राष्ट्रीय
‘वैश्विक’ कारकों के कारण मुद्रास्फीति बढ़ने की उम्मीद
एक्सपर्ट्स और आम जनता का कहना है कि आने वाले महीनों में महंगाई तेजी से बढ़ने वाली है। जरूरी और गैर-जरूरी चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। जिसके चलते प्रत्येक घर प्रभावित होगा।
वैश्विक और स्थानीय (वैश्विक) कारकों के संयोजन से भू-राजनीतिक विकास, फसल उत्पादन, कच्चे तेल के उत्पादन में कमी और रुपये के गिरावट से कीमतों में तेजी आने की उम्मीद है।
कीमतें पहले से ही बढ़ रही हैं और आगे भी बढ़ती रहेंगी।
शहर के एक स्टार होटल के शीर्ष अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि उनके रॉ फूड्स की लागत बढ़ गई है और लगातार बढ़ रही है, जिसके कारण होटलों ने डिशिज की कीमतों में बदलाव किया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल के एक सर्वे से पता चला है कि उत्तरदाताओं की अधिकांश श्रेणियां तीन महीने और एक वर्ष बाद दोनों के लिए उच्च मुद्रास्फीति की उम्मीद करती हैं।
उत्तरदाताओं का एक बड़ा हिस्सा सभी उत्पाद समूहों के लिए उच्च कीमतों की अपेक्षा करता है।
सर्वे के मुताबिक, आगे की तीन महीने की अवधि के लिए समग्र कीमतों और मुद्रास्फीति की उम्मीदों को आम तौर पर खाद्य उत्पादों, गैर-खाद्य उत्पादों और सेवाओं की लागत के साथ जोड़ा गया, जबकि वे एक वर्ष के लंबे होरिजन के लिए गैर-खाद्य उत्पादों और सेवाओं की लागत के साथ जोड़ रहे थे।
भारत में, खुदरा मुद्रास्फीति जुलाई में 6.71 प्रतिशत से बढ़कर अगस्त में बढ़कर 7 प्रतिशत हो गई।
आरबीआई अपनी ओर से रेपो रेट को बढ़ाकर मुद्रास्फीति से मुकाबला करने की कोशिश कर रहा है, जिस दर पर वह बैंकों को उधार देता है।
केंद्रीय बैंक ने हाल के दिनों में रेपो रेट में 190 आधार अंकों की वृद्धि की है और पिछले महीने 50 आधार अंकों की वृद्धि की थी।
क्रेडिट पॉलिसी की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा था, “खाद्य कीमतों के लिए भी जोखिम है। संभावित कम खरीफ धान उत्पादन के कारण गेहूं से चावल तक अनाज की कीमतों का दबाव बढ़ रहा है।”
उन्होंने कहा, “खरीफ दलहन की कम बुवाई से दबाव हो सकता है। मानसून की देरी से वापसी और विभिन्न क्षेत्रों में तेज बारिश ने सब्जियों की कीमतों, विशेषकर टमाटर की कीमतों को प्रभावित करना शुरू कर दिया है। खाद्य मुद्रास्फीति के लिए ये जोखिम मुद्रास्फीति की उम्मीदों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं।”
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, भारतीय बाजार कच्चे तेल की कीमत पहली छमाही 2022-23 में लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल थी और दूसरी छमाही 2022-23 में लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल होने की उम्मीद है।
दास ने कहा, “इन कारकों को ध्यान में रखते हुए, मुद्रास्फीति अनुमान 2022-23 में 6.7 प्रतिशत पर, दूसरी तिमाही के साथ 7.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 6.5 प्रतिशत पर और चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत पर जोखिम समान रूप से संतुलित जोखिमों के साथ बनाए रखा गया है। सीपीआई (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) मुद्रास्फीति 2023-24 की पहली तिमाही में 5.0 प्रतिशत तक और कम होने का अनुमान है।”
हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों (100 डॉलर प्रति बैरल) के बारे में आरबीआई को विचार करना होगा। तेल उत्पादक देशों ने अपने उत्पादन में कटौती और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी की घोषणा की है।
मुद्रास्फीति पर आरबीआई की उम्मीदों पर अर्थशास्त्रियों और आम आदमी की अलग-अलग राय है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने आईएएनएस से कहा, “मौजूदा समय में मुद्रास्फीति के दो कारकों के कारण नीचे की ओर बढ़ने की संभावना नहीं है। तेल की कीमतों में वृद्धि और रुपये में गिरावट से आयातित मुद्रास्फीति में वृद्धि की संभावना है।”
सबनवीस ने कहा, “खरीफ उत्पादन में कुछ कमी आई है, जिसका मतलब कीमतों में वृद्धि होगी। साथ ही बारिश के देर से बंद होने से सब्जियों की फसल प्रभावित हुई है और कुछ क्षेत्रों में चावल और तिलहन की फसल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।”
खरीफ सीजन के दौरान चावल और दालों के लिए बुवाई क्षेत्र में कमी आने वाले महीनों में मुद्रास्फीति को कम करने की उम्मीद है।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि खरीफ सीजन के लिए बुवाई का रकबा 30 सितंबर, 2022 के अंत में पिछले साल की तुलना में 0.8 प्रतिशत कम हो गया है।
चावल और दालों का बुवाई क्षेत्र क्रमश: 4.8 प्रतिशत और 4 प्रतिशत कम था।
दलहनों में अरहर (4.4 प्रतिशत), मूंग (4 प्रतिशत) और उड़द (3.8 प्रतिशत) ने कम बुवाई दर्ज की है।
तिलहन (1 प्रतिशत) और जूट और मेस्टा (0.1 प्रतिशत) के लिए बोया गया क्षेत्र पिछले वर्ष के स्तर की तुलना में कम है।
सबनवीस ने कहा, “तिलहन उत्पादन में किसी भी तरह की कमी से खाद्य तेलों के उत्पादन पर असर पड़ेगा और हमारे आयात में वृद्धि होगी। वर्तमान में हमारी 60 फीसदी जरूरतें आयात के जरिए हैं। कीमतों में मजबूती के साथ ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन होगा जिसका मुद्रास्फीति पर असर पड़ेगा।”
सबनवीस ने कहा, “वित्त वर्ष 2023 में मुद्रास्फीति दर 6.5-7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 24 में 5.5-6 प्रतिशत होगी।”
घरेलू बाजार में खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने के साथ, सरकार ने जमाखोरी को रोकने के लिए आयात शुल्क में कमी, खाद्य तेल के स्टॉक को सीमित करने जैसे उपाय किए हैं।
सरकार ने घरेलू आपूर्ति को स्थिर रखने और कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए गेहूं का आटा, चावल, मैदा आदि जैसे खाद्य उत्पादों के निर्यात पर रोक लगा दी है।
केंद्र सरकार ने कहा कि आने वाले हफ्तों और महीनों में इन उपायों के समझौते को और अधिक महत्वपूर्ण रूप से महसूस किए जाने की उम्मीद है।
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का गिरना भी मुद्रास्फीति को बढ़ावा देता है क्योंकि आयात (कच्चा और खाद्य तेल) महंगा हो जाता है।
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स के अनुसार, 2022 में विभिन्न मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का आसमान छूना उन्नत और उभरते बाजारों के लिए समस्या पैदा कर रहा है। इस मुद्दे का समाधान सिर्फ अर्थशास्त्र पर ही नहीं बल्कि राजनीति पर भी निर्भर है।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
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