राष्ट्रीय
आसियान सम्मेलन में बोले कैलाश चौधरी – आमजन को पोषक कृषि उत्पाद उपलब्ध कराएं
कोरोना महामारी के चलते कृषि और वानिकी पर आसियान-भारत मंत्री स्तरीय छठी बैठक बुधवार को वर्चुअल रूप से आयोजित हुई। इसमें भारत सहित आसियान के सदस्य देशों — ब्रुनेई दारुस्सलाम, कम्बोडिया, इंडोनेशिया, लाओ पीडीआर, मलेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड और वियतनाम के कृषि एवं वानिकी मंत्रियों ने भाग लिया। इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने सह-अध्यक्षता करते हुए भारत का प्रतिनिधित्व किया। बैठक के बाद कैलाश चौधरी ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुरक्षित एवं पोषक कृषि उत्पादों की उपलब्धता को लेकर एक दूसरे का पूर्ण सहयोग करने को लेकर भारत प्रतिबद्ध है। चौधरी ने कहा कि भारत कृषि क्षेत्र को मजबूत और समृद्ध बनाने में आसियान को केंद्रीय भूमिका निभाते हुए देखना चाहता है।
कृषि राज्यमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में रणनीतिक सहयोग सुनिश्चित करके आसियान क्षेत्रों में कल्याण और जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के सिद्धांत और उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के अनुकूल वातावरण में किफायती मूल्य पर खाद्य और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने के मुख्य उद्देश्य से कृषि और खाद्य सुरक्षा भारत सरकार के प्राथमिक मुद्दों में से एक है।
चौधरी ने कहा कि खेती-किसानी हमारे लिए विशेष रूप से महžवपूर्ण है क्योंकि देश की अधिकांश आबादी अभी भी अपनी आजीविका के लिए इस पर निर्भर है। भारत ने पिछले दशकों के दौरान हरित क्रांति और श्वेत क्रांति के माध्यम से खाद्य और दूध उत्पादन में आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त किया है।
कैलाश चौधरी ने वर्ष 2022 तक किसान की आय को दोगुना करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लक्ष्य को पूरा करने पर जोर देते हुए देश में कृषि और कृषि प्रौद्योगिकियों में की गई प्रगति पर प्रकाश डाला। बैठक के दौरान सभी पक्षों ने पारस्परिक रूप से प्राथमिक परियोजनाओं, अर्थात जलवायु-स्मार्ट कृषि, कृषि उत्पादन में रोबोटिक्स और ड्रोन का तथा खाद्य प्रसंस्करण में विद्युत चुम्बकीय तरंगों का अनुप्रयोग, फलों और सब्जियों के लिए कटाई-उपरांत प्रौद्योगिकी का संवर्धन और फसलों, पशुधन और जलीय कृषि के लिए ट्रांस-बाउंड्री रोग और स्वास्थ्य प्रबंधन के विकास और कार्यान्वयन पर ध्यान केंद्रित किया।
अंतरराष्ट्रीय
स्वतंत्रता दिवस की शुभकामना देने पर इजरायल के राष्ट्रपति और पीएम नेतन्याहू को प्रधानमंत्री मोदी ने कहा धन्यवाद

नई दिल्ली, 16 अगस्त: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और राष्ट्रपति हर्जोग की ओर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शुभकामना दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका धन्यवाद अदा किया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा, “प्रधानमंत्री नेतन्याहू, आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। भारत-इजरायल की विशेष रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हो, जिससे नए अवसर खुलें और हमारे देशों के लोगों के बीच गहरे संबंध बनें।
इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग की ओर से शुभकामना देने पर पीएम मोदी ने उनको धन्यवाद दिया। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा गया, “राष्ट्रपति हर्जोग, आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। भारत इजरायल के साथ अपनी दोस्ती को बहुत महत्व देता है। हम अपने लोगों के फायदे के लिए अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
बीते दिन शनिवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर लिखा गया था, “भारत और मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी को 80वें स्वतंत्रता दिवस की बधाई। भारत और इजरायल को एक साल के अंतर से आजादी मिली। हम दो प्राचीन देश हैं जो अपने लोगों के लिए बेहतर जीवन लाने के लिए मिलकर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। हमारी इनोवेशन और दोस्ती की कोई सीमा नहीं है। सबसे अच्छा समय तो अभी आना बाकी है!”
इजरायल के राष्ट्रपति की ओर से सोशल मीडिया पर लिखा गया था, “इजरायल की ओर से, मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के शानदार लोगों को आपके 80वें स्वतंत्रता दिवस पर हार्दिक बधाई देता हूं! हम इजरायल और भारत के बीच की खूबसूरत दोस्ती को और मजबूत करते रहें।”
बता दें कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को देशभर में जश्न का माहौल रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से ध्वजारोहण किया था। इस दौरान उन्होंने 75 मिनट तक देशवासियों को संबोधित किया था। देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि आज हम सभी के लिए एक ऐतिहासिक पल है। 80 साल बाद स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर पहली बार ‘वंदे मातरम’ गाया गया। हम 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने की दिशा में काम करेंगे। यह 140 करोड़ से ज्यादा देशवासियों की सामूहिक आवाज है।
अपराध
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई : जुआ, शराब और चोरी के 3 मामलों में 9 आरोपी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 16 अगस्त: दिल्ली पुलिस ने अलग-अलग थाना क्षेत्रों में जुआ, अवैध शराब और चोरी के तीन मामलों में कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कैश, ताश के पत्ते और अवैध शराब भी बरामद की है।
खजूरी खास थाना पुलिस को शनिवार रात करीब 8 बजे सूचना मिली कि ई-ब्लॉक, श्री राम कॉलोनी, गली नंबर 2 के सामने कुछ लोग जुआ खेल रहे हैं। सूचना मिलते ही हेड कांस्टेबल रोहित, हेड कांस्टेबल जुबैर और कांस्टेबल प्रमोद ने एसएचओ को जानकारी देकर मौके पर छापा मारा।
पुलिस को देखकर आरोपी भागने लगे, लेकिन टीम ने छह लोगों को पकड़ लिया। मौके से एक ताश की गड्डी और 10,440 रुपए बरामद किए गए। गिरफ्तार आरोपियों में हनीफ (60), आशिफ (29), मोहम्मद सलीम (30), राजू, (60), हनीफ (38), और मोहम्मद सलीम (40) शामिल हैं।
इस मामले में थाना खजूरी खास में एफआईआर दर्ज की गई। जांच के दौरान किसी की भी कोई पुरानी संलिप्तता नहीं मिली। आगे की जांच जारी है।
इसी तरह सोनिया विहार पुलिस ने शनिवार शाम 6:30 बजे गश्त के दौरान बेदी गैस एजेंसी के पास एक खाली प्लॉट में एक महिला को संदिग्ध हालत में खड़े देखा। तलाशी लेने पर उसके बैग से 30 बीयर, 30 हाफ और 49 क्वार्टर की अलग-अलग ब्रांड की अवैध शराब की बोतलें मिलीं।
सूचना पर हेड कांस्टेबल राज हसन और महिला कांस्टेबल यास्मीन मौके पर पहुंचीं और 52 वर्षीय महिला को गिरफ्तार कर लिया। जांच में पता चला कि आरोपी पहले भी इसी तरह के एक मामले में शामिल रह चुकी है। थाना सोनिया विहार में एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस शराब सप्लाई के स्रोत का पता लगा रही है।
वहीं तीसरे मामले में 3 अगस्त को ताशन जैन ने शिकायत दी थी कि हर्ष विहार, मेन 20 फुटा रोड स्थित उनकी दुकान से लगभग 35,000 रुपए चोरी हो गए हैं। इस पर ई-एफआईआर दर्ज की गई थी।
एसएचओ इंस्पेक्टर तेज दत्त गौर के नेतृत्व में एसआई संदीप, एएसआई गिरीश, हेड कांस्टेबल गौरव, हेड कांस्टेबल कुंदन और हेड कांस्टेबल भूपेंद्र की टीम ने सबूत जुटाकर दो संदिग्धों को पकड़ा। पूछताछ में आरोपियों ने जुर्म कबूल किया और उनकी निशानदेही पर 10,000 रुपए बरामद हुए।
गिरफ्तार आरोपियों में आर्यन (18) और सनी (18) के नाम शामिल हैं। तीनों मामलों में पुलिस आगे की जांच कर रही है।
राजनीति
बंकिम चंद्र के वंशज ने सोनिया गांधी को पत्र लिखकर ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर जताया दुख, बिना शर्त माफी की मांग

नई दिल्ली, 16 अगस्त: भाजपा विधायक और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वंशज सुमित्रो चटर्जी ने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखकर स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के अपमान पर गहरा दुख जताया है।
नॉर्थ 24 परगना जिले के नैहाटी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चटर्जी ने अपने पत्र में मांग की कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की मशहूर रचना का पूरा वर्जन गाने से जुड़ी घटना के लिए भारत के नागरिकों और खासकर पश्चिम बंगाल के लोगों से बिना शर्त माफी मांगी जाए।
सुमित्रो चटर्जी ने लिखा, “जब पूरा देश मातृभूमि की पूजा में लगा हुआ था, तब ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के मुख्यालय में हुई घटनाएं सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण ही नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक गलती को बेशर्मी से दोहराना थीं।”
उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस कार्यकर्ता वंदे मातरम का पूरा वर्जन गा रहे थे, तो सोनिया गांधी की “साफ दिख रही बेचैनी, नाराजगी और उसे रोकने की बार-बार की कोशिशों” से उन्हें बहुत दुख हुआ।
चटर्जी ने लिखा, “एक आम भारतीय नागरिक, एक देशभक्त और सबसे बढ़कर ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के परिवार का सीधा वंशज होने के नाते, मैं आज गहरे दुख, खालीपन और पीड़ा के साथ यह पत्र लिख रहा हूं।”
इस गीत के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए चटर्जी ने अरबिंदो का हवाला दिया और लिखा, ‘यह मंत्र दिया गया और एक ही दिन में पूरा देश देशभक्ति के धर्म में दीक्षित हो गया। अरबिंदो ने इसे सिर्फ एक मंत्र नहीं, बल्कि देशभक्ति का धर्म बताया था।
चटर्जी ने कहा कि इस मंत्र से प्रेरणा लेकर खुदीराम बोस समेत अनगिनत निडर क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने लिखा, “आज स्वतंत्र भारत की धरती पर उसी मंत्र ‘वंदे मातरम’ के पूर्ण पाठ के प्रति आपकी असहिष्णुता उन लाखों शहीदों के बलिदान का गंभीर अपमान प्रतीत होती है।”
उन्होंने आजादी की लड़ाई में ‘वंदे मातरम’ की भूमिका को भी याद किया और राष्ट्रवादी नेता बिपिन चंद्र पाल का जिक्र किया, जिन्होंने लिखा था कि बंगाल के बंटवारे के बाद यह गीत हर क्रांतिकारी की जुबान पर था। चटर्जी ने कहा कि ‘स्वदेशी’, ‘बहिष्कार’ और ‘वंदे मातरम’ आजादी की लड़ाई के जीते-जागते पर्याय बन गए थे।
भाजपा विधायक ने 1905 के बनारस कांग्रेस अधिवेशन में सरला देवी चौधरानी द्वारा पूरे गीत को गाए जाने, 1909 में राजद्रोह के मुकदमे के दौरान बाल गंगाधर तिलक द्वारा समर्थकों को इसे गाते हुए सुनने और 1938 में उस्मानिया यूनिवर्सिटी में राष्ट्रवादी छात्र आंदोलन का भी जिक्र किया।
उन्होंने 1896 में कलकत्ता में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने का भी जिक्र किया और गीत के “जादुई शब्दों” तथा बाधाओं को तोड़ने और दिलों को छूने की उनकी ताकत के बारे में टैगोर की बातों को दोहराया।
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