राष्ट्रीय
भारत का शीर्ष बैंक जल्द ही भारतीय मुद्रा का डिजिटल संस्करण लॉन्च करेगा
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा कि वह जल्द ही विशिष्ट उपयोग के मामलों के लिए भारतीय मुद्रा रुपये के डिजिटल संस्करण का पायलट लॉन्च शुरू करेगा। आरबीआई ने एक आधिकारिक संचार में कहा कि इसने सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) पर एक अवधारणा नोट भी जारी किया है, जिसका उद्देश्य सामान्य रूप से ऐसी मुद्राओं और विशेष रूप से डिजिटल रुपये की नियोजित विशेषताओं के बारे में जागरूकता पैदा करना है। आरबीआई कॉन्सेप्ट नोट में कहा गया है कि केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा केंद्रीय बैंकों द्वारा मौद्रिक नीति के अनुरूप जारी की गई एक संप्रभु मुद्रा है। यह केंद्रीय बैंक की बैलेंस शीट पर देयता के रूप में दिखाई देगा।
आरबीआई ने एक बयान में कहा, कॉन्सेप्ट नोट में प्रौद्योगिकी और डिजाइन विकल्पों, डिजिटल रुपये के संभावित उपयोग और जारी करने के तंत्र जैसे महत्वपूर्ण विचारों पर भी चर्चा की गई है। अवधारणा नोट के अनुसार, सभी नागरिकों, उद्यमों और सरकारी एजेंसियों द्वारा डिजिटल मुद्रा को भुगतान के माध्यम, कानूनी निविदा और मूल्य के एक सुरक्षित भंडार के रूप में स्वीकार किया जाना चाहिए।
एक बयान में कहा गया, डिजिटल मुद्रा वाणिज्यिक बैंक के पैसे और नकदी के खिलाफ मुक्त रूप से परिवर्तनीय होगी। यह एक परिवर्तनीय कानूनी निविदा होगी, जिसके लिए धारकों के पास बैंक खाता होना जरूरी नहीं है। 2022-23 का केंद्रीय बजट पेश करते हुए वित्तमंत्री ने कहा था कि आरबीआई चालू वित्तवर्ष में रुपये के बराबर एक डिजिटल रोल आउट करेगा। इस तरह के पायलट लॉन्च की सीमा और दायरे का विस्तार होने के कारण, आरबीआई समय-समय पर डिजिटल रुपये की विशिष्ट विशेषताओं और लाभों के बारे में संवाद करना जारी रखेगा।
डिजिटल रुपये से पैसे और लेनदेन जारी करने की लागत कम होने की उम्मीद है। कागजी मुद्रा के घटते उपयोग का सामना करते हुए केंद्रीय बैंक अब मुद्रा के अधिक स्वीकार्य इलेक्ट्रॉनिक रूप को लोकप्रिय बनाने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा को भारत की अत्याधुनिक भुगतान प्रणालियों द्वारा समर्थित किया जाएगा जो कि सस्ती, सुलभ, सुविधाजनक, और सुरक्षित हैं। शीर्ष बैंक के अवधारणा नोट में कहा गया है कि ई-रुपया भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा, वित्तीय समावेशन को बढ़ाएगा और मौद्रिक और भुगतान प्रणाली को और अधिक कुशल बनाएगा।
आरबीआई ने बयान में कहा, ई-रुपया वर्तमान में उपलब्ध मुद्रा के लिए एक अतिरिक्त विकल्प प्रदान करेगा। यह बैंक नोटों से काफी अलग नहीं है, लेकिन डिजिटल होने के कारण यह आसान, तेज और सस्ता होने की संभावना है। इसमें डिजिटल मुद्रा के अन्य रूपों के सभी लेनदेन संबंधी लाभ भी हैं।
नोट में कहा गया है कि डिजिटल मुद्रा को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया जाना चाहिए जो प्रदर्शन में गिरावट के बिना बहुत अधिक मात्रा और लेनदेन की दर का समर्थन करने के लिए अत्यधिक स्केलेबल हो। यह वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए मजबूत होना चाहिए और अन्य सुविधाओं के बीच डेटा की सुरक्षा के लिए छेड़छाड़-सबूत अभिगम नियंत्रण प्रोटोकॉल और क्रिप्टोग्राफी होना चाहिए।
केंद्रीय बैंक की डिजिटल मुद्रा से वास्तविक समय में डेटा के विशाल सेट उत्पन्न होने की उम्मीद है। नोट में कहा गया है, गुमनामी से संबंधित चिंताओं को ध्यान में रखते हुए सीबीडीसी से उत्पन्न बिग डेटा के उपयुक्त विश्लेषण साक्ष्य-आधारित नीति बनाने में सहायता कर सकते हैं। यह वित्तीय उत्पाद अंतर्दृष्टि के लिए सेवा प्रदाताओं के लिए एक समृद्ध डेटा स्रोत भी बन सकता है।
उपभोक्ता संरक्षण पर जोर देते हुए आरबीआई इसे वित्तीय स्थिरता का एक महत्वपूर्ण स्तंभ कहता है। केंद्रीय बैंक ने उपभोक्ता संरक्षण ढांचे का आह्वान किया है जो उपभोक्ताओं की डिजिटल साक्षरता में भिन्नता और उपभोक्ता समझ और पारदर्शिता बढ़ाने के तरीकों पर विचार करना चाहिए।
आरबीआई ने उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल मुद्रा तक सहज पहुंच का आह्वान किया। उसने एक मजबूत तंत्र के माध्यम से ग्राहकों की शिकायतों के प्रभावी और कुशल समाधान पर भी जोर दिया।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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