अंतरराष्ट्रीय
बेंगलुरु-दिल्ली के बीच 19 सितंबर से चलेगी किसान रेल
दक्षिण पश्चिम रेलवे ने कहा है कि पहली ‘किसान रेल’ कर्नाटक से दिल्ली के बीच 19 सितंबर से 19 अक्टूबर तक चलेगी। दक्षिण पश्चिम रेलवे के एक प्रेस रिलीज के मुताबिक, किसान रेल मल्टी कमोडिटी और मल्टी-कंसाइनर्स वाली ट्रेनें हैं। यह ट्रेन मैसूरु, हुबली और पुणे से होकर गुजरेगी और पांच यात्राएं करेगी।
यह एन-रूट स्टॉपेज के साथ निश्चित मूल-गंतव्य जोड़े के बीच चलेगी, और एन-रूट स्टॉपेज में से किसी पर भी लोडिंग और अनलोडिंग की अनुमति होगी।
रिलीज में कहा गया है कि ट्रेन में 10 वीपीएच (हाई कैपेसिटी पार्सल वैन), एक ब्रेक लगेज-कम-जनरेटर कार और विकलांग फ्रेंडली कम्पार्टमेंट के साथ एक दूसरी श्रेणी का सामान-सह-ब्रेक वैन होगा। 12 एलएचबी कोच होंगे।
दक्षिण पश्चिम रेलवे ने कहा कि ट्रेन को संचालित करने का निर्णय केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की 2020-21 के बजट में नष्ट होने वाले सामान जैसे दूध, मांस और मछली के समावेश के लिए एक सहज राष्ट्रीय कोल्ड सप्लाई चेन बनाने की घोषणा के अनुरूप है।
अंतरराष्ट्रीय
अंतहीन प्रक्रिया की ओर बढ़ रहा ईरान-अमेरिका समझौता, दोनों देश नई शर्तों के साथ कर रहे संशोधन की तैयारी

वाशिंगटन, 1 जून: अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ चल रहे समझौते की शर्तों में बदलाव करने की योजना बना रहे हैं, ताकि युद्ध को खत्म किया जा सके। वहीं दूसरी तरफ तेहरान नए बदलाव जोड़ने की तैयारी कर रहा है।
सूत्रों से मिजी जानकारी के अनुसार ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने बताया कि इस अंतहीन प्रक्रिया में व्हाइट हाउस बातचीत में ईरान की नई प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहा है। लगता है कि यह बातचीत फिर से शुरुआती और मुश्किल स्थिति में पहुंच सकती है।
एडनक्रोनोस समाचार एजेंसी ने एक अधिकारी के हवाले से बताया कि ट्रंप बातचीत को तेज करना चाहते हैं और दूसरी तरफ दबाव बढ़ाकर समझौता जल्दी करना चाहते हैं। लेकिन उन्हें ईरान की जटिल सत्ता व्यवस्था से भी निपटना पड़ रहा है।
तेहरान में किसी भी बदलाव या समझौते को अंतिम मंजूरी सर्वोच्च नेता के पास होती है। अगर समझौते के मसौदे में बदलाव होता है, तो बातचीत और लंबी हो सकती है।
तस्नीम समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के नए प्रस्ताव के बाद ईरान भी समझौते के ड्राफ्ट में कुछ नए बदलाव जोड़ना चाहता है।
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप 60 प्रतिशत तक समृद्ध किए गए यूरेनियम के भंडार को लेकर ज्यादा साफ और सख्त नियम चाहते हैं, जो अभी ईरान के पास हैं। साथ ही वह यह भी चाहते हैं कि समुद्री व्यापार के लिए होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के तरीके साफ किए जाएं।
जो मौजूदा ड्राफ्ट समझौता है, उसमें ईरान यह मानने को तैयार है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। साथ ही इसमें 60 दिनों की एक समय-सीमा भी है, जिसमें दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और जमा हुए संवर्धित यूरेनियम के भविष्य पर बातचीत करेंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति इसमें और साफ नियम जोड़ना चाहते हैं, खासकर इस बात पर कि अमेरिका उस सामग्री को कब और कैसे हासिल करेगा।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा, “मुझे बस यही गारंटी चाहिए कि परमाणु हथियार नहीं बनेंगे। उन्होंने यह मान लिया है।” उन्होंने आगे कहा कि शुरुआत में ईरान ने सिर्फ यह कहा था कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे, लेकिन अब समझौते में यह भी शामिल किया गया है कि वे किसी भी तरह से परमाणु हथियार न तो बनाएंगे और न ही हासिल करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा, “उन लोगों से बातचीत करना बहुत मुश्किल है और इसमें समय लगता है, लेकिन मुझे जल्दी नहीं है।”
व्हाइट हाउस अभी भी इस समझौते को पूरा होने को लेकर आशावादी है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक सरकारी टीवी पर कहा कि अमेरिका के साथ ‘बातचीत और संदेशों का आदान-प्रदान’ अभी भी जारी है, लेकिन जब तक इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता, तब तक इन पर कोई पक्का फैसला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, “इस समय जो भी बातें कही जा रही हैं, वे सिर्फ अटकलें हैं और उन्हें ज्यादा महत्व नहीं देना चाहिए।”
हालांकि, तेहरान से कई बड़े नेताओं की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विदेश मंत्री अराघची के नरम रुख के उलट, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघर गालिबाफ ने सख्त बयान दिया।
उन्होंने कहा, “जब तक हमें यह पूरी तरह भरोसा नहीं हो जाता कि ईरानी लोगों के अधिकार सुरक्षित हैं, हम किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं देंगे।” गालिबाफ ने कहा कि जो लोग कूटनीति से जुड़े हैं, वे अमेरिका के वादों या बातों पर भरोसा नहीं करते।
इस बीच, ईरान की राजनीति को लेकर स्थिति और भी जटिल बताई जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने मोज्तबा खामेनेई को अपना इस्तीफा सौंपने का एक पत्र भेजा है। यह जानकारी लंदन स्थित ईरानी विपक्षी वेबसाइट ‘ईरान इंटरनेशनल’ से जुड़े एक सूत्र ने दी है, लेकिन ईरान सरकार ने इस खबर को तुरंत खारिज कर दिया और इसे ‘झूठी मीडिया रिपोर्ट’ बताया।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला; सेंसेक्स 76,000 के ऊपर

अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होने से भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में खुला। इस दौरान सेंसेक्स 720 अंक या 0.96 प्रतिशत की मजबूती के साथ 76,135 और निफ्टी 247 या 1.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ 23,967 पर था।
शुरुआती कारोबार में बाजार की तेजी को ऑटो शेयर लीड कर रहे थे। निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी ऑयल एंड गैस, निफ्टी रियल्टी, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी प्राइवेट बैंक, निफ्टी इन्फ्रा, निफ्टी सर्विसेज और निफ्टी पीएसई के साथ ज्यादातर सूचकांक हरे निशान में थे। केवल निफ्टी आईटी ही लाल निशान में था।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप भी हरे निशान में थे। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 183 अंक या 1.02 प्रतिशत की मजबूती के साथ 18,149 और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 433 अंक या 0.71 प्रतिशत की बढ़त के साथ 61,847 पर था।
सेंसेक्स पैक में एमएंडएम, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी, इटरनल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडिगो, मारुति सुजुकी, एसबीआई, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, एशियन पेंट्स, आईसीआईसीआई बैंक, ट्रेंट, एक्सिस बैंक, आईटीसी, टाइटन और अदाणी पोर्ट्स गेनर्स थे। टीसीएस, इन्फोसिस, सन फार्मा और एनटीपीसी लूजर्स थे।
ज्यादातर एशियाई बाजार तेजी के साथ खुले। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक हरे निशान में थे। वहीं, जकार्ता लाल निशान में था। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को हरे निशान में बंद हुए थे। मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.58 प्रतिशत और नैस्डैक 0.19 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने के संकेत मिले हैं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौते को लेकर बातचीत अभी जारी है। इसमें होर्मुज स्ट्रेट खुलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत करने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि ईरान के साथ अमेरिकी की बातचीत अंतिम दौर में है।
इससे कच्चे तेल की कीमतों में भी कमी देखने को मिली है।
खबर लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 5.45 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 97.90 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 5.67 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 91.12 डॉलर प्रति बैरल पर था।
व्यापार
वैश्विक अस्थिरता के चलते भारत के प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में आई मामूली गिरावट : पीएमआई डेटा

वैश्विक अस्थिरता से भारत के प्राइवेट सेक्टर की गतिविधियों में मई में मामूली गिरावट देखी गई है और इससे एचएसबीसी फ्लैश इंडिया पीएमआई कम्पोजिट आउटपुट इंडेक्स 58.1 हो गया है, जो कि अप्रैल में 58.2 पर था। यह जानकारी गुरुवार को जारी निजी सर्वेक्षण में दी गई।
एचएसबीसी की ओर से जारी कम्पोजिट पीएमआई डेटा में बताया गया कि सर्विस अर्थव्यवस्था की तेज रफ्तार ने फैक्ट्री में कमजोर उत्पादन की भरपाई की है।
आंकड़ों में बताया गया कि अप्रैल में गिरावट के बाद, इनपुट कीमतों में महंगाई थोड़ी बढ़ी, लेकिन कंपनियों ने उत्पादन शुल्क में कम वृद्धि करके ग्राहकों पर अतिरिक्त लागत का बोझ सीमित कर दिया। इस दौरान सर्विसेज सेक्टर ने मैन्युफैक्चरिंग से बेहतर प्रदर्शन किया और उन पर महंगाई का दबाव कम रहा।
एचएसबीसी के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा, “उत्पादन और नए ऑर्डर की वृद्धि दर में नरमी आने से मैन्युफैक्चरिंग गतिविधि में मामूली गिरावट आई है, जबकि नए निर्यात ऑर्डर की वृद्धि में तेज कमी आई है। फिर भी, निरंतर इन्वेंट्री के कारण मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई मोटे तौर पर अपने दीर्घकालिक औसत के अनुरूप बना रहा।”
उन्होंने आगे कहा, “मई में तैयार माल के भंडार में लगातार दूसरे महीने वृद्धि हुई और खरीद भंडार में पिछले तीन महीनों में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। लागत का दबाव बढ़ गया, और इनपुट कीमतों में जुलाई 2022 के बाद से सबसे तेज वृद्धि हुई।”
पीएमआई आंकड़ों के अनुसार, मई में मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और सर्विस कंपनियों के साथ नए कारोबार में वृद्धि की दर धीमी रही, जिसके परिणामस्वरूप समग्र स्तर पर वृद्धि दर में गिरावट आई।
भारत के निजी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में मई में नए निर्यात ऑर्डर में धीमी वृद्धि देखी गई, जो पिछले 19 महीनों में सबसे कम है। पीएमआई आंकड़ों के अनुसार, वस्तु उत्पादकों ने सितंबर 2024 (फरवरी 2026 से पहले) के बाद से अंतरराष्ट्रीय बिक्री में दूसरी सबसे धीमी वृद्धि दर्ज की।
मई में कारोबारी विश्वास काफी सकारात्मक बना रहा, हालांकि सकारात्मक भावना का समग्र स्तर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गया, फिर भी यह अपने दीर्घकालिक औसत से ऊपर रहा।
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