राष्ट्रीय
वित्त वर्ष 2022 में भारत दो अंकों की वृद्धि की ओर अग्रसर
देश के व्यापार योग्य क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन और इस साल महामारी संबंधी व्यवधानों के कारण सेवाओं की गतिविधि में अपेक्षा से बहुत कम गिरावट के कारण वित्त वर्ष 2022 के लिए भारत की जीडीपी विकास दर दोहरे अंकों में रहने की संभावना है। ये सूचना बार्कलेज की रिपोर्ट के मुताबिक सामने आई है।
बार्कलेज के प्रमुख भारत के अर्थशास्त्री राहुल बाजोरिया द्वारा लिखी गई रिपोर्ट ने अपने वित्त वर्ष 2021- 22 के सकल घरेलू उत्पाद के 9.2 प्रतिशत के अनुमान के ऊपर जोखिम का अनुमान लगाया है और कहा है कि अगर इसके सभी पूवानुमानों को साकार किया जाता है, तो चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दोहरे अंकों के करीब हो सकती है।
भारत के वित्त वर्ष 2022 के सकल घरेलू उत्पाद पर बैंकर का अनुमान आरबीआई के करीब है, जिसने वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद का अनुमान 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा था।
बाजोरिया ने लिखा, “भारत की दूसरी कोविड-19 लहर ने मजबूत रिकवरी के लिए एक ठोकर के रूप में काम किया। फिर भी, आर्थिक क्षति पहले की अपेक्षा कम लगती है। दूसरे प्रकोप को नियंत्रण में लाने के साथ तेजी से रिकवरी चल रही है।”
इस आकलन के आधार पर, बार्कलेज ने अनुमान लगाया है कि भारत की अर्थव्यवस्था में 21 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून, या वित्तीय वर्ष 2021-22 की पहली तिमाही) में 21.2 प्रतिशत वाई/वाई का विस्तार हुआ है, जो कि कम आधार और दूसरे के कारण गतिविधि के बहुत कम नुकसान के रूप में है। कोविड लहर ने एक तिमाही के लिए विकास को सर्वकालिक उच्च स्तर पर धकेल दिया।
देश का अप्रैल-जून जीडीपी डेटा, 31 अगस्त को जारी होने वाला, दो विपरीत विषयों का टकराव दिखाएगा, बार्कलेज ने कहा कि हालांकि कोविड के प्रकोप के कारण क्रमिक गति धीमी हो गई। भारत के व्यापार क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन और बहुत छोटी सेवाओं की गतिविधि में अपेक्षित गिरावट से पहले की अपेक्षा बहुत तेजी से सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि का समर्थन करना चाहिए।
“विवरणों को देखते हुए, हमारा मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र में वाई/वाई विकास क्यू2 में मामूली रूप से धीमा होने की संभावना है, क्योंकि दूसरी लहर ग्रामीण इलाकों में गहराई तक फैली हुई है। इस तरह, ग्रामीण खपत ने तिमाही के दौरान धीमा होने के स्पष्ट संकेत दिखाए, साथ में रिपोर्ट में कहा गया है कि उर्वरक और दोपहिया वाहनों की कमजोर बिक्री और तिमाही के दौरान ग्रामीण बेरोजगारी दर में वृद्धि है। दूसरी ओर, हम खनन क्षेत्र में उत्पादन में मामूली सुधार की उम्मीद करते हैं।”
“विनिर्माण और निर्माण क्षेत्रों में रिकवरी का नेतृत्व करने की संभावना है, क्योंकि स्टील और सीमेंट की खपत मजबूत बनी हुई है, जो उच्च सरकारी खर्च और निर्यात मांग दोनों से प्रेरित है। विशेष रूप से व्यवसायों के लिए आंदोलन पर प्रतिबंधों में ढील ने निर्यात को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया है, जबकि कमजोर घरेलू मांग ने आयात को प्रभावित किया है।”
बाजोरिया ने कहा कि सरकारी व्यय कुल राजस्व संग्रह से कम हो गया है, लेकिन यह गतिविधि पर बहुत अधिक भार नहीं डालेगा। इसके अलावा, सेवाओं के भीतर, निम्न वर्ष-पूर्व आधार गति के क्रमिक नुकसान की भरपाई करने की संभावना है, क्योंकि सार्वजनिक परिवहन सेवाओं, ईंधन की मांग और वित्तीय सेवाओं ने छोटे लेकिन तीव्र दूसरे कोविड प्रकोप के दौरान गतिविधि के क्षरण के कुछ नुकसान का अनुभव किया। बार्कलेज ने कहा कि फिर भी, ये क्षेत्र तेजी से वापसी कर रहे हैं और तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि को और अधिक सार्थक रूप से जोड़ना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है कि निरंतर व्यापक सरकारी व्यय के बावजूद, हम उम्मीद करते हैं कि सार्वजनिक प्रशासन क्षेत्र में उत्पादन वाई/वाई अनुबंधित होगा, क्योंकि खर्च का एक बड़ा हिस्सा हस्तांतरण भुगतान है, जो जीडीपी में योगदान नहीं करेगा।
राजनीति
असम के आदर्श विद्यालयों से बच्चों को मिल रहा ‘बेस्ट’ जैसा माहौल : हिमंता बिस्वा सरमा

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा कि उनकी सरकार ने आदर्श विद्यालय पहल के जरिए राज्य में सरकारी स्कूलों की पूरी सोच ही बदल दी है। इन स्कूलों में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं दी जा रही हैं, ताकि छात्रों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं, बल्कि इन्हें एक पूरे शैक्षिक इकोसिस्टम के रूप में विकसित किया गया है, जहां छात्रों को बड़े और नामी स्कूलों जैसी सुविधाएं मिल सकें।
उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, “हमने असम में सरकारी स्कूल का मतलब ही बदल दिया है। आदर्श विद्यालय सिर्फ नई इमारतें नहीं हैं।”
मुख्यमंत्री ने इन स्कूलों में बनाई जा रही सुविधाओं के बारे में भी बताया। इनमें स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी और खेल के मैदान शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “स्मार्ट क्लासरूम, साइंस और कंप्यूटर लैब, लाइब्रेरी, खेल के मैदान, एक ऐसा इकोसिस्टम जहां किसी भी ब्लॉक का बच्चा बेस्ट स्कूलों के बच्चों के साथ मुकाबला कर सके।”
उनके मुताबिक इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे चाहे किसी भी ब्लॉक या इलाके से आते हों, उन्हें देश के बेहतरीन शिक्षण संस्थानों के छात्रों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिले।
आदर्श विद्यालय कार्यक्रम असम सरकार की सरकारी स्कूल शिक्षा को मजबूत करने की कोशिशों में से एक है। इसके तहत बुनियादी ढांचे में सुधार और छात्रों के लिए बेहतर शैक्षणिक माहौल बनाया जा रहा है, खासकर ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में।
इस पहल के तहत मॉडल स्कूल बनाए जा रहे हैं जो आधुनिक पढ़ाई-लिखाई की सुविधाओं से लैस हैं। सिर्फ बिल्डिंग ही नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार किया जा रहा है जो बच्चों के शैक्षणिक विकास, एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी और उनके एक्सपोजर को बढ़ावा दे।
सरकार राज्य के जिलों में आदर्श विद्यालयों का नेटवर्क लगातार बढ़ा रही है, ताकि स्कूल शिक्षा के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा सके और सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच मिल सके।
यह पहल असम में सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाने और राज्य के अलग-अलग हिस्सों के छात्रों के बीच शिक्षा के अवसरों में जो असमानता है, उसे कम करने के लिहाज से भी अहम है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि फोकस इस बात पर है कि सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी बेहतर संसाधनों वाले संस्थानों के छात्रों के बराबर खड़ा होकर मुकाबला करने की सोच सके।
मुख्यमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब असम सरकार राज्य भर में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार और आधुनिकीकरण कर रही है। आदर्श विद्यालय मॉडल का मकसद सरकारी स्कूलों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के साथ छात्रों और अभिभावकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना है।
सरकार अपनी बड़ी शिक्षा सुधार योजना के तहत स्कूलों में लैब, डिजिटल लर्निंग और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है। आदर्श विद्यालय पहल के जरिए सरकार सरकारी स्कूलों को सिर्फ बुनियादी शिक्षा देने वाले संस्थान के बजाय एक आधुनिक लर्निंग स्पेस के रूप में स्थापित करना चाहती है, जो छात्रों को आगे की पढ़ाई और प्रतिस्पर्धी अवसरों के लिए तैयार कर सके।
राष्ट्रीय
सुप्रीम कोर्ट में अभिषेक बनर्जी के पीए की जमानत याचिका पर सुनवाई, राज्य सरकार ने किया विरोध

सालबोनी जमीन मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (पीए) सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ की मांग की है।
सरकार का कहना है कि जांच के दौरान सुमित रॉय से जुड़े खातों में करीब 15 करोड़ नकद जमा होने की जानकारी सामने आई है। अब जांच टीम यह पता करना चाहती है कि यह पैसा कहां से आया और इसका जमीन के मामले से कोई संबंध है या नहीं।
सुमित रॉय की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पर गुरुवार को भी सुनवाई जारी रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुमित रॉय से पूछताछ के दौरान बैंक खातों में जमा बड़ी रकम के बारे में सवाल किए गए थे। सरकार के मुताबिक, बैंक रिकॉर्ड और पेन से यह रकम सुमित रॉय से जुड़ी होने की बात सामने आई है।
सरकार ने यह भी बताया कि 17 जून 2021 को करीब 71 लाख जमा किए गए थे। यह वही समय था जब जमीन से जुड़े कथित लेन-देन की जांच चल रही थी। सरकार का कहना है कि इन पैसों के बारे में पूरी जानकारी लेने के लिए सुमित रॉय से हिरासत में पूछताछ जरूरी है।
सुमित रॉय की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण ने सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि इन पैसों को लेकर पहले ही सफाई दी जा चुकी है। उनके मुताबिक, यह रकम पार्टी की सदस्यता फीस और चंदे से जुड़ी थी। वकील ने कहा कि सुमित रॉय का काम ही पार्टी से मिलने वाली रकम को जमा करना और उसके चालान को जमा करना था।
राजनीति
राहुल गांधी पर मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट का जल्द सुनवाई से इनकार, सीजेआई बोले-हमारे सामने सब बराबर

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले में जल्द सुनवाई की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इंकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारे सामने सब बराबर हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता को मामले की शीघ्र सुनवाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन दाखिल करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने भरोसा दिया कि आवेदन मिलने के बाद उस पर विचार किया जाएगा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव भाटिया पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि राहुल गांधी इस मामले में कोई वीआईपी नहीं हैं और उनकी अपील करीब पांच महीने से सुनवाई के लिए लंबित है।
उन्होंने कहा कि मामला कई बार सूची में आया लेकिन किसी कारण से सुनवाई नहीं हो सकी। गौरव भाटिया ने दलील दी कि बार-बार मामले की सुनवाई टलना संस्थान के लिए भी उचित नहीं है। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मामले में तय प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए। आवेदन मिलने के बाद वह उस पर विचार करेगा।
बता दें कि यह मामला दिसंबर 2022 में राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। भारत-चीन सीमा पर हुई झड़प को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि चीनी सैनिक अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के जवानों को पीट रहे हैं। उनके इस बयान पर बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन के पूर्व डायरेक्टर उदय शंकर श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कराई थी।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि राहुल गांधी का बयान भारतीय सेना के लिए अपमानजनक है और इससे सेना की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है। इसी मामले में लखनऊ की अदालत ने राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया था।
समन को चुनौती देते हुए राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, हाईकोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। इसके बाद राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल की। सुप्रीम कोर्ट ने पहले मामले में आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई थी।
-
दुर्घटना1 year agoनागपुर विस्फोट: बाजारगांव स्थित सौर ऊर्जा संयंत्र में बड़ा विस्फोट; 1 की मौत, कम से कम 10 घायल
-
महाराष्ट्र1 year agoमीरा भयंदर हजरत सैयद बाले शाह बाबा की मजार को ध्वस्त करने का आदेश
-
व्यापार6 years agoआईफोन 12 का उत्पादन जुलाई से शुरू होगा : रिपोर्ट
-
महाराष्ट्र1 year agoईद 2025 पर डोंगरी में दंगे और बम विस्फोट की ‘चेतावनी’ के बाद मुंबई पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी
-
राजनीति1 year agoवक्फ संशोधन बिल लोकसभा में होगा पेश, भाजपा-कांग्रेस समेत कई पार्टियों ने जारी किया व्हिप
-
अपराध4 years agoभगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के गुर्गो की ये हैं नई तस्वीरें
-
खेल1 year agoआईपीएल 2025 : शानदार रिकॉर्ड के नाम रहा एमआई और केकेआर का मैच, डेब्यूटेंट अश्विनी ने रचा इतिहास
-
महाराष्ट्र1 year agoहाईकोर्ट ने मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस जारी किया, मस्जिदों के लाउडस्पीकर विवाद पर
