व्यापार
लागत लाभ के दम पर भारत आरएंडडी क्षेत्र में 12 लाख करोड़ रुपए के अवसर हासिल करने में सक्षम: पीयूष गोयल
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत अपने लागत लाभ का फायदा उठाकर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) के क्षेत्र में करीब 12 लाख करोड़ रुपए के बड़े अवसर हासिल कर सकता है। इसके लिए सरकारी समर्थन को उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों की क्षमताओं के साथ जोड़ने की जरूरत है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर गोयल ने कहा कि भारत में शोध की लागत स्विट्जरलैंड या यूरोप की तुलना में करीब पांचवें या छठे हिस्से के बराबर हो सकती है। यह लागत लाभ भारत को वैश्विक इनोवेशन हब बनाने की दिशा में बड़ा अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार करीब 1 लाख करोड़ रुपए के निवेश के साथ आरएंडडी कार्यक्रम शुरू करती है और उद्योग जगत भी इसमें बराबर का योगदान देता है, तो भारत अपने मेडिकल कॉलेजों, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और अन्य उत्कृष्टता केंद्रों की क्षमताओं का इस्तेमाल करके 10-12 लाख करोड़ रुपए तक का शोध कार्य कर सकता है।
गोयल ने ‘एक्स’ पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा, “अगर उद्योग बराबर का योगदान देता है और हम अपने अकादमिक संस्थानों का इस्तेमाल करते हैं, तो हम वास्तव में 10-12 लाख करोड़ रुपए का रिसर्च एंड डेवलपमेंट कर सकते हैं।”
उन्होंने भारत में उत्पाद डिजाइन, क्लीनिकल ट्रायल और चिकित्सा उपकरणों के निर्माण जैसे क्षेत्रों में मौजूद संभावनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि लागत में यह अंतर भारत को वैश्विक रिसर्च और इनोवेशन के लिए एक आकर्षक केंद्र बना सकता है।
गोयल इससे पहले भी भारत के हेल्थकेयर और फार्मास्युटिकल उद्योग से जेनेरिक दवाओं के क्षेत्र में मिली सफलता से आगे बढ़कर रिसर्च, डेवलपमेंट और इनोवेशन पर अधिक ध्यान देने का आह्वान कर चुके हैं।
सितंबर की शुरुआत में भारत हेल्थ ग्लोबल एक्सपो 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था कि भारत को मजबूत और वैश्विक स्तर पर एकीकृत हेल्थकेयर सप्लाई चेन विकसित करने के साथ एक भरोसेमंद हेल्थकेयर साझेदार के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत करनी चाहिए।
उन्होंने कहा था, “दुनिया की फार्मेसी” के रूप में पहचाने जाने वाले भारत के पास नई दवाओं, बायोसिमिलर्स और बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में विस्तार करने का बड़ा अवसर है।
गोयल ने फार्मास्युटिकल क्षेत्र से आरएंडडी और इनोवेशन को बढ़ावा देने वाली सरकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने का भी आग्रह किया। इनमें रिसर्च एंड डेवलपमेंट इनोवेशन फंड जैसी पहल शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि अगर भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनना है, तो उसे अपने उत्पाद खुद विकसित करने और उनका पेटेंट कराने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
गोयल ने एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई) और प्रमुख शुरुआती कच्चे माल के क्षेत्र में घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने वर्तमान में आयात किए जाने वाले उत्पादों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि सरकार बल्क ड्रग पार्क और 100 नए औद्योगिक पार्क विकसित कर रही है। इन पार्कों में फार्मास्युटिकल और हेल्थकेयर कंपनियों के लिए समर्पित क्षेत्र उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
राष्ट्रीय
एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ़्लाइट इंजन ऑयल प्रेशर की चेतावनी के बाद कोच्चि लौटी: एयरलाइन

एयरलाइन ने सोमवार को साफ़ किया कि कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अबू धाबी जा रहा एयर इंडिया एक्सप्रेस का एक विमान, सुरक्षा नियमों के तहत समस्या का पता चलने के बाद केरल के एयरपोर्ट पर वापस लौट आया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बोइंग 737 फ़्लाइट IX 415 कोचीन से अबू धाबी की अपनी यात्रा के दौरान 36,000 फ़ीट की ऊंचाई पर उड़ रही थी, तभी क्रू ने इंजन 1 के ऑयल लेवल में तेज़ी से गिरावट देखी।
एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने कहा, “एक हफ़्ते पहले, हमारी कोच्चि-अबू धाबी फ़्लाइट्स में से एक, सुरक्षा नियमों के तहत वापस लौट आई थी।”
एयरलाइन ने एक बयान में कहा कि बाद में यात्रियों को दूसरे विमान से अबू धाबी भेजा गया।
एयर इंडिया एक्सप्रेस के प्रवक्ता ने कहा, “बिना सही समय और संदर्भ के इस घटना की रिपोर्ट करने से यात्रियों और आम लोगों में बेवजह चिंता पैदा हो सकती है।”
इसके अलावा, पायलटों ने एविएशन में इस्तेमाल होने वाली फ़ैसले लेने की प्रक्रिया ‘फ़ोर्डेक’ के तहत स्थिति का आकलन किया और कोचीन लौटने का फ़ैसला किया क्योंकि ऑयल का लेवल लगातार कम हो रहा था।
सूत्रों ने बताया कि कमांडर ने मुंबई रेडियो के ज़रिए एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल को जानकारी दी और विमान का रास्ता बदल दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रू ने इंजन के पैरामीटर्स की निगरानी जारी रखी और आपातकालीन स्थिति के लिए तैयारी की।
रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वापस मुड़ने के लगभग 45 मिनट बाद, इंजन 1 का ऑयल प्रेशर ऊपर-नीचे होने लगा और कॉकपिट गेज पर रेड ज़ोन में चला गया, जो खतरनाक गिरावट का संकेत था।
हालांकि, विमान कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गया।
एयरलाइन ने कहा कि इसके बाद यात्रियों को दूसरे विमान से अबू धाबी भेजा गया।
इसके अलावा, अगस्त की शुरुआत में, दम्मम से दिल्ली जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की एक फ़्लाइट को अहमदाबाद डायवर्ट कर दिया गया था, क्योंकि विमान के बाथरूम में बम की धमकी वाला एक टिश्यू पेपर मिला था। चालीस यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और उनकी तलाशी ली गई।
एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के एक बयान के मुताबिक, ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर ने अधिकारियों को दोपहर करीब 2:40 बजे जानकारी दी कि सऊदी अरब के दम्मम से दिल्ली जा रही एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ़्लाइट IX-170 को अहमदाबाद एयरपोर्ट डायवर्ट कर दिया गया है।
व्यापार
सोना इस हफ्ते चार हजार रुपए और चांदी आठ हजार रुपए से अधिक सस्ती हुई

सोने और चांदी में इस हफ्ते बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे दोनों कीमती धातुओं का दाम क्रमश: 4,000 रुपए और 8,000 रुपए से अधिक घट गया।
इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 24 कैरेट सोने का दाम इस हफ्ते 4,694 रुपए कम होकर 1,54,884 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जबकि पहले यह 1,59,578 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
22 कैरेट सोने की कीमत कम होकर 1,41,874 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है, जो कि पहले 1,46,173 रुपए प्रति 10 ग्राम थी। 18 कैरेट सोने का दाम कम होकर 1,16,163 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गया है, जो कि पहले 1,19,684 रुपए प्रति 10 ग्राम था।
इस हफ्ते 24 कैरेट सोने में सबसे न्यूनतम दाम 2 सितंबर को शाम के सत्र में 1,51,184 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया। वहीं, उच्चतम दाम 31 अगस्त को शाम के सत्र में 1,55,835 रुपए प्रति 10 ग्राम देखा गया।
सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट देखने को मिली है।
चांदी का दाम 8,436 रुपए कम होकर 2,35,456 रुपए प्रति किलो हो गया है, जो कि पहले 2,43,892 रुपए प्रति किलो था।
इस हफ्ते चांदी में उच्चतम दाम 31 अगस्त को शाम के सत्र में 2,37,199 रुपए प्रति किलो देखा गया। वहीं, न्यूनतम दाम 3 सितंबर को सुबह के सत्र में 2,28,360 रुपए प्रति किलो देखा गया।
आईबीजेए की ओर से दिन में दो बार सुबह और शाम के सत्र में सोने और चांदी की कीमतों को जारी किया जाता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोने का दाम करीब 4,500 डॉलर प्रति औंस और चांदी का दाम 66 डॉलर प्रति औंस के करीब था।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सोने और चांदी में गिरावट की वजह अमेरिका और ईरान में तनाव बढ़ना था। अमेरिका की ओर से ईरान पर लगातार हमले किए जा रहे हैं। वहीं, ईरान भी मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इससे बॉन्ड यील्ड, डॉलर और कच्चा तेल भी मजबूत हो गया है।
व्यापार
मजबूत वैश्विक संकेतों से भारतीय शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और आईटी में खरीदारी

मजबूत वैश्विक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के सत्र में बढ़त के साथ खुला। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 466 अंक या 0.61 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 76,619 और निफ्टी 46 अंक या 0.20 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,916 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार में तेजी को बढ़ाने का काम डिफेंस और आईटी ने किया। सूचकांकों में निफ्टी इंडिया डिफेंस 0.89 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.56 प्रतिशत की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स थे।
इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी पीएसई भी हरे निशान में थे।
दूसरी तरफ निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर, निफ्टी एनर्जी और निफ्टी कमोडिटीज लाल निशान में थे।
मिडकैप और स्मॉलकैप में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 63,237 अंक पर करीब सपाट कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 83 अंक या 0.42 प्रतिशत की तेजी के साथ 20,134 पर था।
सेंसेक्स पैक में बजाज फिनसर्व, इंडिगो, ट्रेंट, इन्फोसिस, टीसीएस, अदाणी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा, बीईएल, एचडीएफसी बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट, टाइटन, एमएंडएम, आईटीसी, एसबीआई, एचसीएल टेक, एलएंडटी, पावर ग्रिड और टाटा स्टील गेनर्स थे। एक्सिस बैंक, इटरनल, भारती एयरटेल और एचयूएल लूजर्स थे।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल हरे निशान में थे। अमेरिकी बाजार हरे निशान में बंद हुए थे। इस दौरान मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 1.18 प्रतिशत की बढ़त के साथ और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक 1.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
जानकारों ने कहा कि बाजार के लिए मौजूदा समय में घरेलू स्तर पर सकारात्मक और वैश्विक स्तर पर नकारात्मक फैक्टर्स बने हुए हैं। घरेलू स्तर शानदार 7.8 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ और निजी निवेश का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा है, लेकिन अमेरिका, यूरोप, यूके और जापान में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना वैश्विक बाजारों के लिए एक अहम नकारात्मक कारक बना हुआ है, जिसे लेकर निवेशक सतर्क बने हुए है।
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