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Wednesday,09-September-2026
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महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट ने छोड़े कई अनुत्तरित सवाल

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के सोमवार शाम को कथित तौर पर आत्महत्या करने की घटना ने कई सवालों को जन्म दिया है। आत्महत्या से भी कहीं अधिक उनके द्वारा छोड़े गए कथित सुसाइड नोट ने कुछ अनुत्तरित सवाल पीछे छोड़ दिए हैं, जिनके उत्तर तलाशना जरूरी है।

लगभग 6 पृष्ठों के सामने आ रहे सुसाइड नोट से पता चलता है कि महंत बहुत परेशान थे, लेकिन यह नोट स्पष्ट रूप से उन घटनाओं का उल्लेख नहीं करता है, जिन्होंने उन्हें यह चरम कदम उठाने के लिए प्रेरित किया।

महंत ने कहा है कि वह अपने अलग हुए शिष्य आनंद गिरि और हनुमान मंदिर के पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे संदीप तिवारी के कारण परेशान थे, लेकिन उन्होंने विस्तार से नहीं बताया।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “महंत ने इन तीनों से संबंधित विशिष्ट घटनाओं के बारे में कुछ भी नहीं कहा है, जिससे वह बहुत परेशान थे। हम उन तीनों से अलग-अलग पूछताछ कर रहे हैं, जिन्होंने दिवंगत संत को परेशान किया।”

पुलिस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सुसाइड नोट का खुलासा करने में बेहद सतर्कता बरत रही है।

इसके अलावा, नोट की सत्यता पर भी सवाल उठाया गया है, क्योंकि संत के करीबी लोगों ने कहा है कि वह एक या दो वाक्य से आगे लिखने में माहिर नहीं थे।

यहां तक कि आरोपी आनंद गिरी ने भी कहा है कि उन्हें फंसाने के लिए सुसाइड नोट छोड़ा गया है।

सुसाइड नोट एक तरह की वसीयत भी है, क्योंकि इसमें महंत की अपने उत्तराधिकार के बारे में अपनी इच्छाओं का उल्लेख किया है।

पुलिस अधिकारी ने कहा, “पत्र को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है और हम उनकी लिखावट से नमूनों का मिलान करेंगे।”

पुलिस के मुताबिक इस सुसाइड नोट में मठ और अखाड़े के उत्तराधिकारियों के नाम भी लिखे गए हैं, लेकिन इसमें शामिल कंटेंट का अभी खुलासा नहीं किया गया है।

इसके साथ ही ‘सम्मान और अपमान’ के बारे में भी कुछ बातें लिखी गई हैं।

महंत ने लिखा कि उन्होंने अपना जीवन सम्मान और गरिमा के साथ जिया है और अब वे अपमान नहीं सह सकते।

सुसाइड नोट महंत के शव के पास बिस्तर पर पड़ा मिला था।

सूत्रों के मुताबिक महंत ने वीडियो में एक मैसेज भी रिकॉर्ड किया, जो अब पुलिस के कब्जे में है।

जानकारी के मुताबिक, 4 मिनट के वीडियो में भी सिर्फ वही कहा गया है, जो सुसाइड नोट में बताया गया है।

महाराष्ट्र

एजेंटिक एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी के जरिए फाइनेंशियल सेक्टर में बदलाव लाने का मौका: सीएम फडणवीस

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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को कहा कि महाराष्ट्र आम नागरिकों, किसानों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) तक उभरती डिजिटल वित्तीय तकनीकों का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

सीएम देवेंद्र फणडवीस ने कहा कि एजेंटिक एआई और क्वांटम टेक्नोलॉजी फाइनेंशियल इन्क्लूजन (वित्तीय समावेशन) को एक नई दिशा देंगे।

यहां ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने फाइनेंशियल सेक्टर में क्रांति लाने के लिए एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी की अपार संभावनाओं पर जोर दिया।

सीएम फडणवीस ने याद दिलाया कि पिछले साल के ग्लोबल फिनटेक फेस्ट के दौरान, राज्य ने महाराष्ट्र को देश का पहला ‘टोकनाइज्ड स्टेट’ बनाने का संकल्प लिया था। उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ते हुए राज्य सरकार ने ‘महाराष्ट्र डिजिटाइजेशन एंड एक्सचेंज ऑफ लैंड टोकन एसेट एक्ट (डेल्टा एक्ट)’ का ड्राफ्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। यह कानून जमीन और रियल एस्टेट एसेट्स के ब्लॉकचेन-आधारित टोकनाइजेशन के लिए जरूरी कानूनी ढांचा तैयार करेगा। सेबी, बीएसई, एनएसई, इंडस्ट्री, टेक्नोलॉजी, कानून और एकेडेमिया के एक्सपर्ट इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।

उन्होंने बताया कि टोकनाइजेशन रियल एस्टेट में फंसी पूंजी को प्रोडक्टिव आर्थिक अवसरों में बदलता है, जिससे पारदर्शिता, लिक्विडिटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है और इलिक्विड एसेट्स (आसानी से नकद में न बदले जा सकने वाले एसेट्स) का लाभ उठाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्लोबल फाइनेंस का भविष्य भारत में, खासकर मुंबई में, आकार ले रहा है। देश की फाइनेंशियल राजधानी के तौर पर, मुंबई तेजी से एक उभरती हुई ग्लोबल फिनटेक राजधानी बनने की ओर बढ़ रही है।

इस साल की थीम ‘पोटेंशियल ऑफ इम्पैक्ट’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी की क्षमताओं को असल दुनिया में असरदार बदलाव में बदलना आज की जरूरत है। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) के जरिए एक ग्लोबल बेंचमार्क स्थापित करने के बाद, भारत को अब क्रेडिट, निवेश, मालिकाना हक और वित्तीय जानकारी तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने पर ध्यान देना चाहिए।

सीएम फडणवीस ने कहा कि आधुनिक टेक्नोलॉजी में कोल्हापुर की किसी इंडस्ट्री, विदर्भ के किसी किसान या पुणे की किसी महिला उद्यमी को बड़े फाइनेंशियल संस्थानों के बराबर ही हाई-क्वालिटी वित्तीय जानकारी देने की क्षमता है।

एजेंटिक एआई के बारे में विस्तार से बताते हुए मुख्यमंत्री ने एक ऐसे भविष्य की कल्पना की जहां किसी उद्यमी का एआई असिस्टेंट वित्तीय जरूरतों का आकलन कर सके और सबसे अच्छे समाधान सुझा सके, जबकि किसानों को उनकी मातृभाषा में वित्तीय सलाह मिल सके।

हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भले ही एआई नागरिकों के लिए काम करे, लेकिन अंतिम नियंत्रण इंसानों के हाथों में ही रहना चाहिए।

महाराष्ट्र की वित्तीय, तकनीकी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी ताकतों पर प्रकाश डालते हुए सीएम फडणवीस ने बताया कि मुंबई में देश का सबसे बड़ा फाइनेंशियल इकोसिस्टम है, पुणे तकनीकी टैलेंट का हब है, और नवी मुंबई डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्लोबल कनेक्टिविटी के केंद्र के रूप में उभर रहा है। राज्य सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी), स्टार्टअप और यूनिवर्सिटीज के आस-पास एक मजबूत इकोसिस्टम बना रही है।

उन्होंने इंडस्ट्री लीडर्स से कहा कि वे महाराष्ट्र को सिर्फ एक बाजार के तौर पर न देखें, बल्कि इनोवेशन की एक प्रयोगशाला के तौर पर देखें। मुख्यमंत्री ने खेती, एमएसएमई, शहरी विकास, हेल्थकेयर, मोबिलिटी, फाइनेंशियल इन्क्लूजन, धोखाधड़ी रोकने और पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में समाधान मांगे और बड़े पैमाने पर टेस्टिंग के लिए राज्य की ओर से पूरा सहयोग देने का भरोसा दिलाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने डिजिटल फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक ग्लोबल स्टैंडर्ड सेट किया है और दुनिया भारत की अगली फाइनेंशियल क्रांति को उत्सुकता से देख रही है।

राज्य की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए मुख्यमंत्री फडणवीस ने भरोसा दिलाया कि महाराष्ट्र एक पायनियर के तौर पर काम करेगा, जो अगली पीढ़ी के फिनटेक समाधानों के लिए सबसे बड़े ‘रियल-वर्ल्ड टेस्टबेड’ के रूप में काम करेगा और मुंबई को दुनिया की फिनटेक राजधानी बनाने के पीएम मोदी के विजन को साकार करने की दिशा में प्रयास करेगा।

इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में, बीकेसी में अपने विस्तार को लेकर मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए), सेबी, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई), और एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) के बीच समझौते के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया गया।

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राजनीति

राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

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लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।

उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।

बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।

समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।

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राजनीति

महिलाओं की गरिमा का अपमान करने वाले कांग्रेस विधायक पर कार्रवाई हो : अजय यादव

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मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा ने महिला की मृतदेह को लेकर विवादित बयान दिया है। उनके इस बयान पर सियासत गरमा गई है, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने तो कांग्रेस विधायक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। दरअसल, कांग्रेस के विधायक मिश्रा ने रीवा के संजय गांधी अस्पताल को लेकर एक विवादित बयान दिया।

उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि सुंदर महिला की मृत देह से पोस्टमार्टम रूम में दुष्कर्म तक किया जाता है। उन्होंने यह बयान संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं और पिछले दिनों एक महिला और उसके पेट में पल रहे बच्चे की मौत को लेकर दिया। कांग्रेस के विधायक के इस बयान पर भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने सख्त ऐतराज जताया है और कहा है कि कांग्रेस नेताओं का महिलाओं के प्रति दुर्भावना भरा रवैया बार-बार उनके बयानों से सामने आता है। जिस तरह कांग्रेस विधायक ने महिलाओं की मृत देह के संदर्भ में आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणी की है, वह घोर निंदनीय और बेहद आपत्तिजनक है।

अजय यादव ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी को अपने अमर्यादित बयान देने वाले विधायक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। यदि विधायक के पास इस मामले से संबंधित कोई प्रमाण या तथ्य हैं, तो उन्हें संबंधित पुलिस थाने अथवा जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। लेकिन आरोपों के नाम पर महिलाओं का अपमान करना और यहां तक कि मृत देह की गरिमा को भी ठेस पहुंचाना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

भाजपा प्रवक्ता का आरोप है कि यह कांग्रेस की महिलाओं के प्रति सोच, संस्कार और चरित्र को उजागर करता है। कांग्रेस नेतृत्व को इस अमर्यादित बयान पर जनता से माफी मांगनी चाहिए और अपने विधायक के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

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