व्यापार
सोना इस हफ्ते चार हजार रुपए और चांदी आठ हजार रुपए से अधिक सस्ती हुई
सोने और चांदी में इस हफ्ते बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे दोनों कीमती धातुओं का दाम क्रमश: 4,000 रुपए और 8,000 रुपए से अधिक घट गया।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 4,694 रुपए कम होकर 1,54,884 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,59,578 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
22 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,41,874 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,46,173 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,16,163 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,19,684 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
इस हफ्ते 24 कैरेट सोने में सबसे न्यूनतम दाम 2 सितंबर को शाम के सत्र में 1,51,184 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 31 अगस्त को शाम के सत्र में 1,55,835 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया।
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 8,436 रुपए कम होकर 2,35,456 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,43,892 रुपए प्रति किलो था।
इस हफ्ते चांदी में उच्चतम दाम 31 अगस्त को शाम के सत्र में 2,37,199 रुपए प्रति किलो देखा गया। वहीं, न्यूनतम दाम 3 सितंबर को सुबह के सत्र में 2,28,360 रुपए प्रति किलो देखा गया।
आईबीजेए की ओर से दिन में दो बार सुबह और शाम के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों को जारी किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 66 डॉलर प्रति औंस के करीब था।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ना था। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। वहीं, ईरान भी मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इससे बॉन्ड यील्ड, डॉलर और कच्चा तेल भी मजबूत हो गया है।
व्यापार
एलआरएस के तहत अगस्त में विदेशी बाजारों में भारतीयों का निवेश हुआ दोगुना, 321 मिलियन डॉलर के पार पहुंचा: आरबीआई डेटा

विदेशी शेयर और बॉन्ड बाजारों में निवेश को लेकर भारतीयों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अक्टूबर 2026 बुलेटिन के अनुसार, उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत अगस्त 2026 में भारतीयों द्वारा विदेशी इक्विटी और डेट बाजारों में किया गया निवेश सालाना आधार पर 111 प्रतिशत बढ़कर 321.53 मिलियन डॉलर पहुंच गया, जो एक वर्ष पहले अगस्त 2025 में 152.18 मिलियन डॉलर था।
हालांकि मासिक आधार पर इस श्रेणी में निवेश में 7 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्ज की गई। इससे पहले जून 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश 460 मिलियन डॉलर के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गया था।
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान एलआरएस के तहत कुल बाहरी प्रेषण 28.98 अरब डॉलर रहा। अगस्त 2026 में विदेशी इक्विटी और डेट निवेश कुल एलआरएस प्रेषण का लगभग 11.7 प्रतिशत हिस्सा रहा, जबकि एक वर्ष पहले इसकी हिस्सेदारी केवल 5.8 प्रतिशत थी। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में भारतीय निवेशकों की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है।
कुल एलआरएस प्रेषण अगस्त 2026 में बढ़कर 2.74 अरब डॉलर हो गया, जो अगस्त 2025 में 2.64 अरब डॉलर था। यह सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत और जुलाई 2026 की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत अधिक है। जुलाई 2026 में कुल बाहरी प्रेषण 2.58 अरब डॉलर दर्ज किया गया था।
यात्रा अब भी एलआरएस के तहत सबसे बड़ा खर्च का क्षेत्र बना हुआ है। अगस्त 2026 में विदेश यात्रा पर भारतीयों का खर्च 1.63 अरब डॉलर रहा, जो कुल बाहरी प्रेषण का करीब 59 प्रतिशत था। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1 प्रतिशत अधिक और जुलाई की तुलना में 11.4 प्रतिशत ज्यादा रहा।
विशेष रूप से कारोबारी यात्रा पर होने वाला खर्च जुलाई के 10.9 मिलियन डॉलर से बढ़कर अगस्त में 51 मिलियन डॉलर पहुंच गया, यानी इसमें लगभग पांच गुना उछाल दर्ज किया गया।
अन्य प्रमुख श्रेणियों में उपहार के रूप में भेजी गई राशि बढ़कर 215.72 मिलियन डॉलर हो गई, जबकि निकट संबंधियों के भरण-पोषण के लिए भेजी गई राशि 275.43 मिलियन डॉलर रही। विदेशों में अचल संपत्ति की खरीद के लिए 39.59 मिलियन डॉलर भेजे गए, जबकि विदेशी बैंकों में जमा (डिपॉजिट) के लिए 50.78 मिलियन डॉलर का प्रेषण दर्ज किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सा उपचार के लिए विदेश भेजी गई राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। अगस्त 2026 में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए प्रेषण 21.3 प्रतिशत बढ़कर 4.84 मिलियन डॉलर पहुंच गया।
व्यापार
वैश्विक दबाव के चलते सोना-चांदी धड़ाम; सिल्वर में 6,799 रुपए की गिरावट, कीमत 2 लाख के नीचे फिसली

पिछले कुछ समय से कीमती धातुओं की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है। पिछले दिन की गिरावट के बाद हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों में एक बार फिर सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली।
वैश्विक शेयर बाजारों में बिकवाली, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना और ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे रहने की आशंका ने निवेशकों का रुख प्रभावित किया है, जिसका असर सोने और चांदी दोनों पर पड़ा, जिसके चलते घरेलू बाजार में चांदी का भाव एक बार फिर 2 लाख प्रति किलोग्राम के नीचे पहुंच गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद भाव 1,43,309 रुपए से 1,251 रुपए यानी 0.87 प्रतिशत फिसलकर 1,42,058 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला। वहीं दिन के कारोबार में एक समय यह 1,503 रुपए यानी 1.04 प्रतिशत गिरकर 1,41,806 रुपए प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गया।
कारोबार के दौरान इसमें कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन खबर लिखे जाने तक सोना 629 रुपए या 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,42,680 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा था।
वहीं, चांदी में गिरावट और भी अधिक रही। दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी अपने पिछले बंद भाव 1,99,599 रुपए से 3,012 रुपए यानी 1.50 प्रतिशत लुढ़ककर 1,96,587 रुपए प्रति किलोग्राम पर खुली।
जबकि दिन के कारोबार में एक समय इसमें 6,799 रुपए यानी 3.40 प्रतिशत की भारी दर्ज की गई और यह 1,92,800 रुपए प्रति किलोग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गई, और इस तरह यह 2 लाख रुपए से नीचे लुढ़क गई है।
हालांकि कारोबार के दौरान इसमें भी कुछ सुधार देखने को मिली और यह 1.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,96,276 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर पर ट्रेड करती नजर आई।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, ऊंची ऊर्जा कीमतें महंगाई संबंधी चिंताओं को बढ़ा रही हैं। यदि महंगाई ऊंची बनी रहती है तो प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकते हैं। यही वजह है कि निवेशक फिलहाल सोने और चांदी में सावधानी बरत रहे हैं। इस बीच, वैश्विक बाजार में सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास आ गई है, जिससे बाजार में कमजोरी का माहौल बना हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार कॉमेक्स में भी सोना और चांदी दोनों कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे। सोना करीब 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,034 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करता नजर आया, वहीं चांदी 1.30 प्रतिशत की गिरावट के साथ 54.29 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रही थी। निवेशकों का ध्यान अब अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, महंगाई के रुझान और केंद्रीय बैंकों की अगली नीतियों पर है।
विश्लेषकों का कहना है कि ऊंची बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों के कमजोर पड़ने से सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव बना हुआ है। हालांकि डॉलर में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी आगे चलकर कुछ समर्थन दे सकती है।
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में सोने ने एमसीएक्स पर 1,80,779 रुपए प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। वहीं चांदी 4,20,048 रुपए प्रति किलोग्राम के ऐतिहासिक उच्च स्तर तक पहुंच गई थी। मौजूदा कीमतों को देखें तो सोना अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुका है, जबकि चांदी रिकॉर्ड स्तर से करीब आधी कीमत पर कारोबार कर रही है।
बाजार जानकारों का कहना है कि आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, चीन की अर्थव्यवस्था से जुड़े संकेतों, वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।
व्यापार
अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस का मुनाफा दूसरी तिमाही में दोगुना हुआ, आय 51 प्रतिशत बढ़ी

अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (एईएसएल) ने गुरुवार को वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही के नतीजे जारी किए। जुलाई-सितंबर अवधि में कंपनी का मुनाफा सालाना आधार पर 145 प्रतिशत बढ़कर 1,364 करोड़ रुपए हो गया है। इस दौरान कंपनी की आय 51 प्रतिशत बढ़त के साथ 10,239 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है।
वित्त वर्ष 27 की दूसरी तिमाही में कंपनी की परिचालन से आय सालाना आधार पर 51 प्रतिशत बढ़कर 7,167 करोड़ रुपए पर पहुंच गई है। इसकी वजह कंपनी के ट्रांसमिशन और एनर्जी सॉल्यूशंस प्लेटफॉर्म का अच्छा प्रदर्शन करना है।
सितंबर तिमाही में कंपनी एबिटडा सालाना आधार पर 67 प्रतिशत बढ़कर 3,548 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, ऑपरेशनल एबिटडा सालाना आधार पर 68 प्रतिशत बढ़कर 3,070 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है।
वित्त वर्ष 27 की पहली छमाही में कंपनी का कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 137 प्रतिशत बढ़कर 2,600 करोड़ रुपए हो गया है। वहीं, कुल आय 46 प्रतिशत बढ़कर 20,092 करोड़ रुपए हो गई है।
नतीजों पर अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के सीईओ कंदर्प पटेल ने कहा, “एईएसएल ने वित्तीय वर्ष की पहली छमाही को मजबूत वित्तीय और परिचालन गति के साथ पूरा किया है, जिससे भविष्य की वृद्धि के लिए एक ठोस आधार तैयार हुआ है। हमने विजाग और सतारा के रणनीतिक ट्रांसमिशन एसेट्स हासिल करके अपनी ग्रोथ पाइपलाइन का काफी विस्तार किया है, जिससे हमारा एक्टिव ऑर्डर बुक लगभग 87,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।”
उन्होंने बताया कि परिचालन के लिहाज से, मुंबई वितरण कारोबार में बेची गई बिजली यूनिट्स में लगभग 11 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि स्मार्ट मीटरिंग प्लेटफॉर्म के तहत लगाए गए मीटरों की संख्या बढ़कर लगभग 1.5 करोड़ हो गई है।
पटेल ने कहा, “एमएसईडीसीएल के साथ 2.5 गीगावाट आरटीसी बिजली आपूर्ति का एक बड़ा अनुबंध, ग्राहकों के लिए कई स्रोतों से ऊर्जा जुटाने और बिजली आपूर्ति को बेहतर बनाने में एईएसएल की मुख्य क्षमताओं को और मजबूत करता है।”
उन्होंने आगे कहा, “सभी व्यावसायिक क्षेत्रों में तिमाही-दर-तिमाही मजबूत प्रदर्शन और सख्त वित्तीय अनुशासन के दम पर, हम इस विशाल प्रोजेक्ट पाइपलाइन को हितधारकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य में बदलने की अच्छी स्थिति में हैं।”
सेगमेंट आधार पर दूसरी तिमाही में कंपनी की ट्रांसमिशन ऑपरेटिंग आय सालाना आधार पर 17 प्रतिशत बढ़कर 1,521 करोड़ रुपए हो गई है, जबकि डिस्ट्रीब्यूशन (एईएमएल और एमयूएल) की आय 2 प्रतिशत बढ़कर 3,181 करोड़ रुपए हो गई है।
स्मार्ट मीटरिंग ऑपरेशन से आय 129 प्रतिशत उछलकर 267 करोड़ रुपए हो गई है और एनर्जी सॉल्यूशंस से आय 2,197 करोड़ रुपए हो गई है।
बीएसई पर अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस के शेयर 1,293 रुपए पर बंद हुए। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, अदाणी ग्रुप के इस शेयर का 52-हफ्ते का उच्चतम स्तर 1,789 रुपए और 52-हफ्ते का निचला स्तर 804.70 रुपए रहा है।
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