राष्ट्रीय
धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर कर रहे कई कालनेमि, सावधान रहने की जरूरत: सीएम योगी
सोनीपत/लखनऊ, 22 जनवरी : गोरक्षपीठाधीश्वर एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लव जिहाद, अवैध धर्मांतरण तथा राष्ट्रविरोधी षड्यंत्रों में लिप्त तत्वों को सख्त चेतावनी दी कि हमारी बेटियों के साथ किसी तरह का खिलवाड़ सहन नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अवैध गतिविधियों के प्रति समाज को जागरूक रहना होगा तथा इनका प्रतिकार करने के लिए पूज्य साधु-संतों को भी आगे आना होगा।
सीएम योगी गुरुवार को हरियाणा के सोनीपत जिले में मुरथल स्थित बाबा नागे वाला धाम में आयोजित नाथ संप्रदाय के मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा एवं आठ मान के भव्य भंडारा कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
सीएम ने यह भी कहा कि कई कालनेमि धर्म की आड़ में सनातन धर्म को हानि पहुंचा रहे हैं। इनसे भी सतर्क रहना होगा। एक योगी के लिए, एक संत के लिए, एक सन्यासी के लिए, धर्म व राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता। यही उसके जीवन का ध्येय होना चाहिए। उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं होती। धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है, राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है। अगर कोई राष्ट्रीय स्वाभिमान को चुनौती देता है तो हमें खुलकर उसके सामने आकर खड़े हो जाना चाहिए। ऐसे बहुत कालनेमि होंगे, जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे। हमें उनसे सतर्क रहना होगा।
उन्होंने कहा कि अवैध धर्मांतरण और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को पूरी तरह नियंत्रित किया जाएगा। इसके साथ ही डेमोग्राफी बदलने की जो साजिश हो रही है, लव जिहाद के नाम पर हमारी बेटियों के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है। हम उसे रोकेंगे, पूरी शक्ति से रोकेंगे, जागरूकता से रोकेंगे। समाज के जागरूक लोगों और पूज्य संतों को भी इसके लिए आगे बढ़ना होगा। परिवारों को सुसंस्कृत किया जाएगा।
सीएम ने कहा कि याद करिए, वर्ष 2009 में केरल के उच्च न्यायालय ने कहा था कि ‘लव जिहाद’ केरल जैसे राज्य को इस्लामी राज्य बनाने की साजिश का हिस्सा है। आज जब मैं देखता हूं तो तमाम राज्यों में बड़े पैमाने पर ये षड्यंत्र हो रहे हैं। हमारी संयुक्त परिवारों की परंपरा पहले संस्कारित होकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती थी, लेकिन धीरे-धीरे यह परंपरा विखंडित होती दिखाई दे रही है। इसे पुनः जीवित करने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि परिवार, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना के माध्यम से ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण होगा। धर्म केवल उपासना विधि नहीं, बल्कि अभ्युदय और उत्थान का मार्ग है, जिसमें भौतिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विकास साथ-साथ चलते हैं। धर्मों के संरक्षण के प्रति हमें जागृत होना पड़ेगा। उनकी पवित्रता, मर्यादा को बनाए रखना होगा। सनातन धर्म व आध्यात्मिक विरासत में नाथ पंथ भारत की प्राचीनतम उपासना विधियों में से एक है। गुरु परंपरा के प्रति गहन श्रद्धा भाव के साथ जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस मूर्ति प्राण-प्रतिष्ठा समारोह एवं भव्य भंडारे का आयोजन किया गया है, जो सचमुच अभिनंदनीय और सराहनीय है। सीएम ने नाथ संप्रदाय और योगी सभा की ओर से उपस्थित सभी पूज्य संतों, योगियों एवं श्रद्धालु जनों का स्वागत और अभिनंदन किया।
उन्होंने कहा कि नाथ परंपरा ने सदैव समाज को जोड़ने, साथ लेकर आगे बढ़ने और जीवन को सार्थक ढंग से जीने की प्रेरणा दी है। यही कारण है कि वृहत्तर भारत में उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक सिद्ध महंतों और योगियों की एक लंबी श्रृंखला दिखाई देती है। उनके मठ, मंदिर और धर्मस्थल सनातन धर्म के मूल्यों के प्रति नाथ पंथ की प्रतिबद्धता को प्रस्तुत करते हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ को साकार होते हुए देख रहा है। यह हमारा सौभाग्य है कि लगभग एक हजार वर्षों तक विदेशी आक्रांताओं का सामना करते हुए गुलामी की जंजीरों को तोड़कर भारत पुनः अपने वैभव की ओर अग्रसर है। हालांकि, एक समय ऐसा भी आया, जब लोगों को लगने लगा था कि गुलामी हमारी नियति बन गई है, लेकिन भारत की चेतना ने अंगड़ाई ली और देश फिर उठ खड़ा हुआ। आजादी के अमृत काल में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जो अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है, उसमें भारत और सनातन धर्म का कल्याण एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। दोनों को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। सनातन धर्म मजबूत होगा तो विश्व मानवता के कल्याण का मार्ग भी सुदृढ़ होगा। इसलिए भारत का सशक्त होना भी आवश्यक है।
सीएम योगी ने कहा कि धार्मिक, आध्यात्मिक या राजनीतिक नेतृत्व ऐसे हाथों में होना चाहिए, जो देश को नई दिशा दे सकें और विकास की उन ऊंचाइयों तक पहुंचा सकें, जहां भारत डेढ़-दो हजार वर्ष पहले था। बीते 11 वर्षों में भारत ने एक शानदार यात्रा की है। कभी किसी ने कल्पना की थी कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण होगा? संघर्ष तो था, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण आज डबल इंजन की सरकार डबल ताकत और डबल स्पीड के साथ परिणाम दे रही है। गुलामी के ढांचे टूटे, अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण हुआ और आज सनातन धर्म की ध्वजा पूरे वैभव के साथ फहरा रही है।
उन्होंने कहा कि काशी में बाबा विश्वनाथ धाम का कायाकल्प भी इसका जीवंत उदाहरण है। पहले दस श्रद्धालुओं का एक साथ दर्शन कर पाना कठिन था, आज 50 हजार श्रद्धालु एक साथ और प्रतिदिन डेढ़ से दो लाख श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। अयोध्या धाम में प्रतिदिन डेढ़ लाख से अधिक श्रद्धालु आ रहे हैं। कहीं कोई भय नहीं, कोई अफरातफरी नहीं। प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन साढ़े चार करोड़ श्रद्धालुओं ने संगम में स्नान किया। दुनिया के कई देशों की आबादी इतनी नहीं है, जितनी संख्या में हमारे यहां एक दिन में श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हैं। 8वीं शताब्दी से लेकर 19वीं सदी तक भारत ने गुलामी और आक्रांताओं को झेला। अब अगले हजार वर्ष भारत के हैं। सनातन धर्म को परम वैभव तक ले जाने का यह कालखंड है। इसके लिए हम सबको मिलकर कार्य करना होगा, आने वाले हजार वर्षों तक दुनिया में भारत और उसके सनातन धर्म का डंका बजेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी विकसित भारत की बात करते हैं, उसे हम सभी को मिलकर पूरा करना होगा। यह तभी साकार होगा जब हरियाणा विकसित होगा, मुरथल विकसित होगा। बाबा नागे वाला धाम में सिद्ध बाबा की प्रेरणा से इस क्षेत्र में नॉनवेज का सेवन नहीं होता, यह आध्यात्मिक ऊर्जा का उदाहरण है। एक संत के आशीर्वाद से वीरान भूमि आज एक भव्य धाम में परिवर्तित हो गई है। हमें युवा पीढ़ी को भी नशे से बचाना है। देश के दुश्मन हमारी सशक्त सरकार, सेना, अर्धसैनिक व पुलिस बल के आगे बेबस हैं। हमारे जवान दुश्मन को ऐसा मिट्टी में मिलाते हैं कि कब्र की जगह भी नहीं मिल पाती, इसलिए वह सामने से नहीं लड़ना चाहते। दुश्मन चोरी छुपे नशे के जरिये भारत की नौजवान पीढ़ी को खराब करना चाहता है। किसी को कोई अधिकार नहीं है कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करे। सीमा पार से आने वाला ड्रग देश के दुश्मनों की साजिश का परिणाम है। कोई उसमें लिप्त है तो लोकल पुलिस को अवगत कराएं। समाज को और उसके परिवार को अवगत कराया जाए। इसके खिलाफ समाज संगठित होकर उसके विरोध में खड़ा हो जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रयागराज में माघ मेला के दौरान मौनी अमावस्या के दिन साढ़े चार करोड़ श्रद्धालु वहां जाकर संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इसके लिए प्रेरित किया। किसी को क्या अधिकार मिल सकता है कि हमारी देवतुल्य नदियों को प्रदूषित करे। हमें किसी को यह अधिकार नहीं देना चाहिए। हमारा भी दायित्व बनता है कि तालाब है, तो उसका भी संरक्षण करें। तालाब जल संरक्षण का भी काम करता है। जैसे बैंक में जमा किए बिना पैसा नहीं मिलता, वैसे ही जल संरक्षण किए बिना भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। हरियाणा में सरस्वती नदी के पुनर्जीवन के प्रयासों की उन्होंने सराहना की।
उन्होंने कहा कि राम की मर्यादा, कृष्ण की लीला, शिव की चेतना और प्रयागराज की समरसता संघर्षों से होकर ही सामने आती हैं। यही सनातन धर्म का भाव है। मां गंगा जब 1000 किलोमीटर की यात्रा तय करती हैं, तब प्रयागराज में आती हैं। पत्थरों और पेड़ों को तोड़कर, उनका मुकाबला करते हुए प्रयागराज पहुंचती हैं। मां यमुना प्रयागराज पहुंचती हैं। मां सरस्वती के साथ जब तीनों का संगम होता है, तब त्रिवेणी बनती है और एक पवित्र धाम का निर्माण होता है। तब लोग उचित मुहूर्त देखकर आस्था की डुबकी लगाकर अपने जीवन को धन्य महसूस करते हैं। यही तो सनातन धर्म है, यही सनातन धर्म का भाव है। पूरा देश अगर अयोध्या आ रहा है, तो इसलिए कि अयोध्या धाम में आज भी प्रभु श्रीराम की मर्यादा का स्मरण होता है।
उन्होंने कहा कि याद करिए जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा का कार्यक्रम संपन्न कराया था। इससे पहले 2020 में राम मंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम संपन्न हुआ था। तब से अब तक 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या धाम आ चुके हैं। श्रद्धालुओं की कमीनहीं, कमी हमारे प्रयासों में नहीं होनी चाहिए। हर मंदिर को एक धाम के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य होना चाहिए।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवन एवं आरती की। भगवान गोरक्षनाथ की प्रतिमा भेंटकर उनका स्वागत किया गया। उन्होंने आयोजन के संरक्षक बाबा मत्स्य नाथ धाम के श्री महंत योगी बालकनाथ महाराज और संयोजक व आयोजक बाबा नागेवाले धाम के महंत बालयोगी मसारनाथ महाराज को इस सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया। कार्यक्रम में हरियाणा के जनप्रतिनिधियों, संत समाज और देशभर से आए श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति रही। भंडारे में संतों ने प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ कदम से कदम मिलाकर राष्ट्र निर्माण में आगे बढ़ने का आह्वान किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को देखते ही लोग उत्साहित होकर नारे लगाने लगे।
बाबा नागे वाला धाम में सिद्ध योगी श्रीश्री 1008 महंत काले बाबा नाथ, योगी बजीरनाथ, और योगी प्रेम नाथ की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा एवं आठ मान भंडारा कार्यक्रम में बड़ी संख्या में नाथ सम्प्रदाय के संत उपस्थित रहे। इनमें प्रमुख रूप से योगी महासभा के महामंत्री महंत चैताईनाथ, रमतो के 12 के महंत बाबा कृष्णनाथ, 18 के महंत बाबा समुद्रनाथ, पिहोवा गरीबनाथ मठ के महंत पीर शेरनाथ, कोथ कलां हिसार के महंत पीर जटाईनाथ, उजाना के महंत पीर राजनाथ, राइसन के महंत पीर लहरनाथ, हीरो कलां के महंत पीर पूर्णनाथ, धनौरी के महंत पीर हरिनाथ, और सांगल के महंत पीर शेरनाथ प्रमुख थे।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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