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भारत में कोरोना के नए मामले फिर 78 हजार के पार
भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोनावायरस के 78,512 नए मामले सामने आए हैं। दैनिक संक्रमणों में निरंतर वृद्धि बदस्तूर जारी है और कुल मामलों की संख्या 362,1245 तक पहुंच गई है। सोमवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों से इसका खुलासा हुआ। 971 और मौतों के साथ देश में मृतकों की कुल संख्या बढ़कर 64,469 हो गई है।
कुल कन्फर्म मामलों में से 7,81,975 सक्रिय मामले हैं, जबकि वायरस से अब तक कुल 2,77,48,01 कोरोना मरीज ठीक हुए हैं। एक दिन में 60,868 लोगों के ठीक होने के साथ, रिकवरी दर 76.61 प्रतिशत रही जबकि मृत्यु दर 1.79 प्रतिशत है।
कुल 7,64,281 मामलों और 24,103 मौतों के साथ महाराष्ट्र कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य बना हुआ है। इसके बाद तमिलनाडु में 4,15,590 मामले हैं और 7,137 मौतें हुई हैं। इनके बाद आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और बिहार भी कोरोना से बुरी तरह प्रभावित हैं।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, भारत ने रविवार को एक ही दिन में 8,46,278 परीक्षण किए और अब तक 4,23,07,914 नमूनों की जांच हो चुकी है।
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जंतर मंतर प्रदर्शन : दिल्ली पुलिस ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पूछताछ के लिए बुलाया

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर विरोध प्रदर्शन मामले के सिलसिले में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को गुरुवार को पूछताछ के लिए बुलाया है। सीजेपी सदस्यों को दोपहर में राजौरी गार्डन स्थित दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है।
इससे पहले अक्टूबर में भी दिल्ली पुलिस ने दास और रांका को समन भेजा था। हालांकि, वे समन पर पेश नहीं हुए और बाद में पूछताछ के लिए क्राइम ब्रांच के सामने हाजिर होने के लिए और समय मांगा।
सीजेपी नेताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन से जुड़े मामले अक्टूबर में क्राइम ब्रांच को सौंप दिए गए थे। ये मामले 13 अक्टूबर की उस घटना से जुड़े हैं, जब दास, रांका और अजिंक्य शिंदे 11 अन्य लोगों के साथ जंतर-मंतर में घुस गए थे। जंतर-मंतर को अब विरोध-प्रदर्शन के लिए निर्धारित जगह के रूप में हटा दिया गया है।
दिल्ली पुलिस ने इन सभी को हिरासत में ले लिया था। शिंदे को तो जमानत बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया लेकिन सौरव दास और रांका एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहे।
सीजेपी सदस्य मतदाता सूची के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं के खिलाफ विरोध कर रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे भी लगाए।
21 अक्टूबर को एक सप्ताह की न्यायिक हिरासत के बाद दास और रांका को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया। उन्होंने एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) के सामने लिखित अंडरटेकिंग दी, जिसमें उन्होंने शांति बनाए रखने और जंतर-मंतर पर विरोध-प्रदर्शन का आह्वान न करने का भरोसा दिलाया था।
जंतर-मंतर पर अनाधिकृत प्रवेश के मामले में चल रही जांच पूरी होने तक एसईएम ऋतु राज ने दोनों कार्यकर्ताओं को 50,000-50,000 रुपये के निजी मुचलके और जमानत बांड भरने पर रिहा करने का आदेश दिया।
अपने लिखित वचनपत्रों में दोनों कार्यकर्ताओं ने शांति भंग न करने का वादा किया और न्यायपालिका तथा एसईएम कोर्ट सहित उसकी सभी इकाइयों में पूरा भरोसा जताया। एसईएम कोर्ट ने माना कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 135(3) के तहत शांति भंग या सार्वजनिक व्यवस्था में खलल को रोकने के लिए तत्काल कदम, बांड भरवाने और लिखित वचनपत्र लेने के माध्यम से प्रभावी ढंग से उठाए जा सकते हैं।
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एआई डीपफेक और अश्लील तस्वीरों से परेशान रूपाली गांगुली पहुंचीं बॉम्बे हाईकोर्ट, 4 नवंबर को होगी सुनवाई

टीवी की मशहूर अभिनेत्री रूपाली गांगुली ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि कई ऑनलाइन पोर्टल उनकी तस्वीरों और अन्य कंटेंट का इस्तेमाल बिना अनुमति कर रहे हैं। इतना ही नहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से उनकी नकली तस्वीरें बनाई जा रही हैं और कुछ वीडियो के साथ भी छेड़छाड़ की गई है।
रूपाली का कहना है कि इस तरह तैयार किए गए कंटेंट को कुछ ऐसी वेबसाइटों पर इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री दिखाई जाती है।
अभिनेत्री ने अपनी याचिका में इसे अपने पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की पहचान, तस्वीर, आवाज और छवि का इस्तेमाल उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अदालत से इस मामले में दखल देने की मांग की है।
इस याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट में 4 नवंबर को सुनवाई होगी। इस मामले को जस्टिस माधव जामदार की बेंच सुनेगी।
रूपाली से पहले कई दूसरी अभिनेत्रियां भी अपनी तस्वीरों और पहचान के गलत इस्तेमाल के खिलाफ अदालत पहुंच चुकी हैं। हाल ही में अभिनेत्री सामंथा रुथ प्रभु ने भी बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि कई वेबसाइट और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उनकी तस्वीरों, आवाज और पहचान का इस्तेमाल करके एआई से नकली वीडियो, मॉर्फ की गई तस्वीरें और अश्लील कंटेंट तैयार कर रहे हैं।
इस मामले में कोर्ट ने सामंथा को अंतरिम राहत दी थी। अदालत ने गूगल, मेटा और दूसरे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उनकी पहचान का गलत इस्तेमाल करने वाले चिह्नित कंटेंट को हटाने का निर्देश दिया था।
इससे पहले जुलाई में अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने भी एआई से तैयार किए गए डीपफेक वीडियो और मॉर्फ तस्वीरों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने संबंधित ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को आपत्तिजनक कंटेंट हटाने के निर्देश दिए थे।
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कर्नाटक: नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ईडी की ओर से बड़ी कार्रवाई की गई है। ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 की धारा 17 के तहत नकली दवाओं के रैकेट से जुड़े लोगों और कंपनी के पांच ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया है।
ईडी की ओर से यह कार्रवाई 18 अगस्त से चल रही मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। यह केस तवरेकेरे पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया था।
यह एफआईआर ड्रग कंट्रोलिंग अथॉरिटी और पुलिस वालों की ओर से 18 अगस्त को सीके तांड्या गांव में एक रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी पर की गई जॉइंट सर्च और रेड से जुड़ी है, जहां आरोपी बिना वैलिड लाइसेंस, परमिट या ऑथराइजेशन के दवाएं और फार्मास्युटिकल ड्रग्स स्टोर करते हुए और स्टोर की गई दवाओं पर लेबल बदलते हुए पाए गए।
ईडी ने केस दर्ज किया और पीएमएलए, 2002 के तहत जांच शुरू की। जांच से पता चला है कि आर. प्रशांत ने कथित तौर पर बिना ड्रग लाइसेंस या परमिट के दवाओं को बनाने, री-पैकेजिंग और री-लेबलिंग के लिए बिदादी के पास एक फार्महाउस का इंतजाम किया था। अलग-अलग राज्यों के मैन्युफैक्चरिंग सेंटरों से मंगाए गए सस्ते बल्क फॉर्मूलेशन को कथित तौर पर नई शीशियों में रीपैकेज किया गया और धोखे से महंगे फाइजर एंटीबायोटिक्स, जैसे कि जेविसेफ्टा, एम्ब्लेवो वगैरह के तौर पर रीलेबल किया गया।
शीशियों में जेनेरिक दवाएं थीं, लेकिन उन पर फाइजर-ब्रांडेड लेबल थे। ये दवाएं कथित तौर पर मेसर्स डीएम फार्मास्यूटिकल्स के जरिए बांटी गईं और मेसर्स कृपा हेल्थकेयर को सप्लाई की गईं। इसके बाद मेसर्स कृपा हेल्थकेयर ने पता लगने से बचने के लिए असली दवाओं के साथ दूसरी फार्मास्यूटिकल कंपनियों और अस्पतालों को भी सप्लाई कीं।
छापेमारी के दौरान, वीरेश कुमार के बैंक अकाउंट में लगभग 9 लाख रुपए थे। उस अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया है। इसके अलावा, सर्च एक्शन के दौरान अलग-अलग लोगों के डिजिटल डिवाइस, रिकॉर्ड और गलत जानकारी देने वाले डॉक्यूमेंट्स जब्त किए गए। इस मामले में आगे की जांच की जा रही है।
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