व्यापार
बाजार की पाठशाला: ईपीएफओ कैसे बनाता है सुरक्षित रिटायरमेंट फंड? समझें ईपीएफ, ईपीएस और ईडीएलआई का पूरा गणित
आज के दौर में अक्सर लोग नौकरी शुरू करते समय रिटायरमेंट प्लानिंग पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, लेकिन समय रहते की गई छोटी-छोटी बचत भविष्य में बड़ी आर्थिक सुरक्षा बन सकती है। कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ एक ऐसा ही माध्यम है, जो नौकरी के दौरान बचत, बीमा और रिटायरमेंट के बाद नियमित पेंशन का लाभ देता है। ईपीएफओ की योजनाएं कर्मचारियों को लंबी अवधि में आर्थिक रूप से मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती हैं।
जानकारी के लिए बता दें कि भारत में संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा संस्थान माना जाता है। यह श्रम और रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है और कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत, पेंशन और बीमा जैसी सुविधाओं का प्रबंधन करता है।
ईपीएफओ मुख्य रूप से तीन प्रमुख योजनाओं के जरिए कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है, जिनमें कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (ईडीएलआई) शामिल हैं।
ईपीएफओ ने हाल ही में अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए बताया कि कैसे एक कर्मचारी नौकरी शुरू करने से लेकर रिटायरमेंट तक ईपीएफओ की मदद से मजबूत आर्थिक सुरक्षा तैयार कर सकता है।
ईपीएफओ ने पोस्ट में बताया कि जब कोई कर्मचारी अपनी पहली नौकरी शुरू करता है, तो उसके साथ आर्थिक स्वतंत्रता की शुरुआत भी होती है। इसी समय वह ईपीएफओ प्रणाली का हिस्सा बनता है, जो उसके लंबे समय के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद करती है। नौकरी के साथ शुरू हुई यह छोटी बचत आगे चलकर बड़ा रिटायरमेंट फंड बन जाती है।
ईपीएफओ में शामिल होने के बाद कर्मचारी को यूनिवर्सल अकाउंट नंबर यानी यूएएन (यूएएन) दिया जाता है। यह नंबर कर्मचारी की स्थायी पहचान के रूप में काम करता है। इसके जरिए कर्मचारी अपने पीएफ खाते की जानकारी, बैलेंस और अन्य सेवाओं को आसानी से ट्रैक कर सकता है। नौकरी बदलने पर भी यही यूएएन नंबर काम आता है और सभी पीएफ खाते एक ही पहचान से जुड़े रहते हैं।
इसके बाद कर्मचारी की सैलरी का एक हिस्सा हर महीने ईपीएफ खाते में जमा होता है। कंपनी भी कर्मचारी की ओर से योगदान करती है। यह पैसा कर्मचारी के ईपीएफ और ईपीएस खातों में जमा होता रहता है। लगातार होने वाला यह निवेश समय के साथ कंपाउंडिंग के जरिए तेजी से बढ़ता है और रिटायरमेंट के लिए एक मजबूत फंड तैयार करता है।
ईपीएफओ की ईडीएलआई योजना कर्मचारियों के परिवार को बीमा सुरक्षा भी देती है। यदि किसी कर्मचारी के साथ कोई अनहोनी होती है, तो उसके परिवार को आर्थिक सहायता मिलती है। इस तरह ईपीएफओ केवल रिटायरमेंट बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार की सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण साधन बनता है।
ईपीएफओ ने बताया है कि लंबे समय तक नौकरी और नियमित योगदान के बाद कर्मचारी कर्मचारी पेंशन योजना यानी ईपीएस के तहत मासिक पेंशन पाने का पात्र बन जाता है। इससे रिटायरमेंट के बाद भी नियमित आय बनी रहती है और आर्थिक स्थिरता मिलती है। यही कारण है कि ईपीएफओ को कर्मचारियों के लिए दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कर्मचारियों को अपने ईपीएफओ निवेश और रिटायरमेंट योजना को समझदारी से मैनेज करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह लेकर निवेश योजना बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है, ताकि भविष्य में आर्थिक परेशानियों से बचा जा सके।
राष्ट्रीय समाचार
आईटी शेयरों में खरीदारी से शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 193 अंक चढ़ा, निफ्टी में भी बढ़त

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में तेजी के दम पर शुक्रवार को प्रमुख शेयर बाजार सूचकांकों ने बढ़त के साथ कारोबार की शुरुआत की। हालांकि, निवेशक अमेरिका के फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल संगोष्ठी में दिए जाने वाले वक्तव्य से पहले सतर्क नजर आए।
शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 193.02 अंक यानी 0.25 प्रतिशत बढ़कर 77,126.61 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी 33.80 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,124.65 पर पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी में अधिकतम पुट ओपन इंटरेस्ट 24,000 और 23,800 के स्ट्राइक स्तर पर केंद्रित है, जो इस बात का संकेत है कि इन स्तरों पर निवेशकों को खरीदारी का समर्थन मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों ने कहा, “ऊपरी स्तर पर अधिकतम कॉल ओपन इंटरेस्ट 24,200 और 24,300 स्ट्राइक पर मौजूद है, जिससे संकेत मिलता है कि इस दायरे में बिकवाली का दबाव बना हुआ है और तेजी पर अंकुश लग सकता है।”
एक अन्य विशेषज्ञ ने कहा, “यदि निफ्टी 24,025 के पिछले स्विंग लो के नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है, तो यह मध्यम अवधि के रुझान में बदलाव की पुष्टि करेगा। वहीं, ऊपर की ओर 24,378 का हालिया स्विंग हाई निकटतम प्रतिरोध स्तर के रूप में काम कर सकता है।”
निफ्टी में आईटी शेयरों ने बढ़त की अगुवाई की। टेक महिंद्रा, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और इंफोसिस प्रमुख बढ़त वाले शेयर रहे।
व्यापक बाजार में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। निफ्टी मिडकैप सूचकांक 0.03 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक 0.16 प्रतिशत बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी आईटी इंडेक्स 1 प्रतिशत से अधिक चढ़कर सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले सूचकांकों में शामिल रहा। निफ्टी मेटल और निफ्टी मीडिया सूचकांक में भी मजबूती देखी गई। इसके विपरीत, निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज सूचकांक अपेक्षाकृत कमजोर रहे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार प्रतिभागियों की नजरें जैक्सन होल संगोष्ठी पर टिकी हैं, खासकर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों और मौद्रिक नीति को लेकर संभावित रुख पर, जिसका असर वैश्विक शेयर बाजारों पर पड़ सकता है।
एक विश्लेषक ने कहा, “ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत फिर 89 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर किसी कूटनीतिक समाधान के संकेत नहीं मिल रहे हैं। इस मुद्दे पर स्पष्टता की कमी बाजार की धारणा को प्रभावित कर रही है।”
राष्ट्रीय समाचार
2026 की दूसरी छमाही की शुरुआत में भारत में कई आर्थिक संकेतों ने दिखाई मजबूती : रिपोर्ट

भारत ने 2026 की छमाही की शुरुआत कई सकारात्मक आर्थिक संकेतों के साथ की है, जिसमें विदेशी निवेशकों की खरीदारी, मानसून की रिकवरी, घरेलू वृद्धि और कंपनियों की आय का मजबूत होना शामिल हैं। यह जानकारी गुरुवार को जारी रिपोर्ट में दी गई।
पीएल वेल्थ के ताजा अगस्त 2026 के मार्केट आउटलुक में बताया गया कि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव, वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में अनिश्चितता से बाजारों में व्यापक स्तर पर तेजी आने की संभावना कम है।
पीएल वेल्थ के सीईओ इंदरबीर जॉली ने कहा, “हमारा मानना है कि निवेशकों के लिए यह समय सोच-समझकर निवेश करने, क्वालिटी पर ध्यान देने और किस्तों में पैसा लगाने का है। भारत को लेकर हमारा लंबे समय का भरोसा बना हुआ है, जिसे घरेलू निवेश, वित्तीय क्षेत्र के विस्तार, डेमोग्राफिक्स और देश में स्ट्रक्चरल ग्रोथ के मौकों का समर्थन मिल रहा है।”
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की घरेलू विकास की गति मजबूत बनी हुई है। इसे विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के नेट खरीदार के तौर पर लौटने, बेहतर होते मानसून और वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के नतीजों के सीजन की आम तौर पर स्थिर शुरुआत से सहारा मिल रहा है।
भारत की वित्त वर्ष 2026 की जीडीपी विकास दर का शुरुआती अनुमान 7.7 प्रतिशत है, जबकि आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए विकास दर का अनुमान 6.7 प्रतिशत लगाया है।
जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर की गतिविधियां वृद्धि के दायरे में रहीं, जिसमें पीएमआई क्रमशः 53.9 और 53.1 रहा।
बैंक क्रेडिट ग्रोथ सालाना आधार पर बढ़कर 18.6 प्रतिशत हो गई, जिससे जून 2026 तक कुल बकाया क्रेडिट 219.3 ट्रिलियन रुपए तक पहुंच गया, जबकि कैपेसिटी यूटिलाइजेशन 75.2 प्रतिशत के अच्छे स्तर पर बना रहा, जो इसके लंबे समय के औसत से अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई पर नजर रखना जरूरी है। जुलाई में सीपीआई बढ़कर 4.45 प्रतिशत हो गया, जो आरबीआई के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से अधिक है। इसकी मुख्य वजह खाने-पीने की चीजों की महंगाई बढ़ना है। वहीं, आरबीआई ने वित्त वर्ष 27 के लिए सीपीआई का अनुमान 5.1 प्रतिशत पर बनाए रखा है, जिसमें तीसरी तिमाही में इसके 5.9 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना है।
हालांकि, विदेशी निवेशकों का निवेश एक सकारात्मक संकेत रहा। साल की पहली छमाही में लगातार इक्विटी की निकासी के बाद, जुलाई में एफपीआई नेट खरीदार बन गए और लगभग 20,200 करोड़ रुपए का इक्विटी निवेश दर्ज किया गया, जो फरवरी के बाद से पहला सकारात्मक महीना था।
रिपोर्ट में मानसून की स्थितियों में मजबूत सुधार का भी जिक्र किया गया है। जुलाई में बारिश सामान्य से लगभग 1 प्रतिशत अधिक रही, जिससे जून-जुलाई की कुल कमी कम होकर लंबे समय के औसत से लगभग 13 प्रतिशत नीचे आ गई।
बाहरी दबावों के बावजूद भारत का मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल काफी मजबूत बना हुआ है। बाहरी मोर्चे पर, व्यापार से जुड़ी गतिविधियां मध्यम अवधि के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई हैं।
राष्ट्रीय समाचार
भारत के फ्लेक्स स्पेस सेगमेंट ने जनवरी-जून के दौरान दर्ज की 68.4 प्रतिशत की वृद्धि

भारत के शीर्ष आठ शहरों में फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस ऑपरेटरों ने 2026 की पहली छमाही में 1,91,306 सीटें लीज पर दीं, जो सालाना आधार पर 68.4 प्रतिशत की वृद्धि है। यह जानकारी गुरुवार को जारी हुई एक रिपोर्ट दी गई।
कुशमैन एंड वेकफील्ड की रिपोर्ट के अनुसार, ऑपरेटरों ने ऑफिस मार्केट में अपनी मौजूदगी मजबूत की है। उन्होंने 2026 की पहली छमाही में 8.4 मिलियन वर्ग फुट (एमएसएफ) का ग्रॉस लीजिंग वॉल्यूम (जीएलवी) दर्ज किया, जो इस सेगमेंट का अब तक का सबसे अधिक छमाही स्तर है। यह सालाना आधार पर 55 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दिखाता है।
फ्लेक्स ऑपरेटरों की हिस्सेदारी इस अवधि के दौरान कुल लगभग 43 एमएसएफ की ऑफिस लीजिंग गतिविधि में करीब 20 प्रतिशत रही, जो 2025 की पहली छमाही के आंकड़े से 13 प्रतिशत अधिक थी। इसकी प्रमुख वजह एंटरप्राइजेज, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) और अधिक फ्लेक्सिबल वर्कस्पेस की तलाश कर रही कंपनियों से लगातार मांग बने रहना है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जीसीसी फ्लेक्स वर्कस्पेस सेगमेंट के लिए मांग का प्रमुख स्रोत बने रहे। कुल सीट लीजिंग में उनकी हिस्सेदारी 44 प्रतिशत रही, जो 2025 में दर्ज 37 प्रतिशत से अधिक है।
बेंगलुरु भारत के सबसे बड़े फ्लेक्स मार्केट के रूप में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा। 2026 की पहली छमाही में यहां 57,487 सीटें लीज पर दी गईं, जो कुल सीट लीजिंग का 30 प्रतिशत हैं। इसमें सालाना आधार पर 31.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
हैदराबाद 40,451 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहा और यहां सालाना आधार पर 170.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इसे टेक्नोलॉजी कंपनियों और जीसीसी से लगातार मिल रही मांग का समर्थन मिला।
मुंबई और दिल्ली-एनसीआर में भी मजबूत वृद्धि देखी गई। यहां लीजिंग वॉल्यूम में क्रमशः 130 प्रतिशत और 152.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
पुणे में सीटों की मांग 27.8 प्रतिशत बढ़ी, जबकि चेन्नई में सालाना आधार पर 3.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। अहमदाबाद में फ्लेक्स सीट लीजिंग में सबसे तेज वृद्धि हुई, जहां अपेक्षाकृत छोटे आधार पर सालाना आधार पर 570.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
कुशमैन एंड वेकफील्ड की एग्जीक्यूटिव मैनेजिंग डायरेक्टर, बेंगलुरु और हेड-फ्लेक्स, इंडिया, रमीता अरोड़ा ने कहा, “आज कारोबार अत्यधिक कस्टमाइज्ड और बेहतर अनुभव देने वाले वर्कप्लेस की तलाश कर रहे हैं। फ्लेक्स ऑपरेटर तेजी से ऐसे विशेष वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं, जो वैश्विक ऑफिस मानकों, ब्रांड पहचान और कार्यस्थल संस्कृति के अनुरूप हैं।”
टेक्नोलॉजी आधारित वर्कप्लेस अनुभव, वेलनेस-केंद्रित डिजाइन और सस्टेनेबिलिटी को ध्यान में रखकर तैयार किए गए ये समाधान उद्यमों और जीसीसी दोनों के बीच फ्लेक्स वर्कस्पेस की लोकप्रियता बढ़ा रहे हैं।
इस बीच, सूचीबद्ध फ्लेक्स ऑपरेटरों की बढ़ती मौजूदगी से पारदर्शिता, बेहतर गवर्नेंस मानकों और कारोबारों के भरोसे में सुधार हो रहा है। इससे भारत के फ्लेक्स वर्कस्पेस मार्केट के लगातार परिपक्व होने में मदद मिल रही है।
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