राजनीति
मोदी सरकार ने पेंशन छीनकर सशस्त्र बलों को धोखा दिया : कांग्रेस
कांग्रेस ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि मोदी सरकार सेना के अधिकारियों की पेंशन ‘छीनकर’ उनका मनोबल गिरा रही है। शुक्रवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि मोदी सरकार उन अधिकारियों की सक्रिय सेवा के बाद पेंशन और वैकल्पिक कैरियर विकल्प छीनने वाली इतिहास में पहली सरकार बन गई है, जो हमारी मातृभूमि की रक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा, “शहीद सैनिकों की वीरता और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट बटोरने वाली मोदी सरकार देश के इतिहास की पहली सरकार बनने जा रही है, जो सीमा पर रोजाना अपनी जान की बाजी लगाने वाले सैन्य अफसरों की पेंशन काटने और सक्रिय सेवा के बाद उनके दूसरे करियर विकल्प पर डाका डालने की तैयारी में है।”
कांग्रेस नेता ने कहा, “एक तरफ तो प्रधानमंत्री मोदी सेना के लिए ‘दीया’ जलाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ साहसी और बहादुर सैन्य अफसरों की पेंशन काट अंधेरा फैलाने का दुस्साहस कर रहे हैं।”
सुरजेवाला ने कहा, “मोदी सरकार के नए प्रस्ताव के अनुसार, केवल वे अधिकारी, जिन्होंने सशस्त्र बल सेवा में 35 से अधिक वर्ष बिताए हैं, वही ‘पूर्ण पेंशन’ के हकदार होंगे। लेकिन वास्तविकता यह है कि सेना के 90 प्रतिशत अधिकारी इससे पहले ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में मोदी सरकार सेना के 90 प्रतिशत कर्मचारियों को उनकी पेंशन से वंचित करने की साजिश रच रही है।”
कांग्रेस ने कहा कि सेना में भर्ती के समय भारतीय सैन्य अकादमी के प्रत्येक अधिकारी को अनिवार्य रूप से 20-वर्षीय अनिवार्य बॉन्ड पर हस्ताक्षर करना होगा। 20 साल की सेवा के बाद एक अधिकारी को पेंशन के रूप में पिछले आहरित वेतन (लेटेस्ट सेलरी) का 50 प्रतिशत मिलता है, लेकिन मोदी सरकार का नया प्रस्ताव इसमें से 50 प्रतिशत छीन रहा है।
कांग्रेस ने ‘सशस्त्र बलों में पेंशन के पुनर्विचार’ के लिए आंतरिक ज्ञापन का भी हवाला दिया। सुरजेवाला ने कहा, “उदाहरण के लिए, यदि किसी अधिकारी को उनके अंतिम आहरित वेतन के रूप में एक लाख रुपये मिलते हैं, तो वर्तमान में उन्हें 50,000 रुपये पेंशन के रूप में मिलेंगे। लेकिन भाजपा के नए प्रस्ताव से अधिकारी को केवल 25,000 रुपये ही पेंशन के तौर पर मिल पाएंगे।”
कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर सेना के जवानों के हितों की अनदेखी करने और उन्हें धोखा देने का आरोप लगाया है।
सुरेजवाला ने कहा, “सैन्य अफसरों की सेवाओं की शर्तों को भी बैक डेट से संशोधित नहीं किया जा सकता। जब सेना में भर्ती होते हुए 20 साल की अनिवार्य सेवा और 20 साल के बाद फुल पेंशन पर रिटायरमेंट की शर्त रखी गई है, तो आज मोदी सरकार उन सारी सेवा शर्तों को कैसे संशोधित कर सकती है? इससे सैन्य अधिकारियों का मनोबल टूटेगा।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि भारत की तीनों सेनाओं में पहले से ही 9,427 अफसरों की कमी है। जून, 2019 के आंकड़े बताते हैं कि थल सेना में 7,399 नौसेना में 1,545 और वायु सेना में 483 अफसरों की कमी है।
पार्टी ने कहा कि सशस्त्र बलों में औसतन 65 प्रतिशत सेना अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक सीमित हैं। केवल 35 फीसदी अधिकारी ही कर्नल या उससे ऊपर के पदों तक पहुंच पाते हैं।
महाराष्ट्र
धोखाधड़ी की एफआईआर के बाद एक्शन में एमएचएडीए और बीएमसी: मडियार मेंशन की एनओसी रद्द, ‘स्टॉप वर्क’ नोटिस जारी

मुंबई: धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों में एफआईआर दर्ज होने के बाद म्हाडा (एमएचएडीए) और बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने मांडवी डिवीजन स्थित ‘मडियार मेंशन’ इमारत पर बड़ा शिकंजा कसा है। म्हाडा ने इस परियोजना को जारी की गई अपनी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) रद्द कर दी है, वहीं बीएमसी के बिल्डिंग प्रपोजल विभाग ने निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए ‘स्टॉप वर्क नोटिस’ जारी कर दिया है।
म्हाडा के सख्त निर्देश
म्हाडा द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि:
इस संबंधित परियोजना को भविष्य में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक अनुमति, संशोधन या मंजूरी प्रदान नहीं की जाएगी।
किसी भी कानूनी या प्रशासनिक जटिलता से बचने के लिए निर्माण स्थल पर चल रहे सभी कार्यों को तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए गए हैं।
ध्यान देने योग्य बात: मामले में एफआईआर दर्ज होने के बावजूद, निर्माण स्थल पर सातवें माले (ग्राउंड + 7) का निर्माण कार्य जारी रखा गया था।
फर्जी दस्तावेजों पर बने 8 रजिस्ट्रेशन रद्दी के दायरे में
मामले में FIR दर्ज होने के बाद सब-रजिस्ट्रार ऑफ एश्योरेंस (उप-पंजीयक (आश्वासन)) द्वारा 8 दस्तावेजों को रजिस्टर किया गया था। इस पर संज्ञान लेते हुए सब-रजिस्ट्रार कार्यालय ने संबंधित पुलिस स्टेशन को पत्र लिखा है। पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि इन 8 दस्तावेजों की नींव फर्जी कागजातों पर टिकी है, इसलिए इनका इस्तेमाल कहीं भी न किया जाए।
क्या है पूरा मामला?
इस संपत्ति से जुड़ी धोखाधड़ी का खुलासा इस साल 2 फरवरी को हुआ था। शिकायतकर्ता मोहम्मद रफीक उस्मान पुदीनावाला ने संपत्ति में धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े के आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत के आधार पर पायधूनी पुलिस स्टेशन में निम्नलिखित आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला (FIR) दर्ज किया गया था:
मरियम महबूब कोड़िया
हुसैन कोड़िया
यूसुफ इब्राहिम सुपारीवाला (बिल्डर)
म्हाडा की इस सख्त कार्रवाई के बाद माना जा रहा है कि इस परियोजना से जुड़े अन्य प्रशासनिक पहलुओं और अधिकारियों की भूमिका की जांच भी तेज हो सकती है।
राष्ट्रीय समाचार
भोपाल में भाजपा नेता काले कपड़े पहनकर कांग्रेस दफ्तर घेरने सड़क पर उतरे

दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री आवास के पास धरना देने के विरोध में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भाजपा नेताओं ने विरोध दर्ज कराया। साथ ही, वे कांग्रेस दफ्तर घेरने सड़कों पर उतरे।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता राजधानी के रेड क्रॉस चौराहे पर जमा हुए। प्रदेश अध्यक्ष सहित तमाम बड़े नेता काले कपड़े पहने हुए थे और उन्होंने मंगलवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के करीब दिए गए धरने का विरोध किया। यहां भाजपा नेताओं ने कांग्रेस को संविधान विरोधी बताया, साथ ही कार्यकर्ताओं के हाथ में नारे लिखी हुई तख्तियां थी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी लगातार संविधान की हत्या कर रहे हैं। उन्हें चुनाव में हार मिलती है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस पिछले दरवाजे से इस तरह की अराजकता फैलाने का काम करती है। भाजपा के नेता कार्यकर्ताओं के साथ कांग्रेस की संविधान विरोधी इस गतिविधि का विरोध करते हैं। कांग्रेस जो चुनाव में सफल नहीं होती वह कहीं न कहीं लोकतंत्र को दबाने का काम करती है और अराजकता के रास्ते को अपनाती है।
खंडेलवाल ने आगे कहा कि कांग्रेस के इस कृत्य का भाजपा विरोध करती है, इसीलिए भाजपा के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उनके कार्यालय का घेराव कर रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने राहुल गांधी द्वारा विदेशी मंचों पर दिए जाने वाले बयानों का जिक्र करते हुए कहा कि राहुल गांधी विदेश में जाकर भारत का अपमान करते हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ता रेड क्रॉस चौराहे से कांग्रेस दफ्तर की ओर आगे बढ़े, लेकिन पुलिस द्वारा की गई बैरिकेडिंग के चलते आगे नहीं जा सके। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस दफ्तर के बाहर कांग्रेस नेता भाजपा कार्यकर्ताओं के स्वागत में फूल लिए खड़े हुए थे।
राजनीति
‘कांग्रेस-भाजपा को बोलने दिया, हमें क्यों नहीं’, सदन में बात रखने का मौका न मिलने पर नाराज हुए अखिलेश

लोकसभा में बुधवार को नीट पेपर लीक मुद्दे पर सिर्फ कांग्रेस और भाजपा को बोलने का अवसर मिलने पर समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव नाराज हो गए। स्पीकर ओम बिरला के सामने अपनी आपत्ति जताते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आपने कांग्रेस और भाजपा को बोलने का अवसर दिया, क्या आपने इनसे समझौता किया है?”
अखिलेश यादव ने लोकसभा में कहा, “आपने इनको (कांग्रेस) बोलने दिया, उनको (भाजपा) को बोलने दिया, क्या आपने समझौता कर लिया है? आपने हमें क्यों नहीं बोलने दिया? अध्यक्ष जी, यह पक्ष बिल्कुल ठीक नहीं है। ये युवा-छात्र हम सभी के हैं। हम सभी उनके लिए लड़ रहे हैं।”
नीट मामले पर अखिलेश ने कहा, “यह मामला कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या भाजपा का नहीं है, बल्कि यह नौजवानों और छात्रों का है। अगर छात्रों की नहीं सुनी जाएगी तो हम सड़कों पर आएंगे।”
सपा प्रमुख ने विरोध प्रदर्शनों से निपटने के सरकार के तरीके की आलोचना की और आरोप लगाया कि प्रदर्शनों के दौरान छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया। उन्होंने कहा, “सरकार ने छात्रों के साथ जैसा बर्ताव किया, उनके हाथ-सिर तोड़े गए, उनके कपड़े फाड़े गए। क्या आप (सरकार) हमारी बेटियों के कपड़े फाड़ेंगे?”
प्रधानमंत्री आवास के पास विपक्ष के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा, “मैं और राहुल गांधी थे, हम मजबूरी में प्रधानमंत्री के आवास पर गए। अगर सरकार यहां (सदन) में सुन बात सुन लेती तो हम लोग वहां नहीं जाते।”
उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं के लिए सरकार बाहर बोल सकती है, सदन में क्यों नहीं बोल सकती है।
इससे पहले, कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सदन में नीट का विषय उठाया और व्यापक चर्चा की मांग की। इस पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार इस मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है।
स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “सभी पक्षों की राय आ चुकी है। आप (समाजवादी पार्टी) भी चर्चा चाहते हैं, वे (कांग्रेस) भी चर्चा चाहते हैं और सरकार भी चर्चा के लिए तैयार है। लेकिन इस तरह सदन की गैलरी में खड़े होकर चर्चा नहीं हो सकती।” इसके बाद लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
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