राजनीति
बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर जताया दुख, बिना शर्त माफी की मांग
नई दिल्ली, 16 अगस्त: भाजपा विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर गहरा दुख जताया है।
नॉर्थ 24 परगना जिले के नैहाटी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चटर्जी ने अपने पत्र में मांग की कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की मशहूर रचना का पूरा वर्जन गाने से जुड़ी घटना के लिए भारत के नागरिकों और खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना शर्त माफी मांगी जाए।
सुमित्रो चटर्जी ने लिखा, “जब पूरा देश मातृभूमि की पूजा में लगा हुआ था, तब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में हुई घटनाएं सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराना थीं।”
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस कार्यकर्ता वंदे मातरम का पूरा वर्जन गा रहे थे, तो सोनिया गांधी की “साफ दिख रही बेचैनी, नाराजगी और उसे रोकने की बार-बार की कोशिशों” से उन्हें बहुत दुख हुआ।
चटर्जी ने लिखा, “एक आम भारतीय नागरिक, एक देशभक्त और सबसे बढ़कर ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार का सीधा वंशज होने के नाते, मैं आज गहरे दुख, खालीपन और पीड़ा के साथ यह पत्र लिख रहा हूं।”
इस गीत के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए चटर्जी ने अरबिंदो का हवाला दिया और लिखा, ‘यह मंत्र दिया गया और एक ही दिन में पूरा देश देशभक्ति के धर्म में दीक्षित हो गया। अरबिंदो ने इसे सिर्फ एक मंत्र नहीं, बल्कि देशभक्ति का धर्म बताया था।
चटर्जी ने कहा कि इस मंत्र से प्रेरणा लेकर खुदीराम बोस समेत अनगिनत निडर क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने लिखा, “आज स्वतंत्र भारत की धरती पर उसी मंत्र ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण पाठ के प्रति आपकी असहिष्णुता उन लाखों शहीदों के बलिदान का गंभीर अपमान प्रतीत होती है।”
उन्होंने आजादी की लड़ाई में ‘वंदे मातरम’ की भूमिका को भी याद किया और राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्र पाल का जिक्र किया, जिन्होंने लिखा था कि बंगाल के बंटवारे के बाद यह गीत हर क्रांतिकारी की जुबान पर था। चटर्जी ने कहा कि ‘स्वदेशी’, ‘बहिष्कार’ और ‘वंदे मातरम’ आजादी की लड़ाई के जीते-जागते पर्याय बन गए थे।
भाजपा विधायक ने 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा पूरे गीत को गाए जाने, 1909 में राजद्रोह के मुकदमे के दौरान बाल गंगाधर तिलक द्वारा समर्थकों को इसे गाते हुए सुनने और 1938 में उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवादी छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया।
उन्होंने 1896 में कलकत्ता में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने का भी जिक्र किया और गीत के “जादुई शब्दों” तथा बाधाओं को तोड़ने और दिलों को छूने की उनकी ताकत के बारे में टैगोर की बातों को दोहराया।
राजनीति
ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर वामपंथी दलों और छात्र समूहों का चुनाव आयोग तक मार्च

शुक्रवार को कई वामपंथी संगठनों, छात्र नेताओं और नागरिक समाज के सदस्यों ने राष्ट्रीय राजधानी में भारी सुरक्षा के बीच भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) के मुख्यालय की ओर विरोध मार्च निकाला। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के आरोप में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।
वामपंथी अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसएफ) और अखिल भारतीय युवा संघ (एआईवाईएफ) के सदस्यों सहित प्रतिभागी दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास एकत्र हुए और पटेल चौक के पास स्थित चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च किया।
सीपीआई (एम) नेता वृंदा करात, सीपीआई नेता पी. संदोष कुमार और राजनीतिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
पत्रकारों से बात करते हुए यादव ने कहा कि विरोध प्रदर्शन बिना रुके जारी रहेंगे। अगर आप एक जंतर-मंतर बंद कर देंगे, तो सैकड़ों जंतर-मंतर बन जाएंगे। आप एक व्यक्ति को चुप करा सकते हैं, लेकिन जनता को नहीं। यह आंदोलन अपने स्वरूप में जारी रहेगा क्योंकि यह इस देश की जनता के सबसे बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा है।
पी. संदोष ने आगे कहा कि आने वाले दिनों में हम अपना आंदोलन और तेज करेंगे, और बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होंगे। हम ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तक अपना आंदोलन जारी रखेंगे। उन्हें कोई नहीं बचा सकता।
ईसीआई मुख्यालय के बाहर भी भारी सुरक्षा बल तैनात थे, और पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया।
इससे पहले दिन में, दिल्ली यातायात पुलिस ने विरोध मार्च के मद्देनजर यात्रियों को प्रभावित मार्गों से बचने की सलाह दी थी।
दिल्ली यातायात पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि आज बंगला साहिब गुरुद्वारा से जंतर-मंतर की ओर बड़ी संख्या में लोगों के आने की आशंका के मद्देनजर, दोपहर 1:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक यातायात में बदलाव किया जाएगा।
इसमें कहा गया कि यात्रियों को प्रभावित सड़कों से बचने, अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने और यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा, यातायात पुलिस ने वाहन चालकों से धैर्य रखने, नियमों का पालन करने और क्षेत्र में तैनात यातायात कर्मियों के साथ सहयोग करने की अपील की। इसमें कहा गया कि भीड़भाड़ से बचने के लिए कृपया वैकल्पिक मार्गों के संकेतों और यातायात निर्देशों का पालन करें।
मुख्य चुनाव आयुक्त कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों ने तब और जोर पकड़ लिया जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयोग के भीतर एसआईआर से संबंधित प्रक्रियाओं को लेकर मतभेद हैं।
इस महीने की शुरुआत में, मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व विपक्षी इंडिया ब्लॉक और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने किया, जिसके चलते कई नेताओं को कुछ समय के लिए हिरासत में लिया गया।
राष्ट्रीय समाचार
विश्व विकास सूचना दिवस की ऐसे हुई थी शुरुआत, 1972 में संयुक्त राष्ट्र ने दिया था प्रस्ताव

विश्व विकास सूचना दिवस हर साल 24 अक्टूबर को मनाया जाता है। यह सूचना और संचार तकनीक (आईसीटी), इंटरनेट और मीडिया के माध्यम से विकास संबंधी जानकारी को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर देता है।
दरअसल, समावेशी सूचना तंत्र के सकारात्मक प्रभाव का सबसे बड़ा प्रमाण भारत का ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (डीपीआई) है, जहां एकीकृत भुगतान प्रणाली (यूपीआई) ने वर्ष 2016 में मात्र 0.01 करोड़ मासिक लेनदेन से शुरुआत करके वर्ष 2025 तक 2,000 करोड़ से अधिक मासिक लेनदेन का ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।
ऐतिहासिक दृष्टि से 24 अक्टूबर को केवल ‘संयुक्त राष्ट्र दिवस’ ही नहीं मनाया जाता, बल्कि वर्ष 1970 में इसी दिन अपनाई गई ‘द्वितीय संयुक्त राष्ट्र विकास दशक की अंतरराष्ट्रीय विकास रणनीति’ की स्मृति में इसे ‘विश्व विकास सूचना दिवस’ के रूप में भी समर्पित किया गया है।
वर्ष 1972 में जब दुनिया शीत युद्ध के चरम पर थी, तब भू-राजनीतिक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय सहयोग बाधित था और सूचनाओं का प्रवाह अत्यंत सीमित था। इसी गतिरोध को तोड़ने के लिए व्यापार और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के तृतीय सत्र में विकास की समस्याओं के समाधान हेतु सूचना के व्यापक प्रसार का विचार सामने आया।
इसके परिणामस्वरूप संयुक्त राष्ट्र महासभा ने अपने 27वें सत्र में 19 दिसंबर 1972 को ऐतिहासिक प्रस्ताव संख्या 3038 पारित कर ‘विश्व विकास सूचना दिवस’ की नींव रखी। 24 अक्टूबर 1973 को आयोजित प्रथम विश्व विकास सूचना दिवस सम्मेलन में चिदंबरम सुब्रमण्यम तथा एडेबायो एडेडेजी जैसे नीति-निर्माताओं ने संवाद स्थापित किया, और अक्टूबर 1974 में प्रख्यात अर्थशास्त्री जॉन केनेथ गालब्रेथ ने इस वैश्विक मंच को संबोधित किया।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित सिद्धांतों के अनुसार, इस दिवस का मूल उद्देश्य यह है कि विकास का अंतिम उद्देश्य प्रत्येक व्यक्ति के कल्याण में निरंतर सुधार लाना और समाज के सभी वर्गों तक उसका लाभ पहुंचाना है। संयुक्त राष्ट्र स्पष्ट रूप से रेखांकित करता है कि यदि समाज में अनुचित विशेषाधिकार, संपत्ति की असमानता और सामाजिक अन्याय बने रहते हैं तो विकास अपने मूल उद्देश्य में विफल हो जाता है।
विश्व विकास सूचना दिवस का केंद्रीय स्तंभ ‘जनमत का एकत्रीकरण’ है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, विकसित देशों की सरकारों का यह दायित्व है कि वे अपने नागरिकों को वैश्विक विकास की परस्पर निर्भरता समझाएं और विकासशील देशों को संसाधन व प्रौद्योगिकी हस्तांतरण प्रदान करें। विश्व स्तर पर 15 से 24 वर्ष आयु के 79 प्रतिशत युवा इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं, इसलिए युवाओं की डिजिटल ऊर्जा को रचनात्मक विकास से जोड़ना समय की मांग है।
इस दिशा में भारत का ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (आधार, यूपीआई और इंडिया स्टैक) विकासशील विश्व के लिए एक प्रमाणित मॉडल बनकर उभरा है, जिसे विश्व के शीर्ष 10 सबसे प्रभावी सुधारों में स्थान मिला है। वित्त वर्ष 2021-22 में ही 1 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का लेनदेन संसाधित करने वाले यूपीआई के संदर्भ में विश्व बैंक के अध्ययन से सिद्ध होता है कि इस डिजिटल मंच से जुड़ने वाले बैंकों ने 2 प्रतिशत अधिक वृद्धि दर्ज की है।
राष्ट्रीय समाचार
शेयर बाजार लगातार गिरावट के बाद हरे निशान में खुला; सेंसेक्स 517 अंक उछला, आईटी शेयरों में खरीदारी

लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ हरे निशान में खुला। इस दौरान प्रमुख बेंचमार्कों निफ्टी और सेंसेक्स में 500 से ज्यादा अंकों तक की बढ़त दर्ज की गई।
सेंसेक्स 416.25 अंक यानी 0.57 प्रतिशत चढ़कर 73,665.64 पर खुला, तो वहीं निफ्टी 50 54.55 अंक यानी 0.24 प्रतिशत बढ़कर 22,742.20 पर खुला।
सेंसेक्स पिछले दिन 73,249.39 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी का पिछला बंद 22,687.65 था।
वहीं दिन के कारोबार में सेंसेक्स ने 517.12 अंकों यानी 0.70 प्रतिशत की बढ़त के साथ 73,766.51 का उच्चतम स्तर छुआ। वहीं निफ्टी 50 करीब 100 अंक यानी 0.43 प्रतिशत उछलकर 22,787.25 का हाई टच किया।
इस दौरान, व्यापक बाजारों का प्रदर्शन निराशाजनक रहा, क्योंकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 2 प्रतिशत और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 1.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वहीं, सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी आईटी इंडेक्स एकमात्र ऐसा इंडेक्स था जिसमें तेजी (1.8 प्रतिशत) देखी गई। निफ्टी मेटल, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी मीडिया में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई।
इस बीच, भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 3 पैसे बढ़कर 94.79 पर खुला, जबकि गुरुवार को यह 94.82 के स्तर पर बंद हुआ था।
वैश्विक स्तर पर, एशियाई बाजारों में गिरावट आई, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार एआई पर होने वाले खर्च और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंताओं के चलते ज्यादातर निचले स्तर पर बंद हुआ।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि ब्रेंट क्रूड का उछलकर 114 डॉलर तक पहुंच जाना अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए एक बड़ी नकारात्मक बात है। हालांकि, अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड में 4.96 प्रतिशत तक की भारी गिरावट और डॉलर के मुकाबले रुपए का मजबूत होकर 94.70 पर आना सकारात्मक संकेत हैं, जो एफआईआई की बिकवाली को काफी हद तक रोक सकते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो दिनों में जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में गए 3.73 लाख करोड़ रुपए में से 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि, शेयरों के अलॉटमेंट के बाद अगले सोमवार तक वापस सिस्टम में आ जाएगी। “लिक्विडिटी में आने वाला यह संभावित उछाल अगले हफ्ते बाजार को ऊपर ले जा सकता है।”
विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए आरएसआई 43.98 पर है, जो इसके 38.86 के औसत से ऊपर है, जबकि पीसीआर घटकर 0.82 पर आ गया है। निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 22,600-22,650 के स्तर पर है, और रेजिस्टेंस 22,900-23,000 के स्तर पर देखा जा रहा है।
गुरुवार को एफआईआई नेट सेलर रहे और उन्होंने 3,459 करोड़ रुपए के शेयर बेचे, जबकि डीआईआई ने 2,891 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी करके बाजार को सपोर्ट दिया।
गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में, एआई-आधारित टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के चलते नैस्डैक 2.6 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
इसी तरह, एशियाई बाजारों की शुरुआत भी गिरावट के साथ हुई, जिसमें जापान का निक्केई लगभग 1.7 प्रतिशत नीचे आ गया।
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