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Sunday,25-October-2026
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ओडिशा में 2.60 करोड़ के घोटाले में वन विभाग का अधिकारी गिरफ्तार

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भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ओडिशा विजिलेंस ने रविवार को राज्य वन विभाग के सीनियर क्लर्क को 2.60 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी धनराशि के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया।

आरोपी की पहचान बबलू सुना के रूप में हुई है, जो सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग, नुआपाड़ा के मंडल वन अधिकारी (डीएफओ) कार्यालय में स्थापना अनुभाग के प्रभारी वरिष्ठ सहायक के रूप में तैनात था।

आरोप है कि उसने 2023 से संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (एमएसीपी) और संशोधित सुनिश्चित करियर प्रगति (आरएसीपी) योजनाओं के तहत फर्जी बिल बनाकर 2.60 करोड़ रुपए से अधिक की सरकारी धनराशि का गबन किया।

ओडिशा विजिलेंस के अनुसार, विस्तृत सत्यापन और जांच में पता चला कि बबलू सुना ने एमएसीपी और आरएसीपी योजनाओं के तहत फर्जी एरियर बिल बनाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया।

विजिलेंस ने रविवार को एक बयान में कहा, “सुनाबेड़ा वन्यजीव प्रभाग के पूर्व, सेवानिवृत्त और मृत कर्मचारियों की साख और पहचान का उपयोग करके फर्जी बिलों को संसाधित किया गया ताकि सार्वजनिक धन को उसके परिवार के सदस्यों (पत्नी, भाई, बहन और दो करीबी सहयोगियों) के निजी बैंक खातों में भेजा जा सके।”

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने कथित तौर पर अपने वैध अधिकार से अधिक समय-समय पर वेतन वृद्धि हासिल करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में हेरफेर किया। उसने लंबी अवधि तक अतिरिक्त मासिक वेतन बिल भी बनाए, जिससे गलत तरीके से 10.58 लाख रुपए से अधिक की निकासी की गई। कथित तौर पर गबन की गई कुल राशि 2,60,21,306 रुपए आंकी गई है।

इस संबंध में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी के खिलाफ कोरापुट विजिलेंस पुलिस स्टेशन में दो मामले दर्ज किए गए हैं।

आरोपी पिछले छह महीनों से कथित तौर पर फरार था। उसे ओडिशा विजिलेंस ने शनिवार रात बलांगीर में उसके ठिकाने से पकड़ा।

18 अक्टूबर को विजिलेंस ने ढेंकानाल जिले में वन विभाग के एक सीनियर क्लर्क और उसके दो सहयोगियों को 2016 से 2026 की अवधि में 65,90,773 रुपए की सरकारी धनराशि के गबन के आरोप में गिरफ्तार किया था।

अपराध

तेलंगाना में मिठाई की दुकानों पर छापा, गंदगी और मिलावट का खुलासा

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तेलंगाना में मिठाई बनाने और बेचने वाली दुकानों पर की गई स्पेशल ड्राइव में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। तेलंगाना स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी फॉर फूड एंड एसेंशियल ड्रग्स (टीजी सेफ) ने पूरे राज्य में यह अभियान चलाया।

‘टीजी सेफ’ के फूड सेफ्टी ऑफिसर्स ने 53 मिठाई बनाने और रिटेल यूनिट्स पर छापेमारी की। ‘टीजी सेफ’ ने रविवार को एक बयान में बताया कि शुक्रवार को हुई जांच के दौरान अधिकारियों ने कुछ दुकानों में कई खामियां पाईं।

जांच में फर्श टूटा हुआ मिला और वहां खाने का कचरा बिखरा पड़ा था। धुलाई वाली जगह गंदी थी, नालियां खाने के कचरे से जाम थीं। दीवारों पर गंदगी, धूल और खाने के कचरे के दाग लगे थे। कई जगह कीट नियंत्रण रिकॉर्ड, फूड हैंडलर्स के हेल्थ रिकॉर्ड जैसे जरूरी कागजात भी नहीं थे। फूड हैंडलर्स बिना हेयरनेट और दस्तानों के काम कर रहे थे। एग्जॉस्ट और चिमनियां चिकनाई से भरी थीं और स्टोरेज का तरीका भी गलत था, जैसे खाने का सामान जमीन पर रखा होना और खाने और गैर-खाने के सामान को एक साथ रखना।

अधिकारियों ने मिलावट के शक में 38 सैंपल लिए। जांच में मिली खामियों को सुधारने के लिए 20 दुकानों को सुधार नोटिस दिया जाएगा।

‘टीजी सेफ’ कमिश्नर ने कहा कि इन दुकानों का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा ताकि यह देखा जा सके कि उन्होंने फूड सेफ्टी के नियमों का पालन किया है या नहीं। दोबारा जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और एक दुकान को जांच के दौरान मिली खामियों के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा और जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू की जाएगी।

यह स्पेशल ड्राइव मंचेरियल, जंगांव, सिद्दीपेट, खम्मम, नारायणपेट, जोगुलाम्बा गडवाल, वनपर्थी, नलगोंडा, सूर्यापेट, पेद्दापल्ली, कामारेड्डी, नागरकुरनूल, निर्मल, निजामाबाद, हनुमाकोंडा, मेडक, वारंगल, राजन्ना सिरसिला, जगतियाल, महबूबनगर और कोठागुडेम जैसे जिलों में चलाई गई।

इससे पहले पिछले हफ्ते हैदराबाद में ‘टीजी सेफ’ की छापेमारी के बाद तीन मिठाई की दुकानों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे। अधिकारियों ने जांच के दौरान साफ-सफाई में कमी और फूड सेफ्टी से जुड़ी दूसरी गड़बड़ियां पाईं और जनहित में तीन दुकानों को तुरंत कारोबार बंद करने का निर्देश दिया।

छापेमारी में मकड़ी के जाले, चिकनाई से भरे एग्जॉस्ट, गलत स्टोरेज और फूड हैंडलर्स की खराब व्यक्तिगत सफाई मिली, जिनमें से कुछ के नाखून बढ़े हुए थे। अधिकारियों ने खाने के सामान में कीड़े, कॉकरोच और अचार में फंगल संदूषण की भी सूचना दी।

ये तीन दुकानें उन 21 खोवा और मिठाई बनाने और बेचने वाली इकाइयों में से थीं, जिनकी 11 प्रवर्तन टीमों ने जांच की थी, जिसमें फूड सेफ्टी ऑफिसर और पुलिस कर्मी शामिल थे।

पूरी जांच के दौरान अधिकारियों ने मिलावट के शक में 21 सैंपल लिए और 7,75,850 रुपए मूल्य के 1,035 किलो खाद्य पदार्थ जब्त किए।

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अपराध

गुजरात की पहली नमक कंटेनर ट्रेन शिवलाखा से मिठापुर तक नमक ले गई

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अपनी तरह की पहली पहल में भारतीय रेलवे ने कच्छ के गति शक्ति कार्गो टर्मिनल और मिठापुर के बीच भारत की पहली विशेष नमक कंटेनर ट्रेन शुरू की है।

इस पहल का उद्देश्य एक ऐसी परिवहन प्रणाली शुरू करना है जो न केवल नमक की गुणवत्ता की रक्षा करेगी बल्कि नमक उद्योग के लिए लोडिंग क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ लॉजिस्टिक्स लागत को भी कम करेगी।

इसके साथ ही, गुजरात के कच्छ क्षेत्र से देश के कोने-कोने तक नमक का परिवहन काफी आसान हो गया है।

इस सेवा का उद्घाटन 15 सितंबर को हुआ, जब देश की पहली नमक कंटेनर ट्रेन कच्छ के शिवलाखा गति शक्ति कार्गो टर्मिनल से मिठापुर के लिए रवाना हुई।

परिवहन के लिए स्टेनलेस स्टील से बने विशेष, हल्के कंटेनर विकसित किए गए हैं। इन कंटेनरों को ऊपर से नमक से भरने और बगल से उतारने के लिए डिजाइन किया गया है।

स्टेनलेस स्टील के कंटेनरों का उपयोग कंटेनर और नमक के वजन के बीच इष्टतम संतुलन प्राप्त करने में मदद करता है, जिससे नमक की अधिक मात्रा का परिवहन संभव हो पाता है।

गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे नमक परिवहन में एक ‘परिवर्तनकारी कदम’ बताया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मिठापुर जाने वाली ट्रेन की तस्वीरें भी साझा कीं।

उपमुख्यमंत्री ने एक पोस्ट में लिखा, “देखिए कैसे बदलाव आ रहा है! कच्छ के शिवलखा और मिठापुर के बीच भारत की पहली विशेष नमक कंटेनर ट्रेन, जो बेहतर नमक गुणवत्ता, अधिक लोडिंग क्षमता और अधिक कुशल, मौसम से सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करती है।”

विशेषता यह है कि इन विशेष कंटेनरों की स्टेनलेस स्टील संरचना परिवहन के दौरान नमक को बारिश या नमी से बचाती है। नमक उद्योग के लिए परिवहन के इस नए विकल्प ने क्षेत्र के नमक क्षेत्र को महत्वपूर्ण बढ़ावा दिया है।

नमक कंटेनर ट्रेन सेवा न केवल नमक परिवहन से जुड़ी पुरानी चुनौतियों का समाधान करती है, बल्कि रसद लागत को भी कम करती है, जिससे उद्योग से जुड़े लोगों को आर्थिक लाभ मिलता है।

कुल मिलाकर, नमक परिवहन की यह नई प्रणाली नमक की लोडिंग, अनलोडिंग और हैंडलिंग से संबंधित समस्याओं को कम करने में प्रभावी साबित हो रही है।

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अपराध

एमबीवीवी पुलिस ने अंतरराज्यीय एमडी ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया; तेलंगाना में केमिकल फैक्ट्री नष्ट

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मीरा-भाईंदर, 24 अक्टूबर — मीरा-भाईंदर, वसई-विरार (एमबीवीवी) पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) यूनिट 4 ने अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए तेलंगाना में एक केमिकल फैक्ट्री को नष्ट कर दिया है। इस फैक्ट्री में मेफेड्रोन (एमडी) ड्रग्स बनाने के लिए कच्चे माल का उत्पादन किया जा रहा था। यह हालिया छापेमारी इस चल रही जांच में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे इस बड़े ड्रग सिंडिकेट में गिरफ्तारियों की कुल संख्या 25 हो गई है।
इस अभियान की शुरुआत 24 जून 2026 को हुई थी, जब पुलिस ने नालासोपारा पूर्व में प्रिया वॉशिंग सेंटर के पास बाबा पार्किंग क्षेत्र से दो व्यक्तियों—अविनाश उर्फ सोनू लोकनाथ अय्यर (22) और रविकांत ओमप्रकाश राम (23)—को गिरफ्तार किया था। अधिकारियों ने उनके पास से 3,36,000 रुपये मूल्य का 112 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन) जब्त किया था और तुलिंज पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी।
शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद, वरिष्ठ अधिकारियों ने गहन जांच के लिए मामला क्राइम ब्रांच यूनिट 4 को सौंप दिया। इस गहन जांच के दौरान पहले 19 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और एमडी बनाने वाली दो अवैध फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ किया गया। ये फैक्ट्रियां ग्राम सांधान (कच्छ, गुजरात) और कोसाडा कला (प्रयागराज, उत्तर प्रदेश) में कृषि भूमि पर चल रही थीं। पुलिस ने हालिया छापेमारी से पहले 69.871 किलोग्राम एमडी, नकद, 260 लीटर रसायन और लैब उपकरण जब्त किए थे।
आगे की जांच के परिणामस्वरूप विभिन्न स्थानों से पांच और व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया। इन नए गिरफ्तार संदिग्धों में शामिल हैं:

  • नंदुरबार से मुर्तुजा मोहम्मदभाई पत्रावाला उर्फ मोंटो उर्फ हसनैन भोपाली (36)।
  • बुलढाणा से शुभम विनोद मोरे (23)।
  • मुंबई से सलीम उर्फ सलीमभाई इस्माइल उर्फ इस्माइल डोला (61)।
  • मुंबई से साबिर मोहम्मद देवलेकर उर्फ किंग मेमन उर्फ साबिरअली (42)।
  • कानपुर, उत्तर प्रदेश से मोहम्मद तेहरीम अब्दुल रईस सिद्दीकी (37)।
    पूछताछ में पता चला कि 25वां आरोपी, रमेश बाबू साके (निवासी- मेडचल-मलकाजगिरी, हैदराबाद), अवैध रूप से एनडीपीएस-नियंत्रित केमिकल पाउडर “2-ब्रोमो-4-मिथाइलप्रोपियोफेनोन” का निर्माण और आपूर्ति कर रहा था, जो एमडी ड्रग्स बनाने के लिए आवश्यक है। वह तेलंगाना के संगारेड्डी जिले के पाटनचेरु स्थित आईडीए पाशमैलाराम (आईडीए पशामिलाराम) से इस कारखाने का संचालन कर रहा था।
    इस खुफिया जानकारी के आधार पर, 21 अक्टूबर 2026 को क्राइम ब्रांच यूनिट 4 की एक टीम ने साइबराबाद पुलिस आयुक्तालय की पाटनचेरु पुलिस की मदद से उक्त स्थान पर छापा मारा। टीम ने रमेश बाबू साके को हिरासत में लिया और उसकी फैक्ट्री को नष्ट कर दिया। पुलिस ने 27,06,740 रुपये मूल्य का 44.699 किलोग्राम केमिकल पाउडर, साथ ही रसायन बनाने के लिए आवश्यक अन्य केमिकल और प्रयोगशाला उपकरण जब्त किए।
    अब तक, एमबीवीवी पुलिस ने नालासोपारा, मुंबई, कल्याण, नेरल, जलगांव, गुजरात, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना से कुल 25 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो केमिकल आपूर्तिकर्ता, ड्रग निर्माता, तस्कर, पेडलर और वित्तीय लेन-देन जैसी विभिन्न भूमिकाओं में शामिल थे।
    यह व्यापक अभियान पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक, अपर पुलिस आयुक्त संजय शिंत्रे, पुलिस उपायुक्त (क्राइम) संदीप डोईफोडे और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक नितिन पाटिल के मार्गदर्शन में चलाया गया। कार्रवाई को क्राइम ब्रांच यूनिट 4 के प्रभारी पुलिस निरीक्षक प्रमोद बडाख के नेतृत्व में एपीआई प्रवीण भोसले, एपीआई दत्तात्रय सरक, पीएसआई उमेश भागवत और अन्य कर्मियों ने साइबर सेल के सहयोग से अंजाम दिया।
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