राजनीति
लोकसभा चुनाव 2024: भारत जोड़ो यात्रा, यूट्यूबर्स ने राहुल गांधी और इंडिया ब्लॉक को एक मजबूत विपक्ष देने में कैसे मदद की?
भोपाल (मध्य प्रदेश): कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में कुछ वास्तविक ज्वलंत मुद्दों को उठाया और नतीजे इसका असर दिखा रहे हैं! अंतिम फैसला: पिछले दस वर्षों में विपक्ष बहुत मजबूत होकर उभरा है।
ये विचार हैं दयाशंकर मिश्र के, जिन्होंने “राहुल गांधी: ए हिस्टोरिकल स्ट्रगल अगेंस्ट कम्युनिज्म, प्रोपेगैंडा एंड एट्रोसिटी” किताब लिखी है। इस किताब को आलोचकों से खूब सराहना मिल रही है।
फ्री प्रेस जर्नल के साथ एक साक्षात्कार में, मिश्रा ने कहा कि 2024 का लोकसभा चुनाव 2019 से बिल्कुल अलग था। इस चुनाव में, राहुल गांधी ने भाजपा का मुकाबला करने के लिए वास्तविक मुद्दों को चुना। जनता को संदेश मिला कि अगर बीजेपी 400 का आंकड़ा पार कर गई तो संविधान बदल देगी. और, इसका उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अनिवार्य परिणाम हुआ।
गांधी को सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव और राजद के तेजस्वी यादव जैसे इंडियन ब्लॉक के नेताओं से व्यापक समर्थन मिला।
मजबूत पार्टी प्रमुखों द्वारा समर्थित सही मुद्दों ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के लिए अनुकूल माहौल बनाने में मदद की।
भारत जोड़ो यात्रा: सही दिशा में एक कदम
दयाशंकर की किताब में कहा गया है कि भारत जोड़ो यात्रा राहुल गांधी का सही दिशा में उठाया गया कदम था। इससे एक परिपक्व राजनेता के रूप में उनकी छवि बनाने में मदद मिली, जिससे उनका सार्वजनिक संपर्क मजबूत हुआ। यात्रा ने उन्हें विभिन्न क्षेत्रों और राज्यों के लोगों की वास्तविक समस्याओं के प्रति मार्गदर्शन किया, जिससे उन्हें विपक्ष के एजेंडे को संरेखित करने में मदद मिली।
यूट्यूबर्स की महत्वपूर्ण भूमिका
उन्होंने कहा कि उनकी किताब बताती है कि कैसे भाजपा ने राहुल गांधी को बदनाम करने के लिए वर्षों तक उनके खिलाफ झूठी कहानी गढ़ी। उदाहरण के लिए, यह राहुल गांधी नहीं थे जिन्होंने आलू से सोना बनाने की बात कही थी; बल्कि, यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ही थे जिन्होंने 2017 में कहा था कि राहुल ने उन्हें आलू से सोना निकालने के लिए कहा था। लेकिन सोशल मीडिया पर उन्हें ट्रोल करने के लिए क्लिप का एक हिस्सा ले लिया गया और उनके साथ गलत व्यवहार किया गया।
हालाँकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को भारी हार का सामना करना पड़ा क्योंकि राहुल गांधी के खिलाफ कोई प्रचार काम नहीं आया। यूट्यूबर्स और प्रभावशाली लोगों ने कहानी के दूसरे पक्ष को जनता के सामने उजागर करने में मदद की।
मिश्रा एक प्रतिष्ठित मीडिया समूह के लिए कार्यकारी संपादक के रूप में काम कर चुके हैं।
राजनीति
कांग्रेस नेतृत्व में अपने दम पर सरकार बनाने का जोश नहीं, अब तक जनादेश न आना राहुल की असफलता: शर्मिष्ठा मुखर्जी

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आलाकमान में अपने दम पर सरकार बनाने का जोश दिखाई नहीं देता है। इसके साथ ही, शर्मिष्ठा ने राहुल गांधी को लेकर भी तीखी प्रतिक्रिया दी।
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में 2029 के चुनावों को लेकर शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, “मैं राजनीतिक अटकलें बिल्कुल नहीं लगाना चाहूंगी। 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने 99 सीटें जीती। राहुल गांधी ने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ की थी और उसका एक अच्छा परिणाम आया। दुर्भाग्य यह है कि राहुल गांधी कुछ कार्यक्रम करते हैं, मगर उसके बाद वह फिर गायब हो जाते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “राजनीति 24 घंटा और 365 दिनों का काम है। आप आएं और दो दिन बाद फिर कहीं चले जाएं। कुछ रैलियां करें और लोगों से मिलें, फिर गायब हो जाएं। इस तरह से राजनीति नहीं होती है। आम चुनावों के अलावा भी राज्यों के चुनाव होते हैं। आप सिर्फ गठबंधन करके जीत नहीं सकते हैं।”
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे प्रणब मुखर्जी की बेटी ने यह भी कहा कि कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करना बहुत जरूरी है। मैंने भी कांग्रेस में कुछ दिन काम किया है। मुझे लगता है कि कांग्रेस की सोच यही है कि गठबंधन करके सरकार बनाएं, लेकिन कांग्रेस को अपने संगठन को मजबूत करना चाहिए और अपने बलबूते सरकार बनानी चाहिए। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान में यह जोश दिखाई नहीं देता है।
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा, “सिर्फ आप दूसरों की बदौलत जीतेंगे, यह मानसिकता मुझे ठीक नहीं लगती है। कांग्रेस को अपने दम पर मैदान में आना चाहिए और संगठन की अपनी रणनीति होनी चाहिए। दूसरे कंधों पर बंदूक रखकर चलाने वाली रणनीति सही नहीं है।”
इसी बीच, प्रधानमंत्री मोदी और राहुल गांधी की तुलना पर उन्होंने कहा, “मैं राहुल गांधी और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच कोई तुलना नहीं करना चाहूंगी, क्योंकि वह तुलना कहीं न कहीं गलत होगी। 2014 से राहुल गांधी कांग्रेस का चेहरा हैं। उनके नेतृत्व में कुछ राज्यों को छोड़कर कांग्रेस पार्टी लगातार चुनाव हार रही है। इसलिए तुलना करना सही नहीं है।”
शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी एक लोकप्रिय नेता हैं और उनकी लोकप्रियता जनादेश से ही पता चलती है। राहुल गांधी वह जनादेश अपने और कांग्रेस पार्टी के लिए नहीं ला पा रहे हैं। यह उनकी एक बड़ी असफलता है।
राष्ट्रीय समाचार
मध्य प्रदेश में 65 पुलिस अधिकारियों के तबादले, बालाघाट में 18 डीएसपी की तैनाती

मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए राज्य पुलिस सेवा (एसपीएस) के 65 अधिकारियों के तबादले किए हैं। गृह विभाग द्वारा शनिवार देर रात जारी आदेश के तहत प्रदेश के कई जिलों और प्रमुख शहरी पुलिस इकाइयों में नई पदस्थापनाएं की गई हैं।
इस बदलाव के तहत ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर के नगर पुलिस अधीक्षकों (सीएसपी) के साथ-साथ भोपाल और इंदौर में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
तबादला सूची का सबसे बड़ा फोकस नक्सल-प्रभावित बालाघाट जिला रहा है। राज्य सरकार ने जिले में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से नक्सल-विरोधी इकाई ‘हॉक फोर्स’ में डीएसपी स्तर के 18 अधिकारियों की सहायक सेनानी के पद पर तैनाती की है। इन अधिकारियों में उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति, सचिन पटेल सहित कई अन्य अधिकारी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन अधिकारियों की तैनाती से नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में अभियान और सुरक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा बालाघाट जिले की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पुलिस अनुविभागों में भी नए अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। आदेश के अनुसार दीपक तोमर को एसडीओपी लांजी, चंद्रशेखर पांडे को एसडीओपी बैहर तथा अभिषेक गौतम को एसडीओपी परसवाड़ा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिले के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की तैनाती कर पुलिसिंग को अधिक प्रभावी बनाने की तैयारी की गई है।
प्रदेश के प्रमुख शहरों में भी इस प्रशासनिक बदलाव का असर देखने को मिलेगा। ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और पीथमपुर में नए सीएसपी पदस्थ किए गए हैं, जबकि भोपाल और इंदौर में भी पुलिस प्रशासन को मजबूत करने के उद्देश्य से अधिकारियों की नई नियुक्तियां की गई हैं। सरकार का कहना है कि यह फेरबदल प्रशासनिक आवश्यकता, कानून-व्यवस्था की मजबूती और बेहतर पुलिसिंग को ध्यान में रखकर किया गया है।
गृह विभाग ने सभी स्थानांतरित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे शीघ्र अपने नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। इस व्यापक फेरबदल से न केवल शहरी क्षेत्रों में पुलिस व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि नक्सल प्रभावित बालाघाट जैसे संवेदनशील इलाकों में भी सुरक्षा तंत्र और अधिक प्रभावी बन सकेगा।
महाराष्ट्र
‘दादा, वी मिस यू’, सुप्रिया सुले ने अजित पवार को किया याद, सोशल मीडिया पर लिखा भावुक मैसेज

बारामती लोकसभा क्षेत्र की सांसद सुप्रिया सुले ने अपने आधिकारिक ट्विटर (एक्स) हैंडल पर एक भावुक पोस्ट साझा कर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी है। इस पोस्ट में उन्होंने उपमुख्यमंत्री अजित पवार को याद करते हुए “दादा, वी मिस यू” ऐसा कैप्शन लिखा है।
सांसद सुले द्वारा साझा की गई तस्वीर में दोनों एक साथ नजर आ रहे हैं, जिसमें पुराने पलों की झलक दिखाई देती है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने बीते समय की यादों को ताजा करने की कोशिश की है।
राजनीतिक मतभेदों की पृष्ठभूमि में आई इस भावुक पोस्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ लोग इसे पारिवारिक रिश्तों की अभिव्यक्ति मान रहे हैं, तो कुछ इसे राजनीतिक संकेत के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल, इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में प्रतिक्रियाएं आ रही हैं और यह तेजी से वायरल हो रही है।
इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में संभावित विलय को लेकर अटकलों पर सुप्रिया सुले ने पार्टी का रुख स्पष्ट किया था। उन्होंने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनकी पार्टी को ऐसा कोई प्रस्ताव न तो भेजा गया है और न ही प्राप्त हुआ है।
मीडिया से बात करते हुए सुले ने कहा कि किसी ने भी किसी विधायक, सांसद या किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क नहीं किया है, न ही उनकी पार्टी ने किसी से संपर्क किया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि चर्चा कहां से शुरू हुई या किसने इसकी पहल की।
उन्होंने आगे कहा कि पार्टी प्रमुख शरद पवार को न तो कांग्रेस से कोई विलय प्रस्ताव मिला है और न ही उन्होंने उन्हें ऐसा कोई प्रस्ताव भेजा है।
तृणमूल कांग्रेस के कांग्रेस में विलय या घनिष्ठ गठबंधन की राष्ट्रीय स्तर पर फैली अफवाहों के बारे में पूछे जाने पर सुले ने अटकलें लगाने से परहेज किया।
भारत में मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए धर्मनिरपेक्ष, समान विचारधारा वाली क्षेत्रीय पार्टियों के विलय की संभावना पर पूछे जाने पर, सुले ने पक्षपातपूर्ण राजनीति के बजाय सार्वजनिक मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।
उन्होंने तर्क दिया कि देश की आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक स्थिति दयनीय है। उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक दांव-पेच खेलने का समय नहीं है और देश को बचाने की तत्काल आवश्यकता है।
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