व्यापार
हरे निशान में खुला भारतीय शेयर बाजार, शुरुआती कारोबार में 261 अंक चढ़ा सेंसेक्स
मुंबई, 26 नवंबर: भारतीय शेयर बाजार बुधवार के कारोबारी दिन हरे निशान में खुला। शुरुआती कारोबार में ऑटो, आईटी, मीडिया, पीएसयू बैंक और फार्मा सेक्टर्स में खरीदारी देखी जा रही थी।
सुबह 9 बजकर 24 मिनट पर सेंसेक्स 261.98 अंक या 0.31 प्रतिशत की तेजी के बाद 84,848.99 स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 84 अंक या 0.32 प्रतिशत की बढ़त के बाद 25,968.80 स्तर पर बना हुआ था।
वहीं, निफ्टी बैंक 205.35 अंक या 0.35 प्रतिशत की बढ़त के साथ 59,025.65 स्तर पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 261 अंक या 0.43 प्रतिशत की बढ़त के बाद 60,559 स्तर पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 107.55 अंक या 0.61 प्रतिशत की तेजी के साथ 17,837.85 स्तर पर था।
एलकेपी सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक दे ने निफ्टी को लेकर कहा, “इंडेक्स में बिकवाली देखी गई क्योंकि निफ्टी 26,000 के आसपास का प्रेशर नहीं ले पाया, जिससे यह 25,850 स्तर की ओर गिर गया। घंटे के टाइमफ्रेम पर, इंडेक्स दो बैक-टू-बैक कंसोलिडेशन ब्रेकडाउन के बाद बेयरिश जोन में चला गया है। इसके अलावा, डेली टाइमफ्रेम पर बेयरिश डाइवर्जेंस के साथ-साथ बेयरिश क्रॉसओवर भी दिख रहा है। सेंटीमेंट कमजोर बना रह सकता है, जिससे इंडेक्स के 25,700 की ओर गिरने की संभावना है। ऊपरी लेवल पर, रेजिस्टेंस 26,000 पर बना रहेगा।”
बाजार के जानकारों ने कहा, “कभी-कभी मार्केट बिना किसी क्लियर लॉजिक और वजह के ऊपर-नीचे होता है। बहुत कम समय का मूवमेंट नए फंडामेंटल्स के खिलाफ हो सकता है। इस अनिश्चित मूवमेंट का कारण फ्यूचर्स एक्सपायरी डेट से जुड़ी टेक्निकल और मार्केट पोजिशनिंग में मिल सकता है।”
उन्होंने आगे कहा, “रिटेल इन्वेस्टर्स के लिए सबसे अच्छी स्ट्रेटेजी ट्रेडिंग से बचना होगा। धीरे-धीरे फेयर-वैल्यू वाले हाई क्वालिटी ग्रोथ स्टॉक जमा करें जो ज्यादा वोलैटिलिटी के कारण आकर्षक वैल्यूएशन पर मिलेंगे। ऐसे स्टॉक जल्द ही वापस आ जाएंगे।”
इस बीच सेंसेक्स पैक में टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, मारुति सुजुकी, अदाणी पोर्ट्स, एचसीएल टेक, टाटा स्टील, इंफोसिस और एक्सिस बैंक टॉप गेनर्स थे। वहीं, भारती एयरटेल, बीईएल और एचडीएफसी बैंक टॉप लूजर्स थे।
एशियाई बाजारों में जकार्ता, जापान, सोल और चीन सभी हरे निशान में कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी बाजार आखिरी कारोबारी दिन हरे निशान में बंद हुए। डाउ जोंस 1.43 प्रतिशत या 664.18 अंक की तेजी के बाद 47,112.45 पर बंद हुआ। वहीं, एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.91 प्रतिशत या 60.76 अंक की बढ़त के बाद 6,765.88 स्तर और नैस्डेक 0.67 प्रतिशत या 153.59 अंक की तेजी के बाद 23,025.59 पर बंद हुआ।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) 25 नवंबर को शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 785.32 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) भी इस कारोबारी दिन शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 3,912.47 करोड़ रुपए के शेयरों की खरीदारी की।
राष्ट्रीय समाचार
केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने बढ़ाया अदाणी पोर्ट्स का ईएसजी स्कोर, पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में फिर साबित की मजबूत स्थिति

पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन (ईएसजी) के क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति को और मजबूत करते हुए अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईज़ेड) को केयरएज ईएसजी रेटिंग्स ने 84.3 का ईएसजी स्कोर दिया है।
यह स्कोर बताता है कि ईएसजी से जुड़े जोखिमों के प्रबंधन, पारदर्शी खुलासों, मजबूत नीतियों और बेहतर प्रदर्शन के मामले में अदाणी पोर्ट्स “लीडरशिप” स्थिति में है। वहीं कंपनी के पिछले 81 अंकों के मुकाबले इस बार उसका स्कोर 3.3 अंक बढ़ा है।
कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के अनुसार, यह रेटिंग केयरएज ईएसजी रेटिंग्स की वार्षिक समीक्षा के बाद दी गई है, जिसमें वित्त वर्ष 2025-26 की इंटीग्रेटेड एनुअल रिपोर्ट में किए गए नए खुलासों को भी शामिल किया गया है।
कंपनी के अनुसार, यह रेटिंग बढ़ोतरी ईएसजी प्रदर्शन और पारदर्शिता में लगातार हुए सुधार को दर्शाती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण के क्षेत्र में उत्सर्जन, ऊर्जा, पानी और कचरे की तीव्रता में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा के अधिक उपयोग और पूरी वैल्यू चेन में पर्यावरण संबंधी पहलुओं को शामिल करने जैसे कदमों ने कंपनी के प्रदर्शन को बेहतर बनाया है।
सामाजिक क्षेत्र में सुरक्षा प्रशिक्षण का दायरा बढ़ाने, शिकायत निवारण प्रणाली को मजबूत करने, विविधता, समान वेतन और कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने जैसे प्रयासों का भी सकारात्मक असर देखने को मिला।
कंपनी ने बताया कि बोर्ड स्तर पर ईएसजी की निगरानी, व्यापक गवर्नेंस प्रशिक्षण कार्यक्रम और वैल्यू चेन से जुड़े साझेदारों के साथ बेहतर समन्वय जैसी पहल ने उसके कॉरपोरेट गवर्नेंस ढांचे को और मजबूत किया है।
कंपनी ने कहा, “यह रेटिंग इस बात की पुष्टि करती है कि पोर्ट्स और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में अदाणी पोर्ट्स ईएसजी के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों में शामिल है। यह पर्यावरण, सामाजिक और सुशासन से जुड़े सभी पहलुओं में सर्वोत्तम प्रक्रियाओं, पारदर्शिता और लगातार सुधार के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।”
इसी सप्ताह एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने भी अदाणी पोर्ट्स की लंबी अवधि की इश्यूअर क्रेडिट रेटिंग और सीनियर अनसिक्योर्ड नोट्स की रेटिंग को “बीबीबी-” से बढ़ाकर “बीबीबी” कर दिया था। साथ ही कंपनी के लिए “स्टेबल” आउटलुक भी बरकरार रखा था।
एसएंडपी ने यह अपग्रेड कंपनी की मजबूत नकदी प्रवाह क्षमता और स्वस्थ वित्तीय स्थिति बनाए रखते हुए बड़े विस्तार कार्यक्रम को पूरा करने की क्षमता को देखते हुए दिया है।
इस अपग्रेड के बाद एसएंडपी की ओर से अदाणी पोर्ट्स की रेटिंग भारत की सॉवरेन रेटिंग के बराबर पहुंच गई है।
राष्ट्रीय समाचार
अदाणी ग्रुप का 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा और 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करना है लक्ष्य: सागर अदाणी

अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) के कार्यकारी निदेशक सागर अदाणी ने कहा है कि अदाणी ग्रुप दुनिया के सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो में से एक तैयार कर रहा है। इसके लिए समूह ने वर्ष 2030 तक 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता और 2035 तक 10 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा है।
लंदन क्लाइमेट एक्शन वीक के दौरान लंदन के साइंस म्यूजियम में अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (एजीईएल) और एनर्जी ट्रांजिशन्स कमीशन (ईटीसी) की साझेदारी में आयोजित पहले अदाणी ग्रीन एनर्जी डायलॉग में बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम पंप्ड हाइड्रो और यूटिलिटी-स्केल बैटरी सहित बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं में निवेश कर रहे हैं। साथ ही देश भर में कुशलतापूर्वक बिजली वितरण के लिए ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं और हरित हाइड्रोजन इकोसिस्टम विकसित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, “हम यह सब ऐसे पैमाने और गति से कर रहे हैं, जैसा दुनिया ने शायद ही कभी देखा हो। क्योंकि छोटे-छोटे बदलाव अब पर्याप्त नहीं होंगे।”
सागर अदाणी ने कहा कि पिछले तीन महीनों की घटनाओं ने दुनिया के हर देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है।
उन्होंने कहा कि आज विकसित और विकासशील दोनों देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक संकटों से सुरक्षित रखने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, विकासशील देशों में करोड़ों लोग मध्यम वर्ग में शामिल हो रहे हैं और बेहतर जीवन के लिए उनकी ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना एक बुनियादी आवश्यकता बन गया है।
सागर अदाणी ने कहा कि लगातार बढ़ रहे वैश्विक तनावों ने ऊर्जा की जरूरत को अब अस्तित्व की लड़ाई बना दिया है।
उन्होंने कहा, “ऊर्जा सुरक्षा, ऊर्जा की किफायती उपलब्धता और टिकाऊ ऊर्जा – यही आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है।”
उन्होंने कहा कि भारत में विद्युतीकरण की जरूरत सबसे अधिक है और यह सबसे चुनौतीपूर्ण भी है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में भारत ने कोयला, तेल, गैस, परमाणु ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा सहित सभी स्रोतों से मिलाकर करीब 10,000 टेरावाट-घंटे ऊर्जा की खपत की।
सागर अदाणी ने कहा कि भारत की चुनौती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अगले दो दशकों में देश को लगभग 2,000 गीगावाट नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़नी होगी।
उन्होंने कहा कि यह क्षमता ऐसी होनी चाहिए जो सस्ती, सभी तक पहुंचने वाली और अधिक से अधिक स्वच्छ ऊर्जा पर आधारित हो। यही भारत के सामने सबसे बड़ा अवसर और सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने कहा कि भारत के लिए आगे का रास्ता पूरी तरह स्पष्ट है। भारत को हर क्षेत्र में तेजी से विद्युतीकरण करना होगा, ताकि आयातित ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सके। देश को ऐसी ऊर्जा व्यवस्था तैयार करनी होगी, जो घरेलू संसाधनों पर आधारित हो।
उन्होंने कहा कि इसके लिए व्यावहारिक सोच अपनानी होगी और नवीकरणीय ऊर्जा, जलविद्युत, आधुनिक तापीय ऊर्जा तथा परमाणु ऊर्जा जैसे सभी उपलब्ध स्रोतों का उपयोग करना होगा।
सागर अदाणी ने कहा, “मजबूत और बड़े पैमाने पर उपलब्ध बेसलोड बिजली के बिना यह लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं है।”
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत सरकार के नेतृत्व ने अनावश्यक नियमों और लालफीताशाही को कम करने, सार्वजनिक उपक्रमों को मजबूत करने और निजी निवेश को प्रोत्साहित करने का महत्वपूर्ण काम किया है।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार की कई बड़ी और छोटी नीतिगत पहलों ने ऐसा माहौल तैयार किया है, जहां उद्योग तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। बुनियादी ढांचे का विकास, नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार, ट्रांसमिशन नेटवर्क को मजबूत करना और दीर्घकालिक निवेश को बढ़ावा देना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम रहे हैं।
सागर अदाणी ने कहा, “सरकार की नीतियों में स्पष्टता और निरंतरता ने भारत की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक मजबूत और लचीला बनाने में अहम भूमिका निभाई है।”
व्यापार
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से बाजार को मिला सपोर्ट, निफ्टी और सेंसेक्स ने लगातार तीसरे सप्ताह दर्ज की बढ़त

कच्चे तेल की कीमतों में ईरान-युद्ध से पहले के स्तर तक आई तेज गिरावट और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में यातायात सामान्य होने से भारतीय शेयर बाजार ने लगातार तीसरे सप्ताह भी बढ़त दर्ज की।
साप्ताहिक कारोबार के दौरान निफ्टी में 0.18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जबकि आखिरी कारोबारी दिन यह 0.14 प्रतिशत बढ़कर 24,056 पर बंद हुआ। वहीं सेंसेक्स 109 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,100 पर बंद हुआ। पूरे सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 0.39 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
घरेलू शेयर बाजार ने इस सप्ताह कई मिले-जुले संकेतों के बावजूद मजबूती दिखाई। हालांकि, व्यापक बाजार में खासकर मिडकैप शेयरों पर हल्का बिकवाली का दबाव देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ने से भू-राजनीतिक तनाव कम हुआ। साथ ही भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बढ़ी उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।
हालांकि, असमान मानसून वितरण को लेकर चिंताएं बढ़ने से महंगाई बढ़ने और ग्रामीण मांग पर असर पड़ने की आशंकाएं भी सामने आने लगी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी निकट भविष्य में भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे महंगाई, राजकोषीय घाटे और चालू खाते की स्थिति में सुधार होगा, जिससे भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) मौद्रिक नीति को लेकर अधिक लचीलापन रहेगा।
साप्ताहिक कारोबार में फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर के शेयरों ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं निजी बैंकों के शेयरों में भी तेजी रही, जिसका कारण एफसीएनआर (बी) जमा स्वैप योजना को लेकर आरबीआई की ओर से दी गई स्पष्टता रही।
दूसरी ओर, कमोडिटी कीमतों में गिरावट के कारण मेटल सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। वहीं उपभोक्ता मांग को लेकर चिंताओं के चलते कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।
जहां प्रमुख सूचकांकों ने बढ़त दर्ज की, वहीं व्यापक बाजार में भिन्नता देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप-100 सूचकांक सप्ताह के दौरान 1.15 प्रतिशत गिर गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप-100 में केवल 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई।
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, निकट भविष्य में निफ्टी के लिए 24,400 और 24,500 का स्तर प्रमुख प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेगा, जबकि 23,900 और 23,800 का स्तर मजबूत समर्थन (सपोर्ट) माना जा रहा है।
बैंक निफ्टी के लिए 57,500-57,400 का स्तर प्रमुख सपोर्ट और 58,900-59,000 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस माना जा रहा है।
आने वाले हफ्तों में कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। निवेशकों की नजर कंपनियों की मांग, मुनाफे के मार्जिन और ऑर्डर बुक को लेकर प्रबंधन की टिप्पणियों पर रहेगी।
एक बाजार विशेषज्ञ ने कहा कि निवेशकों को फिलहाल संतुलित लेकिन सकारात्मक रणनीति अपनानी चाहिए और उन मजबूत कंपनियों में निवेश के अवसर तलाशने चाहिए, जिनके शेयर हाल की गिरावट के बावजूद बुनियादी रूप से मजबूत बने हुए हैं।
निवेशकों की निगाह अमेरिका के पीसीई (पर्सनल कंजम्प्शन एक्सपेंडिचर) महंगाई आंकड़ों पर रहेगी, जो वैश्विक बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होंगे। इसके अलावा, नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी दर के आंकड़े भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को प्रभावित कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, घरेलू स्तर पर औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के आंकड़े और जून महीने के पीएमआई (परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स) निवेशकों को पहली तिमाही के नतीजों से पहले अर्थव्यवस्था की स्थिति का शुरुआती संकेत देंगे।
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