अंतरराष्ट्रीय समाचार
ट्रंप की डिनर पार्टी में फायरिंग मामले में नया खुलासा, ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के इरादे से आया था बंदूकधारी
व्हाइट हाउस के पास स्थित वाशिंगटन हिल्टन होटल में संवाददाताओं के रात्रिभोज के दौरान फायरिंग मामले में नई जानकारी सामने आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि बंदूकधारी के पास शॉटगन, हैंडगन और कई चाकू थे। हमलावर वाशिंगटन हिल्टन के पास सीक्रेट सर्विस के चेकपॉइंट की ओर दौड़ा, लेकिन उसे कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने काबू में कर लिया।
वाशिंगटन के अंतरिम पुलिस चीफ जेफ कैरोल ने कहा कि जब संदिग्ध ने सिक्योरिटी तोड़ने की कोशिश की, तो उसके पास भारी हथियार थे। कैरोल ने रिपोर्टरों को बताया, “उसके पास एक शॉटगन, एक हैंडगन और कई चाकू थे, जब वह उस चेकपॉइंट से भागा।”
यह घटना रात करीब 8:36 बजे होटल की लॉबी में हुई, जहां राष्ट्रपति ट्रंप और सीनियर अधिकारियों के हाई प्रोफाइल इवेंट के लिए कई लेवल पर सुरक्षा घेरा बनाया गया था।
कानून प्रवर्तन कर्मियों ने तुरंत संदिग्ध को रोक लिया। अधिकारियों और संदिग्ध के बीच गोलीबारी भी हुई। इस दौरान एक सीक्रेट सर्विस अधिकारी को गोली लगी, लेकिन वह बुलेटप्रूफ जैकेट के कारण बच गया। उसे इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया और वह फिलहाल अच्छी स्थिति में है। संदिग्ध को गोली नहीं लगी, लेकिन उसे भी अस्पताल ले जाकर जांच के लिए रखा गया है।
अधिकारियों ने बताया संदिग्ध उस बॉलरूम तक नहीं पहुंच पाया, जहां हजारों लोग मौजूद थे। अमेरिकी अटॉर्नी जीनिन पिरो ने कहा, “यह चेकपॉइंट काम कर गया,” और कहा कि सुरक्षा व्यवस्था की कई लेयर ने एक बड़े हमले को रोक दिया।पिरो ने कहा कि यह स्पष्ट है कि यह व्यक्ति जितना संभव हो सके, उतना नुकसान और तबाही करने का इरादा लेकर आया था।
पिरो ने कहा, “संदिग्ध पर हिंसक अपराध के दौरान हथियार का उपयोग और संघीय अधिकारी पर खतरनाक हथियार से हमले के दो आरोप लगाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जांच आगे बढ़ने पर चार्ज बढ़ाए जा सकते हैं आरोप लगाए जा सकते हैं।
अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध को मौके पर ही पकड़कर काबू में किया गया और उसे नीचे गिराकर हथकड़ी लगा दी गई। फिलहाल जनता के लिए कोई खतरा नहीं है। कैरोल ने कहा, जांचकर्ताओं को लगता है कि संदिग्ध अकेले ही काम कर रहा था।
वॉशिंगटन की मेयर म्यूरियल बोउजर ने भी कहा, “इस समय हमारे पास यह मानने का कोई कारण नहीं है कि कोई और शामिल था।
अधिकारियों ने अब यह जांच शुरू कर दी है कि संदिग्ध कई हथियारों के साथ होटल के अंदर कैसे पहुंचा। जेफ कैरोल ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है और तलाशी अभियान चल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि होटल में संदिग्ध से जुड़ा एक कमरा सुरक्षित कर लिया गया है।
एफबीआई ने अपनी जॉइंट टेररिज्म टास्क फोर्स और एविडेंस टीमों को जांच में शामिल कर लिया है। सहायक निदेशक डैरेन कॉक्स ने कहा कि सभी संभावित पहलुओं की जांच की जा रही है और इस जांच में कोई भी पहलू छोड़ा नहीं जाएगा।
उन्होंने कानून प्रवर्तन की तेज कार्रवाई की भी सराहना की और कहा कि जनता को अधिकारियों की तत्परता और साहस पर गर्व होना चाहिए।
सीक्रेट सर्विस निदेशक सीन केर्न ने कहा कि कई स्तरों वाली सुरक्षा प्रणाली ने हमलावर को रोक दिया। अधिकारियों ने बताया कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और फॉरेंसिक जांच, गवाहों से पूछताछ और संदिग्ध की पृष्ठभूमि की जांच जारी है।
फिलहाल किसी मकसद की पुष्टि नहीं हुई है और यह भी स्पष्ट नहीं है कि क्या राष्ट्रपति को सीधे निशाना बनाया गया था। अधिकारियों ने कहा कि इन सभी सवालों की जांच जारी है। जांच के आगे बढ़ने के साथ अतिरिक्त आरोप लगाए जाने की संभावना है और आने वाले दिनों में आरोपी को संघीय अदालत में पेश किया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
ईरान के जहाज पर यूक्रेन के हमले का जवाब देना जरूरी : विदेश मंत्री अब्बास अराघची

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि कैस्पियन सागर में ईरान के कमर्शियल जहाज पर यूक्रेन के हमले को बिना जवाब दिए ऐसे नहीं छोड़ा जा सकता।
ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की पर आरोप लगाया कि उन्होंने इजरायल के कहने पर यूएन चार्टर का खुला उल्लंघन करके यूरोप को अपनी लड़ाई में घसीटने का आदेश दिया।
न्यूज एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि उन्होंने शनिवार और रविवार को यूरोपीय संघ की विदेश नीति की प्रमुख काजा कैलास और रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ फोन पर हुई बातचीत में स्पष्ट कर दिया था कि कीव में मुफ्तखोर ने जो किया, उसे बिना जवाब दिए नहीं जाने नहीं दिया जा सकता।
ईरानी विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, अराघची ने शनिवार को ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास के साथ एक फोन कॉल में यह बात कही। इसके साथ ही दोनों पक्षों ने हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर चर्चा की।
बयान के अनुसार, अराघची ने यूक्रेनी हमले की निंदा की और ईयू, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके गुनाहगारों और समर्थकों को जिम्मेदार ठहराने की अपील की।
इसमें आगे कहा गया कि दोनों पक्षों ने होर्मुज स्ट्रेट में हो रहे घटनाक्रम पर भी बात की और क्षेत्रीय तनाव को मैनेज करने के लिए डिप्लोमैटिक पहल की जरूरत पर जोर दिया।
एक अलग बयान में मंत्रालय ने कहा कि ईरान ने हमले को लेकर शनिवार को तेहरान में यूक्रेन के चार्ज डी’अफेयर्स को बुलाया और औपचारिक रूप से इस काम की निंदा करते हुए विरोध पत्र दिया।
ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह हमला शनिवार को स्थानीय समय के हिसाब से सुबह 3:00 बजे हुआ और इसमें जहाज में धमाका हुआ और एक नाविक की मौत हो गई।
अर्धसरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने रविवार को बताया कि हमले में तीन नाविक भी घायल हुए हैं।
ईरान के उत्तरी गिलान प्रांत के गवर्नर हादी हकशेनास के हवाले से बताया गया कि स्टील लादे इस जहाज पर उस समय हमला हुआ, जब वह रूस के अस्त्राखान बंदरगाह से ईरान के गिलान प्रांत स्थित अंजली बंदरगाह की ओर जा रहा था।
हकशेनास ने कहा कि हमले में जहाज का ब्रिज (नियंत्रण कक्ष) पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे वह अपनी यात्रा जारी रखने में असमर्थ हो गया। उन्होंने कहा कि इस घटना को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनी माध्यमों से उठाया जाएगा।
वहीं, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने शनिवार को दावा किया कि यूक्रेनी बलों ने कैस्पियन सागर में एक रूसी युद्धपोत और ईरान से जुड़े सैन्य सामान की ढुलाई में इस्तेमाल किए जा रहे जहाजों को निशाना बनाया है।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-तंजानिया के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर, विदेश कार्यालय परामर्श में कई मुद्दों पर हुई चर्चा

भारत और तंजानिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने को लेकर बातचीत की। दोनों देशों के बीच दार एस सलाम में हुए विदेश कार्यालय परामर्श में व्यापार, रक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और विकास सहयोग समेत कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि भारत और तंजानिया के बीच विदेश कार्यालय परामर्श (एफओसी) 22 जुलाई 2026 को तंजानिया के दार एस सलाम में आयोजित किया गया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (ईएंडएसए) जनेश काइन और तंजानिया के विदेश मामलों एवं पूर्वी अफ्रीकी सहयोग मंत्रालय के एशिया और ऑस्ट्रेलिया विभाग की निदेशक फेलिस्टर रुगाम्बवा ने की।
एफओसी के दौरान जनेश काइन ने तंजानिया के विदेश मामलों एवं पूर्वी अफ्रीकी सहयोग मंत्रालय के स्थायी सचिव राजदूत डॉ. सैमवेल विलियम शेलुकिंडो से भी मुलाकात की।
मंत्रालय ने बताया कि बैठक में दोनों देशों ने आपसी संबंधों की समीक्षा की और व्यापार व निवेश, विकास सहयोग, रक्षा और सुरक्षा सहयोग, डिजिटल सार्वजनिक ढांचे, कृषि, स्वास्थ्य, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा की।
मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से जल्द ही संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) और संयुक्त रक्षा सहयोग समिति की बैठक आयोजित करने पर सहमति जताई। इसके अलावा, दोनों देशों ने क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने विचार साझा किए, जिनमें दोनों की समान रुचि है।
मंत्रालय ने बताया कि दोनों पक्षों ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) और अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल और सहयोग की सराहना की। दोनों देशों ने यह भी सहमति जताई कि विदेश कार्यालय परामर्श का अगला दौर भारत में आपसी सुविधा के अनुसार किसी तारीख पर आयोजित किया जाएगा।
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ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ अहम परमाणु समझौते को मंजूरी दीः रिपोर्ट

‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से मंगलवार को रिपोर्ट दी कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ एक अहम परमाणु समझौते को औपचारिक रूप से मंजूरी दे दी है।
इस समझौते के तहत सऊदी अरब में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति मिल सकती है और अमेरिकी कंपनियों के लिए अरबों डॉलर की कमाई हो सकती है। इस 30 साल के समझौते से सऊदी अरब को एक सिविलियन न्यूक्लियर प्रोग्राम तक पहुंच मिल जाएगी।
‘द जर्नल’ के अनुसार, समझौते को इस तरह से तैयार किया गया है कि अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब के उभरते हुए न्यूक्लियर इंफ्रास्ट्रक्चर के केंद्र में रहें और विदेशी कंपनियां इससे बाहर रहें। यह डील वॉशिंगटन और रियाद के बीच न्यूक्लियर सहयोग के बड़े विस्तार का संकेत हो सकती है। इससे मिडिल ईस्ट में संवेदनशील न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के प्रसार को लेकर कांग्रेस में चिंताएं फिर से बढ़ सकती हैं।
एक अहम प्रावधान के तहत, अमेरिकी कंपनियां सऊदी अरब में यूरेनियम एनरिचमेंट (संवर्धन) प्लांट बना सकती हैं। ‘जर्नल’ के अनुसार, यह प्रोजेक्ट तभी आगे बढ़ेगा जब अमेरिका और सऊदी अरब की संयुक्त स्टडी में यह नतीजा निकले कि ऐसे प्लांट की जरूरत है।
यूरेनियम एनरिचमेंट से आम नागरिकों के इस्तेमाल वाले न्यूक्लियर रिएक्टरों के लिए ईंधन बनाया जा सकता है। इसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल, अगर बहुत ऊंचे स्तर पर किया जाए तो न्यूक्लियर हथियारों के लिए भी सामग्री बनाई जा सकती है। दोहरे इस्तेमाल की इसी क्षमता की वजह से एनरिचमेंट लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय न्यूक्लियर बातचीत के सबसे संवेदनशील हिस्सों में से एक रहा है।
ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि सीधे अमेरिकी दखल से सऊदी न्यूक्लियर प्रोग्राम पर वॉशिंगटन का असर बढ़ेगा। तर्क है कि अमेरिका की भागीदारी से न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी को सैन्य मकसद के लिए इस्तेमाल होने से रोकने में भी मदद मिलेगी।
अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने पिछले हफ्ते के आखिर में इस समझौते को मंजूरी दे दी थी। उम्मीद है कि अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान बुधवार को इस पर हस्ताक्षर करेंगे।
राइट ने अप्रैल 2025 में इस क्षेत्र की अपनी पहली विदेश यात्रा के दौरान अपने सऊदी समकक्ष के साथ प्रस्तावित सहयोग पर चर्चा की थी। इस समझौते से रिएक्टर बनाने, परमाणु ईंधन सेवाएं देने और उससे जुड़े बुनियादी ढांचे के काम में लगी अमेरिकी कंपनियों को बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिल सकते हैं।
सऊदी अरब तेल के अलावा अपने ऊर्जा स्रोतों और अर्थव्यवस्था में विविधता लाने की कोशिश के तहत नागरिक परमाणु ऊर्जा विकसित करना चाहता है। सऊदी अरब का यह भी तर्क है कि परमाणु ऊर्जा से देश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने और निर्यात के लिए अधिक तेल बचाने में मदद मिल सकती है।
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