व्यापार
हरे निशान में खुलने के बाद भारतीय शेयर बाजार में आई गिरावट, ट्रंप द्वारा 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने का दिखा असर
मुंबई, 13 जनवरी: पिछले कुछ दिनों में लगातार गिरावट के बाद सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन, मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार हरे निशान में खुला। इस दौरान घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों ने अच्छी शुरुआत की, लेकिन कुछ समय बाद शुरुआती बढ़त खोकर दोनों प्रमुख बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के इस बयान के बाद कि दोनों देश मंगलवार को व्यापार वार्ता करेंगे और मजबूत वैश्विक संकेतों के बीच सोमवार के कारोबारी सत्र में शुरुआती गिरावट के बाद सेंसेक्स और निफ्टी में शानदार तेजी देखने को मिली और दोनों बेंचमार्क अच्छी बढ़त के साथ बंद हुए थे।
वहीं हफ्ते के दूसरे ट्रेडिंग सेशन में भी दोनों प्रमुख घरेलू बेंचमार्कों ने बढ़त का सिलसिला जारी रखते हुए तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत की।
शुरू में सुबह 9.20 बजे के आसपास 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 278 अंक या 0.33 प्रतिशत की उछाल के साथ 84,156 पर कारोबार कर रहा था, जबकि निफ्टी शुरुआती कारोबार में 82 अंक या 0.32 प्रतिशत की तेजी के साथ 25,872 पर था।
हालांकि कुछ ही देर बाद सुबह 9.30 बजे तक सेंसेक्स 85 अंक या 0.10 प्रतिशत गिरकर 83,792 पर और निफ्टी 22 अंक या 0.08 प्रतिशत गिरकर 25,768 पर आ गया।
व्यापक बाजार में, निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.24 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
सेक्टरवार देखें तो, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.88 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जिसके बाद निफ्टी एफएमसीजी, आईटी और मेटल इंडेक्सों में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई। तो वहीं, निफ्टी फार्मा इंडेक्स में 0.25 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
सेंसेक्स पैक में इटरनल, एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, टेक महिंद्रा और बीईएल टॉप गेनर्स वाले शेयरों में शामिल रहे। तो वहीं दूसरी ओर एल एंड टी, एचसीएल टेक, ट्रेंट, रिलायंस, एम एंड एम, भारती एयरटेल और टाटा स्टील टॉप लूजर्स वाले शेयरों में शामिल रहे।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वीके विजयकुमार ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान और फैसले आगे भी शेयर बाजारों को प्रभावित करते रहेंगे। ट्रंप द्वारा टैरिफ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल करने की नीति पहले ही वैश्विक व्यापार पर असर डाल चुकी है, खासतौर पर उन देशों पर जिन पर दंडात्मक टैरिफ लगाए गए हैं। ट्रंप की हालिया घोषणा कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर अमेरिका 25 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा, यह साफ संकेत देती है कि टैरिफ के जरिए दबाव बनाने की यह नीति आगे भी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि अन्य देशों को निशाना बनाने के अलावा ट्रंप अपने देश में भी उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जो उनकी बात नहीं मानते। फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल के खिलाफ लगाए गए आरोप इस बात का उदाहरण हैं कि ट्रंप किसी भी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेंगे जो उनकी बात नहीं मानता।
एक्सपर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति का यह अभूतपूर्व, अस्थिर और अप्रत्याशित व्यवहार आगे भी बाजारों पर दबाव बनाए रखेगा। भारतीय बाजार के नजरिए से देखें तो अमेरिका-भारत व्यापार समझौते की जरूरत उस समय साफ नजर आई, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने यह कहा कि अमेरिका भारत के साथ व्यापार समझौता करने के लिए प्रतिबद्ध है और इस पर बातचीत 13 जनवरी से फिर शुरू होगी। इस बयान के बाद भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली।
उन्होंने आगे कहा कि निकट अवधि में तीसरी तिमाही के नतीजों के दौरान बाजार में समग्र तेजी से ज्यादा अलग-अलग शेयरों में नतीजों के आधार पर उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
व्यापार
मजबूत डॉलर से सोने और चांदी में गिरावट, दाम करीब 0.70 प्रतिशत घटे

सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली और इससे दोनों की कीमती धातुओं का दाम करीब 0.70 प्रतिशत घट गया।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अक्टूबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,54,381 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले गिरावट के साथ 1,53,500 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
सुबह 10:30 बजे यह 828 रुपए या 0.54 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,53,553 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,53,050 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,54,059 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर छुआ है।
चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखी गई।
चांदी का 4 दिसंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोंजिग 2,41,603 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,40,004 रुपए प्रति किलो पर था। खबर लिखे जाने तक यह 1,689 रुपए या 0.70 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,39,914 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,39,893 रुपए प्रति किलो का न्यूनतम स्तर और 2,41,122 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में कमजोरी देखी जा रही थी। कॉमेक्स पर सोना 0.75 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,391 प्रति औंस और चांदी 0.76 प्रतिशत की गिरावट के साथ 66 डॉलर प्रति औंस पर था।
जानकारों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट की वजह डॉलर इंडेक्स में तेजी को माना जा रहा है। यह अभी 100 के ऊपर बना हुआ है, जो कि बीते चार हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर तनाव कम होने की उम्मीद भी कीमती धातुओं में गिरावट की एक वजह है।
डॉलर इंडेक्स, अमेरिकी मुद्रा डॉलर की दुनिया की छह बड़ी मुद्राओं- यूरो, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, कैनेडियन डॉलर, स्वीडिश क्रोना और स्विस फ्रैंक- के मुकाबले स्थिति को दिखाता है।
राष्ट्रीय समाचार
एआई के बढ़ते इस्तेमाल से चीन में युवाओं की नौकरियों पर मंडराया खतरा

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल से काम करने के तौर-तरीके बदल रहे हैं। इससे प्रोडक्टिविटी तो बढ़ रही है, लेकिन नौकरियां जाने का डर भी बढ़ गया है, खासकर युवाओं में।
क्वार्ट्ज की रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे बीजिंग अर्थव्यवस्था के लगभग हर सेक्टर में एआई को शामिल करने की कोशिश कर रहा है, इसका असर सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से लेकर डिलीवरी सर्विस तक हर क्षेत्र में कर्मचारियों पर दिखने लगा है।
इनमें से एक हैं बीजिंग के प्रोग्रामर फेई झाओजुन, जिन्होंने अपनी नौकरी तब गंवा दी जब उनकी कंपनी ने यह देखना शुरू किया कि क्या एआई इंसानों वाले कोडिंग के काम कर सकता है। फेई उन करीब 160 कर्मचारियों में से थे जिनकी कंपनी में छंटनी के दौरान नौकरी चली गई।
उन्होंने कहा कि एआई की क्षमता लगातार बेहतर हो रही है और कई मिड-लेवल प्रोग्रामिंग की नौकरियां अब आसानी से बदली जा सकती हैं। नौकरी जाने के बाद फेई ने टेक इंडस्ट्री से दूरी बना ली है और अब शॉर्ट वीडियो बना रहे हैं, साथ ही अगले करियर के बारे में सोच रहे हैं।
चीन में एआई अपनाने की रफ्तार हैरान करने वाली है। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म आईडीसी के अनुसार, 2024 में 10 प्रतिशत से भी कम चीनी औद्योगिक कंपनियां एआई मॉडल और एजेंट का इस्तेमाल कर रही थीं। पिछले साल यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 50 प्रतिशत हो गया। यह दिखाता है कि कंपनियां कितनी तेजी से खर्च कम करने और काम तेज करने के लिए इस तकनीक को अपना रही हैं।
इस बदलाव का असर रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिख रहा है। लॉजिस्टिक्स में ह्यूमनॉइड रोबोट लगाए जा रहे हैं, जिनमें पार्सल छांटने की सुविधा भी शामिल है, जबकि स्वायत्त मशीनें ट्रैफिक मैनेजमेंट जैसे काम करने लगी हैं। शहरों में फूड डिलीवरी रोबोट भी आम होते जा रहे हैं, जिससे डिलीवरी से जुड़ी सेवाओं में लगे लाखों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ रही है।
लेबर मार्केट पर इसका असर ऐसे समय में हो रहा है, जब चीन के युवाओं के लिए पहले से ही मुश्किलें हैं। देश में शहरी बेरोजगारी दर लगभग 5 प्रतिशत है, लेकिन 16 से 24 साल के उन युवाओं में बेरोजगारी काफी ज्यादा है जो पढ़ाई नहीं कर रहे हैं। यह राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना है। जानकारों का कहना है कि बड़े पैमाने पर ऑटोमेशन से युवाओं के लिए स्थिर नौकरी पाना और भी मुश्किल हो सकता है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि एआई के फायदे तो साफ हैं, लेकिन यह बदलाव बड़े सामाजिक परिणाम ला सकता है। ऑटोमेशन से प्रोडक्टिविटी बढ़ेगी और आर्थिक विकास को मदद मिलेगी, लेकिन अगर नई नौकरियां जल्दी नहीं बनीं तो बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने से बेरोजगारी का दबाव और बढ़ सकता है और सामाजिक अस्थिरता भी पैदा हो सकती है।
व्यापार
एफपीआई की बिकवाली सितंबर में 23,676 करोड़ रुपए रही, कच्चे तेल में तेजी और वैश्विक अस्थिरता ने बढ़ाया दबाव

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) का आउटफ्लो सितंबर में अब तक (1 से 19 सितंबर) 23,676 करोड़ रुपए रहा है, इससे पहले जुलाई और अगस्त में एफपीआई शुद्ध खरीदार थे। यह जानकारी एनालिस्ट्स की ओर से दी गई।
हालांकि, विदेशी निवेशक प्राइमरी बाजार में लगातार खरीदार बने हुए हैं। सितंबर में अब तक, उन्होंने करीब 2,703 करोड़ रुपए का निवेश किया है, जो कि 2026 में एफपीआई द्वारा किया कुल निवेश 48,550 करोड़ रुपए पहुंच गया है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ.वी.के. विजयकुमार ने कहा कि इससे सेकेंडरी मार्केट के सुस्त प्रदर्शन के बावजूद प्राइमरी मार्केट में जारी तेजी की कुछ हद तक वजह समझ में आती है।
पिछले हफ्ते बाजार गिरावट के साथ बंद हुए, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी ने निवेशकों के सेंटीमेंट पर असर डाला।
ऊंची एनर्जी कीमतों से महंगाई पर पड़ने वाले असर और आर्थिक विकास पर इसके नतीजों को लेकर चिंताएं बनी रहीं।
सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत गिरकर 74,294.46 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.22 प्रतिशत गिरकर 23,346.40 पर बंद हुआ।
एनालिस्ट्स का कहना है कि कई हफ्तों तक अच्छा प्रदर्शन करने के बाद, उतार-चढ़ाव भरे हफ्ते के आखिर में मिडकैप और स्मॉलकैप जैसे बड़े इंडेक्स में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
कच्चे तेल की कीमतें और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी बाजार की धारणा को तय करने वाले मुख्य कारक बने रहे। यूएस फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी ने ग्लोबल लिक्विडिटी की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ा दी।
आगे चलकर, एफपीआई फ्लो पर ईरान-यूएस के बीच चल रहे टकराव और उसके कारण कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ने वाले असर का काफी असर पड़ेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और यूएस बॉन्ड यील्ड का ऊंचा स्तर (यूएस 10-वर्षीय यील्ड 5 प्रतिशत पर) भारतीय इक्विटी बाजार और एफपीआई फ्लो के लिए नकारात्मक हैं।
हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और बेहतर कमाई की उम्मीदें सकारात्मक कराक हैं।
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