राजनीति
गुजरात चुनाव से पहले हार्दिक पटेल ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया
गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है और राज्य कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा की है। वैसे, पार्टी की ओर से कहा गया है कि उन्हें अभी तक उनका इस्तीफा नहीं मिला है। आपको बता दें कि गुजरात में अगले कुछ ही महीनों में चुनाव होने वाले हैं। इस्तीफे में हार्दिक पटेल ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस को गुजरात में कोई दिलचस्पी नहीं है, वह सिर्फ नीतियों और कार्यक्रमों का विरोध कर रही है। पार्टी ऐसा विकल्प नहीं बन रही है, जिसकी लोग तलाश कर रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया है कि कई प्रयासों के बाद भी, पार्टी राष्ट्रहित में और समाज के लिए कार्य करने में विफल रही। अनुच्छेद 370, सीएए-एनआरसी और जीएसटी लागू करने जैसे मुद्दों पर कांग्रेस अड़ी हुई थी। ये सभी लोगों की आकांक्षाएं और समय की मांग थीं, जिसके लिए कांग्रेस को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
वहीं कांग्रेस पार्टी का कहना है कि उन्हें हार्दिक पटेल का कोई इस्तीफा नहीं मिला है।
कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा, पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से यह सुना है कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।
कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भाजपा में शामिल हो सकते हैं।
पीएएएस (पाटीदार अनामत आंदोलन समिति) में हार्दिक के पूर्व सहयोगी और भाजपा कार्यकर्ता चिराग पटेल ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा है कि लाखों भाजपा कार्यकर्ता हार्दिक से नाखुश और निराश हैं। अगर वे भाजपा में शामिल होते हैं तो वे दुखी होंगे।
अंतरराष्ट्रीय समाचार
भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से खुलेंगे आर्थिक विकास के नए रास्ते : साइमन वॉट्स

न्यूजीलैंड के राजस्व मंत्री साइमन वॉट्स ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा को भारत-न्यूजीलैंड संबंधों में एक अहम मोड़ बताया। उन्होंने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर हस्ताक्षर करना दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे दोनों देशों के लिए आर्थिक अवसर खुलेंगे और साथ ही नियमों पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति उनकी साझा प्रतिबद्धता भी मजबूत होगी।
वॉट्स ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए दोनों देशों के आपसी संबंधों में एक ‘बड़ा कदम’ है और इससे दोनों देशों को काफी आर्थिक फायदा होने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, “यह हमारे आपसी संबंधों की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे दोनों देशों के लिए आर्थिक फायदे के अहम रास्ते खुलते हैं। यह उन दो देशों के संबंधों को और मजबूत करता है जिनकी सोच नियम-आधारित व्यवस्था और बहुपक्षीय दृष्टिकोण के मामले में काफी मिलती-जुलती है।”
वर्तमान समय को न्यूजीलैंड के लिए “बहुत अहम पल” बताते हुए वॉट्स ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी करना वेलिंगटन और नई दिल्ली के बीच मजबूत होते रिश्तों को दर्शाता है।
उन्होंने से कहा, “न्यूजीलैंड के लिए प्रधानमंत्री मोदी की मेजबानी करना एक बहुत ही अहम पल है। इससे न्यूजीलैंड और भारत के बीच मजबूत होते रिश्तों को और बढ़ावा मिलता है। एफटीए पर हस्ताक्षर करना दोनों देशों के रिश्तों के लिए एक बड़ा कदम है और न्यूजीलैंड में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह एक बड़ी बात है।”
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक छवि की भी तारीफ की और कहा कि यह दौरा इस बात का मजबूत संकेत है कि दोनों देश इस साझेदारी को कितना रणनीतिक महत्व देते हैं।
वॉट्स ने कहा, “वह वैश्विक स्तर पर एक अहम हस्ती हैं। हमारे प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के लिए न्यूजीलैंड में उनकी मेजबानी करना सम्मान की बात है। प्रधानमंत्री मोदी का न्यूजीलैंड आना रिश्तों को और मजबूत करने वाला है। वह संकेत दे रहे हैं कि यह एक रणनीतिक रिश्ता है और हम यहां उनकी मेजबानी करने के लिए बहुत उत्साहित हैं।”
राजनीति
मुख्यमंत्री विजय करूर भगदड़ के पीड़ितों के परिजनों को सरकारी नौकरियां सौंपेंगे

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय शुक्रवार सुबह करूर के लिए रवाना हुए। वे हाल ही में करूर में हुई भगदड़ में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र और कल्याणकारी सहायता प्रदान करेंगे।
मुख्यमंत्री विजय अपने दौरे के दौरान एक जनसभा को भी संबोधित करेंगे और कई आधिकारिक सरकारी कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे।
मुख्यमंत्री शुक्रवार सुबह हवाई मार्ग से चेन्नई से रवाना हुए और उनके तिरुचिरापल्ली (तिरुची) हवाई अड्डे पहुंचने के बाद सड़क मार्ग से करूर जाने की उम्मीद है। उनके स्वागत के लिए पूरे मार्ग पर पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों द्वारा भव्य स्वागत की तैयारियां की गई हैं।
विजय करूर-सेलम बाइपास रोड स्थित एटलस कलैयारंगम मैदान पहुंचने से पहले लगभग 10 किलोमीटर लंबा रोड शो करेंगे। इसके बाद वह वहां आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे।
जनसभा में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए कार्यक्रम स्थल पर एक विशाल पंडाल बनाया गया है।
जनसभा के बाद मुख्यमंत्री कुछ समय के लिए सरकारी पर्यटक गृह में रुकेंगे और फिर एक आधिकारिक सरकारी कार्यक्रम में भाग लेने के लिए करूर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे।
इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री विजय करूर भगदड़ में अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के पात्र सदस्यों को अनुकंपा नियुक्ति के तहत सरकारी नौकरी के नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। इसके अलावा, वह विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत चयनित लाभार्थियों को कल्याणकारी सहायता और अन्य लाभ भी वितरित करेंगे।
अनुकंपा नियुक्तियां राज्य सरकार द्वारा राहत और पुनर्वास उपायों के तहत दी जा रही हैं, जिनका उद्देश्य शोकाकुल परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। कार्यक्रम में वितरित की जाने वाली कल्याणकारी सहायता में विभिन्न सरकारी योजनाओं के पात्र लाभार्थियों को मिलने वाले लाभ शामिल हैं।
आधिकारिक कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री सड़क मार्ग से तिरुचिरापल्ली हवाई अड्डे लौटेंगे और वहीं से शाम को चेन्नई के लिए रवाना होंगे।
मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। करूर जिले में लगभग 6,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।
मुख्यमंत्री के यात्रा मार्ग, जनसभा स्थल, जिला कलेक्ट्रेट और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। इसके अलावा, पुलिस ने मुख्यमंत्री के काफिले की निर्बाध आवाजाही और सभी निर्धारित कार्यक्रमों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक यातायात प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए हैं।
महाराष्ट्र
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस सरकार नहीं बल्कि भीड़तंत्र चला रहे: सामना में शिवसेना (यूबीटी)

शिवसेना (यूबीटी) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर निशाना साधते हुए उनकी सरकार पर मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना में “भीड़तंत्र” चलाने और “वैश्विक स्तर का भ्रष्टाचार घोटाला” करने का आरोप लगाया है।
पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ में प्रकाशित एक संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस द्वारा विपक्ष के खिलाफ कथित तौर पर इस्तेमाल की गई आक्रामक भाषा की आलोचना की गई। साथ ही आरोप लगाया गया कि मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के घाट खंड को बाईपास करने के लिए बनाई जा रही ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना की लागत में करीब 2,500 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
संपादकीय के अनुसार, दो सुरंगों, आठ लेन की सड़क और दो पुलों वाली 13 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की प्रारंभिक अनुमानित लागत 4,797.55 करोड़ रुपये थी। इसमें दावा किया गया कि सामान्य लागत वृद्धि को ध्यान में रखने पर भी परियोजना की लागत 5,500 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए थी, लेकिन अंतिम व्यय बढ़कर 7,180 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
संपादकीय में दावा किया गया कि परियोजना की लागत करीब 540 करोड़ रुपये प्रति किलोमीटर बैठती है और इसे “भ्रष्टाचार का विश्व रिकॉर्ड” बताया गया। इसमें यह भी आरोप लगाया गया कि पहली ही बारिश में परियोजना में भारी रिसाव शुरू हो गया। संपादकीय में टिप्पणी की गई कि यदि कोई इस परियोजना में कथित भ्रष्टाचार पर शोध करे तो वह “कैम्ब्रिज या ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट हासिल कर सकता है।”
संपादकीय में मुख्यमंत्री फडणवीस की इस बात के लिए कड़ी आलोचना की गई कि उन्होंने कथित तौर पर जनता और विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा था, “हमारे भ्रष्टाचार पर सवाल उठाना महाराष्ट्र की बदनामी है। राज्य की बदनामी करने वालों से मैं सख्ती से निपटूंगा।” इसमें मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में राज्य के खर्च पर सवाल उठाने वाले नागरिकों और विपक्षी नेताओं को “किराए के लोग” और अन्य अपमानजनक शब्दों से संबोधित करने की भी निंदा की गई।
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने संपादकीय में कहा कि राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ इस प्रकार की भाषा किसी जनप्रतिनिधि की नहीं बल्कि “गुंडों” की भाषा है। पार्टी ने सवाल किया कि क्या भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वालों को चुप कराने की कोशिश की जा रही है।
संपादकीय में आरोप लगाया गया कि इस तरह के भ्रष्टाचार से कमाए गए धन का इस्तेमाल विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त में किया जा रहा है। इसमें दावा किया गया कि मुख्यमंत्री फडणवीस का राज्य से कोई भावनात्मक जुड़ाव नहीं है, बल्कि वे “मुगलों और अंग्रेजों” की तरह व्यवहार कर रहे हैं जिनकी एकमात्र नीति “लूट कर भाग जाना” थी।
संपादकीय में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्रियों का उल्लेख करते हुए कहा गया कि राज्य में सुसंस्कृत नेतृत्व की परंपरा रही है। इसमें राज्य के पहले मुख्यमंत्री यशवंतराव चव्हाण की बुद्धिमत्ता, संयम और राजनीतिक परिपक्वता की सराहना की गई।
संपादकीय में आगे कहा गया कि वसंतराव नाईक, वसंतदादा पाटिल, शरद पवार, विलासराव देशमुख, मनोहर जोशी और उद्धव ठाकरे सहित विभिन्न दलों के पूर्व मुख्यमंत्रियों ने सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा बनाए रखी और विधानसभा के मंच का इस्तेमाल विपक्ष को धमकाने या कथित रूप से भ्रष्ट लोगों का बचाव करने के लिए नहीं किया।
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