राष्ट्रीय समाचार
सरकार ने कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता 2027 मानदंड का मसौदा जारी किया, आम जनता से मांगे सुझाव
विद्युत मंत्रालय ने गुरुवार को पक्षकारों से परामर्श के लिए कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता 2027 मानदंड (सीएएफई-III) का मसौदा जारी किया। ये मानदंड 2027-28 से 2031-32 के दौरान भारत में बिक्री के लिए विनिर्मित या आयातित एम1 श्रेणी के यात्री वाहनों पर लागू करने का प्रस्ताव है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, मसौदा मानदंड एम1 श्रेणी के वाहनों पर लागू होंगे। एम1 श्रेणी में ऐसे यात्री वाहन शामिल हैं, जिनमें चालक के अलावा अधिकतम आठ लोगों के बैठने की क्षमता होती है। इसमें निजी उपयोग के लिए बेची जाने वाली सभी हैचबैक, सेडान और एसयूवी शामिल हैं। इस श्रेणी में वाणिज्यिक मालवाहक वाहन और बसें शामिल नहीं हैं।
मौजूदा सीएएफई-II (कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी) मानदंडों की अवधि 31 मार्च, 2027 को समाप्त होने की संभावना है। इसके बाद सीएएफई-III नियम लागू हो सकते हैं।
सीएएफई-III के तहत अनुपालन का आकलन दो चरणों में किया जाएगा। पहला चरण तीन वर्षों का होगा, जबकि दूसरा चरण शेष दो वर्षों का होगा। प्रत्येक वर्ष के साथ ईंधन दक्षता के लक्ष्य और अधिक कड़े होते जाएंगे।
बिजली मंत्रालय के अधीन ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) की निगरानी में तैयार किए गए सीएएफई-III का उद्देश्य वित्त वर्ष 2032 तक वाहन बेड़े के औसत उत्सर्जन को मौजूदा स्तर से घटाकर काफी कम करना है।
नए ढांचे के तहत, कंप्लायंस क्रेडिट की कीमत 2,500 रुपए प्रति क्रेडिट तय की गई है, जो हर वर्ष 500 रुपए बढ़ेगी। अनुपालन अवधि समाप्त होने के बाद इस्तेमाल न किए गए क्रेडिट स्वतः समाप्त हो जाएंगे और जो वाहन निर्माता तय मानकों को पूरा नहीं कर पाएंगे, उन पर जुर्माना लगाया जा सकता है, हालांकि जुर्माने की विस्तृत राशि का अभी उल्लेख नहीं किया गया है। वहीं, सालाना 1,000 से कम वाहन बेचने वाले निर्माताओं को इन नियमों से छूट मिलेगी।
मसौदे के पहले के संस्करणों पर उद्योग जगत की राय अलग-अलग रही है। सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) ने इस प्रस्ताव को संतुलित बताया है, जबकि कुछ वाहन निर्माताओं ने छोटी पेट्रोल कारों के लिए राहत की मांग की है और कुछ ने इस श्रेणी के लिए अलग नियम बनाए जाने का विरोध किया है।
मंत्रालय ने इस मसौदे पर हितधारकों और आम जनता से सुझाव आमंत्रित किए हैं। सुझाव ऊर्जा संरक्षण प्रभाग के अवर सचिव को नई दिल्ली स्थित मंत्रालय के कार्यालय में भेजे जा सकते हैं या ई-मेल के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं।
सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 6 अगस्त, 2026 निर्धारित की गई है। बयान में कहा गया है कि मसौदा मानदंड जल्द ही बिजली मंत्रालय और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (बीईई) की वेबसाइटों पर भी अपलोड किए जाएंगे।
एम1 श्रेणी के वाहन सीएएफई मानदंडों के तहत कड़े ईंधन दक्षता और उत्सर्जन लक्ष्यों के दायरे में आते हैं। ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से इन मानदंडों को समय-समय पर अपडेट किया जाता है।
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ई20 पेट्रोल विवाद: उपभोक्ता के पक्ष में देश का पहला फैसला, रायपुर कोर्ट ने कंपनी को वाहन बदलने का दिया आदेश

ई20 पेट्रोल से वाहन में खराबी को लेकर आए देश के पहले फैसले में अदालत ने उपभोक्ता को राहत पहुंचाई है। कार मालिक ने आरोप लगाया था कि ई20 पेट्रोल ने उसकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद रायपुर जिला उपभोक्ता अदालत ने कार मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। साथ ही, अदालत ने कंपनी और संबंधित पक्षकारों को कार मालिक की शिकायत को देखते हुए वाहन बदलने या निर्धारित राशि का भुगतान करने का आदेश दिया है।
रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में परिवाद की ऑनलाइन 12 मार्च 2025 को की गई थी, जबकि इसका पंजीयन 16 अप्रैल 2025 को हुआ। 14 जुलाई को आयोग ने अपना आदेश जारी किया।
उपभोक्ता प्रेमराज देवता ने आरोप लगाया था कि उनकी मारुति ग्रैंड विटारा कार में ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद बार-बार समस्याएं आने लगीं। शिकायत में इंजन संबंधी परेशानी, परफॉर्मेंस के खराब होने, मिसफायरिंग और लगातार माइलेज घटने जैसी समस्याओं का जिक्र किया गया। उपभोक्ता का कहना था कि ई20 पेट्रोल के उपयोग के बाद वाहन की समस्या दूर नहीं हुई, जबकि कई बार सर्विस सेंटर में जांच और मरम्मत कराई गई।
आयोग ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 35 के तहत परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार किया। आयोग ने माना कि ई20 पेट्रोल के संबंध में उपभोक्ता के पास व्यवहारिक रूप से अन्य ईंधन विकल्प उपलब्ध नहीं था, क्योंकि अधिकांश पेट्रोल पंपों पर यही ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा था।
आयोग ने संबंधित पक्षकारों को निर्देश दिया कि वे उपभोक्ता की कार वापस लेकर उसी मॉडल की नई ई20 ईंधन समर्थित कार आदेश की तारीख से 45 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। अगर निर्धारित अवधि में वाहन नहीं बदला जाता है, तो विपक्षी पक्षकारों को वाहन की कीमत और संबंधित खर्चों का भुगतान (कुल राशि 20,50,494) करना होगा।
आयोग ने यह भी आदेश दिया कि संबंधित पक्षकारों को मानसिक क्षति और वाद व्यय की राशि भी अदा करनी होगी। आयोग ने उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए एक लाख रुपए और मुकदमे के खर्च के लिए 10 हजार रुपए का भुगतान करने को कहा है। आदेश में कहा गया कि राशि का भुगतान 45 दिनों के भीतर नहीं किया जाता है, तो भुगतान की तारीख तक 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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कच्चे तेल में गिरावट से भारतीय इक्विटी बाजार में जोखिम घटा; 84,000 के स्तर तक जा सकता है सेंसेक्स : रिपोर्ट

भारतीय शेयर बाजार के आउटलुक में सुधार हुआ है और सेंसेक्स इस साल के अंत तक 84,000 के स्तर को छू सकता है। इसकी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट होना, घरेलू स्तर पर खपत मजबूत रहना और कंपनियों में आय से जुड़ा जोखिम कम होना है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
एचएसबीसी ब्रोकरेज की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के हफ्तों में भारतीय इक्विटी के लिए व्यापक आर्थिक माहौल में काफी सुधार हुआ है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें उम्मीद से अधिक तेजी से संघर्ष से पहले के स्तर पर वापस आ गई हैं।
इसमें कहा गया है कि तेल की कीमतों में गिरावट से कॉर्पोरेट मार्जिन पर दबाव कम हुआ है और कमाई के अनुमानों में भारी कटौती की संभावना भी घटी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब वैल्यूएशन सामान्य हो गई हैं, जबकि ऊर्जा की कम कीमतों और मजबूत खपत ने कमाई के आउटलुक को बेहतर बनाया है।
इसके अलावा, हालिया भारी खरीदारी के बाद आने वाले महीनों में खपत धीमी हो सकती है, जबकि अल नीनो ग्रामीण मांग के लिए एक बड़ा जोखिम बना हुआ है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वित्त वर्ष 27 में कमाई में बढ़ोतरी के आम अनुमान (कमोडिटी को छोड़कर) को पहले के 18 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है। हालांकि, इसमें और कटौती होने की उम्मीद है।
एचएसबीसी के एनालिस्ट के अनुसार, बॉन्ड और बैंक डिपॉजिट में विदेशी निवेश लाने के लिए आरबीआई के हालिया कदमों से रुपए को स्थिर करने और विदेशी निवेश की निकासी को कम करने में मदद मिली है।
उन्होंने बताया कि विदेशी संस्थागत निवेशक भी शुद्ध खरीदार बन गए हैं और जुलाई में अब तक लगभग 1.8 अरब डॉलर का निवेश आया है।
भारतीय इक्विटी को ‘अंडरवेट’ से ‘न्यूट्रल’ कैटेगरी में अपग्रेड करने के बावजूद, ब्रोकरेज ने चेतावनी दी है कि विदेशी निवेश शायद लंबे समय तक बना न रहे, क्योंकि ग्लोबल निवेशक एक बार फिर दूसरे बाजारों में एआई से जुड़े मौकों पर ध्यान दे सकते हैं।
हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि इक्विटी के लिए घरेलू निवेशकों की मांग मजबूत बनी रहेगी।
इसके अलावा, ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट में भारत के प्राइवेट बैंकों, कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी, रियल एस्टेट, कमोडिटी और चुनिंदा इंडस्ट्रियल कंपनियों को प्राथमिकता दी है। हालांकि, एआई से जुड़ी चिंताओं के कारण सॉफ्टवेयर सर्विस सेक्टर को लेकर सतर्क हैं, भले ही इस सेक्टर के वैल्यूएशन में काफी सुधार हुआ है।
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नोएडा: अंतर्राज्यीय बाइक चोर गिरफ्तार, चोरी के 12 दोपहिया वाहन बरामद

नोएडा के थाना फेस-1 की पुलिस ने वाहन चोरी की घटनाओं पर कार्रवाई करते हुए एक शातिर अंतर्राज्यीय दोपहिया वाहन चोर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी की 10 मोटरसाइकिल, एक स्कूटी और एक मोटरसाइकिल का चेसिस बरामद किया है। इस कार्रवाई में एक नाबालिग आरोपी को भी पुलिस हिरासत में लिया गया है। बरामद वाहनों की कीमत लाखों रुपए बताई जा रही है।
पुलिस के अनुसार, 15 जुलाई को फेस-1 पुलिस ने मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर अभियान चलाया। इस दौरान बर्ड सेंचुरी अंडरपास के पास से आरोपी आशु ढेढा (26 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय सुखबीर सिंह, निवासी पीपल चौक, दल्लूपुरा, थाना न्यू अशोक नगर, दिल्ली को गिरफ्तार किया गया। आरोपी के कब्जे और उसकी निशानदेही पर चोरी के कुल 12 दोपहिया वाहन बरामद किए गए।
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि वह अपने साथी के साथ पहले दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के विभिन्न इलाकों की रेकी करता था। मौका मिलते ही पार्किंग या सुनसान स्थानों से मोटरसाइकिल और स्कूटी चोरी कर लेता था। चोरी के बाद वाहनों को तुरंत बेचने के बजाय सेक्टरों में खड़ी अन्य गाड़ियों के बीच छिपाकर रख देता था ताकि किसी को शक न हो। बाद में जरूरत पड़ने पर वह खुद को मजबूर बताकर इन वाहनों को कबाड़ियों या राह चलते लोगों को कम कीमत पर बेच देता था। चोरी से मिलने वाले पैसों को दोनों आपस में बांटकर मौज-मस्ती और अपने शौक पूरे करने में खर्च करते थे।
पुलिस ने बताया कि बरामद एक मोटरसाइकिल की जांच जिपनेट के माध्यम से की गई, जो थाना ईस्ट विनोद नगर, दिल्ली से चोरी होना पाई गई। इसके बाद आरोपी की फोटो उत्तर प्रदेश पुलिस के ‘यक्ष ऐप’ और ‘गाण्डीव पोर्टल’ पर मिलान कराई गई, जिसमें उसके खिलाफ पहले से दर्ज कई आपराधिक मामलों की पुष्टि हुई। जांच में सामने आया कि आरोपी के खिलाफ दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के विभिन्न थानों में वाहन चोरी, लूट, चोरी का माल रखने, आर्म्स एक्ट सहित कुल 33 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।
इससे स्पष्ट है कि आरोपी लंबे समय से वाहन चोरी के संगठित नेटवर्क से जुड़ा हुआ था और लगातार वारदातों को अंजाम दे रहा था। बरामद वाहनों में नोएडा के फेस-1, सेक्टर-24 और सेक्टर-49 थानों के अलावा दिल्ली के कल्याणपुरी, गोविंदपुरी, शकरपुर तथा अन्य क्षेत्रों से चोरी हुई मोटरसाइकिलें और स्कूटी शामिल हैं। कुछ वाहनों के इंजन और चेसिस नंबर के आधार पर उनकी पहचान की जा रही है।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि आरोपी के गिरोह में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा चोरी के अन्य वाहनों की बरामदगी और खरीदने वालों तक पहुंचने के लिए पूछताछ जारी है।
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