राजनीति
देश के लिए त्याग, तपस्या और सर्वस्व समर्पण का नाम हैं नरेंद्र मोदी : अमित शाह
नई दिल्ली, 17 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 75वें जन्मदिन पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नेतृत्व, त्याग और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के लिए त्याग, तपस्या और सर्वस्व समर्पण का नाम नरेंद्र मोदी है। उन्होंने पीएम मोदी की पांच दशक से अधिक की राष्ट्रसेवा, वैश्विक नेतृत्व और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में उनके योगदान को रेखांकित किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट किया।
प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने लिखा, “त्याग और समर्पण के प्रतीक, करोड़ों देशवासियों की प्रेरणा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 75वें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। सामाजिक जीवन में पांच दशक से अधिक समय से देशवासियों के कल्याण के लिए बिना रुके, बिना थके अनवरत कार्य करने वाले पीएम मोदी हर एक देशवासी के लिए ‘राष्ट्र प्रथम’ की जीवंत प्रेरणा हैं।”
उन्होंने पीएम मोदी की जीवन यात्रा को प्रेरणादायी बताते हुए कहा कि संघ से संगठन और सरकार तक, मोदी जी की जीवन यात्रा बताती है कि जब निश्चय हिमालय के समान अडिग और दृष्टि समुद्र के समान विशाल हो, तो कितने व्यापक परिवर्तन संभव हैं। व्यवस्था में शुचिता, निर्णयों में दृढ़ता और नीतियों में स्पष्टता लाने वाले मोदी जी ने शासन के केंद्र में वंचितों, पिछड़ों, गरीबों, महिलाओं और आदिवासियों को लाने का अविस्मरणीय कार्य किया है।
उन्होंने कहा कि करोड़ों देशवासियों के जीवन में अकल्पनीय परिवर्तन लाकर ‘विकसित’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की निर्माण यात्रा से उन्हें जोड़ने वाले मोदी जी पर पूरे देश को गर्व है।
अमित शाह ने कहा, “बीते चार दशकों से मैं पीएम मोदी को अलग-अलग दायित्वों में देख रहा हूं। चाहे वे संघ के प्रचारक हों, भाजपा के संगठन मंत्री, गुजरात के मुख्यमंत्री या बीते 11 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री, नरेंद्र मोदी ने हमेशा राष्ट्र प्रथम को आगे और स्वयं को पीछे रखा है। मेरे जैसे कार्यकर्ता सौभाग्यशाली हैं, जिन्हें उनके साथ उनकी हर भूमिका में कार्य करने का अवसर मिला। चाहे कोई भी दायित्व हो, पीएम मोदी ने हमेशा रचनात्मक कार्यों और निर्णयों को बढ़ावा दिया। यह हम सभी भाजपा कार्यकर्ताओं के लिए हर्ष का विषय है कि उनके हर निर्णय ने देश को सदैव आगे बढ़ाया है।”
उन्होंने कहा, “समस्याओं को दूरदृष्टि से देखना और उनका पूरी निष्ठा से समाधान करना पीएम मोदी के व्यक्तित्व की खासियत है। पूरा विश्व उन्हें प्रॉब्लम-सॉल्विंग लीडर मानता है। युद्धों, तनावों और ग्लोबल लॉबी के दौर में मोदी जी पूरी दुनिया के सामने संवाद-सेतु बनकर उभरे हैं। इसी कारण दुनिया के 27 देशों ने विश्व-मित्र मोदी जी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया है। यह उनकी वैश्विक लीडरशिप का द्योतक है।”
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत वैश्विक आकांक्षाओं का केंद्र भी बना है। अंतरिक्ष में चांद के दक्षिणी ध्रुव से लेकर द्वारका में समुद्र की गहराई तक, उन्होंने विरासत और विज्ञान दोनों को गौरव दिलाया है। उनके नेतृत्व में आज भारत स्पेस सेक्टर में नए कीर्तिमान बना रहा है। स्वदेशी कोविड वैक्सीन, स्वदेशी रक्षा प्रणाली, स्टार्टअप्स, इनोवेशन, किसानों की फसलों को उचित दाम दिलाने से लेकर मैन्युफैक्चरिंग मिशन तक, मोदी जी एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं, जो हर क्षेत्र में स्वावलंबी हो।
अमित शाह ने लिखा, “जिन क्षेत्रों में विकास पहुंचना तो दूर, जहां के लोग बात तक नहीं करते थे, मोदी जी ने उन क्षेत्रों में पिछले 11 वर्षों में विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचाने का कार्य किया है। असम में सबसे लंबा पुल, कश्मीर में दुनिया का सबसे ऊंचा चिनाब रेलवे ब्रिज, सेमीकंडक्टर यूनिट और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मोदी सरकार में हर क्षेत्र में नंबर 1 बन रहे भारत के ये प्रतीक हैं। आज जब रेहड़ी-पटरी पर सब्जी बेचने वाले भी गर्व से यूपीआई दिखाते हैं, तब नरेंद्र मोदी होने का अर्थ समझ आता है।”
उन्होंने लिखा, “एक समय यह कहा जाता था कि विकास और इकोनॉमी के कार्य एक साथ संभव नहीं हैं। मोदी जी ने यह दिखाया कि कैसे गरीबों का कल्याण और अर्थव्यवस्था का उत्थान समानांतर संभव है। उनके नेतृत्व में भारत दुनिया की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बना है। आईएमएफ ने भारत को ग्लोबल इकोनॉमी में ब्राइट स्पॉट कहा है, और देश का ग्रोथ रेट दुनिया में सबसे अधिक रहा है। आज भारत में 60 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आ रहे हैं और देश ग्लोबल इकोनॉमी का लीडर भी बन रहा है। यह मोदी ऐरा में ही संभव था।”
राष्ट्रीय समाचार
त्योहारी मौसम से पहले सरकारी बफर स्टॉक से प्याज कोलकाता पहुंचेगा

पश्चिम बंगाल में प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के प्रयासों के तहत मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) के बफर स्टॉक से प्याज लेकर कांडा एक्सप्रेस गुरुवार को कोलकाता पहुंचने वाली है। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई है।
पश्चिम बंगाल में एनएएफईडी और एनसीसीएफ की मोबाइल वैन के माध्यम से लगभग 1,400 मीट्रिक टन प्याज 35 रुपए प्रति किलो की दर से वितरित किया जा चुका है।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि कांडा एक्सप्रेस के आने से अतिरिक्त मात्रा में प्याज की आवाजाही अधिक कुशलता से हो सकेगी, जिससे बाजार में उपलब्धता में सुधार होगा और मौसमी कीमतों पर दबाव कम होगा।
बयान में आगे कहा गया कि आगमन से प्याज की अधिक मात्रा की आवाजाही में तेजी आने की उम्मीद है और कोलकाता और आसपास के जिलों में, विशेष रूप से त्योहारी मौसम से पहले, इसकी उपलब्धता और मजबूत होगी।
बयान में आगे कहा गया है कि कोलकाता जाने वाली कांडा एक्सप्रेस, रेल और सड़क परिवहन के हाइब्रिड नेटवर्क के माध्यम से पीएसएफ बफर स्टॉक से प्याज की सुनियोजित आपूर्ति की चल रही रणनीति का हिस्सा है।
एनएएफईडी और एनसीसीएफ के माध्यम से बफर स्टॉक का लक्षित निपटान 24 अगस्त से शुरू हुआ, और बाजार की आवश्यकताओं के आधार पर देश के विभिन्न हिस्सों में आपूर्ति धीरे-धीरे भेजी जा रही है।
मंत्रालय ने बताया कि कोलकाता में वर्तमान में 25 से अधिक स्थानों पर खुदरा बिक्री की जा रही है, जिनमें कोले मार्केट, मेचुआ मंडी, मानिकतला मार्केट, रामपुरिया मार्केट और श्याम बाजार जैसे प्रमुख बाजार शामिल हैं।
इसके अलावा, सरकार ‘सुफल बंगला’ के माध्यम से बफर स्टॉक प्याज की खुदरा बिक्री की संभावना तलाश रही है, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त पहुंच मिलेगी और इस पहल का दायरा व्यापक होगा।
बफर स्टॉक से प्याज की आपूर्ति अब तक देश भर के 100 से अधिक शहरों में की जा चुकी है।
बफर स्टॉक हस्तक्षेप के बाद बाजार में उपलब्धता में सुधार का संकेत देते हुए, 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में खुदरा प्याज की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं या उनमें गिरावट आई है। पिछले सप्ताह जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में प्याज की कीमतों में गिरावट आई है, उनमें दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, तमिलनाडु और बिहार शामिल हैं।
राष्ट्रीय समाचार
एआई समाधान दे सकता है, लेकिन सही सवाल पूछना आपकी जिम्मेदारी होनी चाहिए: राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार को उच्च शिक्षा में मल्टी-डिसिप्लिनरी (कई विषयों को मिलाकर) अप्रोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), गरीबी उन्मूलन और लोकतंत्र जैसी जटिल समकालीन चुनौतियों का समाधान केवल अध्ययन के एक क्षेत्र से नहीं किया जा सकता।
गुजरात में महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी ऑफ बड़ौदा के 75वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के कई विषय हैं, जो इसे ज्ञान की अलग-अलग धाराओं को एक साथ लाने की स्थिति में लाते हैं।
उन्होंने कहा, “आर्ट्स से लेकर साइंस, टेक्नोलॉजी से लेकर मेडिसिन, लॉ से लेकर सोशल वर्क, फाइन आर्ट्स से लेकर परफॉर्मिंग आर्ट्स, मैनेजमेंट से लेकर जर्नलिज्म तक, यह यूनिवर्सिटी ज्ञान के कई क्षेत्रों में शिक्षा दे रही है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि समाज के सामने आने वाली समस्याएं अब आपस में अधिक जुड़ी हुई हैं और उनके समाधान के लिए कई विषयों के ज्ञान की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “क्लाइमेट चेंज सिर्फ एनवायरनमेंटल स्टडीज का विषय नहीं है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिर्फ कंप्यूटर साइंस का विषय नहीं है। हेल्थ सिर्फ मेडिसिन या मेडिकल साइंस का विषय नहीं है। गरीबी दूर करना सिर्फ अर्थशास्त्री का विषय नहीं है। लोकतंत्र सिर्फ पॉलिटिकल साइंस का विषय नहीं है।”
उन्होंने कहा, “आज, सभी जरूरी समस्याओं को हल करने के लिए कई विषयों को मिलाकर काम करने (मल्टीडिसिप्लिनरी) के नजरिए की जरूरत है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि छात्रों को सिर्फ अपनी पढ़ाई के खास विषयों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें अलग-अलग तरह की समझ और नजरिया विकसित करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा, “हमें एक वैज्ञानिक जैसी जिज्ञासा, एक कलाकार जैसी संवेदनशीलता, एक इतिहासकार जैसा नजरिया, अर्थशास्त्र की समझ और समाजशास्त्र की चेतना की जरूरत है।”
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी जैसे उच्च शिक्षा संस्थानों से उम्मीद की जाती है कि वे इसी दिशा में आगे बढ़ें और छात्रों को अलग-अलग विषयों में ज्ञान का इस्तेमाल करने में मदद करें।
राष्ट्रपति मुर्मु ने तेजी से बदलती टेक्नोलॉजी को अपनाते समय छात्रों द्वारा सही समझ और विवेक का इस्तेमाल करने की जरूरत पर भी जोर दिया।
उन्होंने छात्रों से कहा, “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) समाधान दे सकती है, लेकिन सही सवाल पूछना आपकी जिम्मेदारी होनी चाहिए। टेक्नोलॉजी रफ्तार तो दे सकती है, लेकिन इसका इस्तेमाल किस दिशा में किया जाए, यह तय करना छात्रों का काम है।”
राष्ट्रपति ने छात्रों से टेक्नोलॉजी की क्षमताओं को मानवीय मूल्यों और संवैधानिक सिद्धांतों के साथ जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे नागरिकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे संविधान में बताए गए “न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व” के आदर्शों को अपने जीवन और कार्यस्थलों में अपनाएं।
यूनिवर्सिटी के विभागों में आर्ट्स, साइंस, एजुकेशन और साइकोलॉजी, कॉमर्स, टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग, मेडिसिन, लॉ, फाइन आर्ट्स, फ़ैमिली और कम्युनिटी साइंसेज़, सोशल वर्क, परफॉर्मिंग आर्ट्स, मैनेजमेंट स्टडीज, जर्नलिज़्म और कम्युनिकेशन और फार्मेसी शामिल हैं।
दीक्षांत समारोह की घोषणा के अनुसार, 229 उम्मीदवार डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी डिग्री, 2,857 उम्मीदवार मास्टर डिग्री, 8,863 उम्मीदवार बैचलर डिग्री और 657 उम्मीदवार पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा के लिए योग्य पाए गए।
राजनीति
राहुल गांधी ने एसआईआर विवाद के बीच चुनाव आयोग पर साधा निशाना, कहा-समय आएगा, हम आपको नहीं बख्शेंगे

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चल रहे विवाद के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बुधवार को भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) और चुनाव अधिकारियों पर गड़बड़ी का आरोप लगाया और चेतावनी दी कि “समय आएगा, हम आपको बख्शेंगे नहीं।”
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने कहा, “वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक अपराध है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले भाजपा, आरएसएस और चुनाव आयोग ने देशद्रोह का काम किया है। इंसाफ जरूर होगा।”
गांधी ने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें उन्होंने कहा, “मैं चुनाव आयोग और चुनाव अधिकारियों से साफ कह रहा हूं। आप जो कर रहे हैं, वह गलत है।”
उन्होंने कहा, “यह देशद्रोह है। समय आएगा! हम आपको पकड़ेंगे, आप बच नहीं पाएंगे।”
यह ताजा विवाद एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 10 महीनों के दौरान 14 मौकों पर दो चुनाव आयुक्तों ने आयोग के फैसलों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, ये आपत्तियां कई तरह के फैसलों और प्रक्रियाओं से जुड़ी थीं। इनमें यह आरोप भी शामिल था कि नए वोटरों को जोड़ने और वोटर लिस्ट से नाम हटाने से जुड़े कुछ मामलों और मुद्दों के बारे में आयुक्तों को अंधेरे में रखा गया था।
इससे पहले दिन में ईसीआई ने एक प्रमुख अखबार की उस रिपोर्ट को खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनाव आयोग के कई फैसलों पर “आधिकारिक तौर पर आपत्ति” जताई थी, जो कथित तौर पर उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे।
इस मामले की सीधी जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि चुनाव आयोग के किसी भी फैसले पर किसी चुनाव आयुक्त ने कोई असहमति दर्ज नहीं कराई थी। उन्होंने कहा कि दोनों आयुक्तों ने केवल कुछ टिप्पणियां की थीं, जिनकी बाद में आयोग ने समीक्षा की थी।
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