चीन को इस तरह उपकृत करने का ये कदम अंतरराष्ट्रीय कानूनों का भी उल्लंघन है।”

बता दें कि उत्तरी क्षेत्रों में गिलगित, बाल्टिस्तान और डियामर में मीडिया को पूरी तरह सेंसर किया गया है। इसे पाक सरकार द्वारा नियंत्रित किया जाता है।

हाल ही में चीन की सरकारी फर्म और पाकिस्तान आर्मी की एक विंग के बीच डियामर भाषा बांध बनाने के लिए 442 बिलियन रुपये का जॉइंट वेंचर भी हुआ है।

गिलगित बाल्टिस्तान में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर पाकिस्तान 45,000 मेगावाट बिजली पैदा करने की योजना बना रहा है। ये बिजली पाकिस्तान के लोगों के लिए इस्तेमाल की जाएगी ।

बता दें कि जीबी क्षेत्र में एक स्थानीय सरकार है लेकिन इसका कंट्रोल पाकिस्तान से होता है ।

राष्ट्रीय समाचार

भारतीय सेना के जांबाज डॉग्स ने अमेरिकी सैनिकों के सामने दिखाया कौशल

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भारतीय सेना के प्रशिक्षित सैन्य डॉग भी भारत और अमेरिका के बीच चल रहे संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का हिस्सा बने हैं। राइस, विक्टर, जैक और राउडी नाम के चार सैन्य डॉग्स ने विशेष अभियानों में सैनिकों की मदद करने की क्षमता का प्रदर्शन किया।

अभ्यास के दौरान इन डॉग्स ने एक संदिग्ध ठिकाने में प्रवेश की कार्रवाई और रस्सी के सहारे नीचे उतरने जैसे अभ्यासों में हिस्सा लिया। यहां अमेरिकी सैनिकों को भारतीय सेना के सैन्य डॉग्स की ट्रेनिंग, फुर्ती और कठिन सामरिक परिस्थितियों में सैनिकों के साथ काम करने की क्षमता को करीब से देखने का अवसर मिला। इन चारों सैन्य डॉग्स की नस्ल भी अलग-अलग है।

राउडी और विक्टर स्वदेशी रामपुर हाउंड नस्ल के हैं। भारतीय सेना सैन्य भूमिकाओं में इस भारतीय नस्ल का इस्तेमाल लगातार बढ़ा रही है। जैक बेल्जियन मैलिनॉइस नस्ल का है, जबकि राइस लैब्राडोर रिट्रीवर है। इन सैन्य डॉग्स के पास भारत की उत्तरी और पूर्वी सीमाओं पर तैनाती का अनुभव भी है। रामपुर हाउंड नस्ल के डॉग्स ने इससे पहले मेघालय के उमरोई में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया था। इसके बाद उन्हें मणिपुर सीमा पर तैनात किया गया, जहां उन्होंने आईईडी यानी इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का सफलतापूर्वक पता लगाया।

सेना के मुताबिक, इनके भाई-बहनों को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जालंधर और अमृतसर सेक्टरों में भी तैनात किया गया था। इससे अलग-अलग इलाकों और परिस्थितियों में इस सैन्य डॉग टीम की उपयोगिता और अनुकूलन क्षमता सामने आई। ‘युद्ध अभ्यास 2026’ में इनकी भागीदारी एक बार फिर दिखाती है कि आधुनिक सैन्य अभियानों में प्रशिक्षित सैन्य डॉग किस तरह सैनिकों के महत्वपूर्ण साथी बन चुके हैं।

खास तौर पर स्वदेशी रामपुर हाउंड जैसी नस्लों का बढ़ता इस्तेमाल भारतीय सेना की अपनी सैन्य क्षमता में विविधता और स्वदेशी विकल्पों को भी दर्शाता है। कठिन परिस्थितियों में डॉग्स और उनके संचालकों के बीच तालमेल इस पूरी व्यवस्था की सबसे अहम कड़ी है।

गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच युद्ध अभ्यास का 22वां संस्करण उत्तराखंड के बर्फीले पहाड़ी क्षेत्र औली से लेकर राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में जारी है। अभ्यास में भारत और अमेरिका के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस अभ्यास में आधुनिक तकनीक भी केंद्र में है। सैनिक निगरानी और टोह लेने के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों का इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

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राजनीति

एसआईआर पर कांग्रेस का केंद्र पर आरोप, कहा- ‘शाह-प्रेरित वोटर हटाओ अभियान’

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कांग्रेस ने रविवार को आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट में चल रहे ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (एसआईआर) के कारण बड़ी संख्या में वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। पार्टी ने इस प्रक्रिया को “गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर वोटरों को हटाने” की कार्रवाई बताया और दावा किया कि यह “संविधान पर हमला” है।

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट को वेरिफाई और अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर का तीसरा चरण शुरू किया है, जिसमें 36.73 करोड़ से अधिक वोटर शामिल हैं।

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया कि तीसरे चरण में शामिल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग हर तीन में से एक वोटर का नाम या तो वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था या उनके नाम हटाए जाने की संभावना थी।

उन्होंने एक बयान में कहा, “नाम हटाने की दर 17 प्रतिशत से अधिक है। इसके अलावा, 5.43 करोड़ वोटरों को नोटिस भेजकर वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए हैं। नाम हटाए जाने का जोखिम 15 प्रतिशत और है।”

उन्होंने दावा किया कि चल रहे तीसरे चरण में 12 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल 36.06 करोड़ मतदाताओं में से 6.18 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।

रमेश ने आगे दावा किया कि एसआईआर के पहले दो चरणों के परिणामस्वरूप 7.8 करोड़ नाम हटा दिए गए और नाम हटाने की दर संशोधन प्रक्रिया से पहले मतदाता सूची का 13 प्रतिशत थी।

चुनाव आयोग के अनुसार, एसआईआर के तीसरे चरण का आदेश 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में दिया गया था, जिसमें 3.94 लाख से अधिक बूथ लेवल अधिकारियों ने 36.73 करोड़ से अधिक मतदाताओं का घर-घर जाकर सत्यापन किया।

रमेश ने कहा, “इस प्रकार, चौंकाने वाली बात यह है कि 32 प्रतिशत (यानी लगभग हर तीन में से एक) मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं या उनके नाम हटाए जाने का खतरा है।”

कांग्रेस नेता के बताए आंकड़ों के मुताबिक, जिन वोटरों के नाम हटा दिए गए थे या जिनके नाम हटने का खतरा था, उनका कुल अनुपात दिल्ली में 53.73, चंडीगढ़ में 52.58, तेलंगाना में 48.90, झारखंड में 39.57, हरियाणा में 37.5, उत्तराखंड में 35.71, मेघालय में 35.36 और महाराष्ट्र में 33.88 फीसदी था। कर्नाटक में यह आंकड़ा 27.6, ओडिशा में 23.67, आंध्र प्रदेश में 21.17 और पंजाब में 15.23 फीसदी था।

रमेश ने आरोप लगाया कि नाम हटाने की इस प्रक्रिया का असर समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों पर बहुत ज्यादा पड़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ज्यादातर बड़े राज्यों में पुरुषों के मुकाबले ज्यादा महिलाओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं।

उन्होंने सभी राज्यों में उन वोटरों की लिस्ट सार्वजनिक न करने के लिए चुनाव आयोग की आलोचना की, जिनके नाम हटाए जा सकते थे। उन्होंने कहा कि दिल्ली ने जनता के दबाव के बाद 19 सितंबर को अपनी लिस्ट जारी की।

रमेश ने कहा, “यह अनुपात बहुत ज़्यादा है और यह पूरी एसआईआर प्रक्रिया में ढांचागत कमियों को दिखाता है।”

कांग्रेस नेता ने आगे आरोप लगाया कि एसाईआर प्रक्रिया ने असल में पात्रता साबित करने की जिम्मेदारी नागरिकों पर डाल दी है, क्योंकि उनसे ऐसे अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जा रहे हैं जो शायद राज्य ने उन्हें कभी दिए ही न हों।

उन्होंने कहा, “एक ऐसा टेस्ट जिसे अधिकतर नागरिक पास नहीं कर सकते, वह सिर्फ ‘बाहर करने की मशीन’ है।”

रमेश ने इस प्रक्रिया के तहत दस्तावेजों की जरूरतों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया उन नागरिकों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती है जो वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखना चाहते हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर इशारा करते हुए रमेश ने कहा, “एसआईआर असल में बड़े पैमाने पर मतदाताओं का नाम शाह ने हटाने के लिए उकसाया है। यह हमारे संविधान पर हमला है।”

एसआईआर प्रोसेस के तीसरे चरण में आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिज़ोरम, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, त्रिपुरा, तेलंगाना और उत्तराखंड के साथ-साथ दिल्ली, चंडीगढ़ और दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव भी शामिल हैं।

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महाराष्ट्र

मुंबई : लालबाग में करंट लगने से बच्ची समेत दो की मौत मामले में एफआईआर दर्ज

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मुंबई के लालबाग इलाके में रविवार देर रात 2 बजे बड़ा हादसा हो गया। गणपति पंडाल के बाहर करंट लगने से 8 साल की बच्ची समेत 2 लोगों की मौत हो गई जबकि 4 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

यह घटना लालबाग के कालाचौकी क्षेत्र में दत्ताराम लाड मार्ग पर हुई। पुलिस के अनुसार, आस्था हॉस्पिटल के पास लगे पेप्सी-कोला स्टॉल के एक खुले तार से करंट फैल गया। यह हादसा कालाचौकी विभाग सार्वजनिक उत्सव मंडल के पास हुआ, जहां गणपति उत्सव के दौरान भारी भीड़ जमा थी। इसी बीच अचानक करंट फैलने से वहां अफरा-तफरी मच गई।

कालाचौकी पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, यह घटना शनिवार-रविवार दरमियानी रात 2 बजे हुई। खुले तार के संपर्क में आने से 8 साल की बच्ची रागिनी और उसके पास खड़े अन्य लोग करंट की चपेट में आ गए। बच्ची को मसीना हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, 33 साल की सुजाता थोराटी नामक महिला की ग्लोबल हॉस्पिटल में मौत हो गई। हादसे में घायल हुए 4 अन्य लोगों को इलाज के लिए भर्ती कराया गया है।

पुलिस ने स्टॉल संचालक कमल शेट्टी के खिलाफ लापरवाही का आरोप लगाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 125(बी) के तहत एफआईआर दर्ज की है और जांच शुरू कर दी है।

बताया जा रहा है कि गणपति उत्सव के कारण लालबाग इलाके में देर रात भी लोगों की काफी भीड़ थी। पंडाल के बाहर लगे स्टॉल में बिजली के तारों में लापरवाही बरती गई थी, जिसके चलते यह दर्दनाक हादसा हुआ।

पुलिस मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि बिजली कनेक्शन में किस तरह की लापरवाही हुई थी।

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