व्यापार
भारतीय शेयर बाजार लाल निशान में बंद, सेंसेक्स 324 अंक फिसला
मुंबई ,19 जनवरी : भारतीय शेयर बाजार सोमवार के कारोबारी सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 324.17 अंक या 0.39 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,246.18 और निफ्टी 108.85 अंक या 0.42 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 25,585.50 पर था।
बाजार में बिकवाली का नेतृत्व रियल्टी, मीडिया और ऑयल एंड गैस स्टॉक्स ने किया। इस कारण सूचकांकों में निफ्टी रियल्टी 1.99 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 1.84 प्रतिशत, निफ्टी ऑयल एंड गैस 1.56 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.90 प्रतिशत और निफ्टी कमोडिटीज 0.89 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी एफएमसीजी 0.67 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 0.15 प्रतिशत और निफ्टी ऑटो 0.13 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ।
सेंसेक्स पैक में इंडिगो, टेक महिंद्रा, एचयूएल, कोटक महिंद्रा बैंक, मारुति, बजाज फाइनेंस, ट्रेंट, आईटीसी, एचसीएल टेक, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, बीईएल, एलएंडटी और सन फार्म गेनर्स थे।
आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, टाइटन, टीसीएस, अल्ट्राटेक सीमेंट, एनटीपीसी, इन्फोसिस, भारती एयरटेल, एसबीआई और एचडीएफसी बैंक लूजर्स थे।
लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 220.15 अंक या 0.37 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,647.65 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 171.60 अंक या 0.99 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 17,190.70 पर था।
एसबीआई सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स प्रमुख सुदीप शाह ने कहा कि टैरिफ को लेकर चिंताएं फिर से बढ़ने के कारण सोमवार को बाजार की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई। इससे बाजार का सेंटीमेंट भी प्रभावित हुआ है।
उन्होंने आगे कहा कि निफ्टी के लिए 25,500 से लेकर 25,450 का जोन अहम सपोर्ट एरिया है। अगर यह 25,450 के नीचे जाता है तो 25,300 के स्तर भी देखने को मिल सकते हैं। वहीं, तेजी की स्थिति में 25,700 से लेकर 25,730 का स्तर अहम रुकावट का जोन है।
बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 498 अंकों यानी 0.60 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,072 के स्तर पर था। वहीं एनएसई निफ्टी 134 अंक यानी 0.52 प्रतिशत टूटकर 25,560 के स्तर पर था।
व्यापार
मध्य पूर्व में संघर्ष का असर! सेंसेक्स 1,097 अंक टूटकर बंद, बैंकिंग स्टॉक्स में बिकवाली

share market
मुंबई,6 मार्च : मध्य पूर्व में संघर्ष के चलते भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट के साथ बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 1,097 अंक या 1.37 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 78,918.90 और निफ्टी 315.45 अंक या 1.27 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,450.45 पर था।
बाजार में गिरावट बैंकिंग शेयरों की तरफ से आई। निफ्टी बैंक 2.15 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,783.25 पर बंद हुआ। इसके अलावा, निफ्टी रियल्टी 2.09 प्रतिशत, निफ्टी पीएसयू बैंक 2.01 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 1.81 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो 1.06 प्रतिशत, निफ्टी कंजप्शन 1.02 प्रतिशत, निफ्टी इन्फ्रा 0.89 प्रतिशत और निफ्टी मीडिया 0.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।
दूसरी तरफ निफ्टी इंडिया डिफेंस 2.77 प्रतिशत, निफ्टी एनर्जी 0.13 प्रतिशत, निफ्टी पीएसई 0.12 प्रतिशत और निफ्टी आईटी 0.04 प्रतिशत की मजबूती के साथ बंद हुआ।
लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप में कम बिकवाली देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.69 प्रतिशत या 399.20 अंक की कमजोरी के साथ 57,393.35 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 39.90 अंक की गिरावट के साथ 16,498.90 पर था।
सेंसेक्स पैक में बीईएल, सनफार्मा, एनटीपीसी, इन्फोसिस और एचसीएल टेक गेनर्स थे। आईसीआईसीआई बैंक, इटरनल, एक्सिस बैंक, अल्ट्राटेक सीमेंट,एचडीएफसी बैंक, एसबीआई, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, इंडिगो, मारुति सुजुकी, भारती एयरटेल, ट्रेंट, कोटक महिंद्रा बैंक, बजाज फाइनेंस और एचयूएल लूजर्स थे।
बाजार में बड़ी गिरावट के पीछे बड़ा कारण अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध का जारी रहना है। युद्ध के लंबा चलने से अब एनर्जी की आपूर्ति को भी जोखिम पैदा हो गया है, जिससे निवेशकों के सेंटीमेंट पर नकारात्मक प्रभाव हुआ है।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली भी भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बनाने का काम कर रही है। एफआईआई ने गुरुवार को 3,752.52 करोड़ रुपए के इक्विटी की बिकवाली की थी।
युद्ध के चलते कच्चे तेल में भी तेजी जारी है। डब्ल्यूटीआई क्रूड करीब 80 डॉलर प्रति बैरल और ब्रेंट क्रूड का दाम 84 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
व्यापार
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से कंपनियों के मुनाफे पर हो सकता है असर, इनपुट लागत भी बढ़ेगी : रिपोर्ट

oil
नई दिल्ली, 6 मार्च : कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत में कंपनियों के मुनाफे पर असर हो सकता है, क्योंकि इससे कई सेक्टर्स में इनपुट लागत बढ़ जाएगी। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट में कहा गया कि अगर इजरायल-ईरान युद्ध कुछ हफ्तों से ज्यादा समय तक चलता है तो भारत में कॉरपोरेट कंपनियों की आय में गिरावट आ सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से सभी सेक्टर की इनपुट लागत बढ़ेगी।
रिपोर्ट में बताया गया कि ऊंची कच्चे तेल और गैस की कीमतों से अर्थव्यवस्था और बाजारों को भी खतरा है, क्योंकि इससे देश का चालू खाता घाटा बढ़ने की संभावना है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि मध्य पूर्व में तनाव से निवेशकों (विशेषकर विदेशी निवेशकों) का सेंटीमेंट प्रभावित होने शुरू हो गया है।
विदेशी निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में 3,752.52 करोड़ रुपए की बिकवाली की थी। हालांकि, घरेलू निवेशकों का बाजार को सपोर्ट बना हुआ है और इस दौरान उन्होंने 5,153.37 करोड़ रुपए का निवेश इक्विटी में किया।
रिपोर्ट में बताया गया कि भारत, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, वैश्विक ऊर्जा कीमतों में तीव्र वृद्धि के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील है, जिससे तेल संकट मौजूदा परिवेश में देश के लिए सबसे बड़े व्यापक आर्थिक जोखिमों में से एक बन गया है।
ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा कि स्थिर स्थानीय इक्विटी निवेश और भारत की मध्यम अवधि की विकास संभावनाओं जैसे घरेलू कारक बाजारों को समर्थन देना जारी रख सकते हैं, हालांकि निकट भविष्य में भू-राजनीतिक घटनाक्रम एक महत्वपूर्ण निगरानी का विषय बने रहेंगे।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, ” मौजूदा समय में बाजार के लिए प्रमुख नकारात्मक जोखिम मध्य पूर्व में तेल/गैस आपूर्ति में व्यवधान और कीमतों में वृद्धि के साथ मध्य पूर्व संकट का अपेक्षा से अधिक लंबा चलना है।”
राजनीति
महाराष्ट्र में वेतन, पेंशन और ब्याज पेमेंट पर 2025-26 में 3,12,556 करोड़ रुपये खर्च करेगी सरकार

cm
मुंबई, 6 मार्च : वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान पर महाराष्ट्र सरकार 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 3,12,556 करोड़ रुपये खर्च करेगी। जो 6,06,855 करोड़ रुपये के राजस्व खर्च का 50 प्रतिशत से अधिक होगा। अधिकारियों ने गुरुवार को बताया कि राजस्व मिलने का अनुमान 5,60,964 करोड़ रुपये है।
2025-26 के आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, महाराष्ट्र सरकार का वेतन पर खर्च 1,72,760 करोड़ रुपये (कुल राजस्व खर्च का 28.5 प्रतिशत) है। जबकि 2024-25 में यह 1,46,037 करोड़ रुपये (25.9 प्रतिशत) था।
राज्य सरकार पेंशन भुगतान पर 75,137 करोड़ रुपये (12.4 प्रतिशत) का खर्च करेगी। जबकि 2024-25 में यह 60,038 करोड़ रुपये (10.7 प्रतिशत) था।
ब्याज भुगतान पर राज्य सरकार का खर्च 64,659 करोड़ रुपये (10.7 प्रतिशत) होगा। जबकि 2024-25 में यह 54,687 करोड़ रुपये (9.7 प्रतिशत) था।
इसके अलावा, राज्य सरकार को 2024-25 में 60,623 करोड़ रुपये (10.8 प्रतिशत) के मुकाबले 58,528 करोड़ रुपये (9.6 प्रतिशत) खर्च करने होंगे। राज्य सरकार अनुदान सहायता (वेतन के अलावा) पर 1,70,546 करोड़ रुपये (28.1 प्रतिशत) खर्च करेगी। जबकि 2024-25 में यह राशि 1,78,094 करोड़ रुपये (31.6 प्रतिशत) थी।
राज्य सरकार का अन्य मदों पर खर्च 2024-25 में 63,520 करोड़ रुपये (11.3 प्रतिशत) के मुकाबले 65,225 करोड़ रुपये (10.7 प्रतिशत) होगा। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, राजस्व व्यय 2024-25 में 5,62,999 करोड़ रुपये के मुकाबले 6,06,855 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है।
इस बीच, आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर 2019 से मार्च 2025 तक, भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) में राज्य 31 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष स्थान पर बना रहा। 2024-25 के दौरान, राज्य से निर्यात ने भारत के कुल निर्यात में 15 प्रतिशत का योगदान दिया।
चालू वर्ष में, जनवरी 2026 तक राज्य से सॉफ्टवेयर निर्यात 1,74,798 करोड़ रुपये रहा। आईटी और आईटीईएस नीति 2023 के लागू होने के बाद से, दिसंबर 2025 तक, लगभग 18,595 करोड़ रुपये के निवेश से 37 सार्वजनिक आईटी पार्क स्थापित किए गए और लगभग 2.7 लाख रोजगार सृजित किए गए।
10 फरवरी 2026 तक, अखिल भारतीय स्तर पर स्टार्टअप में राज्य की हिस्सेदारी सबसे अधिक (17 प्रतिशत) है। महाराष्ट्र में दिसंबर 2025 तक उद्यम पंजीकरण पोर्टल पर पंजीकृत एमएसएमईज की कुल संख्या 63.85 लाख थी (62.11 लाख सूक्ष्म, 1.55 लाख लघु और 0.18 लाख मध्यम), जिनमें कुल 252.84 लाख रोजगार सृजित थे।
राज्य सरकार ने महाराष्ट्र को एक प्रमुख वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से महाराष्ट्र उद्योग, निवेश और सेवा नीति 2025 की घोषणा की है। जिसका लक्ष्य पर्याप्त निवेश आकर्षित करना, नवाचार को बढ़ावा देना और प्रौद्योगिकी को तेजी से अपनाना है।
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