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Friday,09-October-2026
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क्या विराट ने कप्तानी छोड़ दी है या अपनी नौकरी खो दी है?

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आठ साल पहले जब विराट कोहली से पूछा गया कि उनके और एमएस धोनी के अलावा भारत की टीम का नेतृत्व करने की क्षमता किसके पास है। उन्होंने कहा था, “रोहित शर्मा के पास जबरदस्त क्रिकेटिंग दिमाग है। वह कप्तान बनने लायक हैं।” रोहित का करिश्मा तब से बढ़ रहा है, रोहित ने खुद को अपने साथी खिलाड़ियों के बीच एक मजबूत कप्तान के रूप में पेश किया है। इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में मुंबई इंडियंस के कप्तान के रूप में उनके कारनामे इस बात की गवाही देती है। हालांकि, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर कप्तानी ज्यादा मौका नहीं मिला है।

जब गुरुवार को कोहली ने आगामी टी 20 विश्व कप के बाद क्रिकेट के सबसे छोटे प्रारूप में टीम इंडिया के कप्तान के रूप में पद छोड़ने की घोषणा की, तो सभी क्रिकेट प्रेमियों के मन में पहला सवाल आया, अगला कप्तान कौन होगा?

और रोहित, बिना किसी संदेह के कप्तान बनने के उम्मीदवारों की सूची में शीर्ष पर हैं।

रोहित के कप्तान बनने के समर्थन मे मौजूदा कप्तान कोहली भी है। कोहली ने ट्विटर पर पोस्ट किए गए अपने घोषणापत्र में विशेष रूप से रोहित का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कोच रवि शास्त्री और रोहित शर्मा के साथ अपने फैसले पर चर्चा की थी।

टी20 में कोहली के नेतृत्व में भारत का रिकॉर्ड अच्छा रहा है, हालाकि कप्तान कोहली अभी भी अपनी पहली आईसीसी ट्रॉफी की तलाश में हैं। अब कोहली के पास 17 अक्टूबर से संयुक्त अरब अमीरात और ओमान में आईसीसी टी20 विश्व कप की ट्रॉफी जीतने से बेहतर मौका है।

कोहली ने 45 टी20 मैचों में भारत का नेतृत्व किया जिसमें 27 जीते और 14 हारे, जबकि दो मैच बिना किसी परिणाम के समाप्त हुए और दो टाई रहे। यह कोहली को धोनी के बाद जीत के मामले में भारत का दूसरा सबसे सफल टी 20 कप्तान बनाता है, जो 72 मैचों में 41 जीत के साथ शीर्ष पर है।

तो अब सवाल यह उठता है कि क्या उन्होंने कप्तानी छोड़ दी है या अपनी नौकरी खो दी?

यह भी एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब अभी बीसीसीआई से लोग लगातार मांग रहे हैं। पहले यह बताया गया था कि कोहली की आईसीसी ट्रॉफी जीतने में विफलता उनकी कप्तानी में एक बड़ी बाधा बन गई है।

साथ ही, बीसीसीआई के अधिकारी विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप फाइनल के लिए कोहली के टीम चयन से कथित तौर पर खुश नहीं थे। जिसमें भारत न्यूजीलैंड से हार गया था।

बाद में, रिपोर्टें सामने आईं कि कोहली टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान केंद्रित करने के लिए छोटे प्रारूप में कप्तान के रूप में पद छोड़ सकते हैं। दिलचस्प बात यह है कि बीसीसीआई के कोषाध्यक्ष अरुण धूमल ने ऐसी किसी भी रिपोर्ट का खंडन करते हुए कहा था कि बोर्ड ने कप्तानी से जुड़ी किसी भी बात पर कभी मुलाकात या चर्चा नहीं की।

हालांकि, कोहली द्वारा गुरुवार को अपने फैसले की घोषणा करने के बाद, बीसीसीआई सचिव जय शाह ने कहा कि वह पिछले छह महीनों से कोहली और लिडरशिप टीम के साथ चर्चा कर रहे थे और फिर निर्णय पर विचार किया गया है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि बीसीसीआई कोहली और मुख्य कोच शास्त्री को हटाने पर विचार कर रहा था और यही वजह थी कि धोनी को टी20 विश्व कप के लिए टीम इंडिया का मेंटर बनाया गया था।

आईएएनएस ने पहले सूचना दी थी कि जय शाह ने धोनी को भारतीय टीम के मेंटर के रूप में लाने की पहल की थी। यहां तक कि बीसीसीआई के बड़े से बड़े अधिकारी भी इस कदम के बारे में नहीं जानते थे। शास्त्री, जो 2017 से पूर्णकालिक कोच हैं उनका तीसरा कार्यकाल दिए जाने की संभावना नहीं है और टी 20 विश्व कप के बाद एक नए चेहरे के कोच के रूप में टीम में शामिल होने की संभावना है।

विभाजित कप्तानी और रोहित का प्रदर्शन :

भारतीय क्रिकेट में लंबे समय से विभाजित कप्तानी एक गर्म विषय रहा है। कई लोगों ने सुझाव दिया है कि रोहित को नेतृत्व का प्रभार दिया जाना चाहिए, कम से कम टी20 प्रारूप में, विशेष रूप से कोहली पर कार्यभार और आईसीसी टूर्नामेंट में उनकी कमियों को देखते हुए।

यहां तक कि पूर्व क्रिकेटर मदन लाल ने बुधवार को आईएएनएस से कहा था कि रोहित को छोटे प्रारूपों में भारत की अगुवाई करनी चाहिए।

34 वर्षीय सलामी बल्लेबाज टीम में सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक है और सीमित ओवरों की टीमों के उप-कप्तान भी हैं, जिससे कोहली द्वारा टी20 विश्व कप के अंत में टी20 कप्तानी छोड़ने के बाद उन्हें कप्तानी के लिए प्रमुख दावेदार माना जा रहा है।

रोहित का आईपीएल में शनदार रिकॉर्ड है, जिसने मुंबई इंडियंस को पांच आईपीएल खिताब दिलाए। रोहित ने 10 वनडे मैचों में कप्तानी की है जिसमें उन्हें 8 मैचों में जीत मिली है जबकि 19 टी20 मैच में कप्तानी की है जिसमें 15 मैचों में उन्होंने जीत का स्वाद चखा है।

अंतरराष्ट्रीय

कुवैत ने नेतन्याहू की सीरिया यात्रा को बताया ‘संप्रभुता का उल्लंघन’

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कुवैत ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सीरिया दौरे पर घोर आपत्ति की है। कड़ी निंदा करते हुए इसे “अवैध प्रवेश” करार दिया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सीरिया की संप्रभुता और उसकी क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि वह “अपने भाई सीरियाई अरब गणराज्य की भूमि में इजरायली प्रधानमंत्री के अवैध प्रवेश” की कड़े शब्दों में निंदा करता है।

बयान में कहा गया कि नेतन्याहू का सीरिया में प्रवेश देश की संप्रभुता और उसकी भूमि की अखंडता का “घोर उल्लंघन” है। मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का भी उल्लंघन बताया।

कुवैत ने सीरिया में इजरायल की लगातार घुसपैठ और सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई। मंत्रालय के मुताबिक, सीरियाई क्षेत्र में इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र में तनाव बढ़ा रही हैं और सुरक्षा एवं स्थिरता को कमजोर कर रही हैं।

कुवैत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सीरिया में इजरायल की लगातार कार्रवाइयां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। उसने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ऐसे कदमों के खिलाफ रुख अपनाने और सीरिया की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

यह बयान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच आया है, जहां सीरिया में इजरायल की सैन्य गतिविधियों को लेकर अरब देशों की ओर से लगातार आपत्तियां सामने आती रही हैं। कुवैत ने अपने बयान में सीरिया की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान को अंतरराष्ट्रीय कानून का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

दरअसल, नेतन्याहू रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज और आईडीएफ के डिप्टी चीफ-ऑफ-स्टाफ मेजर-जनरल तामिर यदाई के साथ बुधवार को इजरायली कब्जे वाले दक्षिणी सीरिया में सैनिकों से मिलने गए थे। इस दौरान उन्होंने दावा किया था कि अपने दम के बल पर इजरायल ने रणनीतिक रूप से अहम स्थलों पर सफलतापूर्वक कब्जा कर रखा है। दक्षिणी सीरिया में, इजरायली सैनिक एक तथाकथित सुरक्षा क्षेत्र में तैनात हैं; वे दिसंबर 2024 में लंबे समय तक शासक रहे बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद देश के अंदरूनी इलाकों में आगे बढ़े थे।

इजरायल उस इलाके में मौजूद है जो पहले संयुक्त राष्ट्र की निगरानी वाला बफर जोन था; यह जोन 1974 से इजरायल के कब्जे वाले गोलन हाइट्स में इजरायली और सीरियाई सेनाओं को अलग करता था।।

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अंतरराष्ट्रीय

मुंबई पहुंचे अमेरिकी राजदूत गोर ने की सीएम फडणवीस से मुलाकात, भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने पर हुई चर्चा

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भारत में अमेरिका के राजदूत ने मंगलवार को मबारष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। दोनों ने द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा की। गोर मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) राष्ट्रीय सम्मेलन 2026 में शामिल हुए।

सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सर्जियो संग मुलाकात की जानकारी दी। तस्वीरें साझा करते हुए कहा, ” मुंबई पहुंचे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर का स्वागत करते हुए खुशी हुई। हमने भारत-यूएस संबंधों को मजबूत करने और बेहतर सहयोग के मौके तलाशने पर अच्छी चर्चा की।”

इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (आईएसीसी) नेशनल कन्वेंशन 2026 को गोर ने संबोधित भी किया। इस सम्मेलन का मुख्य विषय ‘रीडिफाइनिंग द इंडिया-यूएस कॉम्प्रीहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को पुनर्परिभाषित करना) है।

गोर ने इस सम्मेलन को खास बताया। उन्होंने कहा, “सच में हम समय की एक खास दहलीज पर खड़े हैं। सिर्फ दो दशकों में, हमारे द्विपक्षीय व्यापार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जो लगभग 20 बिलियन डॉलर से बढ़कर 240 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया है। यह 12 गुना बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है। कोई भी सेक्टर चुन लें, आप पाएंगे कि अमेरिका और भारत उसे पूरा करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “चाहे वह एआई हो, टेक्नोलॉजी हो, एयरोस्पेस हो, डिफेंस हो, या एनर्जी हो, दोनों देश रिकॉर्ड स्तर पर मिलकर काम कर रहे हैं, बाकी दुनिया से हम आगे हैं। यह गहरे, अटूट भरोसे को दिखाता है। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का हमारा साझा मकसद हमारे सामने मौजूद मौके के बड़े पैमाने को दिखाता है। यह बेजोड़ क्षमता दर्शाता है।”

गोर के अनुसार, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत पर पूरा भरोसा है। आगे बोले, “राष्ट्रपति ट्रंप भारत पर भरोसा करते हैं, और उन्होंने पहले दिन से ही इस रिश्ते को बरकरार रखने पर काफी मेहनत की। अपने दूसरे दौर के कुछ ही हफ्तों में, उन्होंने और पीएम मोदी ने एक भरोसे की पहल शुरू की, जिससे रिश्ते बदल गए और एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, डिफेंस और ज़रूरी चीजों में कोऑपरेशन को तेज करने के लिए स्ट्रेटेजिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया।”

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अंतरराष्ट्रीय

ईरान का दावा: अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत

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ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि बुधवार से शुरू हुए अमेरिकी हमलों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 78 लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय के अनुसार, ये हमले ईरान के पांच प्रांतों में किए गए।

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता होसैन केरमनपौर ने बताया कि घायलों में से 47 अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि बाकी लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं और राहत कार्यों को तेज कर दिया गया है।

इस बीच, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने खाड़ी क्षेत्र स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले किए हैं।

ईरानी सेना के अनुसार, इन हमलों में कुवैत में पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली, कतर में प्रारंभिक चेतावनी (अर्ली वार्निंग) सैटेलाइट एंटीना साइट, और बहरीन में अमेरिकी सेना के ईंधन भंडारण टैंकों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि इन अभियानों में विभिन्न प्रकार के बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ईरानी सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा कि वे “अमेरिकी राष्ट्रपति के उद्देश्यों को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देंगे” और देश की सुरक्षा तथा इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा के लिए अपने अभियान जारी रखेंगे।

हालांकि, ईरान के इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। अमेरिका, बहरीन, कतर और कुवैत की ओर से भी इन कथित ड्रोन हमलों और संभावित नुकसान को लेकर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

अमेरिका ने बुधवार रात ईरान पर फिर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने भी दावा किया कि उसने ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल हैं।

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