राष्ट्रीय समाचार
मिश्रित वैश्विक संकेतों के बीच हल्की बढ़त के साथ खुला भारतीय शेयर बाजार, टेक स्टॉक्स में खरीदारी
मिलेजुले वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत गुरुवार को हल्की बढ़त के साथ हुई है। इस दौरान सेंसेक्स 186 अंक या 0.24 प्रतिशत की तेजी के साथ 77,388 और निफ्टी 63 अंक या 0.26 प्रतिशत की मजबूती के साथ 24,142 पर था।
शुरुआती कारोबार में तेजी का नेतृत्व आईटी शेयर कर रहे थे। सूचकांकों में निफ्टी आईटी 1.80 प्रतिशत की मजबूती के साथ टॉप गेनर था। इसके अलावा निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी कंजप्शन, निफ्टी मीडिया, निफ्टी ऑटो, निफ्टी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग, निफ्टी सर्विसेज, निफ्टी फार्मा, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी मेटल, निफ्टी कमोडिटीज, निफ्टी हेल्थकेयर भी हरे निशान में थे।
इसके अलावा, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे सूचकांक लाल निशान में थे।
सेंसेक्स पैक में एचसीएल टेक, मारुति सुजुकी, एमएंडएम, टेक महिंद्रा, ट्रेंट, टाइटन, टीसीएस, एशियन पेंट्स, पावर ग्रिड, एचयूएल, इंडिगो, बजाज फाइनेंस, पावर ग्रिड और अल्ट्राटेक सीमेंट गेनर्स थे। एक्सिस बैंक, इटरनल, सन फार्मा, एचडीएफसी बैंक, बजाज फिनसर्व, एसबीआई और एलएंडटी लूजर्स थे।
जानकारों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में कोई बड़ा बदलाव न होने और ग्लोबल मार्केट के स्थिर रहने के कारण, हमारे बाजार सकारात्मक रुख के साथ एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कई कंपनियों के तिमाही नतीजे आने वाले हैं, इसलिए मार्केट इन नतीजों पर प्रतिक्रिया दे सकता है।
एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार हो रहा था। टोक्यो, शंघाई और सोल लाल निशान में थे। वहीं, हांगकांग, बैंकॉक और जकार्ता हरे निशान में थे। अमेरिकी शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी सत्र में तेजी के साथ बंद हुआ था। इस दौरान मुख्य सूचकांक डाओ जोन्स 0.29 प्रतिशत की तेजी के साथ और नैस्डैक 0.62 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं और बुधवार को उन्होंने 735.83 करोड़ रुपए की इक्विटी में बिकवाली की और इस दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 704.93 करोड़ रुपए का इक्विटी में निवेश किया।
राष्ट्रीय समाचार
त्योहारी सीजन में दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग तेज, यातायात आवागमन पर विशेष जोर

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अपनी मोटरसाइकिल यूनिट (एमटीयू) के जरिए मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग तेज कर दी है। यह फैसला त्योहारी सीजन और वाहनों की आवाजाही में संभावित वृद्धि को देखते हुए लिया गया है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस (जोन-I) ने सुबह और शाम के व्यस्त समय (पीक आवर्स) के दौरान अपनी मोटरसाइकिल यूनिट (एमटीयू) के जरिए मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग तेज कर दी है। इसका उद्देश्य ट्रैफिक को सुचारू बनाए रखना, जाम को रोकना और आम जनता के लिए आवागमन को परेशानी-मुक्त बनाना है।
जोन-I के अंतर्गत प्रमुख सड़कों और ट्रैफिक की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में मोटरसाइकिल पेट्रोलिंग की जा रही है। इनमें लाला जगत नारायण मार्ग, भगवान महावीर मार्ग, जीटी करनाल रोड, अक्षरधाम रोड, मुर्गा मंडी से पेपर मार्केट रोड, खजूरी चौक से गोकुलपुरी फ्लाइओवर रोड, मॉल रोड, सुभाष पार्क से टी-पॉइंट छट्टा रेल रोड, हनुमान मंदिर से पीली कोठी रोड, तीस हजारी से कश्मीरी गेट रोड और खन्ना मार्केट जैसी महत्वपूर्ण जगहें शामिल हैं।
एमटीयू के कर्मचारी पीक आवर्स के दौरान ट्रैफिक के लिहाज से संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त कर रहे हैं। वे ट्रैफिक की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहे हैं और जाम की समस्या को तुरंत दूर करने के साथ-साथ वाहनों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए जरूरी कदम उठा रहे हैं।
इस बढ़ी हुई गश्त का मकसद सड़क पर ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाना, ट्रैफिक में रुकावट आने पर तुरंत कार्रवाई करना और लोगों का समय बर्बाद होने से बचाना है। ट्रैफिक को व्यवस्थित रखने और सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए व्यस्त चौराहों, जाम वाले रास्तों और अन्य संवेदनशील जगहों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से अपील करती है कि वे त्योहारों के मौसम में ट्रैफिक नियमों का पालन करें, ताकि सड़कें सुरक्षित और जाम-मुक्त रहें।
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मध्य प्रदेश के सिंगरौली में भूकंप के झटके, रिक्टर स्केल पर 3.5 रही तीव्रता

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में शनिवार दोपहर 2:12 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.5 मापी गई।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अधिकारियों ने बताया कि भूकंप का केंद्र सतह से लगभग 10 किलोमीटर नीचे स्थित था।
यह जानकारी प्रारंभिक मापों पर आधारित है और वैज्ञानिक एजेंसियों द्वारा इसकी आगे पुष्टि की जानी बाकी है। सिंगरौली के कुछ हिस्सों में रहने वाले लोगों ने दोपहर के समय हल्के झटके महसूस किए। हालांकि तीव्रता अपेक्षाकृत कम थी, लेकिन अचानक आए इस झटके से प्रभावित क्षेत्रों में लोगों में क्षणिक चिंता फैल गई।
अभी तक इमारतों को नुकसान या किसी के घायल होने की कोई तत्काल सूचना नहीं मिली है। भूकंप निगरानी एजेंसियां भूकंप के केंद्र का सटीक स्थान निर्धारित करने और किसी भी आफ्टरशॉक की संभावना का आकलन करने के लिए प्रारंभिक आंकड़ों की जांच कर रही हैं।
3.5 तीव्रता के भूकंप को आमतौर पर हल्का भूकंप माना जाता है, जिसे आसपास के लोग महसूस कर लेते हैं, लेकिन इससे इमारतों को गंभीर नुकसान कम ही होता है, खासकर जब इसका केंद्र लगभग 10 किलोमीटर की मध्यम गहराई पर हो।
सिंगरौली के अधिकारियों ने जनता को शांत रहने और आगे किसी भी भूकंपीय गतिविधि की आशंका में मानक सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। स्थानीय प्रशासन स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है और अद्यतन जानकारी के लिए संबंधित वैज्ञानिक संस्थाओं के साथ समन्वय में है।
यह पहली बार नहीं है जब इस क्षेत्र में हल्की भूकंपीय गतिविधि देखी गई है, हालांकि कम तीव्रता की ऐसी घटनाएं आमतौर पर बिना किसी बड़ी घटना के गुजर जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तीव्रता के भूकंप देश के विभिन्न हिस्सों में अपेक्षाकृत आम हैं और आमतौर पर लगभग 10 किलोमीटर की गहराई पर गंभीर खतरा पैदा नहीं करते हैं।
एजेंसियों द्वारा संपूर्ण डेटा सेट का विश्लेषण जारी रहने के कारण आगे की जानकारी की प्रतीक्षा है।
राष्ट्रीय समाचार
एफएसएसएआई का प्रस्ताव: 6 महीने तक के शिशुओं के खाद्य उत्पादों में चीनी मिलाने पर लगेगी रोक

शिशुओं के लिए पोषण संबंधी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) विनियम, 2020’ में संशोधन का एक मसौदा प्रकाशित किया है। इसमें 6 महीने तक के शिशुओं के लिए बनाए गए खाद्य उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
16 अक्टूबर 2026 को भारत के राजपत्र (गजट) में प्रकाशित ‘खाद्य सुरक्षा और मानक (शिशु पोषण के लिए खाद्य पदार्थ) संशोधन विनियम, 2026’ का उद्देश्य मौजूदा नियामक ढांचे को और अधिक मजबूत बनाना है। इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशु पोषण उत्पाद उनकी उम्र के हिसाब से जरूरी पोषक तत्वों के आधार पर तैयार किए जाएं, जिसमें जीवन के शुरुआती चरणों के दौरान ‘एडेड शुगर’ के सेवन को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है।
मौजूदा नियमों में जन्म से लेकर 24 महीने तक के बच्चों के लिए विभिन्न प्रकार के शिशु पोषण उत्पादों की पोषण संरचना, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए गए हैं। वर्तमान नियमों के तहत, कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में लैक्टोज और ग्लूकोज पॉलिमर को प्राथमिकता दी जाती है जबकि सुक्रोज या फ्रुक्टोज को केवल तभी मिलाया जा सकता है जब कार्बोहाइड्रेट के स्रोत के रूप में उनकी आवश्यकता हो और वह भी निर्धारित सीमा के भीतर।
इन्हीं नियमों को आगे बढ़ाते हुए, संशोधन के इस मसौदे में 6 महीने तक के शिशुओं के लिए उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज मिलाने पर एक विशेष प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। प्रस्तावित नियम में कहा गया है कि “6 महीने तक की उम्र के शिशुओं के लिए बनाए गए उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज नहीं मिलाया जाना चाहिए”।
जीवन के पहले 6 महीने स्वस्थ विकास और वृद्धि के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवधि होते हैं, इसलिए इस दौरान उचित पोषण मिलना विशेष रूप से आवश्यक है। प्रस्तावित प्रतिबंध का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशुओं के पोषण उत्पादों में सुक्रोज और फ्रुक्टोज की अनावश्यक मात्रा मिलाए बिना इस आयु वर्ग की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा किया जाए। इस कदम का मकसद सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी उन व्यापक कोशिशों को समर्थन देना भी है, जो बच्चों के शुरुआती जीवन में अतिरिक्त शर्करा के सेवन से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए की जा रही हैं। इसमें बचपन में मोटापे और उससे जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम कारकों को कम करना भी शामिल है।
यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी उन स्थापित सिफारिशों को और मजबूत करती है, जो जीवन के पहले छह महीनों में केवल स्तनपान कराने को बढ़ावा देती हैं। शिशुओं के पोषण उत्पादों के लिए मानकों को सख्त बनाकर, यह प्रस्तावित संशोधन बच्चों को सही तरीके से आहार देने की प्रथाओं को समर्थन देता है। साथ ही, यह निर्माताओं को ऐसे उत्पाद बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जो छोटे शिशुओं की विशिष्ट पोषण संबंधी जरुरतों को प्राथमिकता देते हैं।
इस मसौदा अधिसूचना को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया गया है। इसमें हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। ये सुझाव उस तारीख से 60 दिनों के भीतर दिए जा सकते हैं, जिस दिन इस अधिसूचना वाली आधिकारिक राजपत्र की प्रतियां जनता के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। संशोधन को अंतिम रूप देने से पहले एफएसएसएआई तय समय सीमा के भीतर प्राप्त सभी सुझावों और आपत्तियों पर विचार करेगा।
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