अंतरराष्ट्रीय समाचार
डब्ल्यूएचओ सीरो ईडी पोस्ट के लिए बांग्लादेश की उम्मीदवारी को भारत का समर्थन
भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय (सीरो) के कार्यकारी निदेशक (ईडी) पद के लिए बांग्लादेश की उम्मीदवारी का समर्थन किया है।
ढाका में नवनियुक्त भारतीय उच्चायुक्त विक्रम कुमार दोरईस्वामी ने बुधवार सुबह प्रधानमंत्री शेख हसीना से उनके आधिकारिक गणभवन निवास पर शिष्टाचार भेंट करते हुए इसकी पुष्टि की।
दोरईस्वामी ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हसीना और सभी बांग्लादेशियों को बधाई दी। जवाब में, प्रधानमंत्री ने अपने भारतीय समकक्ष के प्रति आभार व्यक्त किया। हसीना ने लिबरेशन वारंड और बांग्लादेश के पुनर्निर्माण में भारत के योगदान को भी याद किया।
नए उच्चायुक्त का स्वागत करते हुए, प्रधानमंत्री ने उन्हें कर्तव्यों के निर्वहन के लिए सभी प्रकार का समर्थन देने का आश्वासन दिया।
भारतीय दूत ने कहा कि बांग्लादेश के जनक शेख मुजीबुर रहमान के सपने ‘गोल्डन बांग्लादेश’ को साकार करने के लिए, भारतीय इस कदम का हिस्सा बनने के लिए तैयार हैं।
हसीना ने कहा, “जहां तक बांग्लादेश का संबंध है, सभी भारतीय एक स्वर में एकजुट हैं।” उन्होंने कहा कि भारतीय संसद में ऐतिहासिक भूमि सीमा समझौते (एलबीए) के अनुसमर्थन के दौरान यह उदाहरण देखने को मिला था।
उन्होंने एक बार फिर क्षेत्रीय विकास और सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
दूत ने कोरोनोवायरस महामारी के कारण भारतीय वीजा प्राप्त करने में बांग्लादेशी नागरिकों के सामने आने वाली कठिनाइयों पर चर्चा की।
दोरईस्वामी ने हसीना को बताया कि विभिन्न श्रेणियों के 90 प्रतिशत भारतीय वीजा पहले ही ओपन हो चुके हैं, जबकि शेष कोविड-19 स्थिति के आधार पर दिए जाएंगे।
उन्होंने भारत के सीरम इंस्टूीट्यूट के माध्यम से बांग्लादेश को कोविड-19 वैक्सीन की 3 करोड़ खुराक की आपूर्ति की चल रही प्रक्रिया का जिक्र किया।
इस संबंध में, उन्होंने टीकों के प्रभावी वितरण के लिए बांग्लादेशी स्वास्थ्य पेशेवरों की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत सरकार की इच्छा व्यक्त की।
बैठक के दौरान, हसीना ने दोहराया कि बांग्लादेश शेख मुजीबुर रहमान द्वारा अपनाई गई विदेश नीति में विश्वास करता है – ‘सभी से मित्रता, किसी के प्रति द्वेष नहीं।’
तदनुसार, 17 दिसंबर को हसीना और मोदी के बीच आगामी वर्चुअल समिट के दौरान कुछ अन्य परियोजनाओं के साथ-साथ 1965 की प्री कनेक्टिविटी लाइन, चिलाहाटी-हल्दीबाड़ी रेल लिंक का उद्घाटन किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
नई नेपाल सरकार ने चीन के साथ हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर समझौतों की जांच शुरू की

चीन ने हमेशा नेपाल के साथ अपने आर्थिक संबंधों का इस्तेमाल हिमालयी देश में राजनीतिक हस्तक्षेप के लिए एक सीढ़ी के रूप में किया है, लेकिन अब नेपाल में सत्ता परिवर्तन के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के साथ किए गए कई समझौतों की जांच की जा रही है।
दिल्ली स्थित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट रिसर्च एंड रिजोल्यूशन (आईसीआरआर) द्वारा प्रकाशित एक लेख के अनुसार, “हाल के वर्षों में, नेपाल में चीन की बढ़ती भूमिका आर्थिक सहयोग से परे जाकर रणनीतिक और राजनीतिक हस्तक्षेप के रूप में सामने आई है, जिसमें तिब्बत और ताइवान से संबंधित मुद्दों पर राजनयिक दबाव से लेकर आंतरिक निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयासों तक शामिल हैं।”
लेख में कहा गया कि के.पी शर्मा ओली के कार्यकाल के दौरान नेपाल ने चीन के साथ कई समझौते किए, जिन्हें आर्थिक स्वतंत्रता की दिशा में क्रांतिकारी कदम के रूप में पेश किया गया था।
हालांकि, अब देश की नई सरकार इन समझौतों की गहन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ओली काल में शुरू की गई चीन से जुड़ी कई परियोजनाएं बिना किसी स्पष्ट कारण के क्यों रुक गईं, उनमें देरी हुई या वे प्रभावी रूप से बंद हो गई हैं।
नई सरकार ने यह भी घोषणा की है कि इन परियोजनाओं की पूरी समीक्षा होने तक चीन के साथ किसी भी नए समझौते पर विचार नहीं किया जाएगा।
नेपाल-चीन संबंधों में निर्णायक मोड़ 2016 और 2018 के बीच आया, जब बेल्ट एंड रोड पहल के तहत नेपाल बीजिंग के करीब आया। ओली सरकार ने इन समझौतों को नेपाल को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी केंद्र में बदलने के ऐतिहासिक अवसर के रूप में प्रस्तुत किया। हालांकि, इन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को हमेशा व्यावहारिक योजना या वित्तीय स्पष्टता का समर्थन नहीं मिला।
लेख में अटकी हुई कई परियोजनाओं का जिक्र किया गया है, जिसमें बूढ़ी गंडकी जलविद्युत परियोजना शामिल है, जिसका ठेका मई 2017 में चीन के गेझोउबा समूह को दिया गया था, जिसे नवंबर 2017 में रद्द कर दिया गया था, 2018 में बहाल किया गया था और 2022 से बिना किसी मजबूत प्रगति के प्रभावी रूप से रुका हुआ है।
लगभग 2016-2017 में घोषित प्रस्तावित केरंग-काठमांडू रेलवे परियोजना, तकनीकी चुनौतियों और वित्तीय समाधानों की कमी के कारण 2026 में भी अटकी हुई है।
इसी प्रकार, 2017 और 2018 के बीच बीआरआई के तहत शुरू किया गया ट्रांस-हिमालयी बहुआयामी कनेक्टिविटी नेटवर्क भी सैद्धांतिक चर्चाओं से आगे नहीं बढ़ पाया है। 2018 और 2020 के बीच जिन सीमा पार ट्रांसमिशन लाइन परियोजनाओं पर चर्चा हुई थी, वे अभी तक कार्यान्वित नहीं हुई हैं।
इसी तरह, 2017 और 2020 के बीच शुरू की गई रसुवागढ़ी-केरंग सीमा पर बुनियादी ढांचे का विकास भी आंशिक और धीमी गति से ही हुआ है। 2016 और 2018 के बीच शुरू की गई उत्तरी राजमार्ग कनेक्टिविटी परियोजनाएं भी अधूरी हैं, जबकि 2018-2019 के दौरान पहचानी गई बीआरआई से जुड़ी अधिकांश पहलें 2026 तक भी लागू नहीं हो पाई हैं।
लेख में बताया गया है कि 2017 से हुआवेई और जेडटीई से जुड़े डिजिटल विस्तार के प्रयास भी असमान रूप से आगे बढ़े हैं, जिससे कार्यान्वयन और रणनीतिक निहितार्थों दोनों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
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ट्रंप की डिनर पार्टी में फायरिंग मामले में नया खुलासा, ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के इरादे से आया था बंदूकधारी

व्हाइट हाउस के पास स्थित वाशिंगटन हिल्टन होटल में संवाददाताओं के रात्रिभोज के दौरान फायरिंग मामले में नई जानकारी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि बंदूकधारी के पास शॉटगन, हैंडगन और कई चाकू थे। हमलावर वाशिंगटन हिल्टन के पास सीक्रेट सर्विस के चेकपॉइंट की ओर दौड़ा, लेकिन उसे कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने काबू में कर लिया।
वाशिंगटन के अंतरिम पुलिस चीफ जेफ कैरोल ने कहा कि जब संदिग्ध ने सिक्योरिटी तोड़ने की कोशिश की, तो उसके पास भारी हथियार थे। कैरोल ने रिपोर्टरों को बताया, “उसके पास एक शॉटगन, एक हैंडगन और कई चाकू थे, जब वह उस चेकपॉइंट से भागा।”
यह घटना रात करीब 8:36 बजे होटल की लॉबी में हुई, जहां राष्ट्रपति ट्रंप और सीनियर अधिकारियों के हाई प्रोफाइल इवेंट के लिए कई लेवल पर सुरक्षा घेरा बनाया गया था।
कानून प्रवर्तन कर्मियों ने तुरंत संदिग्ध को रोक लिया। अधिकारियों और संदिग्ध के बीच गोलीबारी भी हुई। इस दौरान एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी को गोली लगी, लेकिन वह बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण बच गया। उसे इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और वह फिलहाल अच्छी स्थिति में है। संदिग्ध को गोली नहीं लगी, लेकिन उसे भी अस्पताल ले जाकर जांच के लिए रखा गया है।
अधिकारियों ने बताया संदिग्ध उस बॉलरूम तक नहीं पहुंच पाया, जहां हजारों लोग मौजूद थे। अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो ने कहा, “यह चेकपॉइंट काम कर गया,” और कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की कई लेयर ने एक बड़े हमले को रोक दिया।पिरो ने कहा कि यह स्पष्ट है कि यह व्यक्ति जितना संभव हो सके, उतना नुकसान और तबाही करने का इरादा लेकर आया था।
पिरो ने कहा, “संदिग्ध पर हिंसक अपराध के दौरान हथियार का उपयोग और संघीय अधिकारी पर खतरनाक हथियार से हमले के दो आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच आगे बढ़ने पर चार्ज बढ़ाए जा सकते हैं आरोप लगाए जा सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध को मौके पर ही पकड़कर काबू में किया गया और उसे नीचे गिराकर हथकड़ी लगा दी गई। फिलहाल जनता के लिए कोई खतरा नहीं है। कैरोल ने कहा, जांचकर्ताओं को लगता है कि संदिग्ध अकेले ही काम कर रहा था।
वॉशिंगटन की मेयर म्यूरियल बोउजर ने भी कहा, “इस समय हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि कोई और शामिल था।
अधिकारियों ने अब यह जांच शुरू कर दी है कि संदिग्ध कई हथियारों के साथ होटल के अंदर कैसे पहुंचा। जेफ कैरोल ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है और तलाशी अभियान चल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि होटल में संदिग्ध से जुड़ा एक कमरा सुरक्षित कर लिया गया है।
एफबीआई ने अपनी जॉइंट टेररिज्म टास्क फोर्स और एविडेंस टीमों को जांच में शामिल कर लिया है। सहायक निदेशक डैरेन कॉक्स ने कहा कि सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है और इस जांच में कोई भी पहलू छोड़ा नहीं जाएगा।
उन्होंने कानून प्रवर्तन की तेज कार्रवाई की भी सराहना की और कहा कि जनता को अधिकारियों की तत्परता और साहस पर गर्व होना चाहिए।
सीक्रेट सर्विस निदेशक सीन केर्न ने कहा कि कई स्तरों वाली सुरक्षा प्रणाली ने हमलावर को रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और फॉरेंसिक जांच, गवाहों से पूछताछ और संदिग्ध की पृष्ठभूमि की जांच जारी है।
फिलहाल किसी मकसद की पुष्टि नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्या राष्ट्रपति को सीधे निशाना बनाया गया था। अधिकारियों ने कहा कि इन सभी सवालों की जांच जारी है। जांच के आगे बढ़ने के साथ अतिरिक्त आरोप लगाए जाने की संभावना है और आने वाले दिनों में आरोपी को संघीय अदालत में पेश किया जाएगा।
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वैश्विक एआई दौड़ के बीच गूगल एन्थ्रोपिक में 40 अरब डॉलर तक का करेगा निवेश

अमेरिका की दिग्गज टेक कंपनी गूगल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दौड़ में बड़ा दांव खेलते हुए एआई कंपनी एन्थ्रोपिक में 40 अरब डॉलर तक निवेश करने की योजना बनाई है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब दुनियाभर की बड़ी टेक कंपनियां एडवांस एआई मॉडल और इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी से निवेश कर रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस प्रस्तावित निवेश में शुरुआती तौर पर 10 अरब डॉलर का निवेश किया जाएगा, जो एन्थ्रोपिक के 380 अरब डॉलर के वैल्यूएशन पर आधारित होगा। इसके बाद बाकी 30 अरब डॉलर का निवेश कंपनी के प्रदर्शन से जुड़े लक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
यह निवेश दोनों कंपनियों के बीच पहले से चल रही साझेदारी को और मजबूत करता है। इस साझेदारी के तहत गूगल, एन्थ्रोपिक को क्लॉड इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है और उसके एआई मॉडल, खासकर क्लॉड सीरीज तक पहुंच देता है।
इसके अलावा, एन्थ्रोपिक, गूगल के कस्टम टेंसर प्रोसेसिंग यूनिट्स (टीपीयू) का इस्तेमाल करता है, जो पारंपरिक ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (जीपीयू) का एक विकल्प हैं।
एआई टूल्स की बढ़ती मांग के कारण कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर दबाव बढ़ता जा रहा है। इसी को देखते हुए एन्थ्रोपिक ने हाल ही में गूगल और ब्रॉडकॉम के साथ मिलकर 5 गीगावाट कंप्यूट क्षमता हासिल की है और इसे आगे और बढ़ाने की योजना है।
दिलचस्प बात यह है कि साझेदारी के बावजूद दोनों कंपनियां एआई बाजार में एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी भी हैं। गूगल के जेमिनी मॉडल, एन्थ्रोपिक के एआई मॉडल्स को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
गूगल ने 2023 में पहली बार एन्थ्रोपिक में 300 मिलियन डॉलर का निवेश किया था, जिससे उसे लगभग 10 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली थी। बाद में यह निवेश 3 अरब डॉलर से ज्यादा हो गया और डील से पहले उसकी हिस्सेदारी करीब 14 प्रतिशत बताई जा रही थी।
एन्थ्रोपिक की स्थापना 2021 में ओपन एआई के पूर्व शोधकर्ताओं ने की थी, और इसके क्लॉड मॉडल्स को तेजी से लोकप्रियता मिली है। कंपनी की सालाना आय 30 अरब डॉलर के पार पहुंच चुकी है।
इससे पहले अमेजन भी एन्थ्रोपिक में 5 अरब डॉलर का निवेश कर चुका है और 20 अरब डॉलर तक के अतिरिक्त निवेश की प्रतिबद्धता जता चुका है।
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