राष्ट्रीय समाचार
केतन अग्रवाल हत्याकांड: पुलिस ने किया क्राइम सीन रीक्रिएट, सिया गोयल ने उगला सच
देश के बहुचर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में रविवार सुबह एक बेहद अहम और चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। मामले की जांच कर रही लोनावाला पुलिस आज सुबह ठीक 7:00 बजे आरोपी सिया गोयल को लेकर लोहगढ़ किले पर पहुंची। इस मौके पर पुलिस अपने साथ फाइबर से बना एक पुतला (डमी) भी लेकर आई थी ताकि वारदात वाले दिन की कड़ियों को जोड़ा जा सके।
जब पुलिस ने सिया गोयल की मौजूदगी में पूरे घटनाक्रम का क्राइम सीन रीक्रिएट करना शुरू किया, तो सिया ने पुलिस के सामने पूरी साजिश का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताई हुई गठित जानकारी के अनुसार, सिया ने पूछताछ और रीक्रिएशन के दौरान कबूल किया कि केतन को रास्ते से हटाने के लिए उसने अपने साथी चेतन के साथ मिलकर एक खौफनाक प्लान तैयार किया था। सिया के मुताबिक, तय प्लान के तहत सिया को लोहगढ़ किले की ऊंचाई पर जाकर अपने जूतों के फीते (लेस) बांधने का नाटक करना था। जैसे ही सिया फीते बांधने के बहाने झुकी, पीछे से चेतन को आकर केतन पर हमला करना था।
चेतन ने योजना के मुताबिक पीछे से आकर केतन को अचानक धक्का दे दिया, जिससे वह संतुलन खो बैठा और सीधे 400 फीट गहरी खाई में जा गिरा। इस दर्दनाक हादसे में केतन की मौके पर ही मौत हो गई थी।
पुलिस ने सिया के इस कबूलनामे और रीक्रिएशन की पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग की है, जिसे कोर्ट में पुख्ता सबूत के तौर पर पेश किया जाएगा। मामले की आगे की कार्रवाई जारी है।
जांचकर्ताओं के अनुसार, पूछताछ के दौरान गोयल ने माना कि केतन अग्रवाल से तय शादी को रद्द करने के बजाय उन्हें खत्म करना ज्यादा आसान लगा, क्योंकि वह अपने परिवार को निराश नहीं करना चाहती थी।
सूत्रों का कहना है कि यह कथित कबूलनामा तब सामने आया है, जब पुलिस गोयल और सह-आरोपी चेतन चौधरी की भूमिकाओं की जांच का दायरा बढ़ा रही है। जांच टीम परिवार के सदस्यों से पूछताछ कर रही है और साजिश का पता लगाने के लिए डिजिटल सबूतों की जांच कर रही है।
पुणे में केतन अग्रवाल हत्याकांड में एक अहम मोड़ आया है, क्योंकि पुलिस आरोपी सिया गोयल और उनके प्रेमी चेतन चौधरी की जिंदगी के कई पहलुओं की जांच कर रही है।
पुलिस का दावा है कि केतन अग्रवाल की मौत 18 जून को लोहगढ़ किले में एक चट्टान से गिरने से हुई थी। जांचकर्ताओं का आरोप है कि गोयल और चौधरी ने उन्हें मारने की साजिश रची, क्योंकि गोयल नवंबर में अग्रवाल से तय शादी को आगे नहीं बढ़ाना चाहती थी।
राष्ट्रीय समाचार
रुपए में स्थिरता, कोरियाई और ताइवानी बाजार में उतार-चढ़ाव से भारत में हो सकती है विदेशी निवेशकों की वापसी

कच्चे तेल की कीमत में गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की ओर से चुनिंदा खरीदारी के चलते बिकवाली का दबाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार की धारणा में सुधार हुआ है। यह जानकारी विश्लेषकों की ओर से दी गई।
पिछले नौ ट्रेडिंग दिनों (15 जून – 25 जून) के दौरान, एफआईआई ने कैश मार्केट में पांच दिन खरीदारी की, हालांकि यह खरीदारी सीमित मात्रा में थी। इससे विदेशी निवेशकों की तरफ से लगातार हो रही भारी बिकवाली अब खत्म होती दिख रही है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, “विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की गतिविधियों में इस बदलाव के लिए दो बातें जिम्मेदार हैं। पहली, रुपया स्थिर हो गया है और 15 मई को डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से मजबूत भी हुआ है। अब रुपया डॉलर के मुकाबले लगभग 94.40 पर है।”
जब रुपया मजबूत हो रहा हो, तो एफपीआई के लिए बिकवाली करना समझदारी नहीं है।
दूसरी बात, दक्षिण कोरियाई और ताइवानी बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव एफपीआई को इन बाजारों में बिकवाली करने के लिए मजबूर कर रहा है।
उन्होंने कहा, “एक दिन दक्षिण कोरियाई बाजार 8 प्रतिशत गिर गया, जिससे ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इससे भारी मुनाफा कमाने वाले एफपीआई दक्षिण कोरिया और ताइवान में बिकवाली कर रहे हैं। यह एफआईआई को भारत में कम कमाई के बावजूद फिर से निवेश करने पर विचार करने के लिए प्रेरित कर रहा है।”
वहीं, कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना भारत के लिए बहुत अच्छी बात है।
भारत जिस ‘बैलेंस ऑफ पेमेंट्स’ संकट का सामना कर रहा था, वह अब खत्म हो चुका है। इस कारण यह निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि लगातार एफपीआई बिकवाली का दौर खत्म हो गया है। हालांकि, विश्लेषकों का कहना है कि एफपीआई को भारत में लगातार खरीदार बनने में कुछ समय लग सकता है।
भारत-अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर उम्मीदों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया, जबकि बीच-बीच में पैसे निकलने के बाद चुनिंदा एफआईआई की खरीदारी लौटने से बाजार का भरोसा बढ़ा।
रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा कि व्यापक घरेलू आर्थिक संकेतों में सुस्ती और ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण निवेश का एक अनुशासित और शेयर विशिष्ट तरीका अपनाने की जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा कि ग्लोबल स्तर पर, कच्चे तेल की कीमतों का ट्रेंड, पश्चिम एशिया में अस्थिरता और एफआईआई के निवेश का ट्रेंड बाजार के सेंटीमेंट को तय करने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे। भारत-अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड एग्रीमेंट पर हो रही प्रगति पर भी करीबी नजर रखी जाएगी।
राष्ट्रीय समाचार
पश्चिम बंगाल: अरामबाग में बस खाई में गिरी, 2 महिलाओं की मौत, 30 घायल

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के अरामबाग क्षेत्र में मंगलवार को एक यात्री बस अनियंत्रित होकर पलट गई और सड़क किनारे खाई में जा गिरी। इस हादसे में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि करीब 30 यात्री घायल हो गए।
अधिकारियों के मुताबिक, घायलों में कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका स्थानीय अस्पताल में इलाज चल रहा है। दुर्घटना के बाद एंबुलेंस के देर से पहुंचने पर स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, करीब 50 यात्रियों को लेकर जा रही यह बस पूर्व बर्दवान जिले के बर्दवान शहर से हुगली जिले के तारकेश्वर जा रही थी। अरामबाग के आदमबांध इलाके में चालक बस पर नियंत्रण खो बैठा, जिसके बाद बस पलटकर खाई में जा गिरी।
तेज आवाज सुनकर आसपास के लोग तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। बाद में सूचना मिलने पर पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची।
पुलिस के अनुसार, हादसे में दो महिला यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान 65 वर्षीय लक्ष्मी मुर्मू और 35 वर्षीय शर्मिला सोरेन के रूप में हुई है। दोनों पूर्व बर्दवान जिले के धादन क्षेत्र की रहने वाली थीं और तारकेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए जा रही थीं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
हादसे में घायल यात्रियों को बचाकर अरामबाग मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से कुछ की हालत गंभीर बनी हुई है।
स्थानीय लोगों ने दुर्घटना के लिए सड़क की खराब स्थिति को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि सड़क मरम्मत की मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। एंबुलेंस के देर से पहुंचने को लेकर भी लोगों में काफी नाराजगी देखी गई।
गौरतलब है कि हाल ही में जलपाईगुड़ी जिले के मयनागुड़ी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-27 पर उत्तर बंगाल राज्य परिवहन निगम की एक यात्री बस सड़क किनारे खड़े ट्रेलर से टकरा गई थी। उस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 10 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे।
राजनीति
सरकार किसी की मेहरबानी से नहीं, जनता के भरोसे चल रही : सीएम विजय

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने दावा किया है कि वह उस पैसे को राज्य के खजाने में वापस ला रहे हैं, जिसे अलग-अलग विभागों में “पार्टी फंड” के नाम पर लूटा गया था। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार किसी की मेहरबानी से नहीं बल्कि जनता के भरोसे चल रही है।
मुख्यमंत्री ने जारी बयान में कहा है, “ठीक वैसे ही जैसे तमिलनाडु राज्य विपणन निगम लिमिटेड (टीएमएसएमएसी) के मामले में हुआ, हम उस पैसे को राज्य के खजाने में वापस ला रहे हैं जिसे अलग-अलग विभागों में “पार्टी फंड” के नाम पर लूटा गया था। हम अभी भी साफ-साफ कहते हैं, हम जनता के पैसे का एक पैसा भी नहीं छुएंगे। हम किसी और को भी इसे छूने नहीं देंगे। अगर कोई इसे छूता है, तो हम उसे बख्शेंगे नहीं। जिन्होंने पहले भी ऐसा किया है, हम उन्हें भी नहीं छोड़ेंगे।”
विजय ने कहा, “जैसे-जैसे भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं, क्या हर मुखौटा आखिरकार उतर नहीं जाएगा? यहां बहुत से लोग डरे हुए हैं और इसीलिए हमारे खिलाफ बदनामी का अभियान चला रहे हैं। अब, वे एक नई कहानी लेकर आए हैं। उनका दावा है कि हमारी सरकार किसी की मेहरबानी से चल रही है। नहीं, यह सरकार जनता की कृपा और उन लोगों की वजह से चल रही है, जिनके पास ज़मीर है। कुछ लोग कहते हैं, “हमने ही उन्हें सत्ता में भेजा है।” अगर जिन लोगों का दावा है कि उन्होंने हमें सत्ता में भेजा, उन्हें कैबिनेट में पद दिए गए होते, तो अब इतना रोना-धोना और शिकायतें क्यों हो रही हैं?”
मुख्यमंत्री विजय ने आगे कहा, “कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) का कहना है कि हमारा समर्थन करने का उनका फैसला स्वतंत्र था। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया का कहना है कि उनका समर्थन भी एक स्वतंत्र फैसला था। तो फिर “हमने उन्हें सत्ता में भेजा” वाला दावा कहां से आता है? जनता सब कुछ बहुत ध्यान से देख रही है।”
विजय ने कहा, “डॉ. अंबेडकर का सौ साल पुराना सपना अब पूरा हो गया है। मैं जोर से इसलिए बोल रहा हूं, क्योंकि मैं चाहता हूं कि विपक्ष के सदस्य मेरी बात सुनें। विपक्ष में जो लोग खुद को महिलाओं का रक्षक बताते हैं, उन्होंने अपनी कैबिनेट में कितनी महिलाओं को शामिल कियाय. हमारी कैबिनेट में चार महिलाओं को मंत्री पद दिया है। जिन्हें जनता ने नकार दिया है, उनसे हम बस एक ही बात कहना चाहते हैं। सिर्फ़ वही लोग गठबंधन सरकार बनाने के लिए आगे आ सकते हैं, जो कह सकें, ‘हम गलत काम नहीं करेंगे, हम ईमानदार रहेंगे।’ सिर्फ ऐसे लोग ही सत्ता और अधिकार साझा करने के लिए आगे आ सकते हैं। जो लोग भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं, वे शासन या सत्ता में हिस्सेदारी के लिए आगे नहीं आ सकते। चाहे उनके पास बहुमत हो या न हो, वे ऐसा कभी नहीं करेंगे। उनके पास हमेशा एक तैयार जवाब होता था कि ‘लोग गठबंधन सरकारें नहीं चाहते।’ आज जनता उन्हीं लोगों का मजाक उड़ा रही है।”
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