अंतरराष्ट्रीय समाचार
पेट्रोल संकट से जूझ रहा पाकिस्तान
इस्लामाबाद, 11 फरवरी : पाकिस्तान पेट्रोल संकट का सामना कर रहा है। 50 में से केवल चार प्रमुख तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के पास पेट्रोल का 90 प्रतिशत स्टॉक है, जबकि बाकी विनिमय घाटे के डर से ईंधन का आयात नहीं कर रही हैं। पंजाब प्रांत संकट की मार झेल रहा है और देश में पेट्रोल की आपूर्ति कम हो रही है। द न्यूज ने बताया कि प्रांत के प्रमुख और छोटे शहरों, कस्बों और गांवों में प्रमुख ईंधन नहीं है।
15 फरवरी को होने वाली अगले पखवाड़े की समीक्षा में इसकी कीमत में वृद्धि की प्रत्याशा में लोगों को पेट्रोल जमा करने से रोकने की सरकार की चेतावनी के बावजूद पिछले कुछ दिनों में संकट और गहरा गया है।
देश के तेल क्षेत्र के सूत्रों ने सीधे तौर पर तेल विपणन कंपनियों, पेट्रोलियम डीलरों और सरकार को दोषी ठहराया है। उन्होंने बताया कि अधिकांश कंपनियां विनिमय घाटे को देखते हुए पेट्रोल का आयात नहीं कर रही थीं, जिसे सरकार ने केवल आंशिक रूप से समायोजित किया था।
द न्यूज ने बताया कि उन्होंने कहा कि छोटे ओएमसी के पास पेट्रोल का 20 दिनों का स्टॉक भी नहीं था क्योंकि वे विनिमय दर के नुकसान के डर से ईंधन का आयात नहीं कर रहे थे।
केवल पाकिस्तान स्टेट ऑयल (पीएसओ), शेल पाकिस्तान, टोटल पार्को और एटॉक पेट्रोलियम पेट्रोल का आयात कर रहे थे और 90 प्रतिशत स्टॉक इन चार कंपनियों के पास है। देश में लगभग 50 ओएमसी काम कर रहे हैं और कुछ के पास सीमित स्टॉक है जबकि अन्य सूख गए हैं।
ओएमसी के एक अधिकारी ने कहा, “पेट्रोल का आयात कौन करेगा, जब ऐसी आशंकाएं हैं कि विनिमय दर के नुकसान को समायोजित नहीं किया जाएगा और वापस भुगतान करने में समय लगेगा।”
द न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने कहा कि अधिकांश ओएमसी द्वारा पेट्रोल के कम आयात के अलावा, पेट्रोलियम डीलरों के पास फील्ड डे भी था और फरवरी के मध्य तक कीमतों में अपेक्षित वृद्धि के मद्देनजर पेट्रोल की जमाखोरी में शामिल थे।
पेट्रोल की पूर्व-रिफाइनरी कीमत में मुख्य रूप से रुपये के मुकाबले डॉलर में भारी वृद्धि के कारण वृद्धि दिखाई दे रही है। तेल क्षेत्र के लोगों ने कहा कि डीलर अप्रत्याशित लाभ कमाने के लिए जमाखोरी में लिप्त होकर स्थिति का फायदा उठा रहे हैं।
द न्यूज ने बताया कि सरकार की नीतियों ने भी पेट्रोल की कमी में विशेष रूप से पेट्रोलियम उत्पादों पर कराधान से संबंधित योगदान दिया है।
डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, पर्याप्त उपलब्धता के दावों और जमाखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की सरकार की चेतावनी के बीच, पूरे पंजाब में पेट्रोल की कमी बनी हुई है, जिससे आम जनता का सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, दूरदराज के इलाकों में स्थिति सबसे खराब है, जहां पंपों में पिछले एक महीने से आपूर्ति नहीं है।
दूसरी ओर, पाकिस्तान पेट्रोलियम डीलर एसोसिएशन (पीपीडीए) ने सभी तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को मांग के अनुसार पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित नहीं करने के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जिससे पंप सूख रहे हैं और मोटर चालकों के पास शहरों में पेट्रोल खोजने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
दावे को खारिज करते हुए, ओएमसी एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान (ओएमएपी) ने कहा कि कुछ पंप पेट्रोल की जमाखोरी में शामिल थे और पेट्रोलियम की कीमतों में अपेक्षित वृद्धि को ध्यान में रखते हुए अधिक मुनाफा कमाने के लिए कृत्रिम कमी पैदा कर रहे थे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान संघर्ष पर रूस फिक्रमंद, दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील

मास्को, 10 जून: रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता जताई है और दोनों पक्षों से तत्काल संयम बरतने की अपील की है। यह तनाव 8 अप्रैल के संघर्षविराम के बाद सबसे गंभीर माना जा रहा है। अमेरिका इसे आत्मरक्षा में उठाया गया कदम तो ईरान जवाबी कार्रवाई बता रहा है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि रूस “नए दौर के अमेरिका-ईरान सशस्त्र संघर्ष को लेकर अत्यंत चिंतित” है। उन्होंने इसे “बिना उकसावे के अमेरिका-इजरायल की ईरान के खिलाफ कार्रवाई” बताते हुए स्थिति को गंभीर करार दिया।
जखारोवा ने कहा कि रूस दोनों पक्षों से अपील करता है कि वे संयम बरतें और तुरंत सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकें, ताकि स्थिति और अधिक न बिगड़े।
रूस और ईरान के संबंध लंबे समय से अमेरिका की मध्य एशिया, अफगानिस्तान और इराक में नीतियों को लेकर साझा अविश्वास पर आधारित रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, दोनों देशों के बीच यह रणनीतिक साझेदारी समय के साथ और मजबूत हुई है।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कई मौकों पर ईरान के साथ संबंधों को “रणनीतिक प्राथमिकता” बता चुके हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है।
इस बयान के साथ ही रूस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वह क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने और कूटनीतिक समाधान निकालने की दिशा में प्रयास तेज करे, ताकि पश्चिम एशिया में स्थिति नियंत्रण से बाहर न हो।
वहीं, चीन ने भी चिंता जाहिर करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लीन जिआन ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, “सभी पक्षों को संयम बनाए रखने की जरूरत है, संघर्ष को और बढ़ाने से बचना चाहिए। इससे क्षेत्र में हालात बनेंगे नहीं बल्कि और बिगड़ेंगे ही।”
इस बीच, ईरान की ओर से खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए गए। आईआरजीसी ने इसकी जिम्मेदारी ली और इसे अमेरिकी कार्रवाई का जवाब बताया। बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर किए गए ईरानी हमलों की यूएई, कतर समेत तमाम खाड़ी देशों ने आलोचना की है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान पर और बड़े हमलों की चेतावनी, ट्रंप बोले-‘बातचीत में देरी की कीमत चुकानी होगी’

वाशिंगटन, 10 जून: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर अपना रुख और सख्त करते हुए हमले और तेज करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए कहा कि अगर तेहरान जल्द किसी समझौते पर नहीं पहुंचता, तो अमेरिका उसके महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों को निशाना बना सकता है।
फॉक्स न्यूज को दिए एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, ” मैं ईरान के बिजली संयंत्रों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचागत सुविधाओं पर नए हमलों की मंजूरी देने पर विचार कर रहा हूं।” उनके अनुसार, ईरान समझौते के लिए बातचीत में जरूरत से ज्यादा समय ले रहा है।
ट्रंप का ये बयान पश्चिम एशिया में बदलते और बढ़ते तनाव के बीच आया है। पिछले 48 घंटों में हवाई हमलों में तेजी आई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बुधवार को ही ट्रुथ सोशल पर एक कड़ा संदेश भी जारी किया। उन्होंने लिखा कि ईरान ने समझौते के लिए बातचीत में बहुत अधिक समय गंवा दिया है और अब उसे इसकी “कीमत चुकानी होगी।” दावा ये भी किया कि ईरान की मिलिट्री, नेवी और एयरफोर्स पूरी तरह तबाह हो चुकी है। ईरान सिर्फ बात करता है हालांकि कुछ करता नहीं है। मध्य पूर्व में सबको धमकाने वाले की हिम्मत टूट चुकी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने बयान में यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित कार्रवाई किस प्रकार की होगी या अमेरिका आगे कौन से कदम उठाने जा रहा है। हालांकि फॉक्स से उन्होंने एक बार फिर ईरानी पुलों और आधारभूत ढांचों को बर्बाद करने की बात जरूर कही।
अगर अमेरिका वास्तव में ईरान के ऊर्जा और परिवहन ढांचे को निशाना बनाता है, तो इसका प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
दूसरी ओर, ईरान लगातार कहता रहा है कि वह बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा और किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब देने के लिए तैयार है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती बयानबाजी ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल चीन और रूस समेत कई देशों ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने क्यों उठाया पाकिस्तान के ‘डीप स्टेट’ का मुद्दा? नफरत की फैक्ट्री चलाने का आरोप

संयुक्त राष्ट्र, 9 जून: पाकिस्तान अपनी डीप स्टेट सत्ता और संसाधनों पर अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए अपने नागरिकों के मन में भारत के प्रति नफरत के बीज बो रहा है संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने आरोप लगाया कि इस्लामाबाद एक संगठित नफरत की फैक्ट्री चला रहा है, जो धार्मिक शब्दावली का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह कर रहा है। साथ ही सुरक्षा परिषद में आतंकवादी संगठनों का नाम लेकर भारत ने वैश्विक समुदाय पर दबाव बनाने की कोशिश की कि आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरे मानदंड न अपनाए जाएं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सोमवार को भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, ”अपनी असफलताओं के लिए पड़ोसियों को दोष देना पाकिस्तान की पुरानी आदत है और दुनिया को गुमराह करने की यह कोशिश असफल साबित होगी।”
पी. हरीश ने पाकिस्तान द्वारा अपने देश के भीतर सक्रिय कुछ समूहों को “फितना अल हिंदुस्तान” कहे जाने की आलोचना करते हुए इसे धार्मिक शब्दावली की आड़ में फैलाया जा रहा सरकारी दुष्प्रचार बताया।
‘फितना’ एक अरबी धार्मिक शब्द है, जिसका अर्थ ‘विद्रोह’ या ‘मूर्तिपूजा’ भी हो सकता है।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा, पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान देश के राजनीतिक और आर्थिक संकटों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारत विरोधी माहौल तैयार करते हैं। हरीश ने कहा कि पाकिस्तान की “डीप स्टेट” अपने नागरिकों को लगातार भारत के खिलाफ उकसाकर सत्ता पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती है।
उन्होंने ‘डीप स्टेट’ का उल्लेख पाकिस्तान की सेना की ओर इशारा करते हुए किया, जिसने पिछले साल संवैधानिक संशोधनों के जरिए राजनीति पर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली।
उन्होंने कहा, ”27वें संवैधानिक संशोधन के जरिए सेना द्वारा किया गया वास्तविक तख्तापलट इसका सबसे हालिया उदाहरण है।”
यह संशोधन नवंबर में किया गया था, जिसके बाद सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लगभग कानून से ऊपर की स्थिति मिल गई और सरकार पर उनका नियंत्रण और मजबूत हो गया।
अफगानिस्तान पर सुरक्षा परिषद की चर्चा के दौरान हरिश ने पाकिस्तान द्वारा सुविधायुक्त आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
अफगानिस्तान पर आयोजित सुरक्षा परिषद की बैठक में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया। भारत ने कहा कि आईएसआईएल (इस्लामिक स्टेट), अलकायदा, लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और इनके सहयोगी संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर कार्रवाई करनी चाहिए।
लश्कर-ए-तैयबा के सहयोगी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए उस हमले की जिम्मेदारी ली थी, जिसमें एक पर्यटन स्थल पर 24 हिंदू और एक ईसाई की मौत हुई थी।
संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब दक्षिण एशिया में सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा-पार गतिविधियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज है।
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