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Saturday,10-October-2026
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महाराष्ट्र

पुणे बिल्डिंग हादसा: मलबे से एक शव बरामद, 9 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, राहत-बचाव अभियान जारी

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पुणे के पास पिंपरी-चिंचवड़ के मोशी स्थित कचरा प्रबंधन संयंत्र में इमारत गिरने के बाद गुरुवार को राहत और बचाव अभियान जारी रहा। अधिकारियों ने बताया कि मलबे से अब तक एक शव बरामद किया गया है, जबकि 9 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। कई एजेंसियों की टीमें अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं।

यह तीन मंजिला इमारत वेस्ट-टू-एनर्जी (कचरे से बिजली बनाने वाले) प्लांट के ऊपर बनी हुई थी। बुधवार दोपहर पुराने कचरे (लिगेसी वेस्ट) का बड़ा ढेर इमारत पर गिर गया, जिससे पूरी इमारत ढह गई और करीब 18 लोग मलबे में दब गए।

हादसे के कुछ ही घंटों के भीतर 7 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया था। इसके बाद देर रात 2 और लोगों को बचा लिया गया, जिससे अब तक बचाए गए लोगों की संख्या 9 हो गई है।

बचाव अभियान की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की 5वीं बटालियन के कमांडेंट एसबी सिंह ने बताया कि गुरुवार की सुबह मलबे से एक शव बरामद किया गया है, जबकि दो अन्य का पता भी चल गया है।

उन्होंने कहा, “एनडीआरएफ अपनी पूरी कोशिश कर रही है। हमने हाथों से खुदाई कर एक संकरी जगह बनाई है और उसी रास्ते से अंदर पहुंच रहे हैं। अब तक तीन शवों का पता चल चुका है, जिनमें से एक को बाहर निकाल लिया गया है।”

उन्होंने बताया कि दूसरा शव दूर से दिखाई दे रहा है, लेकिन उसे निकालने में अभी समय लगेगा।

एसबी सिंह ने कहा कि बचाव अभियान बेहद कठिन है, क्योंकि इमारत पूरी तरह अस्थिर हो चुकी है और कभी भी दोबारा गिर सकती है। इससे बचावकर्मियों की जान को भी खतरा बना हुआ है।

उन्होंने कहा, “हमारी सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इमारत दोबारा न गिर जाए। अगर ऐसा हुआ तो बचावकर्मी भी मलबे में फंस सकते हैं। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि अंदर फंसे लोगों पर और मलबा न गिरे।”

उन्होंने बताया कि इमारत करीब 45 डिग्री तक झुक गई है, इसलिए अंदर पहुंचना बेहद मुश्किल है। बचावकर्मियों को संकरे रास्तों से रेंगते हुए अंदर जाना पड़ रहा है।

एनडीआरएफ अधिकारी ने बताया कि भारी मशीनों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनसे होने वाले कंपन से इमारत फिर गिर सकती है। इससे मलबे में फंसे लोगों और बचावकर्मियों दोनों की जान खतरे में पड़ सकती है, इसलिए मलबा हाथों से धीरे-धीरे हटाया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “इसमें समय जरूर लगेगा, लेकिन हम पूरी कोशिश कर रहे हैं।”

एसबी सिंह ने यह भी बताया कि लाइफ डिटेक्टर, ध्वनि पहचान उपकरण (अकॉस्टिक सेंसर) और स्निफर डॉग्स जैसे आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया गया, लेकिन अब तक मलबे के नीचे किसी जीवित व्यक्ति के होने के संकेत नहीं मिले हैं।

अधिकारियों के अनुसार, हादसे के समय एंटनी लारा रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी के कई कर्मचारी इमारत में मौजूद थे। यह कंपनी पिंपरी-चिंचवाड़ नगर निगम (पीसीएमसी) के साथ मिलकर 14 मेगावाट के वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का संचालन करती है।

पीसीएमसी ने शुरुआत में बताया था कि मलबे में 23 लोगों के फंसे होने की आशंका थी। इनमें से 5 लोग बचाव दल के पहुंचने से पहले ही खुद बाहर निकलने में सफल हो गए थे।

राहत और बचाव अभियान में एनडीआरएफ, भारतीय सेना, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम फायर ब्रिगेड, पुणे महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (पीएमआरडीए) फायर ब्रिगेड और पुलिस की संयुक्त टीमें लगातार काम कर रही हैं।

महाराष्ट्र

घाटकोपर रोड चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर गिराए गए

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मुंबई ; घाटकोपर (वेस्ट) में झुनझुनवाला कॉलेज और अंधेरी-घाटकोपर लिंक रोड के बीच सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित 28 स्ट्रक्चर को गिराने का अभियान कल (7 अक्टूबर, 2026) मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के ‘एन’ वार्ड (एन वार्ड) ऑफिस द्वारा चलाया गया। इस अभियान का नेतृत्व असिस्टेंट कमिश्नर (‘एन’ वार्ड) जयदीप मोरे ने किया। ऑपरेशन के दौरान म्युनिसिपल अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पर्याप्त पुलिस सुरक्षा भी तैनात की गई थी।

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महाराष्ट्र

नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर बस दुर्घटनाग्रस्त; 2 यात्रियों की मौत और 6 घायल

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महाराष्ट्र के नासिक जिले के पेठ तालुका में करंजाली के निकट सावलघाट क्षेत्र में नासिक-अहमदाबाद मार्ग पर एक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे में दो यात्रियों की मौत हो गई जबकि छह यात्री घायल हुए हैं।

जिला नियंत्रण कक्ष को दुर्घटना की सूचना 6 अक्टूबर की रात 11 बजे प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल इमरजेंसी सेवाओं ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। घटना के समन्वय के लिए दो पुलिस निरीक्षक और एक अनुविभागीय पुलिस अधिकारी तत्काल घटनास्थल की ओर रवाना हुए। बस में सवार सभी यात्रियों को सुरक्षित रूप से बाहर निकाला गया और घायलों को अलग-अलग एम्बुलेंस के माध्यम से उपचार के लिए नाशिक लाया गया।

रात 00:30 बजे से 02:15 बजे के बीच नासिक सिविल अस्पताल में आठ लोगों को लाया गया। इनमें सात व्यक्ति जीवित थे जबकि एक व्यक्ति को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया। इसके अलावा दुर्घटना में एक अन्य व्यक्ति की भी मौत हुई है। वर्तमान में दो घायल मरीज सिविल अस्पताल में भर्ती हैं जबकि अन्य घायलों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें अस्पताल में भर्ती किए बिना छुट्टी दे दी गई।

हादसे में घायल प्रमिला राउत (53) को गंभीर चोट के कारण सिविल अस्पताल के ई-वार्ड में भर्ती किया गया है। वहीं, बाल विमल जगदीश (65) के बाएं हाथ की ह्यूमरस हड्डी में फ्रैक्चर होने के कारण उन्हें एमओडब्ल्यू वार्ड में भर्ती किया गया है। अन्य घायलों में यश देसाई, आरती देसाई, नयन वासोने तथा स्वाति सुरेश बडाणे शामिल हैं।

दुर्घटना में राहुल ओझा और महेंद्र पाल (48) की मौत हुई है। महेंद्र पाल को सिविल अस्पताल, नासिक में मृत अवस्था में लाया गया था। मृतकों के परिजनों से संपर्क कर आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पेठ तालुका के सावलघाट क्षेत्र में हादसे के समय बादल और कोहरे की स्थिति के कारण दृश्यता काफी कम थी। प्रशासन की प्राथमिक जांच में कम दृश्यता को दुर्घटना का प्रमुख कारण माना गया है। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों को लेकर संबंधित एजेंसियों की जांच जारी है।

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महाराष्ट्र

‘विद्यार्थियों की मांग नहीं मानी तो पूरा महाराष्ट्र बंद करेंगे,’ मनोज जरांगे पाटिल की सरकार को चेतावनी

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महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (एमपीएससी) के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर पुणे में छात्रों का एक बड़ा आंदोलन चल रहा है। इस आंदोलन का जमीनी नेतृत्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार कर रहे हैं। इस बीच मराठा आरक्षण आंदोलनकारी मनोज जरंगे पाटिल भी आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने छात्रों से बातचीत की और उनकी मांगों को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

मनोज जरांगे पाटिल ने कहा, “बच्चों, अगर इन लोगों ने आपकी बात नहीं सुनी तो यहां बैठे सभी नेताओं से भी कहता हूं और आपसे भी कहता हूं, आपके लिए पूरा महाराष्ट्र बंद कर देंगे। इन्हें क्या हो गया है, इन्हें घमंड हो गया है।”

उन्होंने छात्रों से कहा, “आपके साथ हुआ अन्याय जाति से परे है। अगर मैं जातिवादी होता तो यहां नहीं आता। यहां महाराष्ट्र के किसानों के बच्चे बैठे हैं और मैं किसान का बेटा बनकर आया हूं, जाति के नाम पर नहीं।”

जरांगे पाटिल ने कहा कि आरक्षण की मांग करने का मतलब यह नहीं है कि वे छात्रों को उनके हाल पर छोड़ देंगे। उन्होंने कहा कि मेहनतकश माता-पिता की उम्मीद है कि उनके बेटे और बेटियां भी अधिकारी बनें और सरकार को इस भावना को समझना चाहिए।

छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने को राजनीति बताने पर भी जरांगे पाटिल ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि क्या सरकार चाहती है कि छात्रों के पीछे कोई खड़ा न हो और उन्हें कोई ताकत न मिले।

उन्होंने पूछा, “रोहित दादा राजनीतिक नेतृत्व करते हैं, इस पर किसी को संदेह है तो राज्य सरकार मुझे इसका जवाब दे। इससे पहले एमपीएससी में दो साल की अवधि बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन हुआ था। क्या वह राजनीतिक था? फिर यह आंदोलन राजनीतिक कैसे हुआ? आज बच्चे अनशन पर बैठे हैं। उनकी जान का क्या? उनके सवालों का क्या? आप हर बात को राजनीतिक रंग क्यों देंगे?”

पत्रकारों से बातचीत में जरांगे पाटिल ने कहा कि छात्रों को न्याय मिलना चाहिए और सीएम फडणवीस को जवाब देना चाहिए। गृहमंत्री के तौर पर उन्हें विद्यार्थियों का दिल जीतने का काम करना चाहिए।

छात्रों के बीच तीन गुटों में आंदोलन होने के सवाल पर उन्होंने कहा, “न कांग्रेस आपकी है, न राष्ट्रवादी आपकी है, न भाजपा आपकी है, न शिवसेना आपकी है, न महायुति आपकी है, न महाविकास आघाड़ी आपकी है। हमारे असली हीरो हमारे माता-पिता हैं। वे मेहनत करके हमें पढ़ाते हैं।”

उन्होंने कहा कि आंदोलन तीन जगह हो या एक जगह, न्याय छात्रों को ही चाहिए। मुख्यमंत्री को सभी आंदोलनों पर तत्काल ध्यान देकर उनकी मांगें पूरी करनी चाहिए और उनका विश्वास जीतना चाहिए। उन्होंने छात्रों से एकजुट रहने की अपील भी की।

सरकार के मंत्री और विधायक एक आंदोलन की ओर जा रहे हैं जबकि दूसरे आंदोलन की ओर सरकार का प्रतिनिधिमंडल नहीं आया है, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार को सभी जगह जाना चाहिए और छात्रों की राय सुननी चाहिए।

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