व्यापार
सपाट खुला भारतीय शेयर बाजार, निफ्टी 25,750 स्तर से नीचे कर रहा कारोबार
मुंबई, 4 नवंबर: भारतीय शेयर बाजार दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को सपाट खुला। शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक सेक्टर्स में बिकवाली देखी जा रही थी। वहीं, फार्मा, रियल्टी और मीडिया सेक्टर में खरीदारी दर्ज की गई।
सुबह करीब 9 बजकर 34 मिनट पर सेंसेक्स 162.84 अंक या 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,815.65 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 58.40 अंक या 0.23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 25,704.95 स्तर पर बना हुआ था।
सत्र की शुरुआत में निफ्टी बैंक 211.15 अंक या 0.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57,890.30 स्तर पर बना हुआ था। वहीं, निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 23.35 अंक या 0.04 प्रतिशत की गिरावट के बाद 60,264.05 पर कारोबार कर रहा था। दूसरी ओर, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 49.05 अंक या 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 18,464.35 स्तर पर था।
चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग की टेक्निकल एंड डेरिवेटिव एनालिस्ट अमृता शिंदे ने कहा कि पिछले सत्र में निफ्टी 50 ने मजबूती का प्रदर्शन किया था। इंडेक्स ने सपाट शुरुआत की लेकिन पूरे सत्र में ऊपर की ओर रुझान बनाए रखा, जो निचले स्तरों पर लगातार खरीदारी की रुचि का संकेत देता है।
उन्होंने आगे कहा, “आज के लिए, तत्काल रेजिस्टेंस 25,850 पर इसके बाद 25,900 और फिर 26,000 स्तर पर रहेग। नीचे की ओर, सपोर्ट लेवल 25,650 और 25,600 पर दिखाई दे रहे हैं, जो पोजिशनल ट्रेडर्स के लिए संभावित अक्यूमलेशन ज़ोन के रूप में काम कर सकते हैं।”
इस बीच सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, टाइटन, कोटक महिंद्रा बैंक, अदाणी पोर्ट्स टॉप गेनर्स थे। वहीं, पावरग्रिड, मारुति सुजुकी, इटरनल और इंफोसिस टॉप लूजर्स थे।
एशियाई बाजारों में जकार्ता और हांग कांग हरे निशान में कारोबार कर रहे थे, जबकि जापान, चीन और सोल लाल निशान में बने हुए थे।
अमेरिकी बाजारों की बात करें तो आखिरी कारोबारी दिन डाउ जोंस 0.48 प्रतिशत या 226.19 अंक की गिरावट के बाद 47,336.68 पर बंद हुआ। वहीं, एसएंडपी 500 इंडेक्स 0.17 प्रतिशत या 11.77 अंक की तेजी के बाद 6,851.97 स्तर और नैस्डेक 0.46 प्रतिशत या 109.77 अंक की तेजी के बाद 23,834.72 पर बंद हुआ।
विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) 3 नवंबर को शुद्ध विक्रेता रहे और उन्होंने 1883.78 करोड़ रुपए के भारतीय शेयर बेचे। दूसरी ओर, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) इसी कारोबारी दिन शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 3,516.36 करोड़ रुपए के शेयरों की खरीदारी की।
राष्ट्रीय समाचार
भारतीय रेलवे ने नांदेड़ डिवीजन में 163 करोड़ रुपए की इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन अपग्रेड परियोजना को दी मंजूरी

भारतीय रेलवे ने रेलवे बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और नेटवर्क क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए दक्षिण मध्य रेलवे के नांदेड़ डिवीजन के परभणी-मुदखेड़ डबल लाइन सेक्शन में इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम के उन्नयन (अपग्रेडेशन) को मंजूरी दे दी है। रेल मंत्रालय ने मंगलवार को जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी।
रेल मंत्रालय के अनुसार, 163 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना के तहत मौजूदा 1×25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन सिस्टम को अधिक उन्नत 2×25 केवी सिस्टम में बदला जाएगा। यह कार्य 164 ट्रैक किलोमीटर के दायरे में किया जाएगा।
इसके साथ ही बढ़ते विद्युत भार को संभालने के लिए बिजली आपूर्ति (पावर सप्लाई) से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी आधुनिक बनाया जाएगा।
परभणी-मुदखेड़ रेलखंड रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हाईली यूटिलाइज्ड नेटवर्क (एचयूएन) रूट-9 का हिस्सा है, जो अजमेर, इंदौर, खंडवा, अकोला, पूर्णा, मुदखेड़, सिकंदराबाद, महबूबनगर और धोन को जोड़ता है। यह मार्ग यात्री और मालगाड़ियों, दोनों के लिए बेहद अहम माना जाता है।
रेल मंत्रालय ने बताया कि नए ट्रैक्शन सिस्टम से ट्रेनों के संचालन के लिए बिजली आपूर्ति और अधिक मजबूत होगी, जिससे इस सेक्शन पर अधिक माल ढुलाई (फ्रेट) की क्षमता विकसित होगी और वंदे भारत एक्सप्रेस जैसी तेज गति वाली ट्रेनों के संचालन को भी बेहतर समर्थन मिलेगा। यह परियोजना भारतीय रेलवे के 2029-30 तक 3,000 मिलियन टन माल ढुलाई के लक्ष्य को हासिल करने में भी मददगार साबित होगी।
मंत्रालय के अनुसार, यह परियोजना देश के व्यस्त रेल मार्गों पर विद्युत बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण और परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे की व्यापक योजना का हिस्सा है।
इस महीने की शुरुआत में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया था कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा विद्युतीकृत रेलवे नेटवर्क वाला देश बनकर उभरा है। देश के ब्रॉड गेज रेल नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत हिस्सा विद्युतीकृत हो चुका है। इस मामले में भारत केवल स्विट्जरलैंड (100 प्रतिशत) से पीछे है, हालांकि स्विट्जरलैंड का रेल नेटवर्क भारत की तुलना में काफी छोटा है।
रेल मंत्री ने बताया था कि रेलवे विद्युतीकरण के मामले में भारत चीन (82 प्रतिशत), स्पेन (67 प्रतिशत), जापान (64 प्रतिशत), फ्रांस (60 प्रतिशत) और यूनाइटेड किंगडम (39 प्रतिशत) जैसे देशों से आगे निकल चुका है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे ने दुनिया के सबसे तेज रेलवे विद्युतीकरण अभियानों में से एक को मिशन मोड में पूरा किया है। 2014 से 2026 के बीच 48,072 रूट किलोमीटर रेल मार्ग का विद्युतीकरण किया गया, जबकि इससे पहले के लगभग 60 वर्षों में केवल 21,801 रूट किलोमीटर रेल लाइन का ही विद्युतीकरण हो पाया था।
व्यापार
सोना और चांदी गिरावट के साथ खुले, 1.80 प्रतिशत तक कम हुआ दाम

सोने एवं चांदी की शुरुआत मंगलवार को गिरावट के साथ हुई और दोनों कीमती धातुओं का दाम 1.80 प्रतिशत तक लुढ़क गया है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का 5 अगस्त, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोंजिग 1,43,063 रुपए प्रति 10 ग्राम के मुकाबले 1,42,353 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।
सुबह 10 बजे यह 1,129 रुपए या 0.79 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 1,41,934 रुपए प्रति 10 ग्राम पर था।
अब तक के कारोबार में सोने ने 1,41,808 रुपए प्रति 10 ग्राम का न्यूनतम स्तर और 1,42,353 रुपए प्रति 10 ग्राम का उच्चतम स्तर हुआ है।
चांदी में भी कमजोरी देखी जा रही है। चांदी का 4 सितंबर, 2026 का कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,21,173 रुपए प्रति किलो के मुकाबले 2,20,555 रुपए प्रति किलो पर खुला।
फिलहाल यह 3,940 रुपए या 1.78 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 2,17,233 रुपए प्रति किलो पर था।
अब तक के कारोबार में चांदी ने 2,16,592 रुपए प्रति किलो और 2,20,555 रुपए प्रति किलो का उच्चतम स्तर छुआ है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सोने और चांदी में गिरावट देखी जा रही है। कॉमेक्स पर सोना 0.76 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 4,045 डॉलर प्रति औंस और चांदी 2.06 प्रतिशत की गिरावट के साथ 57.53 डॉलर प्रति औंस थी।
जानकारों के मुताबिक, अमेरिका में फेड की बैठक मंगलवार को शुरू होगी और इसके फैसले का ऐलान बुधवार को किया जाएगा। इससे पहले निवेश सतर्क बने हुए हैं। वहीं, अमेरिका-ईरान के बीच हमले रुकने से वैश्विक अस्थिरता में कमी आई है, जिससे दोनों कीमती धातुओं में गिरावट को सहारा मिला है।
उन्होंने आगे कहा कि जून के महंगाई और रोजगार के आंकड़ों ने इस बात को मजबूत किया है कि फेडरल रिजर्व अपनी जुलाई की बैठक में दरों को बिना बदले रखे, भले ही तेल की कीमतों में फिर से हुई बढ़ोतरी से कीमतों के बढ़ने का दबाव दोबारा पैदा होने का खतरा हो।
राष्ट्रीय समाचार
एआई निवेश से ग्लोबल आईटी खर्च 6.37 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद : रिपोर्ट

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और इंटेलिजेंट एप्लिकेशन में तेजी से बढ़ते निवेश के चलते वर्ष 2026 में वैश्विक सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) खर्च बढ़कर 6.37 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। यह 2025 की तुलना में 14.2 प्रतिशत अधिक होगा। यह जानकारी सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
गार्टनर की रिपोर्ट के अनुसार, डेटा सेंटर सिस्टम और इन्फ्रास्ट्रक्चर ऐज ए सर्विस (आईएएएस) पर खर्च सबसे तेज गति से बढ़ेगा, क्योंकि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की मांग लगातार बढ़ रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, डेटा सेंटर सिस्टम पर खर्च 2025 के 506 अरब डॉलर से बढ़कर 2026 में 822 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि 62.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दिखाता है।
वहीं, आईएएएस पर खर्च 29.3 प्रतिशत बढ़कर 287 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जबकि सॉफ्टवेयर पर खर्च 15.5 प्रतिशत बढ़कर 1.47 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है।
इसके अलावा, डिवाइस पर खर्च लगभग 10 प्रतिशत बढ़कर 868 अरब डॉलर, आईटी सेवाओं पर खर्च करीब 5 प्रतिशत बढ़कर 1.57 ट्रिलियन डॉलर और कम्युनिकेशन सेवाओं पर खर्च 4.4 प्रतिशत बढ़कर 1.35 ट्रिलियन डॉलर रहने का अनुमान है।
गार्टनर के वीपी एनालिस्ट जॉन-डेविड लवलॉक ने कहा, “एआई के लिए आवश्यक कंप्यूट क्षमता तैयार करना मानव इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना है। एआई वर्कलोड और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग के चलते हाइपरस्केलर कंपनियां और बड़े उद्यम अगली पीढ़ी के डेटा सेंटरों की क्षमता का तेजी से विस्तार कर रहे हैं।”
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि तकनीकी बजट अभी भी महंगाई, सेमीकंडक्टर और मेमोरी की आपूर्ति संबंधी बाधाओं, हार्डवेयर लागत में बढ़ोतरी और उद्यमों की बदलती प्राथमिकताओं के कारण दबाव में हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ताजा अनुमान यह दर्शाता है कि एआई के नेतृत्व में बाजार के विस्तार को लेकर भरोसा बढ़ा है। अतिरिक्त आईटी खर्च का बड़ा हिस्सा अब एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लाउड सेवाओं और सॉफ्टवेयर पर केंद्रित होगा, जबकि पारंपरिक तकनीकी क्षेत्रों में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि देखने को मिलेगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कंपनियां एंटरप्राइज एआई को बड़े पैमाने पर लागू करने के लिए एआई-अनुकूलित सर्वर, क्लाउड प्लेटफॉर्म और एआई-रेडी सॉफ्टवेयर में तेजी से निवेश कर रही हैं। इसके चलते एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर वैश्विक आईटी खर्च के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र बन गए हैं।
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