खेल
धोनी के भविष्य पर बोले मोरे, यह उनका फैसला
पूर्व भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज किरण मोरे ने कहा है कि महेंद्र सिंह धोनी फिट थे और वह इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 13वें संस्करण के लिए तैयार थे। बीसीसीआई ने कोरोनावायरस महामारी के कारण आईपीएल को अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित कर रखा है। ऐसा माना जा रहा था कि धोनी अगर आईपीएल में खेलते हैं तो उनके पास इस साल आस्ट्रेलिया में होने वाले टी 20 विश्व कप में भी खेलने का मौका होगा, लेकिन आईपीएल के स्थगित होने से धोनी के अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के भविष्य पर संदेह होने लगा है क्योंकि पूर्व कप्तान ने पिछले साल जुलाई में इंग्लैंड में हुए विश्व कप के बाद ही कोई भी मैच नहीं खेला है।
पूर्व चयनकर्ता प्रमुख मोरे ने स्पोटर्सक्रीडा से कहा, ” यह बहुत मुश्किल है। यह उनका फैसला है। वाकई में यह आसान नहीं होने वाला और धोनी के लिए भी काफी कठिन रहेगा। दिमाग कहता है कि आगे बढ़ो, लेकिन शरीर इसकी इजाजत नहीं देता।”
उन्होंने कहा, “आईपीएल शुरू होने से पहले वह फिट थे और मैंने भी उनको नेट्स पर देखा था और वह काफी तैयार नजर आ रहे थे। टेनिस के खेल में आप 34 से 39 वर्ष की उम्र तक खेल में सर्वश्रेष्ठ रहते हो।”
मोरे ने कहा, “अगर आप अभी भी देश के लिए खेलने को लेकर इच्छुक हो और आपका दिमाग और शरीर इसकी अनुमति देता है तो आप वापसी कर सकते हैं। आशीष नेहरा ने भी तो वापसी की और उन्होंने बेहतर किया।”
अंतरराष्ट्रीय
मिडिल ईस्ट संकट और अफगानिस्तान युद्ध से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चरमराई, बचत उपायों की उम्मीद नहीं

नई दिल्ली, 16 मार्च : ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में पैदा हुए संकट से पाकिस्तान को बहुत नुकसान हुआ है। सऊदी अरब के साथ समझौते की वजह से युद्ध में शामिल होने या न होने को लेकर पाकिस्तान के सामने कई मुश्किलें हैं, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर इस्लामाबाद की हालत बदतर होती जा रही है। मिडिल ईस्ट का संकट ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर है।
अफगानिस्तान से युद्ध और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के साथ लगातार लड़ाई ने इसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
अधिकारियों का कहना है कि ये लड़ाइयां पाकिस्तान को न सिर्फ सैन्य मोर्चे पर, बल्कि आर्थिक रूप से भी बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। पाकिस्तान के लिए हालात इतने खराब हैं कि उसे अपनी बची-खुची अर्थव्यवस्था को भी बचाना होगा। इस्लामाबाद ने अब अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं और कई मोर्चों पर कई कटौतियों की घोषणा की है।
केंद्रीय और प्रांतीय सरकारी विभागों में सरकारी गाड़ियों को 60 फीसदी तक सड़क से दूर रखने का फैसला किया गया है। सरकारी ऑफिस में ग्रेड-20 के अधिकारी जो 3,00,000 रुपए से ज्यादा कमाते हैं, उनसे अपनी मर्जी से दो दिन की सैलरी छोड़ने को कहा गया है। हालांकि, यह स्वास्थ्य और शिक्षा सेक्टर के लोगों पर लागू नहीं होता है।
सरकार ने प्रांतीय और केंद्रीय सदन के सदस्यों को दो महीने के लिए सैलरी और अलाउंस में 25 फीसदी की कटौती करने का भी निर्देश दिया है। पाकिस्तान सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है, वह है सरकारी गाड़ियों के लिए पेट्रोलियम प्रोविजन को 50 फीसदी कम करना।
कैबिनेट मंत्रियों, राज्य मंत्रियों, प्रधानमंत्री के स्पेशल असिस्टेंट और सलाहकारों को दो महीने तक अपनी पूरी सैलरी नहीं लेनी होगी। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों के गैर-जरूरी खर्च में 20 फीसदी की कटौती की जाएगी। अधिकारियों को अब बिजनेस क्लास में यात्रा नहीं करनी होगी।
विदेश यात्रा के दौरान सभी अधिकारियों को सिर्फ इकॉनमी क्लास में यात्रा करनी होगी। मंत्री, सांसद और अधिकारी सिर्फ जरूरी विदेश यात्राएं ही कर सकते हैं। सरकारी ऑफिसों के लिए नए टिकाऊ सामान की खरीद पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। आईटी खरीद के लिए जांच के बाद सीमित खरीद को छूट दी गई है। सरकारी डिपार्टमेंट में अब सभी मीटिंग वर्चुअल होंगी।
यह फैसला यात्रा और रहने की लागत दोनों को कम करने के लिए लिया गया है। नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर मौजूदा रोक जून 2026 तक जारी रहेगी। बैंकिंग सेक्टर और जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को छोड़कर, सभी सरकारी ऑफिस हफ्ते में सिर्फ चार दिन ही खुलेंगे।
सरकारी सेमिनार, ट्रेनिंग सेशन और कॉन्फ्रेंस आयोजित करने से पहले उनकी पहले से जांच और मंजूरी लेनी होगी। पाकिस्तान सरकार ने प्राइवेट सेक्टर के लिए भी ऐसी ही गाइडलाइंस जारी करने की सलाह दी है। हालांकि, यह जरूरी नहीं है।
पाकिस्तान पर नजर रखने वालों का कहना है कि देश गले तक कर्ज में डूबा हुआ है। अगर मिडिल-ईस्ट में संकट लंबा खिंचता है, तो पाकिस्तान ने खर्च कम करने के लिए जो भी कदम उठाए हैं, उनसे कोई मदद नहीं मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक संकट रहने से न सिर्फ पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा, बल्कि यह पूरी तरह से गिर जाएगी। आम तौर पर ईद के दौरान बिजनेस में कुछ बढ़ोतरी होती है।
इन सभी रुकावटों ने रिटेल एक्टिविटी को धीमा कर दिया है और लोग सिर्फ जरूरी चीजें ही खरीद रहे हैं, और पहले की तरह इसी समय में ज्यादा खर्च नहीं कर रहे हैं। पाकिस्तान में कई लोग 6 मार्च को तेल की कीमतें 20 फीसदी बढ़ाने की जरूरत पर सवाल उठा रहे हैं। तेल की जमाखोरी रोकने के लिए लिया गया यह फैसला उल्टा पड़ गया है क्योंकि इससे लोगों पर बहुत बुरा असर पड़ा है।
इससे कृषि क्षेत्र को नुकसान हुआ है, जो देश की अर्थव्यवस्था का 23 फीसदी हिस्सा है। लोगों को आने-जाने में मुश्किल हो रही है क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से टैक्सी और रिक्शा से सफर करना बहुत महंगा हो गया है। इस फैसले का फूड डिलीवरी राइडर्स पर भी बड़ा असर पड़ा है।
राष्ट्रीय
देश में 25,605 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स; 17,677 ग्रामीण क्षेत्रों में: सरकार

gas
नई दिल्ली, 16 मार्च : सरकार ने सोमवार को बताया कि देश में कुल 25,605 एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स हैं (1 मार्च 2026 तक), जिनमें से 17,677 डिस्ट्रीब्यूटर्स ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। इन डिस्ट्रीब्यूटर्स को तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के 214 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट्स के जरिए आपूर्ति की जा रही है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में एलपीजी की पहुंच बढ़ाने के लिए अप्रैल 2016 से फरवरी 2026 के बीच 8,037 नए डिस्ट्रीब्यूटर्स शुरू किए गए। इनमें से 7,444 यानी करीब 93 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा दे रहे हैं।
मंत्री ने बताया कि पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए पूरे देश में आईवीआरएस और एसएमएस के जरिए एलपीजी रीफिल बुकिंग की सुविधा शुरू की गई है। इसके तहत बुकिंग, कैश मेमो बनने और डिलीवरी जैसे महत्वपूर्ण चरणों पर उपभोक्ताओं को एसएमएस अलर्ट भेजे जाते हैं।
इसके अलावा, तेल विपणन कंपनियों ने डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) भी शुरू किया है, जो एसएमएस के जरिए उपभोक्ता को भेजा जाता है और डिलीवरी करने वाले व्यक्ति को दिखाने पर ही सिलेंडर की पुष्टि के साथ डिलीवरी होती है।
उपभोक्ताओं को सस्ती एलपीजी उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने वित्त वर्ष 2022-23 में ओएमसी को 22,000 करोड़ रुपए का मुआवजा दिया था, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 30,000 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता को मंजूरी दी गई है।
मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) मई 2016 में शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को मुफ्त जमा राशि के साथ एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराना था।
उन्होंने बताया कि 1 मार्च 2026 तक देश में उज्ज्वला योजना के तहत लगभग 10.56 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दिए जा चुके हैं।
वर्तमान में दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की खुदरा बिक्री कीमत 913 रुपए है। उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को सरकार 300 रुपए प्रति सिलेंडर की लक्षित सब्सिडी देती है, जिसके बाद उन्हें प्रभावी रूप से 613 रुपए में 14.2 किलोग्राम का सिलेंडर (दिल्ली में) मिल जाता है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, भारत पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में आत्मनिर्भर बना हुआ है और घरेलू मांग पूरी करने के लिए इन ईंधनों के आयात की जरूरत नहीं पड़ती। देश की सभी रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं और पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार बनाए हुए हैं।
मंत्रालय ने कहा कि सरकार घरेलू उपभोक्ताओं के हितों को प्राथमिकता देती है और घरों, अस्पतालों तथा शैक्षणिक संस्थानों जैसे प्राथमिक क्षेत्रों में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
राजनीति
भाजपा सांसदों का विपक्ष पर हमला, लोकसभा में हंगामा और मर्यादा भंग करने का आरोप

नई दिल्ली, 16 मार्च : भाजपा के सांसदों ने हाल ही में लोकसभा में विपक्ष के व्यवहार और संसद की मर्यादा को लेकर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से उनका व्यवहार रहता है, वह देश के लिए सही नहीं है। उन्हें व्यवहार में सुधार लाना चाहिए और सदन की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।
भाजपा सांसद जगदम्बिका पाल ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा सभी सांसदों को पत्र भेजना लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष, विशेषकर राहुल गांधी और उनके सहयोगियों ने बिना किसी विषय के सदन में हंगामा किया। यह अविश्वास प्रस्ताव राहुल गांधी की जिद के कारण आया और उन्होंने उम्मीद जताई कि अब वे ऐसे धरने बंद करेंगे।
भाजपा सांसद कमलजीत सेहरावत ने लोकसभा अध्यक्ष की निष्पक्षता की सराहना करते हुए बताया कि ओम बिरला जब भी सदन के किसी भी सदस्य से बात करते हैं, चाहे वो पक्ष से हो या विपक्ष से हो, उसमें भेद-भाव नहीं होता है। लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार नेता प्रतिपक्ष को भी कहा कि वे अपनी बात रखें, लेकिन बार-बार वे उसे नजरअंदाज करते हैं और बाद में आरोप लगाते हैं कि उन्हें बात नहीं रखने दी जाती है, लेकिन उनका नजरअंदाज करना और बाद में आरोप लगाना चिंता का विषय है।
भाजपा सांसद नरेश बंसल ने लोकसभा अध्यक्ष के लिए प्रधानमंत्री के पत्र पर कहा, “निश्चित रूप से संसद के अंदर विपक्ष का जिस प्रकार का व्यवहार है, मुझे लगता है कि उनके दिमाग में उनके खुद के अलावा कोई और सम्मानित है ही नहीं। वे न तो न्यायालय का सम्मान करते हैं, न संसद का, न राष्ट्रपति का, न उपराष्ट्रपति का और न ही स्पीकर का। मुझे लगता है कि उनके कोई सुधरने की गुंजाइश नहीं है।”
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष ने गैर जिम्मेदाराना तरीके अपनाए हैं। उन्होंने बताया कि पहले अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से लोकसभा अध्यक्ष को निशाना बनाया गया और अब चुनाव आयोग पर हमला किया जा रहा है। भाजपा सांसद ने इसे संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का राजनीतिक स्टंट करार दिया।
भाजपा सांसदों ने एक स्वर में कहा कि लोकसभा का उद्देश्य विवाद नहीं, बल्कि देश के चुने हुए 140 करोड़ लोगों के लिए काम करना है। उन्होंने विपक्ष पर हंगामा करने और सदन की मर्यादा भंग करने का आरोप लगाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में सहमति और असहमति दोनों हो सकती हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।
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