राजनीति
मप्र : भाजपा और कांग्रेस उपचुनाव के लिए फूंक-फूंक कर बढ़ा रहे हैं कदम
मध्य प्रदेश में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी दल कांग्रेस के लिए सियासी तौर पर करो या मरो को आधार बनाकर लड़े जाने वाले हैं। यही कारण है कि दोनों राजनीतिक दल फूंक-फूंक कर कदम बढ़ा रहे हैं।
राज्य में 27 विधानसभा क्षेत्रों में आगामी समय में उपचुनाव होना तय है और इन चुनावों की तारीख का ऐलान भी चुनाव आयोग कभी भी कर सकता है। यही कारण है कि दोनों राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। भाजपा के तो वैसे लगभग सभी विधानसभा क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों के नाम तय हैं, वहीं कांग्रेस के उम्मीदवारों का चयन अभी बाकी है।
दोनों ही राजनीतिक दलों में असंतोष की आशंकाएं जोर मार रही हैं। इसके चलते पार्टी के प्रमुख नेताओं को नाराजगी जाहिर करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद करना होता है।
पार्टियों की स्थिति पर गौर करें तो सतही तौर पर भाजपा में कांग्रेस के मुकाबले असंतोष कहीं ज्यादा नजर आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 25 विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा को उन लोगों को उम्मीदवार बनाना पड़ रहा है जो पिछले दिनों कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए हैं। इस स्थिति ने ही पार्टी में असंतोष के बीज बोए हैं। पार्टी की ओर से संतुलन और समन्वय बनाने के प्रयास जारी हैं और पार्टी ने इसके संकेत भी दिए हैं।
प्रदेश संगठन में संतुलन व समन्वय की नीति के आधार पर पांच महामंत्रियों की नियुक्ति की गई है। वे अलग-अलग क्षेत्रों के साथ अलग-अलग वगोर्ं से भी आते हैं। उनमें पूर्व मंत्री हरिशंकर खटीक बुंदेलखंड से आते हैं, वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती के करीबी भोपाल के पूर्व जिला अध्यक्ष भगवानदास सबनानी, ग्वालियर-चंबल के रणवीर सिंह रावत, विंध्य क्षेत्र के शरदेंदु तिवारी और मालवा अंचल की कविता पाटीदार को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
विधानसभा के उपचुनाव को लेकर दिल्ली में पार्टी ने राज्य के नेताओं की मंगलवार को एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक को चुनाव के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि इस बैठक में संगठन की समीक्षा, संगठन का काम और उपचुनाव पर चर्चा हुई।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा विधानसभा के उपचुनाव में पार्टी की जीत की संभावनाओं को लेकर आशान्वित हैं और उनका कहना है, भाजपा ने विधानसभा क्षेत्र ही नहीं हर वार्ड में चुनाव जीतने की रणनीति बनाई है और कार्यकर्ता उसी दिशा में काम भी कर रहा है।
दूसरी ओर अगर हम कांग्रेस की स्थिति देखें तो कांग्रेस लगातार उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया से गुजर रही है। सर्वेक्षण कराए जा चुके हैं और उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पार्टी के संभावित उम्मीदवारों की एक सूची सोशल मीडिया पर जारी होने के बाद हलचल मची हुई है, मगर पार्टी इस सूची को नकार रही है। प्रदेशाध्यक्ष कमल नाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा का कहना है, उपचुनावों को लेकर कांग्रेस ने प्रत्याशियों की कोई सूची जारी नहीं की है। सोशल मीडिया पर वाइरल सारी सूची फर्जी है। यह भाजपा की साजिश है।
उप-चुनाव को लेकर राजनीतिक विष्लेषकों का मानना है कि उप-चुनाव दोनों ही दलों के लिए काफी अहम है। यही कारण है कि देानों ही दल अपने-अपने तरह से रणनीति बनाने में लगे है, नए-नए मुददों को हवा दी जा रही है। चुनाव जीतना दोनों का लक्ष्य है और इसके लिए वे किसी भी हद तक जाने से नहीं चूकेंगे।
राजनीति
कर्नाटक कैबिनेट विस्तार: कांग्रेस ने अनुभव और नए चेहरों के बीच बनाया संतुलन, नागेंद्र को शामिल करना चौंकाने वाला फैसला

कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को कर्नाटक कैबिनेट के विस्तार में अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाए रखा। हालांकि, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और विधायक बी. नागेंद्र को शामिल करना पार्टी नेतृत्व के सबसे चौंकाने वाले फैसलों में से एक रहा है।
उम्मीद है कि विपक्ष कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम में कथित घोटाले को लेकर सरकार को घेरेगा।
एक कथित घोटाले और उसके बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच से जुड़े आरोपों के कारण नागेंद्र ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि उन्हें दोबारा मंत्री बनाने का फैसला करने से पहले पार्टी लीडरशिप ने सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कानूनी राय ली थी।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, राज्य सीआईडी ने नागेंद्र को क्लीनचिट दे दी है जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी रखे हुए है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस नेतृत्व ने मंत्रिमंडल में उनकी वापसी को मंजूरी देने से पहले कानूनी और राजनीतिक पहलुओं पर विचार किया है।
कैबिनेट विस्तार में कई चौंकाने वाले फैसले और कुछ लोगों को शामिल न करने जैसी बातें भी सामने आईं, जो कांग्रेस हाईकमान की ओर से किए गए सावधानीपूर्वक संतुलन बनाने की कोशिश को दिखाती हैं।
मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की करीबी राजनीतिक सहयोगी मानी जाने वाली पूर्व मंत्री लक्ष्मी हेब्बलकर को विस्तारित मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिला। राजनीतिक विश्लेषक उनके इस फैसले को एक बड़ा झटका मान रहे हैं।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता एचसी महादेवप्या, तनवीर सैत, दिनेश गुंडू राव, एसएस मल्लिकार्जुन और एचके पाटिल भी उन लोगों में शामिल थे जिन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली।
नए शामिल किए गए नेताओं में से पूर्व मंत्री मधु बंगारप्पा ने पार्टी नेतृत्व का शुक्रिया अदा किया और समाज के सभी वर्गों के लिए काम करने का वादा किया।
बंगारप्पा ने कहा कि मुझे मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिला है। जनता और पार्टी ने मुझ पर भरोसा जताया है। हम उन लोगों के लिए काम करेंगे जिन्होंने हमें वोट दिया है और जिन्होंने नहीं दिया है।
पूर्व मुख्यमंत्री एन. धर्म सिंह के पुत्र अजय सिंह ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कलबुर्गी जिले के जेवरगी निर्वाचन क्षेत्र की जनता के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि इस अवसर के लिए मैं पार्टी नेतृत्व का आभारी हूं। मैं कर्नाटक की जनता और जेवरगी के मतदाताओं का भी आभारी हूं। मैं 2018 और 2023 में चुनाव नहीं लड़ पाया। मेरे पिता हमेशा कहते थे कि राजनीति में धैर्य रखना पड़ता है और इंतजार करना ही पड़ता है। उनकी सलाह आखिरकार सच साबित हुई है।
पूर्व मंत्री शिवराज तंगदागी ने उन पर भरोसा जताने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, राहुल गांधी, केसी वेणुगोपाल, रणदीप सिंह सुरजेवाला, पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और गृह मंत्री प्रियांक खड़गे सहित कांग्रेस नेतृत्व को धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा, मेरे समर्थको ने मंत्रिमंडल में मेरी वापसी के लिए प्रतिदिन प्रार्थना की। उन्होंने मंत्रालय और तिरुपति की तीर्थयात्रा भी की। मैं अपनी पूरी क्षमता से काम करूंगा और कर्नाटक की जनता का आभार अर्जित करूंगा।”
चल्लाकेरे के विधायक टी. रघु मूर्ति (तीसरी बार विधायक) ने अपने पदभार ग्रहण करने को वर्षों की निष्ठा और दृढ़ता का पुरस्कार बताया।
उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया का धन्यवाद करता हूं। मुझे मुख्यमंत्री का फोन आया था, जिसमें उन्होंने मुझे शामिल किए जाने की जानकारी दी। मैंने पहली बार 2008 में पार्टी टिकट की इच्छा जताई थी लेकिन मुझे टिकट नहीं मिला। पार्टी के लिए वर्षों तक काम करने के बाद आखिरकार मुझे मनोनीत किया गया। चित्रदुर्ग जिले में भाजपा की शानदार जीत के बावजूद मैंने अपनी सीट बरकरार रखी। मेरी निष्ठा और अनुभव को मान्यता मिली है।
पांच बार के विधायक एचसी बालकृष्ण ने मुख्यमंत्री शिवकुमार, डीके सुरेश, सिद्धारमैया और कांग्रेस हाईकमान को उन पर विश्वास जताने के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने कहा कि मुझ पर रखे गए भरोसे पर मै खरा उतरूंगा। मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया है। मैं अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा। बालकृष्ण मुख्यमंत्री पद के लिए शिवकुमार की उम्मीदवारी के प्रबल समर्थकों में से एक थे।
हावेरी के विधायक रुद्रप्पा लमानी ने कहा कि उनकी नियुक्ति से यह साबित होता है कि समर्पण और कड़ी मेहनत का अंततः फल मिलता है। उन्होंने कहा कि मैंने मंत्रिमंडल में पद पाने के लिए पैरवी नहीं की। जब मैं अपने पैतृक स्थान पर था तब मुझे मुख्यमंत्री का फोन आया। इससे साबित होता है कि ईमानदारी और मेहनत का फल मिलता है। मैं कोई भी जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हूं। पेयजल आपूर्ति और भूमिगत जल निकासी व्यवस्था में सुधार मेरी प्राथमिकताओं में शामिल होंगे।
मंत्रिमंडल विस्तार में पूर्व मंत्री जमीर अहमद खान की वापसी भी हुई, जिनका शामिल होना दावनगेरे उपचुनाव के बाद हुए विवादों के मद्देनजर कई राजनीतिक विश्लेषकों के लिए आश्चर्य की बात थी।
पार्टी सूत्रों ने बताया कि उनकी संगठनात्मक क्षमता और केरल में कांग्रेस के चुनाव प्रचार में उनके योगदान को नेतृत्व द्वारा विचार किए गए कारकों में शामिल किया गया था।
एक और चौंकाने वाला नाम बेगलुरु के विधायक रिजवान अरशद का था, जिन्हें कांग्रेस के युवा चेहरों में से एक माना जाता है। पार्टी नेताओं ने दावणगेरे उपचुनाव के दौरान उनके संगठनात्मक कार्यों और प्रयासों को मंत्री पद के लिए उनकी दावेदारी को मजबूत करने वाले कारक बताया।
पूर्व मंत्री संतोष लाड ने मंत्रिमंडल विस्तार का स्वागत किया और एक बार फिर लेबर पार्टी का पोर्टफोलियो संभालने की अपनी इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा, “मैं श्रम विभाग को वापस लाना चाहता हूं। सरकार ने अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाया है। जब भी ऐसा कोई कदम उठाया जाता है, तो स्वाभाविक रूप से कुछ असंतोष होता है। कुल मिलाकर, मैं मंत्रिमंडल के विस्तार का स्वागत करता हूं।”
पूर्व मंत्री दिनेश गुंडू राव (जिन्हें मंत्रालय में शामिल नहीं किया गया) ने कहा कि उन्हें इस फैसले से कोई निराशा नहीं है। उन्होंने कहा, “मेरी कोई अपेक्षा नहीं थी। मैं पहले ही मंत्री के रूप में कार्य कर चुका हूं। दूसरों को भी अवसर मिलना चाहिए और प्रशासनिक अनुभव प्राप्त करना चाहिए। यह अच्छी बात है कि राज्य में अब पूर्ण रूप से गठित मंत्रिमंडल है।”
राजनीति
कांग्रेस सांसदों ने पप्पू यादव पर हमले को गलत बताया, कहा-सरकार लोगों को डरा रही

संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस ने मंगलवार को केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरते हुए संसद में सार्थक चर्चा की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुए कथित हमले की कड़ी निंदा की, प्रस्तावित विधेयकों पर विस्तृत बहस की आवश्यकता जताई और छात्रों पर कथित बल प्रयोग के मामले में गृह मंत्री से संसद में बयान देने की मांग दोहराई।
कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने पप्पू यादव पर हुए कथित हमले को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमत होने का अर्थ यह नहीं है कि उसके साथ हिंसक या अनुचित व्यवहार किया जाए। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अपनी बात रखने का अधिकार है और असहमति का जवाब संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।
संसद में लाए जाने वाले प्रमुख विधेयकों पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखदेव भगत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने और विदेशी योगदान (विनियमन) अधिनियम में संशोधन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर व्यापक और सार्थक चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने बहुमत के बल पर कई बार विधेयकों को ध्वनि मत से पारित करा देती है, जिससे विपक्ष को अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं मिल पाता।
उन्होंने कहा कि पहले भी कुछ विधेयकों के दौरान विपक्ष के नेता को पूरा समय नहीं मिला और बहस आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह गई। उनका कहना था कि संसद का उद्देश्य केवल विधेयक पारित करना नहीं बल्कि सभी पक्षों की राय सुनना और लोकतांत्रिक विमर्श को मजबूत करना भी है। संख्या बल के आधार पर चर्चा को सीमित करना लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है।
वहीं, कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी पप्पू यादव पर हुए कथित हमले की निंदा करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के विचारों से असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका जवाब हिंसा, गाली-गलौज या किसी भी प्रकार की आक्रामक प्रतिक्रिया से नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि पप्पू यादव ने किसी मंच पर अपनी बात रखी है तो उसका जवाब भी तर्क और शब्दों से ही दिया जाना चाहिए।
प्रमोद तिवारी ने कहा कि लोकतंत्र में बहस और संवाद ही मतभेदों का समाधान है। उन्होंने कहा कि पप्पू यादव छह बार सांसद रह चुके हैं और उनकी राय को सुनना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार की हिंसा लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है।
संसद के विधायी एजेंडे पर पूछे गए सवाल के जवाब में प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि सदन में चार विधेयक पेश होंगे या नहीं। उन्होंने बताया कि बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक दोपहर 1:05 बजे निर्धारित है, जिसमें यह तय होगा कि सदन में कितने विधेयकों पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि बैठक के बाद ही इस विषय पर विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी।
पप्पू यादव पर हुए कथित हमले के संबंध में जेबी माथर ने भी इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के अनेक संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे, चाहे वह राम मंदिर से जुड़ा हो या कोई अन्य संवेदनशील विषय, पर विरोध प्रदर्शन पत्र लिखकर, लेख प्रकाशित कर, प्लेकार्ड और बैनर के साथ प्रदर्शन करके या नारे लगाकर किया जा सकता है, लेकिन हिंसा या डराने-धमकाने की कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
इसी दौरान बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव की मतगणना और जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की राजनीतिक संभावनाओं पर भी सुखदेव भगत ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने और जनता के बीच अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने प्रशांत किशोर को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अब यह जनता तय करेगी कि उनके वादों और रणनीति पर कितना भरोसा करती है। उन्होंने यह भी कहा कि नई पार्टी के रूप में जन सुराज के लिए यह एक महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा होगी।
उधर, कांग्रेस सांसद जेबी माथर ने छात्रों पर कथित तौर पर एके-47 और पैलेट गन के इस्तेमाल के मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन इस मामले पर अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने मांग की कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद के दोनों सदनों में आकर इस पूरे मामले पर विस्तृत बयान दें। उनके अनुसार यह बेहद गंभीर विषय है और सरकार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है।
जेबी माथर ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को लगातार उठाता रहेगा क्योंकि छात्रों से जुड़े मामलों पर सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय शेयर बाजार कच्चे तेल में नरमी से उछला; सेंसेक्स 79,000 के करीब

भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ खुला। इस दौरान सेंसेक्स 788.70 अंक या 1.01 प्रतिशत की तेजी के साथ 78,883.34 और निफ्टी 189.10 अंक या 0.78 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,572.70 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार का नेतृत्व मेटल और एफएमसीजी शेयर कर रहे थे। इस कारण सूचकांकों में निफ्टी मेटल और निफ्टी एफएमसीजी टॉप गेनर्स थे। निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑयल एंड गैस में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था।
गिरने वाले सूचकांकों में निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मीडिया लाल निशान में थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी के साथ कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 274 अंक या 0.44 प्रतिशत की तेजी के साथ 62,181 औक निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 164 अंक या 0.85 प्रतिशत की बढ़त के साथ 19,513 पर था।
सेंसेक्स पैक में इंडिगो, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, टीसीएस, इन्फोसिस, इटरनल, एलएंडटी, एमएंडएम, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील, बीईएल, एचयूएल, पावर ग्रिड, ट्रेंट, टाटा स्टील, अदाणी पोर्ट्स, एनटीपीसी, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एचसीएल टेक गेनर्स थे। सन फार्मा, मारुति सुजुकी और भारती एयरटेल लूजर्स थे।
शेयर बाजार में तेजी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान को माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने ईरान पर हमले रोकने का ऐलान किया है। इससे कच्चे तेल में भी बड़ी कमी देखी जा रही है। खबर लिखे जाने तक, कच्चे तेल का बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 83.66 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 80.02 डॉलर प्रति बैरल पर था।
ज्यादातर एशियाई बाजारों में कमजोरी के साथ कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंधाई, बैंकॉक, सोल और जकार्ता लाल निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे, जिसमें मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.53 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक करीब एक प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
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